सतगुरु जयगुरुदेव : पुनर्जन्म के पावन पर्व पर विशेष सतसंग कार्यक्रम दिनांक 06 जून 2017 से 08 जून 2017 तक अखंड रूप से विराजमान अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर , ग्राम बड़ेला, तहसील - रुदौली, जिला - फैज़ाबाद (अयोध्या), उत्तर प्रदेश , भारत में होगा | इस कार्यक्रम में भारत एवं विश्व के समस्त गुरु भाई-बहन एवं प्रेमी जन सादर आमंत्रित हैं |

सतगुरु जयगुरुदेव :

नवीन सूचना

सतगुरु जयगुरुदेव : गुरु महाराज ने गुरु भाई अनिल कुमार गुप्ता को 3 जून 2012 को अंतर में आदेश दिया की मेरा पुनर्जन्म 7 जून 2012 को मनाओ | अतः परम संत सतगुरु जयगुरुदेव जी महाराज के अंतर आदेशानुसार छठवां पुनर्जन्म उत्सव एवं सतसंग कार्यक्रम दिनांक 06 जून 2017 से 08 जून 2017 तक अखंड रूप से विराजमान अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर , ग्राम बड़ेला, तहसील - रुदौली, जिला - फैज़ाबाद (अयोध्या), उत्तर प्रदेश , भारत में होगा | इस कार्यक्रम में भारत एवं विश्व के समस्त गुरु भाई-बहन एवं प्रेमी जन सादर आमंत्रित हैं |
सत्संग स्थल का पता :
अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
रेलवे स्टेशन : रुदौली (Rudauli) (Code: RDL)
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975
नोट : सभी प्रेमी अपनी कुल व्यवस्था के साथ आएंगे |

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 12/03/2017

पावन मंगल पुरुष अनामी, रूप धरो मानव सतनामी ||
शब्द भेद की राह बतायी, सत पथ मारग दिया दरशायी ||
नाम भजन सुमिरन एक माला, मैलाई को कटि कटि जाना ||
नाम अनाम बृहद सतनामा, पावन मंगल सतगुरु नामा ||
सत भाव से करो बन्दना, सतगुरु चरणन नमन अरधना ||
शब्द भेद का मारग दीन्हा, लख चौरासी से तुमको है छिना ||
नाम भेद है दिया बतायी, क्यों करते हो अब चतुरायी ||
सतगुरु नाम अनाम की पावर, सत देश की यह न्योछावर ||
सत दया और धरम बिराजे, अन्तर मंगल सतगुरु साजे ||
नाम ध्वनि को दिया सुनायी, शब्द भेद भी दिया लखायी ||
नाम अनूप बृहद सतनामा, सच्चा सतगुरु मोल मुकामा ||
सत के स्वामी पुरुष अनामी, मंगल शब्द भेद सतनामी ||
एक एक मण्डल शकल पसारा, सब दिखलायो रूप तिहारा ||
भेद खोल कर सब समझायो, कुल बृतंत और कथा सुनायो ||
तब भी पापी मन ना माने, लख चौरासी को जाना ठाने ||
एक अनिय और एक अनामा, सतगुरु तेरे मूल मुकामा ||
दृढ़ इच्छा शक्ति को रखो, सतगुरु चरण धरो एक वारा ||
मालिक दया मेंहर के स्वामी, स्वैत पुरुष मंगल सतनामी ||
ज्ञान ध्यान सतगुरु की किरपा, सत सत भाव सत सतनामी ||
सतगुरु मेंहर होये एक वारा, देखो सब जन शकल पसारा ||
नाम रूप की सड़क बनायी, उस पर सब जन करो चढ़ायी ||
दिव्य अलौकिक प्रकटै अन्तर, जपो जो तुम सतगुरु का मन्तर ||
मन्त्र अनाम देश की चाभी, लो तुम लाभ बनो सतलाभी ||
सत सत सतगुरु चरणन जाओ, सतगुरु जी की महिमा गाओ ||
सतगुरु चरणन हो अनुरागु, बंदो सतगुरु परम परागु ||
सत धाम सतगुरु सतनामा, ये सतगुरु का मूल मुकामा ||
श्रद्धा भाव से करो बन्दना, सतगुरु सत नाम की अरधना ||

सतगुरु जयगुरुदेव
अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
रेलवे स्टेशन : रुदौली (Rudauli) (Code: RDL)
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

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सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 30/नवम्बर /2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
नाम भजन साँचे सतगुरु का, प्रेमियों का आधार ||
सुमिरसुमिर कर नाम गुरु का, होवे बेड़ा पार ||
नामी अपने पुरुष अनामी,सत पुरुष करतार ||
शब्द भेद का मार्ग बतायो, ये सच्चा आधार ||
सतगुरु स्वामी पुरुष अनामी, करेंगे बेड़ा पार ||
शब्द सुहावन अति मन भावन, अन्तर में झनकार ||
शब्द सिरोही सतगुरु नामी, नाम का है ब्यापार||
नाम देत और जीव खरीदत, करते नईया पार ||
शब्द सुहावन मंगल देशा, सत पुरुष करतार ||
शब्द भेद के साँचे मालिक, सतगुरु हीं आधार ||
जिन सतगुरु ने नाम बतायो, वो हीं करेंगे उद्धार ||
सतगुरु मेरे पुरुष अनामी, सत नाम आधार ||
सूरत सुहावन अति मन पावन, सतगुरु नाम आधार ||
सत नाम का बाँचा बाँचे, सतगुरु हीं आधार ||
परम दयालु और किरपालु, करते हैं उद्धार ||
पुरुष अनामी नामी सबके, शब्द भेद करतार ||
घड़ी सुहावन अति मन भावन, जब ये मिलो है नाम ||
पुण्य उदित हुये जनम जनम के, मिला सच्चा आधार ||
ज्ञान वैराग्य हुआ सतगुरु संग, गुरु से किया है प्यार ||
हे मेरे नामी पुरुष अनामी, तुम हीं तो हो आधार ||
शब्द सत में सत के मालिक, शब्द रूप झनकार ||
शब्द की सीढ़ी गगन मंझारी, नईया करती पार ||
हे मेरे नामी पुरुष अनामी, कर दिजे उद्धार ||
हे सतगुरु सतनाम सिरोही, शब्द रूप सतगुरु नर देही||
त्रिभुवन आयो आप ||
मृत्यु लोक में अलख जगायो, तुमने दीन्ही दात ||
दात है प्यारी अति है दुलारी, जिससे बनेगी बात ||
सूरत हमारी शब्द देश में, अब तो करेगी वास||
पावन घड़ी सुहावन सुन्दर, शब्द भेद अविनास||
पहुँचे सुरतिया सत धाम में, बन जावे हर काम ||
नाम भजे साँचे सतगुरु का,पावेगी आराम ||
कुटुम्ब पड़ोसी गाँव के लोगवा, निर्जन करते वास||
अलख जागावो सत नाम का, सत्य नाम सत पार ||
सत सत नामी पुरुष अनामी, सत पुरुष करतार ||
सत चरणन में शीश झुकाऊँ, हो जाये उद्धार ||
सतगुरु जयगुरुदेव :

आरती सतगुरु सत अनामी, शब्द भेद सतगुरु सतनामी ||
सत सतकोटी तुम्हें परणामी, सतगुरु जयगुरुदेव अनामी ||

सतगुरु जयगुरुदेव ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 29/नवम्बर /2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :

शब्द भेद साँचे सतगुरु का, बोलें बम बम नाथ ||
निर्गुण निराकार शिव भोले, दया मेंहर उनकी साथ ||
सतगुरु नामी पुरुष अनामी, शब्द भेद रघुनाथ ||
साँचे सतगुरु शब्द सुनावें, देते नाम की दात ||
हे मेरे सतगुरु हे सतनामी, सत सत मेंहर सत नाम ||
सत नाम में लग जाये मनवा, हे मेरे करतार ||
शब्द शब्द की बनी है सीढ़ी, शब्द रूप झनकार ||
शब्दन भेद बतायो मालिक का, दया मेंहर तेरी साथ ||
मनवा लग जाये नाम भजन में, करूँ मैं आपका नाम ||
नाम जपन मैं सतगुरु चाहूँ, हे मेरे प्रभु रघुनाथ ||
दीन दयालु हे किरपालु, सतगुरु दीना नाथ ||
सत भेद अन्तर समझायो, घट में दीन्ही दात ||
घाट पार सब देश तुम्हारे, दया मेंहर में आप ||
सच्चे स्वामी पुरुष अनामी, हे सतगुरु हो आप ||
नाम भजन तुमने समझायो, तुमने दीन्ही दात ||
हे मेरे सतगुरु पुरुष अनामी, शब्द भेद रघुनाथ ||
सत सत नमन करूँ मैं तुमको, तुम हीं नवाऊँ माथ ||
दीन दयालु हे किरपालु, करुणा निधि मेरे साथ ||
संत शिरोमणि सतगुरु नामी, दया मेंहर की दात ||
पुरुष जो देखे अन्तर अद्भुत, लीला तेरे साथ ||
हे मेरे नामी सतगुरु स्वामी, दया करो रघुनाथ ||
साँचे सुन्दर पुरुष दयाला, शब्द की सीढ़ी घट में डाल||
घट घट वासी आप ||
दात दियो और भेद बतायो, सत मेंहर के साथ ||
रूप लखायो अलख अगम का, हे मेरे सरकार ||
नामी नामी पुरुष अनामी, दया मेंहर किया नाथ ||
जीव कल्याण हेतु तन धारा, सत्संग की बहे निर्मल धारा ||
नैन रहे अनुराग ||
शब्द भेद सतगुरु मेरे मालिक, हे मेरे दीन दयाल ||
हे मेरे नामी पुरुष अनामी, हे मेरे दातार ||
नाम भजन में लगे ये मनवा, सत पुरुष करतार ||
शब्द भेद सतगुरु मेरे मालिक, आप हो दीना नाथ ||
चरण बन्दना तेरी करते, हे सतगुरु मेरे नाथ ||
नामी नामी पुरुष अनामी, शब्द भेद के नाथ ||
शब्द की सीढ़ी शकल पसारा, हे मेरे सतगुरु आप ||
सत अनामी पुरुष सतनामी, तुमही नवाऊँ माथ ||
हे मेरे सतगुरु पुरुष अनामी, प्रकट होवो हे नाथ ||
नर तन धारा बहे निर्मल अब, सत्संग ज्योति साथ ||
सत के स्वामी पुरुष अनामी, हे सतगुरु हो आप ||
सतगुरु जयगुरुदेव
आरती सतगुरु सत अनामी, सत पुरुष मंगल सतनामी ||
शब्द के तुम हो दाता, आप हीं खोलो अन्तर खाता ||
हे सतगुरु मेरे जगत बिधाता||
आपके चरणन शीश झुकाऊँ,मुक्ति मोक्ष परम पद पाऊँ||
हे दयाल सतगुरु मेरे दाता,दया मेंहर कर खोलो खाता||
सतगुरु जयगुरुदेव अनामी,कोटि कोटि तुमको परणामी||
मेरे नामी मेरे स्वामी,सतगुरु जयगुरुदेव अनामी ||
सतगुरु जयगुरुदेव ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

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Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 12/नवम्बर /2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :

अनुपम छटा निराली अन्तर, शब्द भेद के नामी ||
दया मेंहर बरसे स्वामी की, बोलो राधा स्वामी ||
चरण बन्दना कर सतगुरु की, चरणन कोटि नमामि ||
शिव शम्भू तिरलोक पति को, कोटि कोटि परणामी ||
दया मेंहर आवे नामी की, सतगुरु हैं सतनामी ||
शब्द भेद अन्तर में समझो, सत सत नमन हे स्वामी ||
सतगुरु नामी पुरुष अनामी, शब्द भेद सतनामी ||
दया मेंहर कर नर तन धारो, प्रभु सतगुरु मोरे स्वामी ||
दीन दयालु हे किरपालु, हे मेरे दाता नामी ||
शब्द भेद संचार तुम्हारा, दया मेंहर के नामी ||
दीन दयाल प्रभु संग मेरे, सतगुरु पुरुष अनामी ||
दया कियो और नाम बतायो, सतगुरु मेरे स्वामी ||
शब्द शब्द पर बना पसारा, सत की है रजधानी ||
सुंदर निर्मल कंचन मालिक, अकथ अकह है कहानी ||
नाम नामनी मोरे मालिक की, गावें संत जबानी ||
सतगुरु नामी पुरुष अनामी, शब्द भेदसतनामी ||
मारग बतलायो निज घर का, सतगुरु मोरे स्वामी ||
दया मेंहर से सब हो जावे, दया मेंहर है नामी ||
हे मेरे संत सतगुरु प्यारे, होवे दया तुम्हारी ||
पंथ सनातन की रंगरलियाँ, सत धाम हो नामी ||
अपने जीवों को आयी उबारो, बन कर राधा स्वामी ||
दया मेंहर जब से है बरसी, स्वर्ग बैकुंठ में नामी ||
दीन दयालु हे किरपालु, हे मेरे सतगुरु स्वामी ||
शब्द भेद साँचा है तेरो, सुन्दर मधुर कहानी ||
सत पथ पंथ नहीं है हेरे, पंथ नरक है गामी ||
मेरे स्वामी का रूप अलौकिक, शब्द भेद हैं नामी ||
सुन्दर सुन्दर मूरत प्यारी, शब्द भेद सतनामी ||
धरा पे है अवतार लिया, सतगुरु मेरे नामी ||
पुरुष अनामी सतगुरु मेरे स्वामी, मेंहर करो हे नामी ||
दीन दयालु सतगुरु किरपालु, शब्द भेद के नामी ||
मेरे सवरिया सतगुरु साहेब, समझो बात पुरानी ||
दया दया में दया सिन्धु हैं, हे मेरे पुरुष अनामी ||
सत धाम में मेरी सुरतिया, बसै हे मेरे नामी ||
सतगुरु नामी पुरुष अनामी, तुम्ही हो राधा स्वामी ||
शब्द भेद सतगुरु हमारे, सच्ची अकथ कहानी ||
सत नाम का भेद बतायो, सतगुरु मेरे नामी ||
हे मेरे पुरुष अनामी दाता, तुमको कोटि प्रणामी ||
सतगुरु जयगुरुदेव आरती है अनाम श्रुति नामी, शब्द पुरुष मंगल सतनामी ||
सत सत कोटि तुम्हें परणामी, मेरे नामी मेरे स्वामी ||
सतगुरु जयगुरुदेव अनामी, कोटि कोटि तुमको परणामी ||
सतगुरु जयगुरुदेव ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

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Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 06/नवम्बर /2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :

परम दयाल सतगुरु प्यारे, परम दया करके हैं पधारे ||
नर तन रूप पुनः हैं धारे, हर जीवों को करेंगे उद्धारे ||
समरथ संत हमारे ||
दया मेंहर आवे नामी की, पग पग घूमूँ द्वारे ||
नाम सिन्धु किरपाल सतगुरु, दया मेंहर के अधारे ||
साँचे नामी पुरुष अनामी, नर तन रूप हैं धारे ||
दया मेंहर किन्हा अति भारी, जीवों को आये उबारे ||
नाम जागृत पुनः है किन्हा, सतगुरु नाम हैं धारे ||
सत नाम धुन अन्तर बाजे, खुले घट के दरवाजे ||
नाम रूप आधार है सुन्दर, सतगुरु शरण तिहारे ||
मंगल बाजा अन्तर बाजे, शब्द रूप सत धारे ||
हे मेरे नामी पुरुष अनामी, हम हैं तेरे द्वारे ||
सतगुरु सतगुरु नाम पुकारूँ, रहूँ तुम्हारे अधारे ||
सत प्रेम की वर्षा करते, सतगुरु मेंहर तिहारे ||
नाम भेद है अलौकिक प्यार, सुन्दर मेंहर हे भारे ||
सतगुरु नाम जो साँचा लागे, रहो सतगुरु के अधारे ||
सत सवरिया प्रीतम नामी, हे गुरुदेव तुम्हारे ||
गुरु चरणन में शीश झुकाऊँ, रहूँ गुरु के हीं सहारे ||
सतगुरु जयगुरुदेव
जनम जनम का है ये नाता, सतगुरु खोल्यो है ये खाता ||
शब्द भेद आधारे ||
सतगुरु नाम सुधा रस बरसे, रहो सतगुरु के अधारे ||
परम दयालु सतगुरु मेरे स्वामी, नाम आपके द्वारे ||
संत शिरोमणि सतगुरु नामी,सत सत के द्वारे ||
मंगल नामी पुरुष अनामी, चंचल चितवन प्यारे ||
सतगुरु सतगुरु नाम पुकारो, चले जाओगे उस पारे||
दिव्य सुहावन पावन झांकी, रहो सतगुरु के अधारे ||
नाम भजन तेरा बन जावे, सत सत नमन हो प्यारे ||
हे मेरे नामी पुरुष अनामी, सत गुरुदेव हमारे ||
हे मेरे नामी पुरुष अनामी, सतगुरु हैं सतनामी ||
सत मेंहर आवे मेरे मालिक, सतगुरु जी के द्वारे ||
हे मेरे नामी पुरुष अनामी, करूँ परणाम तिहारे ||
सतगुरु जयगुरुदेव
आरती सतगुरु अलख फकीरा, शब्द भेद सतगुरु सतविरा ||
सतगुरु चरणन शीश झुकाऊँ, मुक्ति मोक्ष परम पद पाऊँ ||
सतगुरु जयगुरुदेव अनामी, कोटि कोटि तुमको परणामी ||
मेरे मालिक मेरे नामी ||
सतगुरु जयगुरुदेव ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 13/अक्टूबर/2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :

भजो मन सतगुरु जी का नाम ||
दीन दयाल बृहद मेरे शाहेब, पूरे हैं दातार ||
नाम भेद के सच्चे दाता, कुल मालिक सरकार ||
दया मेंहर आवे नामी की,होवेनईया पार ||
दीन गरीबी और बीमारी, सब में करें उद्धार ||
सतगुरु मेरे परम दयालु, परम पुरुष करतार||
शब्द भेद सतगुरु मेरे नामी, सत पुरुष सतगुरु सतनामी ||
साँचे पिता हमार||
मुक्ति मोक्ष के दाता सतगुरु, साँचे हैं सरकार ||
सतगुरु नाम पुकारो अन्तर, दया मेंहर की धार ||
सत धाम के सुन्दर मालिक, सतगुरु पिया हमार||
सतगुरु दया मेंहर कर दीन्हा,नईयाभव के पार ||
दीन गरीबी से है उबारा, दया किया बारम्बार||
सुमिरन ध्यान भजन मन लागे, सतगुरु जी का नाम ||
नाम भजन जपो सतगुरु का, साँचे सत का नाम ||
सत अनामी पुरुष सतनामी, सतगुरु हैं सज्ञान ||
दीन दयाल सतगुरु दाता, मेरे हैं सरकार ||
चंचल चितवन नाम भजन में,होवेगा उद्धार ||
सतगुरु सतगुरु नाम पुकारो,होवे बेड़ा पार ||
सतगुरु नाम धरो अन्तर में, अद्भुत दिखे संसार ||
दिव्य देश देखो धनियों के, सतगुरु सत हमार||
स्वर्ग बैकुंठ रचित तिरलोका, ब्रह्म पार के पार ||
महाकाल की करे बन्दना, हो जावे उस पार ||
दीन दयाल गुरु मोरे स्वामी, सच्चे नामी पुरुष अनामी ||
परम पुरुष करतार||
दया मेंहर के सच्चे नामी,नईया करेंगे पार ||
सतगुरु नाम अधर की कुंजी, नाम भजन अन्तर की पूँजी||
करो भजन मन ठान ||
सतगुरु मेंहर सब भारी, सतगुरु सच्चा जान ||
नाम अनाम बृहद हो पावन, शकल पसारे में है सावन ||
दया करें करतार||
सतगुरु स्वामी नामी अपने, नाम भजन आधार ||
सतगुरु जयगुरुदेव

नाम बेल एक सच्चा बगिया, सतगुरु नाम धारावें||
शब्द की सीढ़ी पकड़ के बंदे, हरी के लोक को जावें||
दया मेंहर हो नामी की, अन्तर में सुख पावें||
नामी अनामी जगत बिधाता, सतगुरु संत लखावें||
नाम भजन सच्चे मालिक का, रास्ता खोली बतावें||
अधर सेन की करी तैयारी, मंगल दृष्यदिखावें||
अद्भुत स्वामी मंगल नामी, नाम रूप बतलावें||
साँचे सतगुरु की करते बन्दना, सत धाम जावें||
सतगुरु सतगुरु नाम पुकारो, परम सूखा को पाओ ||
दरश परश हो अन्तर में, सतगुरु के गुण गाओ ||
सत के दाता सतगुरु मेरे, चरणन शीश झुकाओ ||
चरण बन्दना है मालिक की, आरती उनकी गाओ ||
सतगुरु जयगुरुदेव अनामी, सत पुरुष मंगल सतनामी ||
कोटि कोटितीनकोपरणामी, मेरे सतगुरु मेरे नामी ||
सतगुरु जयगुरुदेव ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

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सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 07/अक्टूबर/2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :

सतगुरु परम दयाल मोरे स्वामी, सत पुरुष हैं पुरुष अनामी ||
नाम दान दीन्हा सतनामी, अन्तर भजन करो सब प्राणी ||
सतगुरु जयगुरुदेव
सतगुरु पावन मंगल नामी, सत पुरुष मालिक सतनामी ||
दया मेंहर करो सब पर स्वामी, दरश परश कर प्यास बुझानि ||
अन्तर दर्शन देओ नामी ||
सतगुरु प्रीतम मोरे सवरिया, हे सतगुरु मोरे हो स्वामी ||
मोरे धाम को देओ पहुँचायी, लख चौरासी से लेओ बचाई ||
दया मेंहर तेरी है नामी, सतगुरु मेरे पुरुष अनामी ||

सतगुरु जयगुरुदेव ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 06/अक्टूबर/2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :

सत भेद हैं पुरुष अनामी, सतगुरु मेरे स्वामी ||
दया निधि मालिक रघुवर ये, ये हीं पुरुष अनामी ||
नाम भेद के सच्चे दाता, सतगुरु संत अनामी ||
सत पुरुष सतगुरु मेरे मालिक, संत शिरोमणि नामी ||
दया मेंहर बरसे सतगुरु की, ये हीं हैं राधा स्वामी ||
सत नारायण स्वामी सतगुरु, प्यारे रघुवर नामी ||
रामायण के दाता स्वामी, आप हीं बने गोस्वामी ||
राधा स्वामी रैदास कहाये, गुरु गोविन्द गुरु नामी ||
गुरु चरणन की सत बन्दना, सच्चे सतगुरु नामी ||
शब्द भेद का भेदी पावन, अगम अलख हैं नामी ||
सत लोक से है सुन्दर क्या, पावन है रजधानी ||
सतगुरु प्रीतम नामी मेरे, आप हैं पुरुष अनामी ||
सत मेंहर के दाता रघुवर, आप हीं हो सतनामी ||
बड़े बड़े खूब यज्ञ रचाये, दीना दात हे नामी ||
सतगुरु संत हमारे प्यारे, सच्चे हैं सतनामी ||
शब्द भेद मालिक मेरे प्रीतम, जो हैं पुरुष अनामी ||
सतगुरु सत नारायण नामी, ये हीं हैं राधा स्वामी ||
तान बसुरिया की वे सुनावें, गरजे बादल पानी ||
घण्ट घारियाल बजे अन्तर घट, किंगरी सारंगी लासानी ||
बीन बांसुरी मेरे मालिक की, सच्ची है रजधानी ||
सतगुरु नाम अलौकिक प्यारा, शब्द भेद की कहानी ||
शब्द के ऊपर बना पसारा, स्वर्ग बैकुंठ लासानी ||
शिव पूरी आद्या का देश जो देखो, प्रभु राम दर्शन होना ||
दया मेंहर होवे स्वामी की, नाही पड़े कहीं सोना ||
हे दयाल समरथ मेरे नामी, सतगुरु प्रीतम पुरुष अनामी ||
ओंकार का गाना ||
लाल देश सुन्दर जहाँ लाली, फटक शीला का खजाना ||
सतगुरु संत बिराजे उन पर, सुन सत्संग का बाना ||
सतनाम सतगुरु मेरे मालिक, है जाना पहिचाना ||
सतगुरु नामी पुरुष अनामी, शब्द भेद का खजाना ||
सतगुरु जयगुरुदेव
नाम भेद सतगुरु का साँचा, नाम भजन कर खोलो बाँचा ||
अन्तर घट की महिमा न्यारि, अन्तर में फैली हरियाली ||
श्वेत नरंगी लाल सतरंगी, अद्भुत दिव्य देश बड़ा प्यारा ||
दया मेंहर हुयी स्वामी की, देखा हमने शकल पसारा ||
आदि अन्त के मालिक सतगुरु, सतनाम सतगुरु की धारा ||
इस सत्संग में जो नर नहावे, मुक्ति मोक्ष परम पद पावे ||
सतगुरु जी का मंगल गावे, श्री चरणन में शीश झुकावे ||
सतगुरु जयगुरुदेव ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

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सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 05/अक्टूबर/2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :

सतगुरु नाम अलौकिक अनुपम, पार ब्रह्म की साया || चढ़ चढ़ जीव जायी वह देशा, कट फल मल की फाया || सतगुरु रूप निरन्तर अद्भुत, करते हैं वो दाया || नाम सहारे चढ़े सुरतिया, दिव्य देश जहाँ माया || चरण बन्दना करे सतगुरु की, आगे कदम बढ़ाया || देश अलौकिक अनुपम देखा, ईश्वर को जहाँ पाया || खुश होयी मन में बहुत समानी, सतगुरु दया कियो लासानी ||| देखा अद्भुत छाया || पार ब्रह्म की करी तैयारी, ब्रह्म में जायी दिखाया || ब्रह्म देश में लाल चुंदरीया, लाल की पूरी माया || उन चरणन में बहे तिरवेणी, सतगुरु जी ने दिखाया || कर स्नान हुयी बलवती जो, फटक शीला पर आया || सतगुरु जी के दर्शन किन्हो, सत्संग को भी पाया || संत सतगुरु मेरे न्यारे, उनही में सबको दिखाया ||| पार ब्रह्म अद्भुत एक बंगला, सूरत वहीं से समाया || कर स्नान सरोवर माही, हंस रूप को पाया || सतगुरु मेंहर हुयी है भारी, झूला खूब झुलाया || सतगुरु मेंहर देख रही अद्भुत, मणि माणिक्यों की साया || अद्भुत अजब निराले देश हैं, सतगुरु संत समाया || सत सत नमन गुरु चरणन में, सत को उसने पाया || सत धाम की महिमा न्यारि, खुल कर सबने गाया || सतगुरु प्रीतम मेरे सवरिया, सारा भेद बताया || पुरुष अनामी गुरु सतनामी, दया मेंहर बरसाया || सतगुरु रूप अद्भुत अलौकिक, दर्शन मैंने पाया || दरश परश कर सूरत जुड़ानी, अन्तर में सुख आया || दीन बन्धु सतगुरु मेरे दाता, दया मेंहर खूब फरमाया || बजे किंगरिया पार ब्रह्म में, सतगुरु दया बरसाया || अद्भुत लोक बना है सारा, सच्चा देखो शकल पसारा || कर्म को सारे कटाया || दीन बन्धु सतगुरु सुख रासी, सत मेंहर जहाँ बसे हैं काशी || धाम आपने बताया || करके मेंहर दया सतगुरु ने, चौथो धाम दिखाया || मालिक से की चरण बन्दना, भाव झरोखे आया || सतगुरु दया सूरत लासानी, श्वेत पुरुष को उसने जानी || गुफा बीच दर्शाया || पार देश सतनाम बिराजी, गुरु की दया समाया || अद्भुत दया हुयी है उस पर, जो है सत को पाया || शीश झुकाया गुरु चरणन में, दया मेंहर को पाया || सतगुरु जयगुरुदेव आरती सतगुरु सत अनामी, सत पुरुष मंगल सतनामी || तिनके चरण कोटि परणामी, सतगुरु जयगुरुदेव अनामी || कोटि कोटि तुमको परणामी ||
सतगुरु जयगुरुदेव ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
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सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 04/अक्टूबर/2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :

भेद बतायो अन्तर घट का, सतगुरु मेरे स्वामी ||
पाँच रंग की बनी चुनरिया, जिसमें रंग है धानी ||
शब्द रूप झनकार अलौकिक, सतगुरु मेरे ज्ञानी ||
सत्य सत में सत नारायण, सत नारायण स्वामी ||
सत लोक के सच्चे दाता, रघुपति पुरुष अनामी ||
नाम भेद घट का बतलायो, तब अन्तर का खेल बतायो ||
सतगुरु मेरे नामी ||
पुरुष अलौकिक शब्द देश के, सच्चे मेरे स्वामी || सतगुरु दाता मेरे सवरिया, कुल मालिक कुल नामी ||
शब्द भेद का रंग अलौकिक, सतगुरु संत अनामी ||
भेद बतायो चार जनम तक, फिर क्यों करो मनमानी ||
रूप अलौकिक मेरे नामी का, वो हीं हैं राधा स्वामी ||
सतगुरु जयगुरुदेव कहाये, सत नाम के नामी ||
सतगुरु दाता मेरे सवरिया, सत नारायण स्वामी ||
आदि अनाम निर्गुणा रूपा, श्री राम पुरुष रजधानी ||
अलख अगम सतधाम बसायो, सत सत सतनामी ||
मंगल नाम अनामी केरो, भजन करो सब नामी ||
रूप लखो तुम अन्तर घट में, पाँच धनी हैं नामी ||
पाँच रूप स्थान बतावें, पाँचो में हैं स्वामी ||
पाँच रंग की चुनरिया, पाँच की है रजधानी ||
पाँच नाम का माला फेरो, सच्ची सरल कहानी ||
सतगुरु नाम बतायो साँचा, हमने बोला वहीं तो बाँचा ||
स्वर्ग बैकुंठ क्या खानी ||
तीन लोक के राजा ईश्वर, ऊपर ब्रह्म लखानी ||
पार ब्रह्म का अजब है बंगला, सत सत सत धानी ||
सून्य महा सून्य तुम सून्य को देखो, श्वेत पुरुष रजधानी ||
पार देश सत धाम बिराजे, जहाँ पे राधा स्वामी ||
सूरत चढ़े सतधाम में जाकर, सतगुरु चरण लासानी ||
शब्द भेद के मेरे सवरिया, सतगुरु मेरे नामी ||
दाता पुरुष अनामी सतगुरु, सत नाम सतनामी ||
सतगुरु जयगुरुदेव कहाये, ये हीं तो राधा स्वामी ||
सत सत में सत बिराजे, सत की कठिन कहानी ||
सत के चरणन शीश झुकाओ, सत सत रजधानी ||
सतगुरु जयगुरुदेव
आरती सतगुरु सत अनामी, सत पुरुष मंगल सतनामी ||
श्री चरणन की चरण बन्दना, आरती और है कोटि नमामि ||
सत सत कोटि करूँ परणामी, सतगुरु जयगुरुदेव अनामी ||

सतगुरु जयगुरुदेव ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

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सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 02/अक्टूबर/2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :

भाव चाव से करो बन्दना, मिली जायें सतगुरु नामी ||
अमर लोक के सच्चे प्रीतम, सच्ची सत्य कहानी ||
सतगुरु मालिक मेरे सवरिया, मेरे दाता नामी ||
सतगुरु जी में प्रेम करो सब, सत्य सत सात वानी||
स्वर्ग बैकुंठ देखना चाहो, अन्तर करो पयानी||
सतगुरु जी ने भेद बताया, नाम जड़ी मन ठानी ||
करो रगड़ाई अन्तर घट में, चमके शीशा पानी ||
अमर लोक तक दिख जाये सारा, सारी सत्य जबानी ||
दया मेंहर को नामी करते, नामी नाम के नामी ||
अन्तर घट की करें सफाई, नाम ध्वनि की जबानी ||
घण्ट घड़ियाल बजे जब घट में, चढ़े सूरत लासानी ||
देखै देश आपनो न्यारा, श्वैत पसारे में नामी ||
नाम देश को सतगुरु बोलें, अन्तर भजन मन ठानी ||
गुरु आज्ञा का पालन करना, यहीं हमारी कहानी ||
नाम भजन मन अन्तर गावे, अन्तर की है जबानी ||
नाम भेद सच्चे सतगुरु का, सतगुरु संत लासानी ||
नाम भजन सतगुरु का गाओ, एक एक कड़ी सुहानी ||
दया मेंहर सतगुरु की होवे, बोलें सत की जबानी ||
दिव्य देश तुम देखो अद्भुत, स्वर्ग बैकुंठ लासानी ||
नाम भेद सच्चा मालिक का, सच्ची अमर कहानी ||
अमर लोक को चलना चाहो, जपो गुरु नाम जबानी ||
घट के भीतर घाट है सुन्दर, बैठक गुरु की लासानी ||
घाट खोल तुम घट के भीतर, दरश परश करो नामी ||
नामी तुमको भेद बतावें, दया करें सतनामी ||
सत भेद के दाता सतगुरु, उनही की है मेहरबानी ||
सतगुरु चरणन शीश धरो सब, नाम संत जग जानी ||
सतगुरु जयगुरुदेव
आरती सतगुरु सत गोसाईं, परम संत सतगुरु सतनाई||
सत के चरणन शीश झुकाऊँ, मुक्ति मोक्ष परम पद पाऊँ ||
सदा जो पूर्ण को तेरे गाऊँ, सतगुरु जयगूरदेव मनाऊँ ||

सतगुरु जयगुरुदेव ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
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सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 01/अक्टूबर/2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :

नमन करो सतगुरु चरणन को, दिखे करो बन्दना ||
देश अनामी मोरे मालिक का, इनकी करो आराधना ||
देश देश के सब जीवों पर, करते रहो आराधना ||
दया मेंहर आवे मालिक की,सुनतसुनावत तान ||
सैन बैन का ये अनुभव है, इसको सच्चा मान ||
दया मेंहर होगी नामी की, अन्तर मन ले ठान ||
सतगुरु जी का नाम पुकारो, और सब सच्चा जान ||
गुरु कृपा आवे ऊपर से, सतगुरु हो मेहरबान ||
नाम की चाभी सतगुरु संग में, ध्यान भजन कर जान ||
सुन्न शिखर की करो चढ़ाई, सतगुरु अपना मान ||
सत देश की साँची बन्दना, अन्तर घट में ठान ||
विषय विकार निकल जब जावे, तब सतगुरु का ज्ञान || सच्चे नामी पुरुष अनामी,तेन को करो परणाम ||
शब्द के नामी हैं सतनामी, सतगुरु अपने जान ||
नाम दान मालिक ने दीन्हा, सच्चा है परमाण||
दया मेंहर उसकी जब होवे, तब तू सच्चा मान ||
सतगुरु नामी पुरुष अनामी, सच्चा दियो है नाम ||
पाँच देश की करो चढ़ाई, सतगुरु संग में ठान ||
प्रभु राम के दर्शन कीजे, अन्तर घट के जान ||
ब्रह्म पार ब्रह्म को मिली आवो, सतगुरु चतुर सुजान ||
दया मेंहर होवे नामी, सुन्न शहर को ठान ||
महा सुन्न के दर्शन करके, पहुँचो तुम सतधाम||
नामी अपने पुरुष अनामी, उनको सच्चा मान ||
सतगुरु सतगुरु नाम पुकारो, अन्तर घट दरम्यान ||
दया मेंहर आवे साईं की, सच्चे चतुर सुजान ||
दया करें जब सतगुरु अपने, उसको लिजै मान ||
सतगुरु चरणन शीश झुकाओ, नाम भजन की ठान ||
सतगुरु जयगुरुदेव
आरती सतगुरु सत अनामी, सत पुरुष मंगल सतनामी ||
कोटि कोटितीनकोपरणामी, सतगुरु जयगुरुदेव अनामी ||

सतगुरु जयगुरुदेव ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

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सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 07/8/2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
करो विचार अपने मन माही, सूरत होये उद्धार मेरे साईं ||
दया मेंहर ऐसी फरमावें, सतगुरु साँचा नाम लखावें ||
विप्र रूप सतगुरु मेरे दाता, सत पथ से है मेरो नाता ||
संत अनामी पुरुष सतनामी, शब्द भेद का खोलो खाता ||
निराकार मेरे गुरु मोरे साईं, सचर जो दीन बन्धु की नाई ||
सतगुरु परम दयाल दयालु, दीन दयाल महा किरपालु ||
संत हमारे सबके दाता, घट घट बसे हैं सबसे नाता ||
सतगुरु परम दयाल मोरे नामी, कोटि कोटि तीनको परणामी ||
सतगुरु संत हमारे नामी ||
चमके बिजुरिया बादल गरजे, अन्तर घट में होये घमासानी ||
सतगुरु संत हमारे नामी ||
शब्द भेद सतगुरु मोरे दाता, शब्द शब्द कर तेरो नाता ||
हे मेरो मालिक संत गोसाईं, दया मेंहर हो स्वामी मेरे ||
दीन दयालु और किरपालु, दया सिन्धु हे मालिक मेरे ||
देश अलौकिक अनुपम देखा, ज्योति शिखा सम करस बिलेसा ||
सहस कमल दल सुन्दर भारी, ज्योति ज्योति की है उजियारी ||
लाल देश की महिमा न्यारि, सतगुरु दया मेंहर की क्यारी ||
बाजे शब्द घनाघोर भाई, दया मेंहर सतगुरु फरमायी ||
सत नाम सतनाम अनामा, प्रभु दरश परश हो सतनामा ||
सत अलौकिक नामी मेरे, दया मेंहर के स्वामी मेरे ||
शब्द रूप हैं संत गोसाईं, शब्द शब्द की बनी हैं खाई ||
सतगुरु जयगुरुदेव बिधाता, तुमसे मेरा सच्चा नाता ||
सत सत के सत हो सिन्धु, दया मेंहर के आप हो बिन्दु ||
सतगुरु जयगुरुदेव अनामी, मेरे मालिक मेरे स्वामी ||
सतगुरु जयगुरुदेव :

तुमको कोटि कोटि परणामी ||
आरती सतगुरु सत अनामी, सत पुरुष सतगुरु सतनामी ||
सत के चरण कोटि परणामी, सतगुरु जयगुरुदेव अनामी ||
सतगुरु जयगुरुदेव ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
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सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 03/अक्टूबर/2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :

अधारे सतगुरु जी के द्वारे ||
घट में घाट घाट पर सतगुरु, यहीं साँचे गुरु द्वारे ||
सच्चे मन से भजन करो तुम, खुल जायें अन्तर सारे ||
नाम भजनिया हो सतगुरु की, दया मेंहर के अधारे||
सतगुरु नाम सुनत अन्तर में,भव के तारण हारे ||
श्वैत पुरुष नाविक रहा न्यारा, जल की बहे सुगन्धित धारा ||
सतगुरु मेंहर है न्यारा ||
दया मेंहर की खान भरी है, अन्तर घट उजियारा ||
सतगुरु नाम जपो जब अन्तर,होवे आरा पारा ||
दया मेंहर नामी की आवे, दिखे शकल पसारा ||
शब्द भेद के साँचे मालिक, करते हैं उजियारा ||
नाम दान सच्चे सतगुरु का, वहीं लगावें पारा ||
सतगुरु दया मेंहर से बन्दो, दया मेंहर वारा ||
नाम भजन साँचे मालिक का, खोलें घट पट द्वारा ||
सतगुरु नाम सत की वाणी, मोहीं उतारें पारा ||
दया मेंहर होवे नामी की, नाम ध्वनि झनकारा||
सतगुरु परम अलौकिक दिखे,आनत वहीं न दुबारा ||
जीव उबार जो चौरासी से, नाम दियो है दुबारा ||
नाम गुरु साँचा सतगुरु है, सत देश है प्यारा ||
सतगुरु रूप अलौकिक निको, कहे न सुन्न आर पारा ||
दिव्य लोक सतगुरु जी दिखावें, और बतावें वारा ||
दया मेंहर होवे नामी की,तातिरलोक उस पारा ||
ब्रह्म में देखे अद्भुत रचना, पार ब्रह्म का न्यारा ||
मणि मणियों से सजे बगीचे,नाही वारा पारा ||
अद्भुत दृश्य दिखे सतगुरु में, दया करें यहीं वारा ||
नाम अलौकिक है मालिक का, दया मेंहर के द्वारा ||
शब्द का सारा शब्द लोक से, है अनाम का तारा ||
हरी अनन्त हरी कथा अनन्ता, शब्द रूप व्यापक भगवन्ता||
साँचा शकल पसारा ||
शीश धरो सतगुरु चरणन में,होवे वारा न्यारा ||
सतगुरु जयगुरुदेव
आरती सतगुरु सत अनामी, सत पुरुष मंगल सतनामी ||
इनके चरण कोटीपरणामी, सतगुरु जयगुरुदेव अनामी ||
सतगुरु जयगुरुदेव ||

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सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 02/अक्टूबर/2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :

भाव चाव से करो बन्दना, मिली जायें सतगुरु नामी ||
अमर लोक के सच्चे प्रीतम, सच्ची सत्य कहानी ||
सतगुरु मालिक मेरे सवरिया, मेरे दाता नामी ||
सतगुरु जी में प्रेम करो सब, सत्य सत सात वानी||
स्वर्ग बैकुंठ देखना चाहो, अन्तर करो पयानी||
सतगुरु जी ने भेद बताया, नाम जड़ी मन ठानी ||
करो रगड़ाई अन्तर घट में, चमके शीशा पानी ||
अमर लोक तक दिख जाये साया, सारी सत्य जबानी ||
दया मेंहर को नामी करते, नामी नाम के नामी ||
अन्तर घट की करें सफाई, नाम ध्वनि की जबानी ||
घण्ट घड़ियाल बजे जब घट में, चढ़े सूरत लासानी ||
देखै देश आपनो न्यारा,श्वैत पसारे में नामी ||
नाम देश को सतगुरु बोलें, अन्तर भजन मन ठानी ||
गुरु आज्ञा का पालन करना, यहीं हमारी कहानी ||
नाम भजन मन अन्तर गावे, अन्तर की है जबानी ||
नाम भेद सच्चे सतगुरु का, सतगुरु संत लासानी ||
नाम भजन सतगुरु का गाओ, एक एक कड़ी सुहानी ||
दया मेंहर सतगुरु की होवे, बोलें सत की जबानी ||
दिव्य देश तुम देखो अद्भुत, स्वर्ग बैकुंठ लासानी ||
नाम भेद सच्चा मालिक का, सच्ची अमर कहानी ||
अमर लोक को चलना चाहो, जपो गुरु नाम जबानी ||
घट के भीतर घाट है सुन्दर, बैठक गुरु की लासानी ||
घाट खोल तुम घट के भीतर,दरश परश करो नामी ||
नामी तुमको भेद बतावें, दया करें सतनामी ||
सत भेद के दाता सतगुरु,उनही की है मेहरबानी ||
सतगुरु चरणन शीश धरो सब, नाम संत जग जानी ||
सतगुरु जयगुरुदेव ||
आरती सतगुरु सत गोसाईं, परम संत सतगुरु सतनाई||
सत के चरणन शीश झुकाऊँ, मुक्ति मोक्ष परम पद पाऊँ ||
सदा जो पूर्ण को तेरे गाऊँ, सतगुरु जयगूरदेव मनाऊँ ||
सतगुरु जयगुरुदेव ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

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सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 01/Sep/2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :

नमन करो सतगुरु चरणन को, दिखे करो बन्दना ||
देश अनामी मोरे मालिक का, इनकी करो आराधना ||
देश देश के सब जीवों पर, करते रहो आराधना ||
दया मेंहर आवे मालिक की,सुनतसुनावत तान ||
सैन बैन का ये अनुभव है, इसको सच्चा मान ||
दया मेंहर होगी नामी की, अन्तर मन ले ठान ||
सतगुरु जी का नाम पुकारो, और सब सच्चा जान ||
गुरु कृपा आवे ऊपर से, सतगुरु हो मेहरबान ||
नाम की चाभी सतगुरु संग में, ध्यान भजन कर जान ||
सुन्न शिखर की करो चढ़ाई, सतगुरु अपना मान ||
सत देश की साँची बन्दना, अन्तर घट में ठान ||
विषय विकार निकल जब जावे, तब सतगुरु का ज्ञान ||
सच्चे नामी पुरुष अनामी,तेन को करो परणाम ||
शब्द के नामी हैं सतनामी, सतगुरु अपने जान ||
नाम दान मालिक ने दीन्हा, सच्चा है परमाण||
दया मेंहर उसकी जब होवे, तब तू सच्चा मान ||
सतगुरु नामी पुरुष अनामी, सच्चा दियो है नाम ||
पाँच देश की करो चढ़ाई, सतगुरु संग में ठान ||
प्रभु राम के दर्शन कीजे, अन्तर घट के जान ||
ब्रह्म पार ब्रह्म को मिली आवो, सतगुरु चतुर सुजान ||
दया मेंहर होवे नामी, सुन्न शहर को ठान ||
महा सुन्न के दर्शन करके, पहुँचो तुम सतधाम||
नामी अपने पुरुष अनामी, उनको सच्चा मान ||
सतगुरु सतगुरु नाम पुकारो, अन्तर घट दरम्यान ||
दया मेंहर आवे साईं की, सच्चे चतुर सुजान ||
दया करें जब सतगुरु अपने, उसको लिजै मान ||
सतगुरु चरणन शीश झुकाओ, नाम भजन की ठान ||
सतगुरु जयगुरुदेव
आरती सतगुरु सत अनामी, सत पुरुष मंगल सतनामी ||
कोटि कोटितीनकोपरणामी, सतगुरु जयगुरुदेव अनामी ||

सतगुरु जयगुरुदेव ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 13/08/2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :

मधुबन उपवन सजे बजाये, अन्तर ऐसा दृश्य दिखाये ||
सतगुरु नाम की माला तेरी, सूरत बने सतगुरु की चेरी ||
नाम भजन मन लायो ||
काव्य ग्रन्थ खूब पढ़ी पढ़ी देख्यो, सच कहूँ न कुछ है पायो ||
सतगुरु मिले अलौकिक नामी, नाम धना को पायो ||
नाम निराला सत देश का, सतगुरु ने फरमायो ||
दिव्य कुंजी अन्तर घट की, ताला खोल गिरायो ||
अन्तर चलो देश अद्भुत हैं, स्वर्ग बैकुण्ठ को गायो ||
नाम की महिमा तुमने जानी, नाम भजन मन गायो ||
नाम अलौकिक उत्तम प्यारा, सतगुरु नाम बतायो ||
नाम दिव्य एक नाम अलौकिक, नाम धना को पायो ||
सचर रूप सतगुरु हैं साईं, नाम भजन मन गायो ||
करो बन्दना तुम सतगुरु की, मुक्ति मोक्ष बनायो ||
रूप अलौकिक अद्भुत देख्यो, समझ एक ना आवे ||
पार की महिमा सुन्दर न्यारी, फैली अद्भुत है अद्भुत उजियारी ||
नाम नाम धुन गायो ||
ब्रम्ह पार ब्रम्ह देख्यो लीला, महा काल पुरुष गायों ||
चितवन कीन्हा बंसी धुन को, सत नाम भीग जायो ||
चंचल अद्भुत चम चम चमके, है स्वरुप का गायो ||
सत अनामी पुरुष सतनामी, उनकी महिमा पायो ||
अद्भुत देश अलौकिक देख्यों, सूरत खूब हीं हर्षायो ||
हर्षित पुलकित भयी सयानी, सतगुरु कै गुन गायो ||
सच्चे नामी पुरुष अनामी, जिनके द्वारे आयो ||
पद पंकज में करि बन्दना, चरणन शीश झुकायो ||
सत अनाम नाम के स्वामी, तेरी दया को पायो ||
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
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Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 22/07/2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :

भाव चाव से करि बन्दना,रीझ जायें सतगुरु नामी ||
नाम दया बरसे हम सब पर,मिल जायें सतगुरु नामी ||
पुरुष अनामी सतगुरु सतनामी, सच्चे प्रीतम स्वामी ||
दीन दयाल सतगुरु स्वामी, भेद देत हैं अनामी ||
एक एक दया बिराजे उनकी, मिलें घट अन्तर नामी ||
नामी सच्चे पुरुष अनामी, सतगुरु हैं सतनामी ||
भेद लखायो नाम बतायो, सच्चे सतगुरु स्वामी ||
निज चरणन की करि बन्दना, मिल जायें पुरुष अनामी ||
भेद सबै समझायो घट का, माने न मन खलकामी ||
सच्ची खिलकत है सतगुरु की, शब्द भेद सतनामी ||
पुरुष अनामी गुरु सतनामी, सच्चे हैं वो स्वामी ||
नाम अनाम से लागे सुन्दर, हैं अनाम की जबानी ||
हरी हरी कथा बिराजै सब पर, शब्द भेद सतनामी ||
सुन्दर पुरुष अलौकिक नामी, नाम भेद की खानी ||
मेरे मालिक की अनुपम लीला, अनुपम अकह कहानी ||
सुन्दर वर्णन करूँ सतगुरु का, शब्द भेद लासानी ||
सुन्दर नामी पुरुष अनामी, भेद देत सतनामी ||
सत मेंहर सतगुरु की साँची, शब्द भेद की जबानी ||
चंचल चितवन होये अन्तर मे,आगम निगम बखानी ||
मेरे अलौकिक सतगुरु साईं, भेद दियो तुम नामी ||
हे दयाल मेरे शम्भू सागर, पावन नाम अनामी ||
सतगुरु नाम पुकारूँ तुमको, तुम हो सच्चे नामी ||
नाम अनाम से आयो नामी, भेद देत हैं जबानी ||
नीस अगम और अलख पसारा, अलख फकीरा नामी ||
दाता रघुवर संत हमारे, पुरुष हैं सतनामी ||
शब्द भेद सत रचना किन्ही, शब्द शब्द की खानी ||
नामी सुन्दर पुरुष हमारे, सतगुरु सत हमारे ||
सत चरणन में शीश झुका कर, मैं में बन्दना ठानी ||
सतगुरु जयगुरुदेव
आरती सतगुरु सत अनामी, शब्द भेद सतगुरु सतनामी ||
सत चरणन में शीश में झुकाऊँ, मुक्ति मोक्ष परम पद पाऊँ ||
सतगुरु हे मेरे सत अनामी, शब्द भेद के सुन्दर स्वामी ||

बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

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Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 16 मई 2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :

अनामी सुन्दर सतगुरु स्वामी ||
सत मेंहर के दाता नामी, सतगुरु पुरुष अनामी ||
भेद छिपे एक एक क्षण क्षण में, सतगुरु अंतरयामी ||
सत भेद सतगुरु संगनी को, सच्चे मालिक नामी ||
मधुर बंसुरिया घाट में बाजे, जो हैं पुरुष अनामी ||
नाम तार घट बीच पड़ा है, अदभुद है झनकारी ||
रुद्र अलौकिक रूप सुहावन, है अनाम कियो नामी ||
महाकाल के देश दिला दें, सतगुरु मंगल नामी ||
रूप अलौकिक है सतगुरु का, शब्द भेद के स्वामी ||
शब्द भेद जो रास बतायो, अंतरघट के नामी ||
नामी ऐसे सुन्दर पावन, अदभुद अमिट कहानी ||
ऐसे सत शीश झुकाओ, जो सबके हैं स्वामी ||

सतगुरु जयगुरुदेव
अलौकिक देश सतगुरु का, पार उस देश जाना है ||
रास्ता है बड़ा सच्चा, इन्हीं में मन को लगाना है ||
साँवरिया सतगुरु प्यारे, याद इनहि दिलाना है ||
लगे जब मन गुरु चरणन में, काम सब हीं बन जाना है ||
भजन हो नाम सतगुरु का, नाम अंतर ध्वनि गाना है ||

सतगुरु जयगुरुदेव
मंगल पावन रूप सुहावन, घट घट ब्यापी सतगुरु ||
सतनाम से करी बन्दना, सत के साँचे सतगुरु ||
सत में सत भेद बतलावे, सत अनामी सतगुरु ||
नामी पुरुष अनामी मालिक, भेद देत हैं सतगुरु ||
भेद अलौकिक पार देश तक, सब बतलावे सतगुरु ||
नाम भजन कर अंतरघट में, देखो मेंहर सब सतगुरु ||
अनतर्घट के माही विस्तारा, अंतर दिखे शकल पसारा ||
शब्द भेद से खोला द्वारा, दया मेंहर किया सतगुरु ||
उन सतगुरु की करो बन्दना, नाम दिया बिना सतगुरु ||
धुर के मालिक नामि साँचे, नाम भेद के दाता ||

सतगुरु जयगुरुदेव
मेंहर कर दीन्हा सतगुरु नाम ||
ऐसा नाम जड़ित अति पावन, ले जाये सिंधु के पार ||
सिंधु आधार गुरु बतलायो, खोले घट के द्वार ||
अंतर की सब महिमा गुरु की, देखो अंतर जाय ||
अंतर घट के बीच मंझारी, सर्वस्व लगाकर बड़े गुरु प्यारे ||
सत संग होत बहार, सत मेंहर की दया बिराजे ||
प्रेमी जावे उस पार, देख के मोहन मूरत गुरु की, उधर समरसे द्वार ||
सुन्दर अति पावन मन भावन, साँचा गुरु का द्वार ||
सत प्रेम से शीश झुकाओ, यहीं सत आधार ||
घट पट खोला है सतगुरु ने, दया कियो बारम्बार ||
ऐसे नामी की चरण बन्दना, करते रहो सत बार ||
सत चरणों में शीश नवाँ कर, सच्ची करो पुकार ||
हे मेरे मालिक दया हो जावे, सूरत जाये उस पार ||

सतगुरु जयगुरुदेव
गुरु ने मोहे दीन्हा नाम रतनवा ||
रखना सम्हाल के बड़े जतनवा, गुरु ने दीन्हा नाम रतनवा ||
राम रतन से राम मिली जावें, ब्रह्म के दर्शन गुरु करवावें ||
पार ब्रह्म सत्संग को सुनावें ||
महाकाल पुरुष गये बलिहारी, सत धाम में सूरत सँवारी ||
ऐसे सतगुरु सत दयाला, दया सिंधु सतगुरु किरपाला ||
सत सत नमन और कोटि बन्दना, सच्चे सतगुरु की है अराधना ||

सतगुरु जयगुरुदेव
आरती सतगुरु सत अनामी, नाम भेद के सच्चे स्वामी ||
नाम जड़ित है हरित अति पावन, अंतर घट सब दिखे सुहावन ||
सतगुरु मंगल रूप, उन चरणन की करी आरती ||
सतगुरु सबके भूप ||
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
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सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 15 मई 2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :

दीन दयाल सतगुरु नामी, दया किया मेहरबानी ||
नाम भेद सब कुछ बतलायो, गायी सुनायो जबानी||
प्रीतम ऐसे साँचे सतगुरु, जिनकी सुना जबानी||
भाव भाव पर सतगुरु रीझें, सत मेंहर महिदानी||
क्या सतगुरु साँचे मेरे साथियों, फिर क्यों बात न मानी ||
नाम भजन में लगा प्रेमियों, नाम भजन है सानी ||
संत स्वभाव सरल सब दीपो, संत की सत जबानी||
सत संगत सतगुरु की बैठी, सत मेंहर लासानी||
सतगुरु प्रीतम मेरे बुलावें, सतगुरु हैं लासानी||

सतगुरु जयगुरुदेव
भवर बीच नैया करते पार ||
सतगुरु साँचे मालिक नामी, यहीं करते उद्धार ||
बीच डगर में फसी जो नैया, खेयी लगावें पार ||
सतगुरु साँची दाता मेरे, नाव फसीमजधार||
खेवनहार खेयी लगायी,नैया अब उस पार ||
उस सतगुरु की चरण बन्दना, करते हैं बारम्बार||

सतगुरु जयगुरुदेव
आरती सतगुरु दीन दयाला,संत सिंधु सतगुरु किरपाला||
साँचे चरणन शीश झुकाऊँ, सतगुरु की बन्दना मैं गाऊँ ||
सतगुरु चरणन शीश झुकाऊँ ||

बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

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सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 14 मई 2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :

विनय मैं करूँ सतगुरु तेरे द्वार ||
घट का ताला बन्द पड़ा है, खोलो द्वार किवाड़ ||
विनय मैं करता बारम्बार||
निज घट घट के स्वामी नामी, हे मेरे करतार||
विनय मैं करता बारम्बार||
सहस्त्र कमाल दल रूप दिखाओ, त्रिकुटी धाम हमें भी लखाओ||
देखूँ दशवा द्वार ||
भवर गुफा के मैं भी जाऊँ, चढ़ूँ सतनाम में धाये ||
सत स मारग सतगुरु जी नव, सत का भेद बताय||
सत अनामी नामी प्रीतम, विनय करूँ बारम्बार||
श्री चरणन में शीश नवाऊँ, हे सतगुरु रघुनाथ ||
हे रघुपति राघव हे स्वामी, हे मेरे दीनानाथ ||
सत भेद सतगुरु समझायों, भेद तुम्हारे साथ ||
हे मेरे मालिक परम दयालु, हम हैं तुम्हारे नाथ ||
सतगुरु चरणनकरिहै बन्दना, और झुकायोमाथ||
सतगुरु जयगुरुदेव
दया की सच्ची सतगुरु खान ||
आन बान सब सतगुरु नामी, चाहे सच्ची शान ||
है सच्चाई समरथ तेरी, साँच में कैसी आँच ||
बाँचा सब घट के भीतर का, घट घट में हों आप ||
घट में घाट घाट पर सतगुरु, सच्चे दीनानाथ ||
पुरुष अनामी सतगुरु नामी, हे मेरे सतगुरु प्याम||
सतगुरु संत हमारोंसाँचो, बाँचो तेरो नाम ||
युगनयुगन की लगन युगन की, प्यास बुझाओ नाथ ||
श्री चरणन की करी बन्दना, हे सतगुरु दीनानाथ ||
सतगुरु जयगुरुदेव
आरती सतगुरु सत के साईं, मंगल पुरुष अनामी नामी ||
सत नाम सतगुरु सतनामी, सत मेंहर के सतगुरु स्वामी ||
शब्द भेद सतगुरु हे नामी, श्री चरणन में कोटीपरनामी||

बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

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सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 13 मई 2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :

नमन करो गुरु चरण को प्यारे,जिनने नाम धरायों||
लाख चौरासी का फन्दा काटो, सत मार्ग बतलायो||
ऐसे सुन्दर शीतल नामी, को सब शीश झुकायो||
नूतन अजब रंग है बँगला, सतगुरु का गुण गायो||
शब्द भेद के सतगुरु मालिक, दया मेंहर को पायो||
सुन्दर नामी पुरुष अनामी, भेद इन्हीं का गायो||
अनुपम छटा निराली बरसे, मूरत देख हर्षायो||
क्या है रंग रोगन सतगुरु की, अजब लाल रीछायो||
लाल लगाम लाल लरदेशा, लार तार गुन गयो||
सुमग अलौकिक गाथा, सतगुरु जी ने सुनायो||
सत देश के सतगुरु मालिक, सत में शीश झुकायो||
शब्द भेद की करी बन्दना, शब्द हीं सतगुरु पायो||
सतगुरु दया मेंहर है अनुपम,देश देश में गायो||
देश निराला प्रीतम जी का, देश में मन को लगायो||
सुन्दर सुमग अलौकिक अद्भुत, नाम भजन को गायो||
चरण बन्दना की नामी की, नामी को शीश झुकायो||

सतगुरु जयगुरुदेव
मधुर वाणी अलौकिक है, गुरु किरपा निराली है ||
भेद जो दीन्हा अन्तर का, होती हर क्षण दीवाली है ||
मधुर सूरत मधुर मूरत,सुमग सुन्दर निराली है ||
महा मंगल महा मन में, मंत्र काया सजाई है ||
भेद और मान सतगुरु का, कोई घट तो न खाली है ||
दीवाली हर घड़ी होती, अजब अद्भुत हरियाली है ||
दया कर घाट पर सतगुरु, दिया दर्शन निराला है ||
खुला है घाट अब तो तुम, घाट सतगुरु का आला है ||
घाट पीछे अजब रंग हों, अजब ढंग के निवाले हों ||
निराले अद्भुतमयी सत्संग, सत संगत भी न्यारि हों ||
हमे सब भाव से लगकर, कोई जन न दुखारी हों ||

सतगुरु जयगुरुदेव
अद्भुत अनुपम सुंदर देशु, नाम भजन कर कटतकलेशु||
सतगुरु अनुपम छटा निराली, अद्भुत अलौकिक हो हरियाली ||
राग रगनी छत्तीस बाजे, अद्भुत मंगल शोभा राजे||
मेंहर होये ऐसी नामी की,दरश परश karसब दुःख भागे ||
सतगुरु शीतल परम सुहावन, चरणामृत अद्भुत अति पावन ||
सतगुरु चरणन शीश झुकावन||
सतगुरु जयगुरुदेव अनामी, नाम भेद के तुम हे स्वामी ||
सतगुरु संत हमारे नामी, तुमको कोटीकोटीपरानामी||
सतगुरु जयगुरुदेव अनामी ||

सतगुरु जयगुरुदेव
आरती सतगुरु संत कृपाला, शब्द भेद के दीन दयाला||
हर घट घट के तुम हो वासी, शब्द रूप सतगुरु अविनासी||
सत दया और मेंहर बसे काशी, आरती सतगुरु जय अविनासी||
श्री चरणन में शीश झुकाऊँ, आरती चरण बन्दना गाऊँ ||
सतगुरु जयगुरुदेव अनामी, मेरे मालिक मेरे नामी ||
सहस्त्रकोटी तुमको परणामी||

बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 09 अप्रैल 2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :

ध्यान मगन हो करो प्रार्थना, याद करो सतगुरु नामी ||
भव को पारण हार हैं स्वामी, सच्चे पुरुष अनामी ||
नाम भेद के दाता सतगुरु, सच्चे पुरुष अनामी ||
भाव झरोखे करो बन्दना, बोलो मीठी वाणी ||
रूप अलौकिक अनुपम छटा है, अद्भुत है हरियाली ||
रूप निरालो मेरे स्वामी का, जो हैं अन्तर यामि||
भेद भाव को दूर हटा कर, जपो सब सच्चे नामी ||
नाम भजन सच्चा अधार है, बोले राधा स्वामी ||
सूरत सुहागन होवे जिस दिन, सारी प्यासी बुझानि||
दिव्य लोक की दिव्य कहानी, सतगुरु बतायो जबानी||
संत शिरोमणि नामी सच्चे, अपने दाता स्वामी ||
नाम भेद रस चखो निरन्तर, बन कर अन्तर यामि||
घट में घाट पर घाट पर सतगुरु, ये हीं तो हैं सच्चे नामी ||
पार देश सतगुरु ले जावें, यही उनकी है खानी ||
संत शिरोमणि सबके दाता, सतगुरु संग अनामी ||
नाम नामनि सब मालिक की, चलो धुर धाम अनामी ||
सतगुरु नाम अलौकिक पावर, नाम भजन दो ध्यानी ||
सतगुरु चरण बन्दना साँची, सत सत नमन जबानी||

सतगुरु जयगुरुदेव
अखण्ड रूप से बिराजमान सतगुरु जयगुरुदेव मन्दिर ग्राम बड़ेला के प्रांगण में बैठे हुये समस्त प्रेमी जन, मालिक की असीम दया-अनुकम्पा और नाना प्रकार के भेद मालिक ने बताये, निज घर जाने का रास्ता दिया | और भेद समझाया कि किस तरह हम सबको ऊपर में चलना है |

सतगुरु भेद बतायो साँचा, अन्तर महिबोलो सब बाँचा ||
गुरु महाराज ने सच्चा नाम भेद बताने के बाद अच्छी तरह से समझाया कि अन्तर में आपकी जबान नहीं चलेगी, मुह में जीभ नहीं हिलेगी और स्वासों पे नाम लेवोगे, बाचा बोलोगे | जिस का बताया है उस नाम का उच्चारण करोगे, जब नाम भजन करोगे तो तुम्हें अद्भुत अलौकिक दिखाई पड़ेगा, सुनाई पड़ेगा, आगे को चलोगे, सूरत जीवात्मा आगे को बढ़ेगी, घाट के पार जायेगी, पूरी की पूरी दया-कृपा होगी | स्वर्ग-वैकुंठ और बहिष्यत और नाना प्रकार की चीजें जो कुछ हैं, ऊपरी मण्डलों की वो देखेगी, प्रभु राम के दर्शन करेगी | सूरत जीवात्मा दूसरे धाम पर जायेगी, पार ब्रह्म, ब्रह्म के दर्शन करेगी | सब ये गुरु महाराज की दया कृपा से होगा | जब अन्तर में बाँचा बोलोगे, साँचा नाम ध्वनि तुम्हारे स्वासों पर होगी, आपके मुह में जबान जो है वो नहीं हिलेगी | आप अन्तर मन से साधना करोगे तब आपकी साधना बनेगी |

साँची सुघर साधना गुरु की, दिव्य देश ले जावे ||
जब तुम सच्चे मन से सुमिरन ध्यान भजन करोगे, अन्तर आत्मा में गुहार लगाओगे, पुकार लगाओगे, अपने सतगुरु की जयजय कार करोगे, तब तुमको अन्तर में अद्भुत दिखायी पड़ेगा | आगे को चलोगे, नाना प्रकार की चीजें आपको दिखेंगी | हर जगह हरियालियों के बाग़-बगीचे, सुगंधित फूल, नदी-झरने, पहाड़, बाग़-बगीचे हर चीजें आपको दिखाई-सुनाई पड़ेंगी और मालिक के बताये हुये अनुसार, अद्भुत रंग रंगीले, रसीले, चिड़ियों की चहचहाहट और हर प्रकार की धन सम्पदा देखने को आपको मिलेगी | आप सब उसमे मन लगा करके देखोगे और मालिक का भजन करोगे |

करो बन्दना सतगुरु नामी, जो हैं सबके सच्चे स्वामी ||
सबसे पहले गुरु महाराज की चरण बन्दना करोगे और गुरु महाराज की अराधना करोगे, गुरु महाराज को मनाओगे, गुरु महाराज से प्रेम करोगे, गुरु महाराज से पूरी दया कृपा मांगोगे | गुरु महाराज पूरी दया-कृपा करेंगे आप पर, तो आप का सारा काम बनता चला जायेगा | आपको अद्भुत अलौकिक दिखने लगेगा, आप उस मण्डल की सैर करने लगेंगे, जिस मण्डल के लिए गुरु महाराज ने बता रखा है | नाना भाँति के, नाना प्रकार के चीजें आपको दिखेंगी | आपको दिखाई-सुनाई सब कुछ पड़ने लगेगा, मालिक से बातें होने लगेंगी |

अन्तर मुख जन सब कुछ पावा, बाही मुखी बस गाल बजावा||
जो अंतर्मुखी होते हैं, अन्तर में चलते हैं, साधना करते हैं, साधक होते हैं, उनको सब कुछ दिखाई सुनाई तो पड़ता है | और जो बाहर से केवल बाँचा बाँचते हैं, ये बताते हैं कि यहाँ पर ये है, वहाँ पर वो है उन्हें कुछ दिखाई-सुनाई नहीं पड़ता | वो तो केवल बताते हैं सुना सुनाया, सुनाते हैं और आँकी समझ में क्या आये, वो तो बस बताते रहते हैं | उनको रुपये पैसे से जरूरत होती है | बस जो सुना-सुनाया सुना देते हैं और उतने में हीं काम उनका चल जाता है | आगे क्या करने कि जरूरत है उनको, उनको तो उसी से जरूरत है, पैसा आये अपने काम बन जाये |

सतगुरु शब्द भेद अविनासी, अन्तर घट में बसती काशी ||
सतगुरु गुरु महाराज, अपने सच्चे सरकार अविनासी हैं, इनका जीवन मरण नहीं होता | ये एक रस, एक आन रहते हैं, तभी इनको किसी प्रकार की जरूरत नही पड़ती | इनके पास खाली चीजें परिपूर्ण हैं | और अन्तर में जहाँ आदि अनाम निर्गुण निराकार शिव रहते हैं, उसको काशी जी कहते हैं | ये सब आपको अन्तर में देखने को, सुनने को मिलेगा | सच्चे दर्शन, अद्भुत दर्शन अन्तर में होंगे | आप प्रफुल्लित हो जायेंगे, मन मगन हो जायेंगे | आप पर पूरी की पूरी गुरु महाराज की दया कृपा हो जायेगी | आपको सच्चा अनुभव होने लगेगा, आपको दिखाई-सुनाई पड़ने लगेगा | आप उस अद्भुत चीजों को देखोगे और मन्त्रमुग्ध हो जाओगे |

सतगुरु दया मेंहर सब पावा, सतगुरु जी का वर्णन गावा ||
साधक प्रेमी, सूरत-जीवात्मा, जो जो कुछ उसको मिलता जाता है, वो जो जो कुछ देखती जाती है, अपने गुरु महाराज का गुणगान करते नहीं थकती | और बताती है की हमने अपने गुरु की कृपा से ये सब कुछ प्राप्त किया है | गुरु महाराज की दया कृपा से हमको मिला है | हममें कोई शक्ति नहीं थी, हममें कोई ताकत नहीं थी, हममें कोई चीज नहीं थी | हमको जो कुछ भी मिला है गुरु महाराज की कृपा से ही सारा कुछ मिला है और गुरु दयाल ने ही हमको सब कुछ दिया है |

गुरु मेंहर ये दया है आयी, शैल शिखर में सूरत समायी ||
कहा मालिक की दया कृपा हो गयी | हमारी सूरत जीवात्मा ऊपर चढ़ गयी और नाना प्रकार की चीजों को देखा | अद्भुत चीजें देखी, ये सतगुरु महाराज की दया-कृपा से हमने देखा, गुरु महाराज की दया कृपा हुयी | तब हमारी चढ़ाई हुयी और हमने ऊपर जा करके प्रभु राम के दर्शन किये, कृष्ण भगवान के दर्शन किये, शंकर भगवान के दर्शन किये, ब्रम्हा बिष्णु महेश के दर्शन किये, गणेश-दिनेश के दर्शन किये| ये सब दर्शन गुरु महाराज की दया कृपा से हुये| अपने आप से कुछ नहीं हुआ | जब गुरु महाराज की दया-कृपा हो गयी तो बहुत कुछ हमने देखा |

रंग रंगीले और रसीले, लाल गुलाबी नीले पीले ||
बड़े रंग रंगीले और रसीले फलों को देखा और रंग-बिरंगे पुष्पों को देखा, रंग बिरंगे फूलों को देखा और झरनों को देखा, नदियों को देखा, पहाड़ को देखा | सूरत जीवात्मा एक रास्ते पर एक निशाने पर चलती चली जा रही है और दोनों तरफ जो कुछ दिखाई पड़ता है उसको देखती हुयी, जैसे प्लेन में बैठा हो सामने कोई कुछ जो कुछ नजर आ रहा हो उसको देख रहा | इस तरह से या आप मान लो कि अगर आप मोटर कार में बैठे जा रहे हो सामने में जो कुछ दिखाई पड़ रहा हो उसको देख रहे हो | इसी तरह से सूरत जीवात्मा अन्तर में चल रही और सब कुछ देखती हुयी सामने चली जा रही है अपने गुरु महाराज के साथ मन मस्त मगन हो करके |
सतगुरु संत हमारे, सच्चे हैं सतगुरु दाता ||
सतगुरु की दया मेंहर से हीं, खुला हमारा खाता ||
सब दया मेंहर सतगुरु की, गुणगान गुरु का गाऊँ ||
जब अन्तिम समय ये आये, तो मुक्ति पद को पाऊँ ||

सतगुरु जयगुरुदेव
आरती सतगुरु दीन दयाला, दीन बन्धु सतगुरु किरपाला||
श्री चरणन में शीश झुकाऊँ, आरती चरण बन्दना गाऊँ ||
सतगुरु जयगुरुदेव अनामी, मेरे मालिक मेरे स्वामी ||
श्री चरणन में कोटि परणामी||

बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

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सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 08 अप्रैल 2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :

भाव झरोखे करो बन्दना, मिलेंगे सतगुरु स्वामी ||
घट में घाट घाट पर सतगुरु, ऐ सर्वज्ञ अन्तर्यामी ||
नामी अपने पुरुष अनामी, सच्चे सतगुरु स्वामी ||
भेद दियो सारे मुकाम का, माने न माने खलकामी||
काम क्रोध मद लोभ सतावे, बढ़ के करत मनमानी ||
सतगुरु सच्ची राह बतायो, भेद दीन्ह है अनामी ||
नाम अलौकिक दीन्हा सतगुरु, भाये देश की नामी ||
पार देश एक सिन्धु है गहरा, जहाँ सतगुरु का हरदम पहरा, सूरत वहीं है समानी ||
सतगुरु के संग में खेले होली, नाहीं करत मनमानी ||
नाम भेद दाता ने दीन्हा, अन्तर भजन कीन्ह सही चीन्हा, सतगुरु की है जबानी ||
सत भेद सतगुरु संग रहकर, भजन करो सब प्रानी||
नामी पुरुष अलौकिक सतगुरु, सतगुरु संग है जानी ||
सतगुरु चरणन शीश झुकाओ, सतगुरु मेंहर है पानी ||

सतगुरु जयगुरुदेव
करो गुनावन गुरु की वाणी, साथ रहे हो सब जन प्राणी ||
उन पल क्षिन को याद दिलाओ, अपने मन को तुम समझाओ ||
सतगुरु मेंहर हुयी अति न्यारि, सत्संग गंगा शकल पसारी ||
सत के वचन सुने एक वारा, खुल गए घट के सारे ताला ||
घट घट के सतगुरु अविनासी, हर घट के हैं सतगुरु वासी ||
शब्द सुरेख बसे जहाँ काशी ||
नैन ज्योति सम चमके अन्तर, चमके सूरज चन्दा वासी ||
सतगुरु मेंहर अद्भुत आवे, दया मेंहर सतगुरु दिखलावें||
घाट पार सतगुरु की बैठक, सत दया सब सतगुरु गावे ||
सतगुरु मेंहर होवे सब संगी, सारी सूरतें हो सतरंगी||
सत देश की बजे सरंगी||
अना वक्त सत देश बिराजे, बीन बसुरिया बाजा बाजे ||
ज्ञान ध्यान सब गुरु चरणन में, नाम भेद सब गुरु के आगे ||
सच्चे सतगुरु प्रीतम दाता, यहीं चरणन शिर नाता ||
असली ये हीं हैं माता-पिता ||
सतगुरु परम दयाल हैं स्वामी, शब्द भेद ये पुरुष अनामी ||
सच्चे प्रीतम रघुवर स्वामी, सतगुरु जयगुरुदेव अनामी ||

सतगुरु जयगुरुदेव
मन चित्त भजन करे सतगुरु का, सच्चे भाव बनावे||
मैलाई सब कटि कटि जावे, नाम मेंहर को पावे||
रूप अलौकिक अद्भुत अनुपम, नाम शिखा मन गावे ||
भेद भेद के दाता नामी, सच्चे शुख को पावे||
सतगुरु ने सत धाम बतायो, सत की गाथा गावे ||
शब्द भेद सत केश सवरिया, सत का चेतन आवे||
सत धाम सत लोक बिराजो, सच्चे सुख को पावे ||
नाम भजन कर गुरु चरणन में, हरी हरी हरी को मनावे ||
हरी शरणागत सतगुरु संग में, जीव सदा हो जावे ||
जीव की मेंहर बिराजे उस पे, जो सतगुरु गुण गावे ||
सत के संगी सतगुरु नामी, सत भेद बतलावें ||
सत सवरिया पुरुष अनामी, सत देश बतलावें||
शीश झुकाओ सत के चरणन में, नाम भजन को गावे ||

सतगुरु जयगुरुदेव
आरती सतगुरु संत कृपाला, हे अनाम श्रुति दीन दयाला ||
हे परभू मेरे मंगल नामी, आरती सहस्त्र कोटि परणामी ||
सतगुरु जयगुरुदेव अनामी ||

बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

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Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 07 अप्रैल 2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :

ध्यान धर सतगुरु देखो, छवि प्रभु राम जैसी है ||
निरन्तर देश बढ़ते चल, गुरु का ध्यान वैसा है ||
ज्ञान गंगा गुरु चरणों, ध्यान में मगन होना है ||
ज्ञान साँचा सतगुरु का, ध्यान मन लगन होना है ||
मान को छोड़ दो सब जन, ज्ञान का पान होना है ||
लगन श्री चरणों में लाओ, देश अपना सदा पाओ ||
सतनामी सतगुरु जो, ज्ञान अपने मालिक का गाओ ||
ध्यान धर बात सतगुरु की, अधर में मन लगाओ सब ||
सिन्धु के पार देखोगे, खड़े सिन्धु के दाता हैं ||
नाम और ध्यान को लाओ, ज्ञान गंगा में बह जाओ ||
चरण सतगुरु का पा जाओ, धन्य तेरा सुफल जीवन ||

सतगुरु जयगुरुदेव
भजन करो साँचा भजो सतगुरु नाम ||
धूर के धाम के सच्चे मालिक, सतगुरु प्रीतम राम ||
सतगुरु जी ने भेद बताया,वोहींआवे काम ||
ध्यान भजन मन लगन जो होवे, गगन में घूमे जाय ||
गगन मंझारी अद्भुत बंगले, रौनक देखि जाय ||
गीत सुहागन प्रीत लगन की, मिलते हैं बड़े भाग ||
सतगुरु शरण चरण गहि देखो, बन जायेंगे भाग ||
सच्चे मालिक ये सतगुरु हैं, इन संग खेलो खाग||
रंग रोगन की नहीं जरुरत, सच्चे रंगत साज ||
सतगुरु प्यारे राज दुलारे, बजते हैं हर साज ||
दिव्य ध्वनि और रूप अलौकिक, बाजे बाजें आज ||
सतगुरु मेरे मेंहर कर दीन्हा, बन गये सारे काज ||

सतगुरु जयगुरुदेव
धरो धूर धाम का रस्ता, मार्ग सस्ता मिला सच्चा ||
बड़े ज्ञानी प्रबल सतगुरु,जिन्होने भेद दीन्हा है ||
गृला कुछ ऐसे पंक्षी हैं,जिन्होने गुरु को चीन्हा है ||
नाम और भेद के दाता, गुरु में होवेलिन्हा है ||
सतगुरु ध्यान धर मन में, सत की दया चीन्हा है ||
अलौकिक राग बजते हैं, दीप ध्यानियाँ भी सजती हैं ||
नाम सतगुरु का लेते चल, तेरा नर तन सुफल होगा ||
प्रीत परतीत सतगुरु की, तुझे साँचा मिलन होगा ||

सतगुरु जयगुरुदेव
सतगुरु मेंहर हुयी अति भारी, नाम दान दियो उच्च मंझारी||
पाँच ध्वनि और रूप बतलाये, अलग अलग बाजे सुनवाये||
सत देश का भेद बताये ||
ऐसे सच्चे सतगुरु दाता, हैं सबकेवो जगत बिधाता||
दीन भाव से करो बन्दना, जोड़ो सतगुरु संग नाता ||
सच्ची प्रीत प्रतीत निभाओ, गुरु चरणन बलिहारी जाओ ||
धन्य भाग्य ऐसा गुरु पाया,जिनने सारा जगत बनाया ||
सच्चे रघुवर सच्चे नामी, सतगुरु चरण कोटि परणामी||

सतगुरु जयगुरुदेव
आरती सतगुरु संत कृपाला, आनन्द छन्द जगत विकराला||
भाव सागर से पार लगावें,डुबत जीव को सदा बचावें||
सतगुरु संत मेरे नन्द लाला, आरती सतगुरु जय किरपाला||

बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
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सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 06 अप्रैल 2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :

भजन मन सतगुरु जी का ध्यान ||
नाम भजन साँचे सतगुरु का, अन्तर घट कल्याण ||
नाम नमनी है सतगुरु की, सच्चा अन्तर ज्ञान ||
भाव झरोखे करो बन्दना, होवै सच्चा ज्ञान ||
नाम भजनिया हो सतगुरु की, अन्तर घट कल्याण ||
मान लोभ को मार भगाओ, सतगुरु से करो ज्ञान ||
ज्ञान ध्यान सच्चे साई का, सतगुरु का परमाण ||
सच्चे सतगुरु पुरुष अनामी, नाम भेद दियो ज्ञान ||
हे सतगुरु मेरे दाता समरथ, मेरा हो कल्याण ||
नाव फसीमजधारे सतगुरु, खेयी लगाओ पार ||
हे मेरे मालिक पुरुष सवरिया, तुम सच्चे अधार ||
नाम सुधा रस हर क्षण बरसे, सच्चा होवै ज्ञान ||
रूप अलौकिक मेरे स्वामी का, ध्यान ज्ञान अभिमान ||
साँचे सतगुरु की चरण बन्दना, साँचा होवै ज्ञान ||
सतगुरु जयगुरुदेव

धरो धूरधाम का रस्ता, नाम तुमको मिला सस्ता ||
दया के निज दया सागर, दीन बन्धु उनके आगर ||
नाम दीन्हा भेद दीन्हा, चरण इनहीं के पर आगर ||
भरी जो शरपे बिष गागर ||
भजन मन ध्यान दे तू कर, ज्ञान आवे तुझे अन्तर ||
नाम निधि मालिक ने दीन्हा, दया के ज्ञान सागर हैं ||
भेद को चिन्ह तू साँचा, मेंहर सतगुरु की है बाँचा ||
धरे जो धाम का रास्ता, दुखो का बेद कट जावे ||
वेग सच्चा मधुर अन्तर, ज्ञान सबहीं सुघर गावे ||
ध्यान सतगुरु वाणी, बने क्यों तू यहाँ अनाड़ी ||
शीश सतगुरु चरण में रख, ज्ञान को तू सही से परख ||
नाम और भेद के मालिक, गुरु साँचे मेरे नामी ||
सत्य के सिन्धु दाता हैं, सतगुरु सत्य के नामी ||
सतगुरु जयगुरुदेव

धुन और ज्ञान भजन मन सतगुरु, सच्चा शब्द सुनावे ||
अधर सेन में शैल शिखर की, तुझे यात्रा करवावें ||
बिन्दु पुर तुझे सिन्धु मिलावें, सतगुरु ज्ञान बतावें ||
ज्ञान ध्यान मेरे सच्चे नामी, जो नर लगन लगावे ||
लाभ कमावे अन्तरघट में, सच्चा ज्ञान हो जावे ||
ज्ञान ध्यान सतगुरु चरणन में, मन चित्त जो प्रेमी मिलावे ||
नाम भजन हो सतगुरु जी का, मीठे फल को पावे ||
सच्चे सतगुरु मालिक प्यारे, नाम भजन जो गावे ||
ज्ञान ध्यान धर सतगुरु जी का, सच्ची नेंह लगावे||
पार देश मालिक पहुंचावै, दया मेंहर जो पावे ||
ज्ञान के दाता सतगुरु मालिक, जो नर लगन लगावे||
घट में घाट घाट पर सतगुरु, दरश परश को पावे ||
सतगुरु जयगुरुदेव
आरती सतगुरु संत अनामी, सच्चे नामी सच्चे स्वामी ||
सतगुरु दाता पुरुष अनामी, जिनके चरणों में कोटि परणामी ||
सतगुरु जयगुरुदेव अनामी ||
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

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Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 05 अप्रैल 2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :

विनय मन सतगुरु जी का ध्यान ||
आत्म बोध और आत्म ज्ञान का, सच्चा हो कल्याण ||
विनय मन सतगुरु जी का ध्यान ||
नाम अलौकिक सतगुरु दीन्हा, नाम भजन कर उसको चीन्हा,होवै सच्चा ज्ञान ||
विनय मन सतगुरु जी का ध्यान ||
सत्य सहारे सत्य अधारे, सतगुरु नाम अधार||
विनय मन सतगुरु जी का ध्यान ||
रूप अलौकिक अद्भुत दिखे, हो सच्ची पहिचान||
विनय मन सतगुरु जी का ध्यान ||
नाम सहारे नाम अधारे, पावन सतगुरु नाम ||
विनय मन सतगुरु जी का ध्यान ||
सच्चे साई अद्भुत दाता,सबके खोलें सतगुरु खाता, सच्चा करियो ध्यान ||
विनय मन सतगुरु जी का ध्यान ||
नाम अधारे पावन द्वारे, सतगुरु हो सतनाम ||
विनय मन सतगुरु जी का ध्यान ||
सतगुरु जयगुरुदेव

सत अनामीपुरुष सतनामी, सतगुरु मेंहर की खान ||
ध्यान ज्ञान हो गुरु चरणन में, ना आवे अभिमान ||
रूप अलौकिक अद्भुत गुरु का, प्रेम शिखा हो ज्ञान ||
मान लोभ को मार भगावो, बन जावो सज्ञान ||
नामा भजन सतगुरु का साँचा,ता में आवे ज्ञान ||
रूप अलौकिक है साई का, साँचे सर्वज्ञ सज्ञान ||
सतगुरु नामी पुरुष अनामी, सच्चा देते ज्ञान ||
ज्ञान ध्यान हो गुरु चरणन में, ना आवे अभिमान ||
मान लोभ को छोड़ कर भागो, सच्चा करियो ध्यान ||
ज्ञान अलौकिक मेरे मालिक का, सच्चा रहे अभिमान ||
सतगुरु चरणन शीश झुकाओ,आवे सच्चा ज्ञान ||
भेद भाव सब सतगुरु जाने, दिव्य अलौकिक काम ||
नाम धाम मेरे साई का, सच्चा है स्थान ||
साँचे सतगुरु प्रीतम प्यारे,ता में लगाओ ध्यान ||
ज्ञान ध्यान सब गुरु चरणन का, ना आवे अभिमान ||
सतगुरु सत्य अलौकिक दाता, सच्चा होवे ज्ञान ||
ज्ञान ध्यान सब गुरु चरणन में, ना हींआवेगा मान ||
सतगुरु संत अनामी प्यारे,चलियो सतगुरु धाम ||

सतगुरु जयगुरुदेव

ध्यान गुरु का हमेशा लगाते चलो, नाम सतगुरु का अपने गुनगुनाते चलो ||
मन ध्यान और भजना में लगाते चलो, ज्ञान सतगुरु का सच्चा पाते चलो ||
मान का पान सच्चा कराते चलो, शीश सतगुरु चरण में झुकाते चलो ||
बन्दना सतगुरु की सब गाते चलो, नाम सतगुरु का अपने गुनगुनाते चलो ||
ध्यान धर गुरु चरण को सवरते चलो, देश सच्चे का गुणगान गाते चलो ||
नाम सतगुरु का अपने गुनगुनाते चलो ||
सत के साईसच्चे गुरु दाता हैं, नाम सतगुरु भजन में लगाते चलो ||
दाता साई के गुण गान गाते चलो ||

अखण्ड रूप से बिराजमान सतगुरु जयगुरुदेव मन्दिर ग्राम बड़ेला के प्रांगण में बैठे हुये समस्त प्रेमी जन, सब पर गुरु महाराज की असीम दया-कृपा,अनुकम्पा बरसे | सब लोग लग करके सुमिरन ध्यान भजन कराते चलो | मालिक के नाम को यादगार बनाते चलो | हाजिर-नाजिर मालिक को मानते हुये, घट है, घट में घाट है, घाट पर गुरु की बैठक | जब हम तुम जिन्दा हैं तो गुरु महाराज अन्तर में बैठे हुये अन्तर में जीवित हैं | हर प्रकार से हाजिर-नाजिर हैं, सर्वज्ञ हैं, इसी धरा पर हैं | गुरु महाराज ने नए मानव पोल पर,नये चेहरे में, जो अपना स्थान ग्रहण किया, उस नये मानव पोल,नये चेहरे के साथ हम सब को प्यार करना है | अपने गुरु महाराज से बिनती प्रार्थना करते रहना है | अपने गुरु महाराज के साथ हीं रहना है | अपने गुरु महाराज की बन्दना करना है | गुरु हीं सर्वज्ञ है, गुरु हीं दाता है, गुरु हीं दयाल है, गुरु हींकिरपाल है, गुरु हीं सबकी मुरादें पूरी करेगा और गुरु के साथ हीं हम सबको रहना है |

सतगुरु जयगुरुदेव
आरती सतगुरु संत कृपाला, हे सतगुरु जयगुरुदेव दयाला||
नाम भजन मन तेरा आवे, सतगुरु तुममेंनेहलगावे||
आरती सतगुरु जी की गावे, श्री चरणन में शीश झुकावे||

बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

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Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 29 मार्च 2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :

ध्यान धर प्रेम से देखो, ज्ञान अन्तर की वाणी है ||
ज्ञान गंगा है घट बिचे, खोलते सतगुरु प्यारे है ||
चमक अद्भुत अलौकिक हो, दिव्य दर्शन सुहानी ||
ज्ञान और ध्यान सतगुरु का, संत जो सत नामी हो ||
सतगुरु की सांची, सत सतगुरु की वाणी हो ||
पुरुष सतगुरु अनामी जब, सत्य और प्रेम उनमें है ||
लगा धुन तू गुरु जी से, ज्ञान की गंगा सच्ची हो ||
ज्ञान और ध्यान सतगुरु का, सत्य का संग सच्चा हो ||
सतगुरु नाम सच्चा है, सत्य का संग सच्चा हो ||

सतगुरु जयगुरुदेव
गगन के बीच मण्डल है, सतगुरु धाम साँचा है ||
सत्य का नाम बजता है, सत का साँचा ढाचा है ||
धरो सतगुरु शरण में सब, यहीं तो बात साँचा है ||

सतगुरु जयगुरुदेव
मिलन होवे स्वामी मेंहर होवे तेरी ||
अन्तर घट में बाजती घड़ियाँ, चलती रहती हैं जो चौघड़ियाँ||
शब्द की छूटती हैं फुलझड़ियाँ, रंग रंगी हैं सारी लड़ियाँ ||
सतगुरु मेंहर से जुड़ती हैं कड़ियाँ||
नाम प्रेम सतगुरु मालिक से, सच्ची मेंहर की जुड़ जाये लड़ियाँ ||
सतगुरु संत हमारे प्यारे, रहो सब जन तो इन्हीं के आधारे||
नाम प्रेम सतगुरु संग करना, सच्चा भजन ध्यान मन भजना ||
सतगुरु चरणन में मन लाना, सत में सत की लौ को जगाना ||
सत मेंहर में है घुल जाना,मिलैसतपुरूष सतनाम का खजाना ||
सतगुरु संगी सच्चे स्वामी, नाम भजन के सच्चे नामी ||
सतगुरु संग है लगन लगाना, सतगुरु संग में समय बिताना ||
मिल जाये सच्चा नाम खजाना, सतगुरु चरणननेह लगाना ||
सतगुरु चरणन शीश झुकना ||

अखण्ड रूप से बिराजमान सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ग्राम बड़ेला के प्रांगण में बैठे हुये समस्त ‘प्रेमी जन, मालिक की असीम दया कृपा अनुकम्पा आप सबके ऊपर बरसती है और हमेशा सदा सर्वदा बरसती रहेगी | हर प्रकार से गुरु महाराज दया कृपा कर रहे हैं | दया के सागर हमारे मालिक, सतगुरु,सतपुरूष, अनामी पुरुष करतार, स्वामी जयगुरुदेव, सतगुरु जयगुरुदेव की दया कृपा बरस रही है | आप सब उसमें ओत्र-पोत्र हो रहे हैं | गुरु महाराज ने हमेशा से चेताया और बताया, समझाया कि हमारा तुम्हारा जन्म यहाँ सुमिरन भजन ध्यान के लिये हुआ है और सुमिरन भजन ध्यान करके अपने देश को चलना है, निज धाम चलना है |

धरो धूर धाम का रस्ता, नाम सतगुरु ने दिया सस्ता ||
मेंहर कर भेद दीन्हा सब, नहीं सतगुरु को चीन्हा सब ||
मंगन हो लौ लगाते चल, गुरु का ज्ञान गाते चल ||
नाम महिमा अलौकिक है, प्रभु ध्यान करते चल ||
सुहावन सत घड़ी सुन्दर, ज्ञान का पान करते चल ||
गुरु में मन लगाये जा, धाम अपना जो पायेगा ||
भाव सतगुरु में लाते चल, गीत सतगुरु के गाते चल ||
नाम गुरु का गुनगुनाते चल, गुरु में मन को लगाते चल ||
ध्यान धर देख सतगुरु को,सिन्धु पर सिन्धु प्यारा ||
देश सच्चा गुरु का है, मिलन होवै एक वारा है ||
प्रभु से लौ लगाते चल, ध्यान सतगुरु में लाते चल ||

सतगुरु जयगुरुदेव
आरती सतगुरु संत सवरिया,सुरति गावे हो के बवरिया||
निज चरणन में करे बन्दना, सतगुरु संत हमारे सवरिया||
आरती करती सूरत बवरिया||

बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

सतगुरु जयगुरुदेव :


मुक़्ती दिवस का पावन पर्व बड़े धूम-धाम से 22 मार्च से 24 मार्च तक ग्राम बड़ेला में मनाया गया। 23 मार्च को सर्व प्रथम प्रात: 08:00 बजे अखण्डेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर के प्रांगण में सतयुगी धर्म ध्वजा को प्रेमियों द्वारा फहराया गया। सभी प्रेमियों ने मुक़्ती दिवस गीत गाया गया। इस समय का दृश्य बड़ा ही मनोहारी था। जो प्रेमीं उपस्थित थे, वही उस समय के गवाह हैं। तद् उपरान्त सत्संग के माध्यम से साधक गुरु भाइयों ने गौरवमयी दर्दीले इतिहास के विषय में बताया कि किस प्रकार कांग्रेस शासन ने स्वामी जी के साथ-साथ प्रेमियों को भी नाना प्रकार के कष्ट दियें। साधक गुरु भाइयों ने प्रेमियों को सुमिरन, ध्यान और भजन पर बैठाया। परम संत सतगुरु जयगुरुदेव जी ने सभी आये हुए पुराने और नए प्रेमियों पर घनाघोर दया की बरसात की। रात के समय मंदिर की छटा देखते ही बनती थी।
सतगुरु जयगुरुदेव

सत्संग स्थल का पता :
अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975
नोट : सभी प्रेमी अपनी कुल व्यवस्था के साथ आएंगे |

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 05 मार्च 2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :

नाम धन सतगुरु जी ने दीन्ह||
नाम भजन कर सब जन प्रेमियों,लो अन्तर में चिन्ह ||
शब्द अलौकिक दृश्य दिखावें, वहीं बीच होवो लीन ||
नाम भजन की है महिमा न्यारि, ज्ञान रसा के अधीन ||
नाम भेद सतगुरु बतलायो, सत देश की चिन्ह ||
मधुर मधुर जब बाजे बंसुरिया, उसहीं में होवो लीन ||
सतगुरु दया बीराजै तुम पर,मीठी बाजे बीन ||
शीश धरो सतगुरु चरणन में, दया मेंहर से तरलीन||

सतगुरु जयगुरुदेव
प्रेमियों, शिव रात्रि के महा पावन पर्व के अवसर पर, ये तीन दिवसीय कार्यक्रम अखण्ड रूप से बिराजमान सतगुरु जयगुरुदेवमन्दिर ग्राम बड़ेला में रखा गया है | गुरु के आदेशानुसार शिव भोले नाथ का सम्मान करना है और लग करके सुमिरन भजन ध्यान करना है |

आदि अनाम नाम शिव जाना, हरी अनन्त ये रूप बखाना ||

आदि अनाम निर्गुण निराकार शिव अनाम पुरुष को कहते हैं | वो अनाम देश में बैठते हैं | उन्हीं का परारूप हर मण्डलों में है और हर मण्डलों से होते हुये यहाँ धरा पर भी बिराजमान हैं | शिव भोलेनाथ बड़े हीं दयालु किरपालु हैं | बड़ी हीं दया कृपा करते हैं | गुरु महाराज को वरदान दिया कि जब तक धर्म की स्थापना नहीं हो जायेगी तब तक हम काशी लौट के नहीं जायेंगे, हम आपके साथ रहेंगे | गुरु महाराज यहाँ अखण्ड रूप से बिराजमान हैं और गुरु महाराज के साथ शिव भोलेनाथ शंकर जी भी बिराजमान हैं | इसमे कोई शंका नहीं | जैसे आप चाहोगे, अन्तर में प्रार्थना करोगे तो गुरु महाराज के साथ शिव भोलेनाथ का भी दर्शन आप सब को होगा |

प्रेम भाव शिव करी बन्दना, दया मेंहर हो नामी ||
प्रेम भाव बस तुम्हें रिझाऊँ, सतगुरु शिव जी स्वामी ||
आदि अनन्त का भेद बतावें,मेंरे सतगुरु नामी ||
गुरु महाराज ने सब कुछ बता चेता रखा है, आदि से अनन्त तक सारा भेद आप सब को बता दिया है | हर प्रकार से आप सबको सत्संग सुनाया, समझाया बताया कि लग करके सुमिरन भजन ध्यान करो, आगे का समय खराब है | तो समय तो दिन प्रतिदिन खराब हीं होता चला जा रहा है | जहाँ पर देखो वहाँ पर महामारी, कहीं पर ओलावृष्टि, कहीं पर दैविक आपदायें आ रही हैं | जब सुमिरन भजन ध्यान नहीं होगा, प्रभु कि आराधना नही होगी, तो प्रभु जब नाराज हो जायेगा तो कुछ न कुछ दण्ड भोगना पड़ेगा | तो प्रेमियों, चाहे जहाँ सारे देश में कहीं के भी प्रेमी हों, कहीं पर भी रहें, पर उस प्रभु, उस मालिक कि बन्दना किसी भी तरह से करें, करते रहें |

सतगुरु सत अनाम मेंरे स्वामी, उनकी दया मेंहर उपजानी||

जो अनाम पुरुष करतार हैं, उन्हीं का सारा विस्तार है, उन्हीं का सारा पसारा है, उनहीं की दया मेंहर उपजी है | जो हर-हर घट में, हर प्रकार से जो है अनुभव-अनुभूति हो रही है, हर प्रकार से दया मेंहर गुरु महाराज की बरस रही है | तभी तो अनुभव अनुभूति हो रही, दिखायी-सुनायी पड़ रहा है | एक यही ऐसा स्थल है अखण्ड रूप से बिराजमान सतगुरु जयगुरुदेवमन्दिर ग्राम बड़ेला, जहाँ से बताया जाता है कि पूरा का पूरा अनुभव होगा | आपको दिखायी-सुनाई पड़ेगा | दिखायी-सुनायी पड़े तो मानो और ना अगर दिखायी-सुनाई पड़े तो मत मानो | जब पूरा अनुभव की बात की जाती है, पूरा आत्मबोध-आत्मज्ञान की बात बताई जाती है, सुमिरन ध्यान भजन की बात बताई जाती है | तो सुमिरन ध्यान भजन अगर नहीं करना चाहते हो, मेला देखना चाहते हो तो अलग की बात है | अगर तुम मुक्ति मोक्ष और सुमिरन ध्यान भजन करना चाहते हो, मुक्ति मोक्ष प्राप्त करना चाहते हो तो एक बार यहाँ आना हीं पड़ेगा | यहाँ आ करके उस गुरु को जानना पड़ेगा, समझना पड़ेगा कि हमें किस तरह से सुमिरन भजन ध्यान करना है | अपने अखण्ड रूप से बिराजमान सतगुरु के आगे नतमस्तक होना पड़ेगा, नतमस्तक होने के बाद जब उनकी दया मेंहर बरसेगी तो आपको दिखाई और सुनाई दोनों पड़ेगा | पूरा का पूरा अनुभव होगा, उसमें कोई शंका कि बात नहीं है | शंका तो वहाँ पर होती है, जहाँ कुछ ना हो | जहाँ सब कुछ हो, वहाँ किस बात की शंका | जब आप तंत्र मंत्र से तो तुमको कुछ दिखायी-सुनायी पड़ने वाला नहीं न तंत्र मंत्र से कुछ दिखता-सुनता है | न आज तक किसी ने दिखाया न सुनाया | तंत्र मंत्र तो अलग विद्या है, ये तो अध्यात्मवाद है | सच्ची नाम की कमाई, प्रभु का दर्शन, राम कर दर्शन, शिव का दर्शन, विष्णु का दर्शन,ब्रम्हा का दर्शन अन्तर में होता है | अन्तर में घट है, घट में घाट है, घाट में गुरु की बैठक, अगर गुरु के दर्शन नहीं हुये तो किसी के दर्शन आपको नहीं होंगे | सर्वप्रथम आपको गुरु से हीं प्रेम करना पड़ेगा | अगर गुरु से प्रेम करोगे, गुरु की दया मेंहर होगी तभी आप सबको दिखायी-सुनाई पड़ेगा |

बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

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Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 02 मार्च 2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :

सतगुरु संत हमारे नामी, सच्चे हैं सतनामी ||
सत की दया मेंहर बरसत है, सत के सुन्दर नामी ||
सत्य भाव मन करिहै बन्दना, सत के सच्चे नामी ||
रूप अलौकिक मेंरे मालिक का, सच्चे सुगम हैं नामी ||
मधुर मधुर बरसे जहाँ बदरी, दया मेंहर लासानी ||
सतगुरु संग में होली खेलो, रंग रोगन रंग जानी ||
नाम सुधा रस अन्तर बरसे, छक छक पियो सब पानी ||
सतगुरु संत हमारे प्रीतम, बात बड़ी लासानी ||
भेद गगन का सार बतायो, तबहु करहु मनमानी ||
अमन चित्त रखो तुम साई में, तबहीं बात बन जानी ||

सतगुरु जयगुरुदेव
धरम ध्वज सतगुरु संग असिन ||
नाम भेद को खूब समझायो, सच्चे नाम को दीन्ह ||
सच्चे सतगुरु सत अनामी, सत की बाजे बिन ||
सत सत नमन गुरु चरणन में, सत में सत हो लीन ||
दया धरम सबको अपनाओ, तब तो बाजे बीन ||
हरे रघुराई सच्चे स्वामी, यहीं तो सतगुरु तीन ||
दीन गरीबी में रह करके, सब जन सुनियों बीन ||
गगन से भेद आवे आवजिया, वो हीं मे होवो लीन ||
नाम सुधा रस अन्तर बरसे, सतगुरु ली जो चिन्ह ||
सत अनामी पुरन नामी, सतगुरु संग बनो दीन ||
सतगुरु संत हमारे साँचे, वो हीं में होवो लीन ||
सतगुरु जयगुरुदेव

अखण्ड रूप से बिराजमान सतगुरु जयगुरुदेव मन्दिर ग्राम बड़ेला के प्रांगण मे बैठे हुये समस्त नर-नारी जन, मालिक की असीम दया अनुकम्पा बराबर हम सब पर बरस रही है | हमको जो भेद बताया है मालिक ने वो सच्चा है | कुशल पूर्वक लग करके, मालिक के बताये हुये नाम का जाप करना हमारा तुम्हारा कर्तब्य है | मालिक के बताये हुये रास्ते पर चलना, मालिक का अनुसरण करना, मालिक के दिये हुये वचनों को याद करना और नित्य प्रति मालिक की याद गारी बनाये रखना, मालिक मे मन को लगाना और मालिक से हर दम प्रार्थना करते रहना कि हे मालिक, हमारा सुमिरन भजन ध्यान बन जाय, हमारी नैया को उबार लो, हमको बचा लो, हमें सम्हाल लो, हमे अपने सत देश का संगी बना लो, हमे अपने चरणों मे बैठा लो, हम पर अद्भुत दया कृपा कर दो | हे प्रभु, हम दीन गरीब पर आपकी दया मेंहर हो जाय और हमारा भाग्य जग जाय, हमारा नर तन सुफल हो जाय | आपकी कि भग्ति मे और आपके साथ रहते हुये, हर प्रकार से आपकी दया मेंहर हो और सदा सर्वदा के लिए आपके हीं हो जाय |

सतगुरु जयगुरुदेव

सत सत नमन सत के नामी, सच्चे साई सतगुरु सतनामी ||
सतगुरु नाम अलौकिक प्यारा, चहुंदिश मे होवै उजियारा ||
सतगुरु जी का शकल पसारा ||
शब्द भेद को खूब समझायो, भाव झरोखे मिल कर गायो ||
सतगुरु संत हमारे नामी, दया मेंहर बरसी है अनामी ||
सतगुरु जयगुरुदेव मेंरे नामी, समझ बुझ के करो परणामी||
सत सत नमन सतगुरु नामी, कोटी बन्दना मेंरे स्वामी ||
गुरु का सच्चा भेद बतायो, पार देश मारग दिखलायो ||
हे सत भेद संत हे नामी, तेरे चरणों में कोटी नमानी ||
गुरु के धाम में बसो निरंतर, अन्तर बाहर ना कोई अन्तर ||
मन चित्त लायी भजे जो निरन्तर||
सतगुरु चरणन नेह लगावे, मुक्ति मोक्ष परम पद पावे ||
गुरु कि जो बन्दना बजावे ||
सतगुरु संत निरन्तर अन्तर, खोजो घाट पे नहीं कोई अन्तर ||
सच्चे मन से जपो तुम मन्तर ||
सतगुरु संग में रोज सुहावन, सत संग होवे अति मन भावन ||
सत सनेही सतगुरु नामी। तुमको कोटी कोटी परणामी ||
सतगुरु जयगुरुदेव अनामी ||

सतगुरु जयगुरुदेव

धरो धूर धाम का रास्ता, मार्ग सच्चा गुरु सस्ता ||
दया कर भेद दे दीन्हा, भजन कर क्यों नहीं चीन्हा ||
ध्यान धार सतगुरु में तू, बीन बंसी सुनाएगी ||
कान एक क्षण में तुमको तो, सत के देश लायेगी ||
करो सुमिरन सतगुरु का, भाग्य तेरे जग जायेंगे ||
भजन मन ध्यान दे तू जरा, काम सारे बन जायेंगे ||
नाम सच्चा नामी सच्चा, मंगन मन नाम को गाओ ||
लगी सीढ़ी गगन में हैं, नाम संग ऊपर चली जाओ ||
सतगुरु को करो बन्दन, कटेंगे कोटी जो बन्धन ||
सतगुरु जयगुरुदेव
आरती सतगुरु संत कृपाला, सतगुरु मेंरे दीन दयाला ||
निज चरणन में करी बन्दना, हे मालिक मेंरे किरपाला ||
मेंहर कियो और नाम बतायो, दया मेंहर सब है ताला ||
तेरे चरणन में शीश झुकाऊँ, मुक्ति मोक्ष परम पद पाऊँ ||
हे सतगुरु मेंरे दीन दयाला, कोटी बन्दना है किरपाला ||
कोटी कोटी करूँ बन्दना, अरब खराब परणामी ||
चरण कमाल बिसरो, सतगुरु जयगुरुदेव अनाम ||
बार बार कर जोर के, सविनय करूँ पुकार ||
साध संग मोहीं देव नित, परम गुरु दातार ||
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

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Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 01 मार्च 2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
संत सहारे रहियो सब जन, संत हैं कृपा निधान ||
दया मेंहर बरसे उन चरणन, सच्चा होवे ज्ञान ||
सतगुरु नाम सुधा रस बरसे, अमृत को करो पान ||
नाम भेद के सच्चे दाता, सतगुरु दीन दयाल ||
सत सनेही सतगुरु साँचे, सत देश में मुकाम ||
गुरु की और बढ़ो सब प्रेमी, मेंहर होये कल्याण ||
सतगुरु चरणनकरीहे बन्दना, सच्चा होवे ज्ञान ||
नाम दान दिया सतगुरु जी ने, नाम हींकरत निदान ||
नाम प्रभु ने जा देश किन्हा, जो भजन कीन्हस्वयी ने चीन्हा ||
सच्ची दया निदान ||
शीश धरो सतगुरु चरणन में, पूरा हो कल्याण ||

सतगुरु जयगुरुदेव
मन चित्त लागे गुरु चरणन में, ऐसी करो बन्दना ||
रीझ जाये जब सतगुरु मालिक, सच्ची बने अरधना||
दया मेंहर बरसै नामी की, सुख बरसै घर अंगना||
होये मेंहर और मिलैबरक्कत, चढ़े नाम रंग रोगना||
भाव झरोखे सतगुरु प्रीतम, यहीं सबके सजना ||
भेद बतयोसतदेश सत, नाम का पालन करना ||
नाम सुधा रस अन्तर बरसे, यहीं दया है अंगना||
घट में घाट घाट पर सतगुरु, दया मेंहर को पाना ||
शीश झुकाना सतगुरु चरणन में, नाम भजन मन गाना ||

सतगुरु जयगुरुदेव
देश अनुपम निराला है, गुरु ने खोला ताला है ||
घाट के पार चल देखो,वो बैठा मुरली वाला है ||
शब्द और भेद को समझो, सुनो झंकार प्रीतम की ||
भेद में भेद को समझो, नाम की रीति प्रीतम की ||
सुगम सुन्दर आदित मण्डल, करो किरतार्थ अन्तर मन ||
चढ़ो सब गगन के बिचे, होये झंकार अन्तर मन ||
शब्द की झोंक को समझो, शब्द झंकार अन्तर मन ||
शब्द की चोट जब लागे, सुधर जायेगा अन्तर मन ||
गुरु चरणों में हो तेरा, ध्यान तन मन ये अन्तर मन ||
ज्ञान होगा अलौकिक सब, ध्यान होगा जो अन्तर मन ||

सतगुरु जयगुरुदेव
पावन मंगल नाम सुहावन, घटा अति मंगल मन भवन ||
छबिन्यारि है मंगल पावन, सूरत जाग गयी अति मन भावन||
सतदेश की करी तैयारी, सूरत सजी हुयी वारी न्यारि||
सतगुरु चरणन बन्दना किन्हा, घट पट खोल गुरु ने दीन्हा||
घाट पार खूब दिव्य दिखावे ||

सतगुरु जयगुरुदेव
अखण्डरूप से बिराजमान सतगुरु जयगुरुदेव मन्दिर ग्राम बड़ेला के प्रांगण में बैठे हुये समस्त प्रेमी जन, लग करके सुमिरन भजन ध्यान करो | वक्त नाजुक है, कब क्या हो जाय कुछ पता नहीं | इसलिए मालिक में मन लगाते रहो, मालिक के बताये हुये निशाने पर चलते रहो | सुमिरन भजन ध्यान करते रहो, किसी की निन्दा आलोचना मत करो और गुरु में मन लगाओ, लग करके सुमिरन भजन ध्यान करो |

सतगुरु जयगुरुदेव
आरती सतगुरु सत्य अनामी ||
सत सत संत हमारे नामी, सत चरणन में करू परणामी||
सत के चरणन शीश झुकाऊँ, मुक्ति मोक्ष परम पद पाऊँ ||
सतगुरु जयगुरुदेव अनामी,मेंरे मालिक मेंरे नामी ||
तुमको कोटी कोटी परणामी ||
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

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Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 29 फ़रवरी 2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
भजन मन सतगुरु जी का ध्यान ||
आत्मबोध अन्तर का होवे,सन्धि सतगुरु सुजान ||
नाम दियो और भेद लखायो, अन्तर का सब ज्ञान ||
चरण बन्दना सतगुरु जी की, सच्चे मन कल्याण ||
भाव झरोखे दीप जलाओ, बन कर चतुर सुजान ||
अद्भुत रूप अलौकिक देखो, जैसे सुन्दर काम ||
सतगुरु काम होत अन्तर में, अन्तर का सब ज्ञान ||
ज्ञान ध्यान हो गुरु चरणों में, सच्चा हो कल्याण ||

सतगुरु जयगुरुदेव
मनवा लागे नाम भजन में, ऐसी करो बन्दना ||
चरणन शीश झुकाओ सतगुरु के, सच्ची यहीं अरधना ||
सतगुरु भजन होये जब साँचा, अन्तर मन सतगुरु का बाँचा ||
सतगुरु रहे सनेही प्रीतम, जैसे चलत देश में जाता ||
कील सहारे सब बच जावें, बाकी सब को काल चबाता ||
सतगुरु संत हमारे प्रीतम, ये हींखोलैसबका खाता ||
सतगुरु नाम भजन मन लागे, भाग्य जगै जन जाता ||
मंगल मंगल मोल सुहावन, रूप बिधित जग जाना ||
सतगुरु नाम परम है सुहावन, सतगुरु सत के दाता ||
सतगुरु जयगुरुदेव

ध्यान मन मंगन हो करके, गुरु का ज्ञान गाना है ||
लगे मन सतगुरु में जब,मिलै अन्तर ठिकाना है ||
देश सच्चा गुरु जी का, गुरु में मन लगाना है ||
करम और धर्म सब सच्चा, शब्द भेदी गुरु सच्चा ||
सत के दीन दाता से, लगन सच्ची लगाना है ||
झुकाओ शीश चरणों में,मिलै सच्ची दया खातिर ||

सतगुरु जयगुरुदेव
रिमझिम रिमझिम बरसे बदरिया, सतगुरु दया मेंहरिया ||
दया मेंहर की चादर ओढ़े, चले प्यारी सूरत गुजरिया ||
शब्द सनेही सतगुरु प्रीतम, सच्चे हैं ये संवरिया ||
सतगुरु सतगुरु नाम भजन में, बन कर डोलो रे बवरिया ||
सतगुरु चरणन करो जो बन्दना, बन जाये सारे संवरिया ||
सतगुरु नाम पुकारो साँचा, अन्तर बोलो सच्चा बाँचा ||
सतगुरु भजन को गाना ||
नाम दियो सतगुरु स्वामी ने, सतगुरु में मन को लगाना ||
शीश झुकाना सतगुरु चरणन में, परम फला को गाना ||

सतगुरु जयगुरुदेव
अखण्ड रूप से बिराजमान सतगुरु जयगुरुदेवमन्दिर ग्राम बड़ेला के प्रांगण के बैठे हुये समस्त प्रेमी जन, गुरु महाराज की असीम दया-कृपा-अनुकम्पा आप सब लोगों के ऊपर बरस रही है, लग करके आप सब सुमिरन ध्यान भजन करो, मालिक की यादगारी करते रहो और मालिक में मन लगाते रहो | दिव्य-अलौकिक जो चीजें गुरु महाराज ने बतायी हैं, उन चीजों को प्राप्त करते रहो | गुरु महाराज को हाजिर-नजीर मानते हुये, सुमिरन ध्यान भजन करते हुयेअपने मार्ग पर अग्रसर रहो | आगे बढ़ते हुये कार्य करते चलो, गुरु में मन लगाते चलो और गुरु भाइयों से प्रेम करते रहो | किसी की निन्दा-आलोचना न करो, ना हीं किसी को कुछ कटु बोलो | जो भी बोलो मीठा बोलो और मीठी भाषा का प्रयोग करो |मीठी भाषा का प्रयोग करने का हीं आदेश गुरु महाराज का है | किसी की निन्दा आलोचना करने का आदेश कभी भी गुरु महाराज ने नहीं दिया | तो प्रेमियों आगे के समय नाजुक हैं | गुरु महाराज के आने की भी घड़ी धीरे-धीरे निकट आ रही है |वो प्रकट होंगे, प्रत्यक्ष होंगे,सबको दर्शन देंगे अन्तर बाहर हर प्रकार से और सबसे गुरु महाराज का मिलन होगा | अभी तो अन्तर में मिलन हो रहा है | आगे ६, ७, ८ शिवरात्रि के महा पावन पर्व पर कार्यक्रम है, यहाँ अखण्ड रूप से बिराजमान सतगुरु जयगुरुदेवमन्दिर ग्राम बड़ेला में आप सब सादर सत्संगी भाई आमंत्रित हैं | यहाँ पर आप सबको अनुभव-अनुभूति होगी, दिखाई भी पड़ेगा, सुनाई भी पड़ेगा | अनुभव हो तो मानो, अनुभव न हो तो मत मानो | यहाँ तो सच्ची चीज है, सच्ची चीज लेने के लिये, एक बार सब लोग आओ और गुरु महाराज का अन्तर का दर्शन करो | अपने घट का ताला खोलो, अपने-अपने वतन वापस जाओ| बैठ करके सुमिरन भजन ध्यान करो और सच्चा फल पाओ |

बोलो सतगुरु जयगुरुदेव
आरती सतगुरु सत अनामी, हे सतगुरु मालिक मेंरे नामी ||
चरण बन्दना कोटीपरणामी,मेंरे मालिक मेंरे नामी ||
श्री चरणन शीश झुकाऊँ, मुक्ति मोक्ष परम पद पाऊँ ||
सतगुरु जयगुरुदेव अनामी,कोटीकोटी तुमको परणामी ||

बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 26 फ़रवरी 2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
मंगन मन नाम भजन गुरु ज्ञान ||
गुरु का ज्ञान अमोलक पूँजी, धरो अन्तर में ध्यान ||
नाम भेद के सतगुरु मालिक, सच्चे हैं सज्ञान ||
दिव्य अलौकिक भेद बतावें, मिलै अन्तर का ज्ञान ||
नाम सुधा रस अन्तर बरसे, सतगुरु मेंहर निदान ||
सत्य भाव से करी बन्दना, सच्चा सतगुरु मान ||
दीन दयाल सतगुरु स्वामी, सतगुरु हैं किरपाल||
नाम दियो और भेद लखायो, सतगुरु सन्त निदान ||
सन्त हमारे सबके नामी, सच्चे हैं सज्ञान ||
परम दयालु और किरपालु, सतगुरु दीन दयाल ||
सत के चरणन शीश झुकाओ, हैं सच्चे किरपाल ||

सतगुरु जयगुरुदेव
भेद दियो नामी पुरुष अनामी ||
ज्ञान मेंहर सतगुरु के संग में, सतगुरु दया निधान ||
नाम भजन का रास्ता दीन्हा, हो जाओ सज्ञान ||
सतगुरु सतगुरु नाम पुकारो,आवे तुमको ज्ञान ||
दया मेंहर बरसै नामी की, सत्य प्रभु सतनाम ||
गुरु का भेद गुरु के संग समझो, गुरु कर सर्वज्ञ सुजान ||
दया मेंहर बरसी है सतगुरु की, सतगुरु कृपा निधान ||
शब्द के साई सतगुरु गोसाई, सच्चे दीनानाथ ||
सतगुरु सतगुरुसन्त हमारे, परम दयालु नाथ ||

सतगुरु जयगुरुदेव
अखण्ड रूप से बिराजमान सतगुरु जयगुरुदेव मन्दिर ग्राम बड़ेला के प्रांगण में बैठे हुये समस्त प्रेमी जन, मालिक की असीम दया कृपा अनुकम्पा बराबर बरस रही है | हर तरफ घनाघोर अनुभव मालिक करा रहे हैं, सच्चाई के रास्ते पर चला रहे हैं, सच्चा भेद बता रहे हैं | अपने सच्चे बंदों से, अपने बच्चों को सच्चा संदेश भिजवा रहे हैं कि सब लोग सुमिरन ध्यान भजन करो, अनुभूति-अनुभव और अनुभव ज्ञान प्राप्त करो | अगर अनुभव नहीं हुआ, दिखाई नहीं सुनाई पड़ा तो किस बात का नाम दान ? प्रेमियों जब नाम दान मिला है तो अनुभव होना जरूरी है, दिखाई सुनाई पड़ना जरूरी है | मेला देखना आना-जाना, ये सब निरर्थक है | अगर तुम्हें सार्थक बनाना है तो सुमिरन ध्यान भजन, अनुभव-अनुभूति, अन्तर का ज्ञान होना परम आवश्यक है | अन्दर में परमानन्द है, अन्तर में आनन्द हीं आनन्द है | अन्तर में सतगुरु बैठा है, बिराजमान हैं |

सत का सिंधु अपार है भाई ||
मन चित्त लावो तुम गुरु चरणन, सच्चा सिंधु सुहायी ||
सतगुरु नाम भजन को कर लो, कटी जावे मैलायी||
नाम भेद के सच्चे दाता, दया मेंहर बतलायी ||
दीन दयाल सतगुरु साई, इनकी मेंहर की छाहीं||
इन चरणों में करो बन्दना, सब जन शीश झुकायी||

सतगुरु जयगुरुदेव
आरती सतगुरु सन्त अनामी ||
सत देश के सच्चे स्वामी, सतगुरु तुम्हें कोटी परानामी ||
सतगुरु चरणन शीश झुकाऊँ, मुक्ति मोक्ष परम पद पाऊँ ||

बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 16 फ़रवरी 2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
ध्यान धार गुरु चरण प्यारे, सहारे इसी के जाना है ||
नाम और भेद का सतगुरु,दियो सच्चा खजाना है ||
मनन मन ध्यान कर सतगुरु, गुरु में मना लगाना है ||
नाम मगिया सतगुरु की, नाम से हीं सजाना है ||
भाव भक्ति गुरु किये संत, दृढ़ इच्छा शक्ति जगाना है ||
अलौकिक कार्य जो तुमको, दिया प्यारे गुरु जी ने ||
भेद सब जान कर अन्तर, चरण में ध्यान लाना है ||
गुरु का ज्ञान सच्चा हो,मनन मन में खजाना है ||
धरो तुम चरण सतगुरु के,नेंहइनहीं में लगाना है ||

सतगुरु जयगुरुदेव
भेद देत सतगुरु सतनामी, अन्तर घट की अमिटकहानी||
एक एक भेद खोल बतलावें, शब्द का मारग भी समझावें||
शब्द की सुन्दर लड़ियाँ, एक साथ सति रोयी कड़ियाँ ||
मन चित्त भाव भजन में होवे, तब सतगुरु की मेंहर को सेवे||
नाम भजन मन चित्त को लाना, सच्ची मेंहर गुरु की पाना ||
नाम दिखायो भेद बतायो, सतगुरु हैं सतनाम खजाना ||
सगुण बंसियाँबाजै कर में, ऐसे हैं सतनाम महाना||
सत की बृथा अपार सुहायी, सतगुरु सत देश बतलाई ||

सतगुरु जयगुरुदेव
मंगन मन भजना सतगुरु नाम||
सतगुरु नाम भजन से बंदौ, कटे मैलाइ की चाम||
सत्संग के सत वचन सुनोगे, सच्चे सतगुरु राम ||
सतगुरुनेंह लगाओ बंदौ, बने तुम्हारे काम ||
सत का हरी हर भजन सुहाये, देखो सतगुरु राम ||
नन्दगोपाला दीन दयाला, शिव शम्भू का धाम ||
देश शारदा करें बन्दना, गुरु को कोटी प्रणाम ||
नाम नमामि सतगुरु स्वामी,मेंरेपरभू हैं राम ||
दया मेंहरिया गुरु की बरसे, सतगुरु हैं सतनाम ||

सत बलिहारी सतगुरु जाऊँ ||
सतगुरु चरणनकरिहै बन्दना, सतगुरु तोहें मनाऊँ ||
नाम नमनी है सतगुरु की, सतगुरु संग हीं जाऊँ ||
सतगुरु सत्संग निकोलागे, नाम भजन को गाऊँ ||
सतगुरु संग में प्रीत प्रतीति, ये हीं रीत निभाऊँ ||
मधुवान उपवन सब है महके, नाम भजन मन गाऊँ ||
सत नारायण सतगुरु स्वामी, तुमको शीश झुकाऊँ ||

सतगुरु जयगुरुदेव
अखण्ड रूप से बिराजमान सतगुरु जयगुरुदेवमन्दिर ग्राम बड़ेला के प्रांगण में बैठे हुये समस्त प्रेमी जन, मालिक की असीम दया-अनुकम्पा बराबर सब पर बरस रही है | दया दुआ की धार मालिक की सबको मिल रही है | जैसा जिसका कर्म है, वैसा फल तो भोगना हीं है | संसार में चाहे हम हों चाहे आप, कोई भी हो मालिक की बनायी हुयीखिलकत में हमको तुमको चलना है, रहना है| मालिक के बताये हुये रास्ते पर चलना है और मालिक का गुण गान करते रहना है | मालिक ने हम सबको तुमको चेताया बताया समझाया, नाम दिया, भेद बताया भजन करने का रास्ता, नीचे से ऊपर तक सत्संग सुनाया | सत्संग में गुरु महाराज ने त्रिलोक का वर्णन किया,ब्रम्हलोक का वर्णन किया,पार ब्रह्म का वर्णन किया, महाकाल पुरुष का वर्णन किया, त्रिलोक धाम, अलख-अगम सब कुछ बताया और समझाया |दात दिया सतगुरु ने और कहा निशाना मुझसे रखना किसी दूसरे से नहीं | पार करने वाला मैं हूँ, कोई दूसरा तुमको पार नहीं करेगा | तो प्रेमियों मन चित्त गुरु में लगाना और गुरु महाराज के हीं साथ रहना | मालिक के वचनों को बराबर याद करते रहना, उलट-पलट करके उनकी वाणियों को पढ़ते रहना | पत्रिकाओं में, अमर सन्देश पत्रिका में बहुत कुछ गुरु महाराज की वाणियाँ हैं, उन वाणियों को पढ़ोगे तो गुरु की सारी भविष्य वाणियाँ और गुरु महाराज के बताये हुये सारे वचन आपको सुनने को, याद करने को,जानने को मिल जायेंगे | सच्ची कहानी, सच्ची घटना आप सबको सतगुरु के, जो साधक हैं शिष्य हैं, उनकी जबानी आप को सुनने को मिलेगा | आप जब गुरु महाराज में मन लगाओगे, चीख़ोगे-पुकारोगे, अन्तर में चिल्लाओगे, गुरु महाराज दयाल हैं, दया कृपा करेंगे और सब पर दया दुआ देते हुयेसबकी झोली भर देंगे |

सतगुरु जयगुरुदेव
सतगुरु संग रहना करो विश्वास ||
सतगुरु सच्चे सत के मालिक, शब्द भेद गुरु राम ||
राम राम सतगुरु को पुकारो, बनी जावेगा काम ||
काल महाकाल होवें सहाईं, सतगुरु मेंहर निदान ||
सत की रीत प्रीत हो सच्ची, मन में सुमिरन ध्यान ||
नाम भजन में मन चित्त राहियों,नाहीआवे मान ||
नाम मान को छोड़ दो भाई, बनी जावेगा काम ||

सतगुरु जयगुरुदेव
ध्यान धर ज्ञान के पीछे, गुरु में मन लगाते चल ||
नाम और वचन को तू समझ,उसि को अन्तर गाते चल ||
भेद एक एक बताया है, खोल सब कुछ समझाया है ||
वचन को मान सतगुरु के,नेंह उनसे लगाते चल ||

सतगुरु जयगुरुदेव
नाम का भजन करना सतगुरु में मन लगाना, सतगुरु की सच्ची वाणियों को याद करना | जैसे आपको कुछ नहीं आ जाता तो यहीं याद करो कि गुरु महाराज का सत्संग अयोध्या में था, हम अयोध्या में गये थे | गुरु महाराज का दर्शन किया था | गुरु महराज ने हमको बहुत कुछ बताया, दर्शन दिया | इलाहाबाद गये त्रिवेणी संगम पर स्नान किया, गुरु महाराज के दर्शन किये, गुरु महराज का सत्संग सुना | गुरु महाराज ने सत्संग उच्च कोटी का सुनाया, राजापुर का और गुरु महाराज ने बहुत सी चीजों को बताया समझाया | मथुरा आश्रम जाते आते रहे, गुरु महाराज का सत्संग सुनते रहे उच्च कोटी का | गुरु महाराज ने नीचे से ऊपर तक सत्संग सुनाया और समझाया यहीं |

प्रथम सतगुरु के दर्शन हों, प्रीत परतीत सांची हो ||

प्रथम गुरु महाराज के दर्शन करो, और उन्हीं से प्रेम प्रतीत करो, उन्हीं में मन लगाओ, उन्हीं को सब कुछ मान कर पूजना-अर्चना, भजन-ध्यान और उन्हीं के चरणों में मन लगाने का काम करो | सच्चाई और कड़ाई के साथ तत्पश्चात प्रभु राम के दर्शन होंगे | प्रभु राम के दर्शन होंगे, स्वर्ग बैकुंठ और ब्रह्मपूरी,शिवपूरी,आद्यामहाशक्ति, प्रभु राम के देश को देखोगे | अन्तर में चलोगे, तुम्हें दिखाई पड़ेगा, सुनाई पड़ेगा, प्रभु राम के दर्शन होंगे, ब्रम्हा-विष्णु-महेश के दर्शन होंगे, सबके दर्शन आप को होंगे | जब गुरु कि बात मान जाओगे, गुरु के निशाने पर चलने लगोगे और गुरु कि वाणी याद करने लगोगे तब तुम्हें ऐसा सब कुछ होने लगेगा, गुरु कि मेंहर आने लगेगी | गुरु कि दया मेंहर से सारा काम बनने लगेगा, आपको सब कुछ अद्भुत-अलौकिक दिखाई पड़ने लगेगा | जब किसी से आप कुछ कहोगे तो वो कहेगा कि ये क्या बक रहा है, क्या बोल रहा है | हमने तो कभी नहीं देखा पर तुम अपने गुरु कि कृपा से सब कुछ देखोगे और समझोगे | आगे ऐसा सुगम वक्त आयेगा कि गुरु महाराज ने कुछ बताया है, उस हिसाब से सारा काम होगा और सारा का सारा परिवर्तन हो जायेगा | गुरु महाराज चौथा महान यज्ञ रचायेंगे, उसमें दस करोड़ नर-नारी होंगे | वो चाहें जमीन से आवें या आसमान से आवें, वहीं पर सतयुग का राज तिलक होगा | वहाँ पर शंकर भगवान भी मौजूद रहेंगे, हर प्रकार के लोग रहेंगे, महाकाल पुरुष और पांचों धनी, सब कुछ सब सारी शक्तियाँ, सारे देवी-देवता गण वहाँ उपस्थित होंगे | और वहीं पर गुरु महाराज सतयुग जी का राज तिलक करेंगे | देखो ये परिवर्तन का सेहरा जो है महाकाल पुरुष के सिर पर है, उन्हीं के मत्थे पर ताज लगा है, उन्हीं के द्वारा ये सब कुछ होगा | गुरु महाराज के कहने के अनुसार सारा काम होगा | आप सब लग करके सुमिरन भजन ध्यान करते रहो और गुरु का गुण गान करते रहो |

सतगुरु जयगुरुदेव
पावन मंगल सतगुरु नामु, नाम भजन मीलै तुम्हें परमानु ||
कोटी कोटी तुम करो बन्दना, सतगुरु चरणन कोटी नमामि||
हे दयाल सतगुरु मेंरे दाता, अन्तर घट में खोलो खाता ||
घाट पार तेरे दर्शन पाऊँ, हे सतगुरु तोहीं एहीं को रिझाऊँ ||
हे मालिक हे संत हमारे, दया मेंहर करो अब एक वारे ||
सतगुरु जयगुरुदेव हमारे ||

सतगुरु जयगुरुदेव
आरती सतगुरु दीन दयाला, दीन बंधु सतगुरु किरपाला ||
श्री चरणन कि करूँ बन्दना, हे सतगुरु मालिक नन्दलाला ||
श्री चरणन में शीश झुकाऊँ, मुक्ति मोक्ष परम पद पाऊँ ||
श्री चरणन बलिहारी जाऊँ, नाम कि महिमा आप कि गाऊँ ||
श्री चरणन में शीश झुकाऊँ ||
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 15 फ़रवरी 2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
सतगुरु संत हमारे नाथ ||
दया मेंहर बरसै सतगुरु की, ध्यान भजन मन साथ ||
ज्ञान की कुंजी सतगुरु देते, नाम की पूंजी साथ ||
सतगुरु परम अलौकिक न्यारे, दिव्य अस्त्र के साथ ||
सतगुरु मानव पोल पधारे, हरी अनाम के नाथ ||
शिव भोले बम भोले जी भी, हैं सतगुरु के साथ ||
सतगुरू के संग सब जन लग जाओ, पार देश की बात ||
करो तैयारी सत देश की, सत्संग सतगुरु साथ ||
सत नाम की बरसा होवे, नाम भजन गुरु हाथ ||
मेंहर होये जिस दिन सतगुरु की, खुल जायें सारे घाट ||
पुलकित मनवा सतगुरू देखै, शब्द भेद के नाथ ||
हे सतगुरु के सच्चे बंदौ, सतगुरु दीना नाथ ||
दीन दयाल बृहद सम भारी, हरहु नाथ मम संकट भारी ||
मन अन्तर कुछ लेव बिचारी, ज्ञान ध्यान की कुंजी प्यारी ||
सतगुरु संग में साथ ||
पग मग देर करो नहीं ठग में, ठग है ठगोरी हाथ ||
नाम भजन में मन चित्त लाओ, चंचल चितवन नाथ ||

सतगुरु संग चलो गगन बिचे ||
मण्डल देखो तारा गण के, क्या देखोगे नीचे ||
उधर देश सच्चा प्रीतम का, क्यों हो आँख को मीचे ||
सच्ची करो बन्दना गुरु की, दया मेंहर सब पी के ||
अमृत नाम सुधा बरसेगी, नाम रसा रस नीचे ||
सतगुरु संग रंग चढ़ी जावे, नाम भजन मन पी के ||

सतगुरु जयगुरुदेव
धरो धूरधाम का रस्ता, मार्ग सतगुरु ने दीना है ||
ध्यान और भजन कर ले तू, नाम मन में हो लीना तू ||
सतगुरु की मेंहर आयी, बनो तुम सब जो दीना जी ||
भजन एक एक कड़ी सच्ची, ज्ञान और ध्यान बन जाये ||
चलो सतगुरु के संग में सब, ज्ञान गंगा भी बह जाये ||
करो पर प्रभु से मिन्नत तुम, गुरु के साथ में लग कर ||
मेंहर हो जाये सतगुरु की, दया की धार आ जावे ||
दया की धार सच्ची है, मिलन का सार हो जावे ||

सतगुरु जयगुरुदेव
कुछ ध्यान भजन मन गाओ, सतगुरु जी को तो रिझाओ ||
ये नाम भजन है सच्चा, बाकी का सब जग काचा ||
ये हीं में को लगाओ, कुछ ध्यान भजन को गाओ ||
चरणन गुरु के तुम जाओ, कुछ प्रेम भाव दर्शाओ ||
सतगुरु से लौ को लगाओ, कुछ ध्यान भजन को गाओ ||
ये प्रभु सतगुरु हैं राजा, ये शब्द का बाजे बाजा ||
वोहीं रंग में रंग जाओ, सतगुरु में मन को लगाओ ||
सत धाम के वासी सतगुरु, हैं शब्द भेद अविनासी, इनहीं के गुण को गाओ ||
करो चरण बन्दना इनकी, इनहीं को शीश झुकाओ, कुछ नाम भजना को गाओ ||

सतगुरु जयगुरुदेव
झील मिल रिल मिल रिलै सुरतिया ||
मेंहर सतगुरु धंसि सुरतिया||
अन्तर देखै सतगुरु मूरति, चम चम चमके सतगुरु सुरति ||
दिव्य प्रकाश हो चहुंउजियारी, देखो घटपट घाट उघारी||
घाट पार क्या अद्भुत लीला, सतगुरु दया मेंहर का किला ||
सतगुरु शब्द भेद के मालिक, दया मेंहर हैं किन ये सालिक||
मेंहर हुयी ऐसी अनाम की, जीव जगावन नाम दान की ||
नाम की महिमा खुद हीं सुनाते, अपने भेद सबै बतलाते ||
ऐसे सतगुरु को तुम पाओ, तो श्री चरणन शीश झुकाओ ||
मुक्ति मोक्ष परम पद पाओ ||
सतगुरु जयगुरुदेव अविनासी, संग शिव शम्भू हैं जहां काशी ||
हैं शिव शम्भू जहां बने काशी ||
घाट पार येह काशी देशा, शिव शम्भू का यहीं है देशा||
बम बमबम महादेव कहाये, हरी हर गुन सबहीं ने गाये ||
बिन इनकी पूजा नहीं दुजी, संत काज में ये हीं पूजे ||
मन चित्त लायी करो सब भजना, सतगुरु नाम करो सब रटना ||

सतगुरु जयगुरुदेव
गुरु अंगना में आये सजाओ थरिया||
आरती उतारो करो गुरु बन्दना, चौकी सजाओ सजाओ दुवरिया ||
गुरु अंगना में आये सजाओ थलिया||
गुरु की मेंहर हुयी अति भारी, है सतगुरु की दया सब सारी ||
सतगुरु नाम भजो रे रसिया, अन्तर घटवा में बोले सबके बसिया ||
सतगुरु सतगुरु नाम है साचा, नाम भजन कुछ नाहीं आचा||
सतगुरु नाम भजो रसिया, अन्तर घटवा में बाजे तो बसिया ||

सतगुरु जयगुरुदेव
अखण्ड रूप से बिराजमान सतगुरु जयगुरुदेव मन्दिर ग्राम बड़ेला के प्रांगण में बैठे हुये समस्त प्रेमी जन, सबको गुरु महाराज की असीम दया कृपा अनुकम्पा से जो अन्तर्घट में गुरु की वाणी उतर रही है, जो कुछ अन्तर आ रहा है, वो आप सबको प्रार्थनायें उच्च कोटी की ऊपर की सुनने को मिल रहीं है | दया मेंहर सतगुरु की है, हमारे पास कुछ नहीं, न हम कुछ लिख कर रखते हैं, कुछ पढ़ करके रखते हैं | जो कुछ गुरु महाराज की दया धार उतरे, वो आप सबको सुनने को मिलता है | प्रेमियों आगे समय नाजुक है, नाजुक समय में सुमिरन भजन ध्यान हीं काम आयेगा, गुरु की दया मेंहर हीं काम आयेगी, वरना कोई बचाने वाला नहीं है | दुनिया में भागा-दौड़ी, हर तरफ चित्कार-पुकार मचेगी, हाहाकार मचेगा, तो कौन बचायेगा | हर जगह दैविक मार पड़ेगी, तो उस दैविक मार से सतगुरु हीं बचायेंगे | तो प्रेमियों लग करके हमको, तुमको, सबको सतगुरु का भजन करना है, सतगुरु की यादगारी करना है, सतगुरु सहारे रहना है, उन्हीं के साथ हीं चलना है | गुरु महाराज ने अब तक नाना प्रकार के सत्संग सुनाये, हर प्रकार से सबको बताया और समझाया कि देखो सुधार जाओ, अपने रास्ते पर चलो, मार्ग सब सच्चा है | सच्चे रास्ते पर चलोगे सुमिरन ध्यान भजन बनेगा | दिखाई भी पड़ेगा, सुनाई भी पड़ेगा, अपने निज घर पहुँच जाओगे | जब अपने निज घर पहुँच जाओगे, तो जीवन मरण से मुक्ति प्राप्त हो जायेगी | किसी को कुछ बोलने कि जरूरत नहीं पड़ेगी, संत सतगुरु हीं सारी चीजों को पार कर देंगे | गुरु महाराज हीं सब पर दया कृपा कर उस पार ले जायेंगे | और अपने देश में सच्चे जब पहुँच जाओगे, तो कोई दुःख पीड़ा तकलीफ नहीं होगी | जीवन-मरण, चौरासी-नरकों से तुमको मुक्ति मिल जायेगी | अपने हीं घर में रहोगे, अपने सतगुरु के संग रहोगे, अपने महल में बिचरण करोगे, सच्चे नाम भजन को गाओगे, सच्ची सतगुरु कि सेवा करोगे और सच्चे सतगुरु के साथ रहोगे | प्रेमियों कहने और सुनने में और करने में बड़ा फरक है | कहने के लिए तो सभी सुना देते हैं, कह देते हैं, बता देते है पर करते कितना हैं, इसको तो गुरु महाराज हीं जानते हैं | गुरु महाराज जिससे जितना करवा लें, वो उतना सुमिरन कर सकता है, उतना भजन कर सकता है, उतना हीं ध्यान कर सकता है | गुरु के सामने एकाग्रचित्त हो करके बैठना, गुरु में ध्यान लगाना, गुरु कि वाणी को याद करना, गुरु से हर प्रकार की दया मेंहर की भीख मांगना हीं हमारा तुम्हारा कर्तव्य है | भीख मांगते रहो गुरु से |

मेंहरिया सतगुरु दीना नाथ ||
मेंहर करो सतगुरु मेंरे नामी, भजन बनै मेंरा सतनामी ||
सत में लगै मन चार ||
अनाचार अन्तर ना आवे, सच्चा सोंच बिचार||

प्रेमियों सच्चा सोंच विचार आवे और इस सतगुरु के भजन में हमारा मन लग जावे | घट में घाट है, घाट में सतगुरु की बैठक, सतगुरु के दर्शन हों | ऐ प्रेमियों, सतगुरु में मन चित्त लग जाय, सतगुरु का नाम भजन हो जाय, सतगुरु में मन रम जाय, सतगुरु की वाणी याद आवे| सतगुरु के साथ बिताये हुये पल चौबीसों घण्टे हमें याद आते रहें, गुरु की दया मेंहर बरसती रहे | ये मन पापी है, चौबीसों घण्टे धमा-चौकड़ी, इधर-उधर भागता रहता है | फिर भी तुम गुरु के चरणों में मन लगाते रहो, गुरु की अराधना-प्रार्थना करते रहो, गुरु का गुणगान करते रहो, गुरु में मन लगाते रहो, गुरु के साथ रहो | गुरु के साथ मन के साथ चलोगे, गुरु की दया मेंहर होगी |

मेंहरिया सतगुरु दीनानाथ ||
दीन बन्धु तुम दया के सागर, कृपा सिन्धु रघुनाथ ||
मेंहरिया सतगुरु दीनानाथ ||
मेंहर कियो कौतुक दिखलायो, दीन्हों नाम का दान ||
नाम भेद बतलाकर सतगुरु, मेंहर कियो हर बार ||
मेंहरिया सतगुरु दीनानाथ ||
हे सतगुरु हम तेरे साथी, दया मेंहर करो नाथ ||
मेंहरिया सतगुरु दीनानाथ ||
सतगुरु जयगुरुदेव
आरती सतगुरु सत अनामी, सत अलौकिक सतगुरु नामी ||
श्री चरणन में कोटीप्रणामी, सतगुरु मेंरे मेंरे स्वामी ||
श्री चरणन में शीश झुकाऊँ, हे सतगुरु बलिहारी जाऊँ ||
मुक्ति मोक्ष परम पद पाऊँ, श्री चरणन की आरती गाऊँ ||
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 14 फ़रवरी 2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
भजो मन सतगुरु सतगुरु नाम ||
नाम अनामी पुरुष का सच्चा, सच्चा है सतधाम||
भजो मन सतगुरु सतगुरु नाम ||
दीन दयालु और किरपालु, ये हीं हैं परभू राम ||
श्री चरणन की करो बन्दना, बैठ के चरणन ठान ||
शब्द शब्द पर सतगुरु प्यारे, सतगुरु जी का नाम ||
संत हमारे सच्चे मालिक, शब्द की भेद की खान ||
सच्चे पिया को करो दण्डवत, मन चित्त सतगुरु लाय||
भाव भरोसे तुम रह जाओ, बन जाये तेरो काम ||
नाम भजन मे समय बिताओ, यह सच्चा है काम ||
परम पुनीत सतगुरु साई, सत के बीच मँझार||
सत सत के हैं सतसंगी, सत में है परमाण||
सत के चरणन चरण बन्दना, सतगुरु मे मन लाय||
भजन करो प्रेमियों सतगुरु का नाम ||
नाम भजन सच्चे स्वामी का, जन्म जन्मान्तर का काम ||
मैलाइ सब कटी कटीजावे,तोहीं मिले आराम ||
सतगुरु चरणन शीश झुकाओ, यह पावन है काम||

सतगुरु जयगुरुदेव

भेद कुछ समझ कर देखो, संत सतगुरु निराले हैं ||
दया और मेंहर के नामी,यहीं सच्चे रखवाले हैं ||
दया के सिंधु दाता जी, दया और मेंहर करते हैं ||
पार उस देश चलाने को, शब्द का सतगुरु देते हैं ||

सतगुरु जयगुरुदेव

भेद समझो नाम समझो, भजन और ध्यान को समझो ||

हे प्रेमी, प्यारे प्रेमियों हर प्रकार के भेदों को समझो, हर प्रकार की चीजों को समझते हुये, नाम भजन सुमिरन ध्यान को भी समझो कि किस तरह हमको सुमिरन ध्यान भजन करना है, और किस तरह गुरु में मन लगाना है | किस तरह गुरु के भजन को गुनगुनाना है, किस तरह नाम भजन गाना है, किस तरह मालिक को रिझाना है |

दया कि धार आवे जब,पयल हो गगन मंझारी की ||

जब दया की धार सतगुरु की आ जावे और वो तुमको खिच करके उस प्यारे गगन में, उन मंडलों में ले जाये जहां की ये सूरत है | जहां से आयी है, वहाँ का वर्णन देखे, वहाँ का रास्ता समझे, वहाँ के गुरु का दर्शन करे, वहीं पर खिल-मिल जाये, गुरु मे मिल जाये, गुरु के दर्शन करे,दरश परश करते हुये आगे जाती रहे |

दरश परश करे सतगुरु जी का,अमृत रसको पावे||
ज्ञान होये सच्चे साई का, नाम भजन मन गावे ||

गुरु महाराज के सच्चे दर्शन हों, सच्चा ज्ञान हो, सब हर प्रकार का भान हो और सच्चे रस को प्राप्त करे| और गुरु महाराज के चरणों में वो जाये, घुल-मिल जाये और उस गगन मंझारी का की सैर करे| जिस गगन में वो कभी नहीं गयी है, जब से आयी गुरु की दया मेंहर से गयी और गुरु महाराज की दया कृपा से आना जाना फिर से बना और गुरु की दया से उसने कुछ अद्भुत चीजों को देखा |

अद्भुत देखै शैल शिखर में,धँसै जहां वो सुन्न शहर में ||

अद्भुत देखती है, अद्भुत नजारे, अद्भुत महा अद्भुत ऐसा कभी नहीं देखा और सुन्न शहर में तीसरे धाम पर वो जाती है, वहाँ मंडराती है | मान सरोवर में स्नान करती है, वहाँ सूरतों से बात-चित करती है,मेंल-मिलाप करती है, गुरु के दर्शन पर्शन करती है और आती जाती रहती है |

आवत जात कई दिन बीते, सतगुरु प्रेम प्रतीत के रिते ||

सतगुरु की दया मेंहर से आती है जाती है, सतगुरु की दया मेंहर को लेती है | सतगुरु से मिलती है, जुलती है | सतगुरु से प्रार्थना करती है, हे मालिक, हे दयाल, हे किरपाल, कभी मेंरा दामन मत छोड़ देना, हमारा हाथ कभी मत छोड़ना | हम पापी जीव हैं, हम नालायक हैं | हमसे रोज पाप हो सकता है, हम कहीं भी गिर सकते हैं | लेकिन आप हमको छोड़ना मत| क्योंकि गुरु नानक का एक जीव जब भटक गया,वो चौरासी में चला गया | वहाँ नरकों पीपों में “नानक जाय अंगूठा बोरा, सब जीवों का किया निबेरा” | सो हे मालिक, ऐसी दया मेंहर करना कि हम चौरासी न जाने पायें | हमारे ऊपर दया मेंहर करो | कोई ऐसी प्रकार की हाड़ी-बीमारी ना देना, जिससे हमारा सुमिरन भजन ध्यान न हो पाये | न हीं ऐसी कोई बिडम्बना हो कि हम आप से छूट जायें, आप से दूर हों जायें | हे प्रभु धीरे से काम निकाल लेना और हमको अपने निज घर, निज धाम पहुंचा देना |

पहुंचावो निज घर हे स्वामी, आरती बिनती प्रार्थना नामी ||

सूरत जीवात्मा प्रभु सतगुरु से प्रार्थना करती है कि हम आपकी आरती करते हैं,अराधना करते हैं, प्रार्थना करते हैं आपसे मिन्नत करते हैं | आपके श्री चरणों में गिड़गिड़ाते हैं, हे प्रभु हमको अपने धाम, निज घर जरूर ले जाना, कहीं नरकों चौरासी में न जाना पड़े | हे प्रभु, जो हमसे वहाँ गलती हो गयी हो, हजार गायों का काटने का पाप लगा हो तो माफ कर दीजिये | हे सतगुरु हम पर दया कर दीजिये, हे गुरु महाराज हम पर कृपा कर दीजिये | आगे ऐसा महापाप या गलती होगी | हम कुछ ऐसा करते नहीं हैं, ये मन बुद्धि चित्त हमको गिरा देता है | हमारे मन बुद्धि चित्त को निर्मल पवित्र कर दीजिये | हे सतगुरु हम पर दया कर दीजिये कि कभी हमारा मन इस तरह का दाव न लगा पावे| चूंकि मन का हीं खेल है, मन के हारे हार है, मन के जीते जीत |हे सतगुरु, मन जीत जाय, आपके नाम की विजय प्राप्त करे| ऐसे कोई राज में ना फसे जिससे हम कूड़े-कचरे में फस जावे और हमसे गलती हो जावे | हे नाथ एक बार हुआ, दो बार हुआ, तीन बार हुआ, क्या बार-बार गलती होगी तो कोई माफ नहीं करता | हे सतगुरु आप हजारों गलतियों को माफ करने वाले हैं | हम पर दाता दयाल दया करके माफ कर दो हमारे गुनाहों को और अपने देश को ले चलो | हे प्रभु एक कोने में बिठा करके अपने धाम को ले चलो |

हे दयाल श्रुति मंगल स्वामी, हे नामी हे पुरुष अनामी ||

हे दाता दयालु, दया के सागर, हे पवित्र पुनीत वत्सल, हे प्रभु, हे सतगुरु, हे दाता दयाल तुम तो नामी हो, सतनामी हो, पुरुष अनामी हो | हे दयाल मेंरे प्रभु, हे सतगुरु, हे सत्यनारायण स्वामी, हे जनपातकहरणा हम पर दया मेंहर करो, हे प्रभु हम पर दया मेंहर करो, हे सतगुरु हम पर दया मेंहर करो, हे मालिक मुझ पर दया मेंहर करो | तो इस तरह सूरत जीवात्मा सतगुरु से दया मेंहर की भीख मांगती है |

मांगतमांगत हो वरदानु, मुक्ति दाम निज होये निदानु||
हे सतगुरु साईमेंरे दाता, निज खोलो अब मेंरा खाता ||
कर्म बीज अब देव जलायी, ऊपर को दो सूरत चढ़ायी ||

प्रेमी सत्संगी जन, साधक और सधिकायें, बहनें-गुरु भाई और गुरु बहनें प्रार्थना करें बच्ची और बच्चे कि हे मालिक हमारे कर्म बीज को जला दीजिये | हमारे कर्मों को, इस गंदगी को,कलमल को साफ कर दीजिये और हे प्रभु, हे दाता दयाल, हे सतगुरु हमको निज धाम, निज मुक्ति मोक्ष के मार्ग पर ले चलिये | हमसे भक्त वत्सल काम बने, सत्य वत्सल काम बने, सत का काम बने, सच्चा काम बने, सच्ची अराधना-प्रार्थना हो | सच्चे मन से,मेंरे मन में कोई मिलौनी न हो, किसी के प्रति यह मन लालायित न हो, काम, क्रोध, मद, लोभ न आवे| हे मालिक हर प्रकार से दया कर दो, हर प्रकार से ये सचेत हो जाये कि ये पाप है, ये महा पुण्य है, ये ऐसा है, ये वैसा है, ये निष्कर्म है, ये सत्कर्म है, ये धर्म है, ये सत धर्म है | हे प्रभु, हे दयालु, हे कृपालु हम पर दया करो |

प्रथम धाम कर करीदयायी, सतगुरु दया मेंहर से विचारी ||

सतगुरु कि दया मेंहर से सूरत जीवात्मा पहले स्टेज कि तरफ, पहले धाम कि तरफ अग्रसर होती है | धीरे-धीरे उठती है गिरती है, चलती है, जाती है, आती है और प्रभु कि दया मेंहर से उन चीजों को देखती है | हे प्रभु, हे दयालु, हे कृपालु की वजह से सारा काम बनता है |

हे दयाल श्रुति मंगल स्वामी, तुम तो प्रभु मेंरे हो सतनामी ||

हे सतनामी, प्रभु, हे सतगुरु, हे सच्चे मालिक, हे सच्चे दाता दयाल, हे सत्य के स्वामी, हे पुरुष अनामी मेंरा सुमिरन ध्यान भजन बन जाय | हे प्रभु आप में हमारा मन लग जाय | हे प्रभु आपके प्रति हम हो जायें, एकाग्रचित्त रहें, आपके साथ-साथ चलें, आपके पास आवें-जावें | हे प्रभु हमारा काम हर प्रकार से बन जावे | हे दाता दयाल हम पर मेंहर हो, हम पर दया हो, हम पर कृपा हो | हे कृपालु हे दयालु, हे दाता दयाल हर प्रकार से दया मेंहर हो, हर प्रकार से कृपा हो, हर प्रकार से आपकी मेंहर बरसे | हे मालिक मुझसे जाने अंजाने जो भी गुनाह हुआ हो, उसको माफ कर दो | हे दयालु हमसे गुनाह न हो, हमारे मन को बदल दो, हमारी बुद्धि को बदल दो, हमारे चित्त को बदल दो और अपने चरणों में लगा लो |

चरणामृत का प्याला पिजै, दया मेंहर सतगुरु जी कीजै ||
हे सतगुरु जी मैं करूँ बन्दना, शोक संताप को अब हर दीजै ||

बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 13 फ़रवरी 2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
भेद सतगुरु में अपने लगाओ सभी ||
नाम सतगुरु का सच्चा है गाओ सभी ||
मान और लोभ को ताक पर छोड़ दो ||
ध्यान और तुम भजन में जरा मन को दो ||
नाम भजना गुरु का सही काम है ||
समझो बन जायेगा तेरा हर काम है ||
हर हरी का भजन कल महा का भजन ||
काल सब सारी ध्वनियाँ भी बज जायेंगी ||
रंग रोगन से सब सेज सज जायेगी ||
भेद सच्चा गुरु का समझ आयेगी ||
सतगुरु ध्यान मन में लगाते चलो ||
ध्यान मन चित्त में अपने बसाते चलो ||
नाम सच्चा है इसको सम्हाले चलो ||
खुल गये सबके घट के हैं ताले सुनो ||
प्यार सतगुरु से सच्चा जताते चलो ||
नाम मन में भजन गुरु का गाते चलो ||

सतगुरु जयगुरुदेव

मनवा लागे गुरु चरणनमें, ऐसी करो यतनियाँ||
राग रागनि घट में बज जायें, सतगुरु ध्यान भजनियाँ||
सतगुरु मेंहरबिराजै सच्ची,लग जाये लगन लगनियाँ||
संत हमारे सच्चे साई,कर लो नाम भजनियाँ||
सतगुरु सतगुरु नाम पुकारो,भवपारण की कड़ियाँ||
दीन दयालासतगुरुकिरपाला, सच्ची बनाई हैं लड़ियाँ ||
शब्द भेद सतगुरु सतसंगी,सत की मिली गयीं लड़ियाँ ||
सत अनामी और सतनामी, चौंसठ होती घड़ियाँ ||
घट में घाट घाट पर सतगुरु, क्यों नहीं पइयाँपड़ियाँ||
शीश झुकाओ सतगुरु चरणन में,मिली जायें सारी लड़ियाँ ||

बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: २३.१२.२०१५

सतगुरु जयगुरुदेव : विेशेष सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
भजनिया सतगुरु जी का नाम||
नाम भजन सच्चे साईं का, अन्तर मन कल्याण ||
वेग अलौकिक होये अन्तर में, अनुभव का परमाण||
नाम सुहानदियो सतगुरु ने, भजो सभी सतनाम ||
चंचल चितवन रूप मनोहर, नाम भजन कल्याण ||
नाम नमनी हो साईं की,रघुवरसीताराम||
सतगुरु सूरत के सच्चे साथी, सच्चा है परमाण||
मन चित्त धरो गुरु चरणन में, हो पूरा कल्याण ||
रूप अलौकिक अद्भुत देखे,अन्तर्घटपरमाण||

सतगुरु जयगुरुदेव
अखण्ड रूप से बिराजमान सतगुरु जयगुरुदेवमन्दिर ग्राम बड़ेला के बैठे हुये समस्त प्रेमी जन, गुरु महाराज की असीम दया कृपा अनुकम्पा बराबर हम सब पर बनी हुयी है | पूरा गुरु महाराज के आदेशानुसार हम सबको जो भी नाम मिला है, वो सच्चा मिला है | आदेश यहीं है कि लग करके सुबह और शाम सुमिरन ध्यान भजना किया जाय | सुमिरन एक ऐसी चीज है कि जिससे सभी धनी प्रसन्न होते हैं, पांचों धनियों को खुश करना और रोज जो कूड़ा कचरा गंदगी हमारे ऊपर, तुम्हारे ऊपर आती है, उसको साफ सफाई करना | रोज रोज अपने अन्तर्घट में झाड़ू मारना, इसको कहते हैं सुमिरन | जिससे रोज की इकठ्ठा गंदगी खतम हो जाय और मन बुद्धि, सूरत जीवात्मा निर्मल पवित्र हो, इसके लिये सुमिरन किया जाता है | ध्यान का मतलब है कि समस्त धनियों के दर्शन करना, मन बुद्धि एकाग्रचित्त हो और लग करके जब साधना में बैठोगे तो जिसका नाम लोगे, उस धनी के स्वरूप का दर्शन होगा | भजन का मतलब ये है कि शब्द भेदी बाण शब्द उतरने लगेगा | शब्द से सूरत, जिस मण्डल का आप भजन कर रहें हैं, जिस मण्डल में आप ध्यान कर रहें हैं जिसधनी का आप ध्यान कर रहे हैं, उस धनी के देश में वो सूरत जीवात्मा प्रवेश करेगी | और सीधे सीधे आपके आँख खुलते हीं आपको स्वर्ग बैकुण्ठ,बहिष्यत,यमपूरी और बैकुण्ठपुरी ,शिवमुकाम ,आद्या महाशक्ति का देश, प्रभु राम का देश, सब कुछ देखने को मिलेगा | धीरे-धीरे आप जब आगे बढ़ते जाओगे तो ओंकार पुरुष, रारंकार पुरुष, सोहं सरकार और सतनाम पुरुष के दर्शन धीरे धीरे से होंगे | पर आपको लगन के साथ आगे को बढ़ना है |

प्रथम गुरु की कर लो सेवा, जिनने नाम बतायो||
सतगुरु अन्तर हैं परमात्मा, जिनने भेद लखायो||
प्रेमियों, जब आप सच्चे मालिक, अपने सतगुरु, अपने गुरु महाराज को देखोगे कि यहीं परमात्मा हैं, इन्हीं के अन्दर परमात्मा बिराजमान हैं, इन्हीं के साथ जाने पर परमात्मा के दर्शन होंगे, तब तो तुम्हें दर्शन होंगे | अगर आप बाबा समझोगे और कहोगे कि बाबा जी तो बाबा जी हैं, परमात्मा कहीं अलग मिलेगा, तो परमात्मा से बाबा जी मिले हुये हैं | पर बाबा जी के साथ जाओगे उँगली पकड़ करके, तो बाबा जी आपको परमात्मा के दर्शन करा देंगे | अगर आप समझोगे कि नहीं परमात्मा अकेले में मिलेगा, तो अकेले में तो मिलेगा, अन्तर में मिलेगा पर गुरु के संग | जब तुम गुरु के संग जाओगे तो तुम्हें परमात्मा जरूर प्राप्त होगा | और प्रथम गुरु चरणो की सेवा करोगे, गुरु की बन्दना अराधना करोगे, उसके बाद में अन्तर में तुमको गुरु के दर्शन होने लगेंगे | तत्पश्चात जब तुमको गुरु के दर्शन होने लगेंगे, उसके बाद में तुम्हें पहले धाम की झलक आयेगी | पहले देश की अद्भुत लीला दिखाई पड़ेगी और सुनाई पड़ेगा घण्टा शंख | आप बड़े मंत्रमुग्ध हो करके सुनोगे | धीरे-धीरे से उसमे भारी कोलाहल होगा और शंख और घण्टा बजेगा | शब्द सुनाई पड़ेगा, अलौकिक धुन आने लगेगी | तुम मंत्रमुग्ध हो जाओगे, स्वर्ग का भी बाजा सुनोगे,बैकुण्ठ का भी, शिवपुरी का भी, ब्रम्हपुरी का भी | धीरे-धीरे शिवपुरी को देखोगे, स्वर्ग को देखोगे, बैकुण्ठ को देखोगे तत्पश्चात आद्या महाशक्ति का देश देखोगे और उसके बाद में प्रभु राम का देश देखोगे | सर्वप्रथम गुरु के दर्शन बाद आपको प्रभु राम के दर्शन होंगे | उसके बाद में कोई चीज आपको दिखाई पड़ेगा | जो मालिक की दया होगी, वही आपको दर्शन हो जायेगा |

प्रथम सतगुरु कर सतसंगा, होये विवेक अनुराग की गंगा ||
सबसे पहले गुरु महाराज का सत्संग सुनो, उसको कथो गुनो, उसी में रत होवो, उसी में मन लगाओ, अपने बिकारों को छोड़ो, तब तुमको निर्मलता आएगी, पवित्रता आयेगी | फिर तुम आगे को चलते चलोगे | तुम्हें गुरु महाराज ने नामदान दिया और तुम सब ने नामदान लिया कि हमारा मुक्ति मोक्ष हो, हमें अनुभव प्राप्त हो, हमें दिखाई सुनाई पड़े | पर प्रेमियों, तुम्हें सोचना चाहिये कि इतने दिन हो गये हुमेनामदान लिये, न कुछ दिखाई पड़ता है, न कुछ सुनाई पड़ता है, फिर किस प्रकार का नाम है | अगर जो नाम भजते तो सुबह शाम जब समय देते हो, तो क्यों नहीं दिखाई पड़ता | इसको आपको सोंचना चाहिये कि हमारे अन्दर क्या कमी है कि हमें दिखाई सुनाई नहीं पड़ता, और दूसरे लोग कहते हैं कि हमारा भजन बनाता है | तो प्रेमियों, जो कुछ गलती हो, उस गलती को दूर करो, अपने रास्ते को सही करो और मालिक के रास्ते पर चलने लगो | तुम्हें भी अनुभव हो, तुम्हें भी दिखाई सुनाई पड़े, केवल दिखाई सुनाई की हीं सच्ची बात है कि तुम्हें गुरु के दर्शन हो, अन्तर में सभी धनियों के दर्शन हों, प्राप्त हों और तुम्हारा भी काम बन जाये | धीरे-धीरे से आप भी आगे को चलने लगो, तो आगे को तभी चलोगो जब तुम गुरु से प्रेम करोगे, अपने मालिक से लगन लगाओगे | और अगर लगन नहीं लगाओगे तो काम कैसे बनेगा | जैसे रूखे फीके थे वैसे रूखे फीके रह जाओगे | तो गुरु महाराज ने प्रथम देश और प्रथम प्रभु राम के दर्शन कराएंगे, उसके बाद ब्रम्ह्पुरी आपको ले जायेंगे |

ब्रम्हपुरी एक लाल मुकामा, फटक शीला सतगुरु का धामा||
ब्रम्हपुरी जो है वहाँ पर लाल मुकाम है, वहाँ दूसरे धाम का ये वर्णन है | वहाँ पर पहुँच करके सूरत जीवात्मा, जीतने भी सतसंगी प्रेमी गुरु भाई बहन सुमिरन ध्यान भजन करते हैं, जिनकी साधना बनती है वो दूसरे धाम पर जाते हैं | वहाँ गुरु महाराज रोज सत्संग सुनाते हैं, सत्संग को सुनते हैं, गुनते हैं, मन को लगाते हैं, प्रभु के दर्शन करते हैं और उस देश की अद्भुत लीला को देखते हैं, नदी नाले, पहाड़ झरने, बाग़ बगीचे, सरोवर स्नान करते हैं हैं त्रिवेणी में और गुरु महाराज को देखते हैं, अपने को भी देखते हैं | ये प्रतीत होता है कि जैसे हम आज होली खेल करके आए हैं | चूंकि वहाँ का रंग लालो लाल है, वहाँ लाल रंग के देश में जाते हैं तो खुद भी लाल हो जाते हैं | जिस तरह मिराबाई गयी तो कहा “लाली देखन मै गयी, तो मै भी हो गयी लाल” | तो गुरु महराज ने जो कुछ तुमको दिया है सच्चा धन, उस सच्चे धन के साथ मन बुद्धि चित्त लगा करके करते चले चलो, आगे को बढ़ते चलो | और गुरु में मन नहीं लगाओगे तो कोई काम बनने वाला नहीं | गुरु महाराज ने कहा था कि ऐसा गियर फसाऊंगा टूट जायेगा छूटेगा नहीं | तो गियर तो फस गया है, कारण तो बन गया है | गुरु महाराज ने जो लीला मौज खेली है, उस लीला मौज में सभी विस्मित हैं, जो कोई निशाना गुरु महाराज से रखता है, सीधे गुरु महाराज को देखता है कि गुरु महाराज हीं हमारे गुरु महाराज, और वहीं जो कुछ करेंगे, हम उनको जानते हैं | मन चित्त लगा करके सुमिरन ध्यान भजन करता है और गुरु महाराज को हाजिर नाजिर जीवित मानता है वहीं सच्चा शिष्य है | जीवित हाजिर नजीर मनाने की दो पद्धतियाँ हैं, जैसे हम आप जीवित हैं, हमारा घट है, घट में घाट है, घाट पर गुरु की बैठक तो हम तुम जिंदा हैं| तो गुरु महाराज जो हमारे अन्तर में बैठे हुये हैं वो जीवित हैं की नहीं हैं ? तो जब वो जीवित, तुम जीवित हो, तो तुम्हारे अन्दर बैठे गुरु महाराज हैं तो तुम कैसे कहते हो कि गुरु महाराज कहीं चले गये | तुम अपने घट के ताले को खोल करके गुरु महाराज के दर्शन करो और गुरु महाराज से पूछो कि हे मालिक क्या मौज है, क्या मेंहर है क्या दया है, क्या है आपका आदेश निर्देश, जैसे की प्रचार प्रसार करें, कैसे सुमिरन भजन ध्यान करें | हे प्रभु, कैसे हमारा काम बने, आप बताओ, हमें रास्ता दो, हमें भी आगे चलना आये, हम भी उठ करके खड़े हों, हमे भी आपका महा प्रसाद मिल जाये |

सतगुरु दया मेंहर से प्रेमियों, पारब्रह्म के दर्शन ||
गुरु महाराज की दया मेंहर हो गयी तो लाल मुकाम से मालिक ने उठा करके पार ब्रह्म पर भेजा, वहाँ मान सरोवर में स्नान करवाया और समस्त प्रेमियों को स्नान कराने के बाद जीवात्मा का कर्म कर्जा खत्म हो गया, सूरत जीवात्मा बलवती हो गयी, निर्मल पवित्र हो गयी | वहाँ के गगन में बड़े बड़े झूले पड़े हैं, उन झूलों में झूलती है, वहाँ के जो प्रेमी हैं हंस और हंसनिया, उनके साथ घूमती टहलती है | हंसो के साथ यारी करती है, हंसो के साथ किलकारी मारती है | वहाँ की क्यारी बाग़ बगीचे मणि माणिक्यों से जड़ित और पूरे प्रफुल्लित हैं, उनको देखती हुयी मंत्रमुग्ध होती है और वहाँ चन्द्रमुखी चंदा तारा है | उस चंदे तारे का दर्शन करती है, तत्पश्चात वो शैल शिखर, नील गिरि में प्रवेश करती है, उधर चढ़ाई करती है आगे को जाने के लिये, किंगरी सारंगी बाजा सुनती है और बड़ा हीं मंत्रमुग्ध होती है, बड़ा खुश होती है कि गुरु महाराज की विशेष दया कृपा रही, जो हमको इस देश तक भेजा और यहाँ तक लाये, हमारे कर्म कर्जे खत्म हुये, वहीं असली प्रभु राम का देश है, सच्चा सतगुरु का देश जहां पर कर्म कर्जा खत्म हुआ | अब सूरत जीवात्मा आगे को चलती है, शिष्य, प्रेमी, सतगुरु के जीव आगे को बढ़ते हैं गुरु महाराज की दया कृपा से| उनमें कोई बल नहीं होता, न कोई दया कृपा होती है, सारी दया कृपा सतगुरु की होती है | उसी की देन होती है, कब आपकी बुद्धि बदल जाय, इसके लिये कोई कुछ नहीं कह सकता पर गुरु कि दया रहेगी तो न आपकी बुद्धि पागल होगी, न आपकी बुद्धि बदलेगी | आप सदा सर्वदा एक रस रहेंगे | गुरु महाराज के वचनों का पालन करेंगे, आगे को आप बढ़ते रहेंगे, गुरु महाराज की सेवा में रत रहेंगे, गुरु महाराज में लगन लगायेंगे और गुरु महाराज का बताया हुआ नाम भेद आप जाप करेंगे | बताओ आप जाप करेंगे कि नहीं करेंगे ? मालिक ने जो समझाया है, बताया है | तो प्रेमियों, हम आप सबको यहीं बताने के लिए चाहते हैं कि जैसे मालिक ने कहा कि सुमिरन ध्यान भजन करो | तो आप सबका सुमिरन ध्यान भजन बन जाय| आप सबको भी दिखाई सुनाई पड़े सबकी तरह और आप को भी लगन लग जाय| मालिक के रोज रोज दर्शन हों, आप को अनुभव हो, आप को दिखाई सुनाई पड़े सच्चे मालिक के दर्शन हों, यहीं सच्ची सबसे बड़ी बात है | किसी से पूछना न पड़े कि मालिक का क्या आदेश है और जब तुम्हें दिखाई सुनाई पड़ेगा तो तुम्हें क्या किसी से पूछना मालिक के आदेश को |

लगन मन धारो सतगुरु नाम, अन्तर घट में अनुभव पाओ ||
मीरा बन तुम भी तो गाओ, भजो सतगुरु का सच्चा नाम ||
सतगुरु नाम मेंहर है सच्ची, सच्चा सतगुरु धाम ||
सतगुरु दया मेंहर जब आवे, खुल जाये घट के तार ||
दया मेंहर आवे मालिक की, होवे सूरत उस पार ||
सच्चे प्रीतम का घर मिल जावे, सच्चे द्वार मोहार||
मेंहर हुयी दाता साई की, पहुँच गयी उस पार ||

तो प्रेमियों, जब गुरु महाराज की विशेष दया कृपा हो गयी तो ये सूरत जीवात्मा इस देश से निकल करके उस देश की तरफ चली गयी और गुरु महाराज के वर्णन किये हुये नाना प्रकार के दृश्यों को देखती हुयी, अपने बिशेष धाम, अपने सतधाम की ओर अग्रसर रहती है | धीरे-धीरे ये बढ़ती चली जा रही है और बलवती होती चली जा रही है | मालिक की दया कृपा बरसती चली जा रही है और ये सूरत धीरे-धीरे आगे को बढ़ती चली जा रही है | मालिक की दया कृपा से उसने तीन धामों को देखा |

चौथा धाम है गगन मंझारी, महा सुन्न मैदान ||
महा सुन्न की रचना भारी, भँवर गुफा को मुकाम ||
सूरत जीवात्मा प्रेमियों, चौथे धाम के लिए चलती है | रास्ते में बहुत बड़ा मैदान मिलता है, उस मैदान में ये चलती चली जाती है और बड़ा हीं प्रसन्न होती है शब्द को पकड़ करके, गुरु महाराज के बताये हुये रास्ते पर उँगली को पकड़ करके |वो धीरे-धीरे उस देश में पहुँचती है और अद्भुत अनुपम और चमकदार, सारी चीजों को देख करके बड़ा प्रसन्न और खुश होती है | वहाँ का बाजा सुन करके बिलकुल मंत्रमुग्ध हो जाती है, एक रस-रस हो जाती है | इतना खुश होती है कि जिसको पूंछों मत, वहाँ महाकाल पुरुष के दर्शन करती है | दर्शन करने के बाद, वहाँ से फिर धीरे वो गुरु के चरणों में बैठ करके सतधाम की तरफ बढ़ती है | और अपने सतपुरुष के साथ सतधाम पहुँच जाती है |सतधाम की वर्णन और लीला को देख करके बहुत मंत्रमुग्ध होती है | यहाँ को आना नहीं चाहती | पर जब जीवात्मा का समय अभी पूरा नहीं हुआ तो मालिक उसको यहाँ मानव रूपी पोल में भेजते हैं | और कहते हैं की अपना समय पूरा करने के बाद, अपने धाम को चली आना, यहाँ अपने धाम में रहना | यहाँ तुम्हारा असली घर है, न जीवन है न मरण है | यहाँ हर चीजों से मुक्ति है | हमेशा स्वछन्द हो, हर प्रकार से गुरु की दया कृपा है और यहाँ पर तुम्हारा मकान है | ये तुमहारा सच्चा घर है | तुम अपने सच्चे घर, सच्चे प्रभु के घर पर रहो | यहाँ तुम्हारे महल अटारी बंगले, तुम उसमे अपना बिचरण करो और यहीं पर बैठ करके प्रभु का, हरी का, सतगुरु का भजन करो |

सतगुरु जयगुरुदेव
आरती सतगुरु सत अनामी, बिमल रंज रंजन के स्वामी ||
गुरु चरणन पर भाव जो पट से, तो सतगुरु के सत अनामी||
सत देश सच खण्ड के नामी, चरण बन्दना आरती स्वामी ||
श्रीचरणन में शीश झुकाऊँ, आरती सतगुरु तेरी गाऊँ ||
भाव बन्दनाकोटीअराधना, निर्मल मन जन जो तुम्हें पाऊँ ||
आरती सतगुरु तेरी गाऊँ,चरणन तेरे शीश झुकाऊँ ||
मुक्ति मोक्ष परम पद पाऊँ ||
सतगुरु जयगुरुदेव अनामी, कोटी कोटी तुमको परनामी||
सतगुरु सतगुरुसतगुरु नामी ||

बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 11 फ़रवरी 2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
भेद निज नाम का सतगुरु, जयगुरुदेव प्रभु ने दीन्हा है ||
काल चकरी से हम सबको, बचा सतगुरु ने लिन्हा है ||
दया और मेंहर भारी है, सतगुरु ने उबारी है ||
भजन और ध्यान का रस्ता, गुरु की मेंहर से सस्ता ||
भेद एक एक बतायो है, ज्ञान सारे गिनायो है ||
नाम के भजन में लग जा, पार नइया तुम्हारी हो ||
गुरु साकार सच्चे हैं, परम समरथ मेंरे स्वामी ||
दया की दात मिलती है, सतगुरु जी मेंरे नामी ||
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 10 फ़रवरी 2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
भेद दियो और नाम लखायो, सच्चे सतगुरु ज्ञानी ||
नाम भेद के सतगुरु मालिक, सतगुरु कहत जबानी||
इस खिलकत को ढंग से देखो, रंग रोगन क्या पानी ||
सतगुरु सतगुरु नाम पुकारो, नाहीं करो मनमानी ||
नाम नामनि होये सतगुरु की, सच्ची सुघर कहानी||
सतगुरु सतगुरु नाम पुकारो, समरथ संत जग जानी ||
सतगुरु जयगुरुदेव
भेद दियो है अलौकिक न्यारा ||
जिसमें भजन का शकल पसारा, बिनती करो एक वारा ||
कटी कटी जाये सभी मैलाइ, स्थिर हो घट द्वारा ||
घट में घाट घाट पर सतगुरु, दरश परश हो सारा ||
सतगुरु सतगुरु सतगुरु नामी, सत का भजन एक वारा ||
संत हमारे सच्चे मालिक, सतगुरु चरण निहारा ||

बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 09 फ़रवरी 2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
नाम का भजन कर प्यारे, यहीं सच्चा भजन प्यारे ||
सार और मूल को देखो, चलो तुम अब गगन प्यारे ||
अन्त अन्तर का अन्तर में, पाठ सतगुरु पढ़ाया है ||
खेल सब घट के भीतर है, मार्ग सतगुरु बताया है ||
भजन और ध्यान हो सच्चा, यहीं सतगुरु ने फरमाया है ||
करो सब लग करके भजना, कटे मैलाई सुरतिया की ||
झुकाओ शीश सतगुरु को, बन्दना गुरु की न्यारी हो ||
प्रेम और भाव के बस में, रिझते सतगुरु प्यारे ||
गुरु से लौ लगाओ सब, काम बन जायेंगे सारे ||
सतगुरु जयगुरुदेव
सतगुरु ध्यान भजन मन लाओ, सतगुरु में मन को लगाओ ||
सच्चे ध्यान भजन को गाओ, सतगुरु में मन को लगाओ ||
अन्तर के घट में जाओ, कुछ ज्ञान गुरु का पाओ ||
मिले शब्द भेद का तोहें सारा, फिर संगत को बतलाओ ||
सच्ची खिलकत को देखो, सतगुरु का शकल पसारा ||
अन्तर में हो उजियारा, घट घट में यहीं पसारा ||
घट के घट के वासी सतगुरु, हैं शब्द भेद अविनासी||
सतगुरु में मन को लगाओ, सब नाम भेद को पाओ ||
सतगुरु नाम भजन मन गाओ, सतगुरु में मन को लगाओ ||

सतगुरु जयगुरुदेव
अखण्ड रूप से बिराजमान सतगुरु जयगुरुदेव मन्दिर के प्रांगण में बैठे समस्त प्रेमी जन, आप सब बड़े हीं भाग्यशाली हो कि गुरु की अनुकम्पा दया है, जो गुरु की वाणी छोटी मोटी, गुरु की प्रार्थनायें और गुरु का सत्संग सुनने को मिलता है | गुरु महाराज की असीम कृपा अनुकम्पा बरसती है, सबको अनुभव अनुभूति होती है, दिखाई सुनाई पड़ता है | जो लोग कहते हैं की हमारा सुनिरान ध्यान भजन गुरु के रहते नहीं बना तो अब क्या बनेगा | तो उन्होंने गुरु के रहते भजन किया हीं नहीं तो अब भी नहीं करेंगे | जब करेंगे नहीं तो बनेगा कहाँ से | तो प्रेमियों गुरु महाराज के रहते और ना रहते, जैसे तब सुमिरन भजन ध्यान बनता था, वैसे अब भी सुमिरन भजन ध्यान बन रहा है | वो करने वालों के लिए है जो करता है, और जो करता नहीं उसका क्या सुमिरन भजन ध्यान बनेगा | यहां तो ऐसे ऐसे प्रेमी हैं परेसान हैं कि हमको थोड़ी सी झलक मिल जाय, मालिक का थोड़ा सा दीदार हो जाय, थोड़ा सा दर्शन हो जाय, कुछ अन्तर में चूँचा बोल जाय, कुछ दिखाई सुनाई पड़ जाय| और लोग ये कहते हैं बस ये करो, वो करो, ऐसा करो वैसा करो | गुरु महाराज ने कहा है कि जब तक सुमिरन भजन ध्यान नहीं करोगे, आत्मबोध आत्मज्ञान नहीं होगा, अन्तर में दिखाई सुनाई नहीं पड़ेगा, फिर आपको मुक्ति मोक्ष किस प्रकार से मिलेगा | जब मैल की धुलाई नहीं होगी, आपकी सूरत जिवात्मा निर्मल पवित्र नहीं होगी तो आपको कैसे दिखाई सुनाई पड़ेगा | गुरु महाराज ने कहा बच्चू तुमने जीते जी ये मन्दिर बनवाया है मेंरा , मैं इसमें अखण्ड रूप से बिराजमान हूँ | यहां पर जो प्रेमी आयेगा, तीन बार सच्चे मन से ध्यान भजन करेगा, उसकी आँख खुल जायेगी | तो प्रेमियों कुछ न कुछ अनुभव, कोई भी प्रेमी आये उसको होता है, गुरु महाराज के आदेशानुसार| और बहुतों को तो बहुत कुछ दिखाई सुनाई पड़ता है | और जो कहते हैं सुमिरन भजन ध्यान होता हीं नहीं और बनेगा नहीं, तो करते नहीं तो बनेगा कहाँ से | अगर खेत में बीज डालोगे निकाई गुड़ाई सिंचाई करोगे, तो कुछ पैदा होगा | अगर बीज पड़ेगा हीं नहीं खेत में तो क्या जमेगा | तो प्रेमियों लगकरके सतगुरु का भजन करना जो बन पड़े, जो नाम दान मिला है, उस नाम दान की नाम जड़ी की रगड़ाई करना | जब जड़ी रगड़ी जायेगी तो चमक आयेगी | चाहे लकड़ी किसी भी प्रकार की हो, उसको रगड़ो तो चिकनी हो जाती है | वैसे जब अन्तरमें रगड़ाई होगी तो चमक आयेगी | दिखाई सुनाई सब कुछ पड़ेगा | सब कुछ पड़ रहा और पड़ेगा | आगे भी दिखाई सुनाई पड़ेगा और पड़ रहा अब भी है | तो प्रेमियों, लगाना है मन सतगुरु में और सतगुरु को हीं अपना गुरु मानना है | सतगुरु कोई दूसरे नहीं, स्वामी महाराज को हीं सतगुरु कहा जाता है | 'सतगुरु जयगुरुदेव', जयगुरुदेव अनामीमहाप्रभु का नाम है, सतगुरु अनामी महाप्रभु का नाम है, सतगुरु उन्हीं को कहा जाता है, अनामी महाप्रभु सतगुरु जयगुरुदेव| तो जिस गुरु ने नाम को बताया, जिस गुरु ने नाम को जगाया, जिस गुरु ने नाम को दिया, उसी गुरु को जानते और मानते हैं | किसी दूसरे को बीच में बैठा लेंगे, निशाने पर कर लेंगे, तो गुरु के बीच में अड़ंगा आ जायेगा | इसलिए सीधा निशाना गुरु महाराज से रखो | बात चित सबसे करो, जाओ आओ कहीं भी, कोई दिक्कत नहीं, पर निशाना सीधे गुरु महाराज से हीं रखना | चूंकि हमारा लोगों का उद्धार, जिन प्रेमियों को नामदान गुरु महाराज ने दिया है, उन प्रेमियों का उद्धार गुरु महाराज करेंगे, बेडा वहीं पार करेंगे, वहीं मजधार से नाव उतारेंगे और वहीं उस पार उस देश तक पहुंचायेंगे | कोई दूसरा माई का लाल पहुंचाने वाला नहीं है | तो प्रेमियों, अपने गुरु पर पूरा बिश्वास रखो, अन्तर बाहर से हर प्रकार दया कृपा मेंहर कर रहें हैं | हर प्रकार से दिखाई सुनाई पड़ रहा है | तो जब आप लग करके करोगो, तो आपका का भी सारा काम बन जायेगा, अनुभव अनुभूति होगी | मालिक ने कहा कि मानव पोल अमोलक है, उसमे जो स्वासों कि पूंजी दी गयी हैं, कुछ दिन के लिए है | ये सराय है डेरा है, इस सराय में रह करके अपना काम बना लो और धीरे से निकल चलो | तो प्रेमियों अपना काम बना लो, सतगुरु का भजन गा लो |

मन सतगुरु में लग जाये, कुछ ऐसे यतन बनाओ ||
रीझ जायें सच्चे स्वामी, कुछ ऐसे यतन बनाओ ||
प्रेमियों, ऐसा जतन करो, ऐसी क्रिया करो, जिससे गुरु महाराज खुश हो जाय| हसने लगें, मुस्कुराने लगें, दया मेंहर की बरसात करने लगें | और गुरु के सामने जब बच्चा रोता है, गिड़गिड़ाता है, दो बून्द आंसू के गिराता है, तो गुरु किरपाल हैं, दयाल हैं, दया के सागर हैं | उनसे बर्दाश्त नहीं होता, चट वो दया मेंहर कर देते हैं | तो प्रेमियों, तुम भी इस तरह कर लो | थोड़ा जैसे रोते हो दुनियादारी के लिये, तो थोड़ा अपने जीवात्मा के लिये उद्धार के लिये, अपने उद्धार के लिये, गुरु महाराज से थोड़ी प्रार्थना कर लो | रो लो गा लो, बिनती प्रार्थना कर लो |

मैं तो बिनती करूँ सतबार, गुरु जी तुम्हरेचरणन की ||
सतगुरु खोल दो बन्द केवाड़, लगन लागिदरशन की ||
टूटी फूटी नइया मेरी, गहरा जग संसार ||
चहुँदिश घूम घूम के हारे, मिलता नहीं पतवार ||
सतगुरु सम्हारो न मेंरी पतवार, अरज मेंरे तन मन की ||
मैं तो बिनती करूँ सतबार, गिुरुजी तुम्हरे चरणन की ||
हे सतगुरु सतलोक के वासी, सुन लो मेंरी पुकार ||
जनम जनम की प्यासी सूरत, आई तुम्हरे द्वार |||
सतगुरु कर दो दया की बरसात, प्यास बुझे जनमन की ||
मैं तो बिनती करूँ सतबार, गुरु जी तुम्हरे चरणन की ||
हे करुणा करुणा के सागर, विनय मेंरी सुन लीजे||
और कछु की इच्छा नाही, नाम रतन धन दीजे||
सतगुरु छूटे जगत जंजाल, लगन लागे सुमिरन की ||
मैं तो बिनती करूँ सतबार, गुरूजीतुम्हरेचरणन की ||

ऐ प्रेमियों सूरत जीवात्मा प्रेमी साधक साधिकायें, अपने सतगुरु से प्रार्थना और बिनती करती हैं कि हे मालिक ये गहरा जग संसार है इसमें हमारी नाव मजधार में फस जायेगी | आप हमारी नाव को निकाल कर पार कर दो और हे दाता दयाल, हे सतगुरु, हम पर ऐसी दया मेंहर करो कि ये जन्मों कि प्यासी सूरत है, जो अभागिन भटका खा रही थी, उसको डोरी से लगा करके, उस पर दया मेंहर कर दो कि पूरी प्यास जन्मों जन्मों कि बुझ जाय| हे प्रभु, हे सतगुरु, हे स्वामी महाराज हम पर ऐसी दया कृपा करो कि हमको नाम रतन धन चाहिये, नाम हीं मिल जाय, नाम का अलौकिक धन प्राप्त हो जाय, बाकी किसी चीज की जरुरत नहीं है | मुक्ति मोक्ष, निज घर, परम धाम की प्राप्ति हो | हे सतगुरु हे दाता दयाल, ऐसी दया मेंहर करो |

दया की नजर करो मेंरी ओर ||
कृपा की नजर करो मेंरी ओर ||
हे सतगुरु सतनामी मालिक, संत सनातन छोड़ ||
सरणा गत सतगुरु मैं तेरे, और ना जानू ठौर ||
दया की नजर करो मेंरी ओर ||
संत कृपालु दयालु सतगुरु, तुम बिन कहीं नहीं ठौर ||
दया की नजर करो मेंरी ओर ||
सतगुरु तुमको शीश झुकाऊं, श्री चरणन बलिहारी जाऊं ||
मेंहर करो एक ठौर, दया की नजर करो यहीं ओर ||
शब्द भेद के मालिक सतगुरु, शब्द भेद के मालिक ||
सत में सत का छोर, मेंहर की नजर करो मेंरी ओर ||
सतगुरु जयगुरुदेव

आरती सतगुरु दीन दयाला, हे दीन बन्धु सतगुरु किरपाल||
श्री चरणन में करूँ बन्दना, कोटि अराधना कोटि प्रार्थना ||
श्री चरणन में शीश झुकाऊं, आरती सतगुरु तेरी गाऊं ||
संत सनातन हे किरपाला, सतगुरु तुम हो दीन दयाला||
सहस्त्रअराधना कोटि प्रार्थना, सतगुरु नामी दीन दयाला||
दया सिन्धु सतगुरु किरपाला||
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 08 फ़रवरी 2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
भजन मन सतगुरु जी का ध्यान ||
सच्चा नाम भजन अन्तर में, पहुँचावे सतधाम ||
निष्कंटक निर्विघ्न नाम है, सतगुरु जी का काम ||
सत नारायण सच्चे स्वामी, प्रभु रघुवर श्रीराम ||
ज्ञान ध्यान सब हो सतगुरू का, सच्चा हो कल्याण ||
नाम नामनी लगे सतगुरु के, ले जावे घाट के पार ||
ध्वनियाँ अजब अलौकिक बजती, अन्तरघट झंकार ||
निर्मोही जन इनको पाते, स्वारथ काल चबात ||
विनय भजन सतगुरु का साचा, सच्ची होवै बात ||
होयी चढ़ायी अगम देश में, निष्कंटक निष्काम ||
निशदिन के चर्या होवै, सतगुरु बिन ना राम ||
सतगुरु चरणन शीश झुका कर, विनय बन्दना शाम ||
सतगुरु जयगुरुदेव

अखण्ड रूप से बिराजमान सतगुरु जयगुरुदेव मन्दिर ग्राम बड़ेला के प्रांगण में बैठे हुये समस्त प्रेमी जन, मालिक की असीम दया और अनुकम्पा से आप लोगो को अन्तर वाणी मालिक की सुनने को मिल रही है| जो कुछ अन्तर में मालिक बताते हैं, वही आपको बताया सुनाया जाता है | जैसे हीं कोई सत्संगी प्रेमी गुरु मालिक का तीन बार नाम लेता है, उसके बाद उसका तार सतगुरु से जुड़ जाता है | और जो अधर से अन्तर में गुरु की वाणी आती है, वहीं चीजे बाहर सुनाई जाती हैं | सच्चा तार संचार साधक की साधना सतगुरु के द्वारे और गुरु के अधारे होती है | सब लोग सच्चाई और कड़ाई से लग करके साधना करो | अच्छी उन्नति होगी, पूरा का पूरा अनुभव अनुभूति होगी, दिखाई भी पड़ेगा सुनाई भी पडेग़ा, पूरा ज्ञान होगा, गुरु मालिक की दया कृपा बरसेगी | दया सतगुरु की....

दया कर दान भगति का, हमें परमात्मा देना ||
निगुर इस गूढ़ रहश्य को, अन्तरभेद कर देना ||
दया और मेंहर की खातिर, तेरी चौखट पे आया हूँ ||
सुना है मुक्ति के दाता, दया कर दान देते हैं ||
बधिर मुख काल चाकरी से, बाहर निकाल लेते हैं ||
हे स्वामी मैं अंजाना हूँ, नाम का भेद दे दीजै ||
कृपा के शिन्धु मालिक हे, खोल घट घाट को दीजै ||
मेंहर होवै सतगुरु जी, नाम ध्वनियाँ भी बज जायें ||
आपके श्री चरणो की, दया की मेंहर हो जाये ||
नाम के भेद के दाता, यहीं बिनती हमारी है ||
ज्ञान और ध्यान सच्चा हो, यहीं आरजू हमारी है ||
दया के दान के दाता, सुनो बिनती हमारी है ||

सतगुरु जयगुरुदेव
उधर उस देश में जाना, जहां मालिक की बैठक हो ||
निरर्थक धाम वो होगा, जहाँ न गुरु के दर्शन हो ||
मान और लोभ को रखना, भजन से दूर होना है ||
सजन की बात जो माने, सत के देश चलना है ||
सुगम सुन्दर अनामी हैं, अलौकिक अपने नामी हैं ||
नयन में सतगुरु बसते, नहीं कोई खलकामी है ||
महा के राज महाराजा, महा काशी के दानी हैं ||
सुघर सुन्दर अलौकिक ये, परम सुन्दर कहानी है ||
सुरत और शब्द का मारग, सतगुरु की जबानी है ||

सतगुरु जयगुरुदेव
निर्मल कंचन होइहै सयानी, शैल शिखर की राह चलानी ||
धसी पार दुई मुख दरवाजा, किंगरी सरंगी बाजे बाजा ||
राग अलौकिक छत्तीस प्यारे, रागिनियों को कौन पुकारे ||
अद्भुत देखो चन्दा तारा, जिसका कोई ना वार पारा ||
अद्भुत देश सुगम है सुन्दर, मण माणिक्य का बाग़ पसारा ||
मान सरोवर फुलकित हर्षित, चपला चंचल बीच मंझारा ||
डाल डालियां सूरतें झूलें, सतगुरु देख बहुत हैं फूलें ||
चमचम चमके देश ये सारा, कर्म कटे सतगुरु एक वारा ||
कर्म बीज यह बतिया जलायी, ऊपर को अब सुरत चढ़ाई ||
मान सरोवर की गति न्यारी, अद्भुत बसती हैं जहाँ क्यारी ||
सतगुरु देख बहुत मन हर्षा, हंस रूप जहाँ सुरतै करसा ||
शब्द भेद अब हुयी सयानी, भवर कलि के बीच बिद्यमानी ||
भवर कलि के पार सुहानी, सतगुरु बैठे हैं लासानी ||
श्री चरणन में शीश झुकावत, चरण बन्दना गुरु की गावत ||
सतगुरु जयगुरुदेव मेंरे प्यारे, दया मेंहर मैं तेरे सहारे ||
पार कियो मेंरे हे दाता, सुन्दर उज्वल जगत बिधाता ||
हे सतगुरु मालिक रघुनाथा, मैं हूँ श्री चारणान केरे दासा ||
सतगुरु जयगुरुदेव
गुरु महाराज की अलौकिक अनुपम दया सुरत पर हुयी, तो सुरत को पारब्रम्ह देश का पूरा पसारा दिखाया, वहाँ का भेद बताया समझाया, तत्पश्चात भवर कलि चौथे धाम के लिए सुरत को गुरु महाराज ऊपर ले गये | चौथे धाम पर कुछ दिन रहने के बाद, गुरु महाराज ने पांचवे धाम पर सुरत को पंहुचा दिया | प्रार्थन बन्दना में पूरा संस्करण तीसरे से पांचवे धाम के बीच आप लोगों को सुनाया गया | और सत्संगी प्रेमी जब भी प्रार्थना आराधना करें आँख बंद करके और उन देशो की महिमा और गाना जब की जाय, बखान तो वो वहीं की बात कोसोचें और समझें और उसी देश को देखें | गुरु महाराज ने बताया है की जहाँ का सत्संग सुनाया जायेगा आपकी सुरत जीवात्मा उसी देश में सैर करेगी | तो जब आप मनन करोगे और गुरु वाणी को सुनोगे सच्चाई से और ध्यान दोगे कि किस देश का कहाँ का क्या सुनाया जा रहा है, वहाँ कैसा वातावरण है, किस तरह के वहाँ धनि बैठे हैं, कैसा पसारा है, किस तरह कि अद्भुत चीजें हैं, कैसा नजारा है,गुरु महाराजकिस तरह के बिद्यमान हैं | प्रकाशवान स्वरुप में बैठे हमारे सतगुरु कैसे सुन्दर और अद्भुत लग रहे हैं, कितनी दया मेंहर बरसा रहे हैं | इन सब चीजों को देखना सुनना हीं हमारा तुम्हारा काम है | गुरु महिमा का गुणगान कोई नहीं कर सकता | गुरु से बड़ा कोई होता नहीं, गुरु से बड़ा कोई दयावान नहीं, कृपावान नहीं, दयालु नहीं, कृपालु नहीं | गुरु सबसे बड़ा दयालु और कृपालु है, वहीं माता है, वहीं पिता है, वहीं सर्वज्ञ है, वहीं सबका दाता हैं | तो प्रेमियों सच्चाई से मन सतगुरु में लगाओ |

सतगुरु जयगुरुदेव

विमल रंज रंजन के स्वामी ||
सतगुरु जयगुरुदेव अनामी, आरती चरण बन्दना स्वामी ||
श्री चरनन में शीश झुकाऊं, आरती सतगुरु तेरी गाऊं ||
अलख अगम हे अनाम फकीरा, काटो सब भव पार की पीड़ा ||
श्री चरनन में आसन दीजै, बच्चे की यहीं जतरथ लीजै ||
सतगुरु आरती हो सतनामी, श्री चरनन में सहस्त्र नमामि ||
कोटि कोटि करूँ बन्दना, अरब खरब परनामी ||
श्री चरनन बिसरो नहीं, सतगुरु जयगुरुदेव ||
बार बार कर जोरि करै, सविनय करूँ पुकार ||
साध संग मोहिं देव नित, परम गुरु दातार ||
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
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Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 07 फ़रवरी 2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
नाम भेद सतगुरु बतलायो, मानो सन्त की वाणी ||
गूढ़ रहश्य अन्तर में समझो, न बनो मूढ़ अनाड़ी ||
नाम भेद सतगुरु ने दीन्हा, लगन से करो भजन प्राणी ||
नाम नमनी है सतगुरु की,बोलत तेरी जबानी||
शैल शिखर अद्भुत है नजारा, सत की नगरियालासानी||
कूड़े कचरे की गगरी फेंको, शुद्ध सूरत हो जानी ||
नाम सहारे भजन करो सब,तब मेरी प्यास बुझनी ||
भाव झरोखे सतगुरु देखो,अमिट छाप बन जानी ||
अमृत मंगल बरसे अन्तर, छक छकपियो तुम प्राणी ||
लगन युगनकी प्यास बुझाओ,बोलतसन्तजबानी||
सतगुरु चरणन शीश झुकाओ, सत की मेंहर है पानी ||

सतगुरु जयगुरुदेव
अखण्ड रूप से बिराजमान सतगुरु जयगुरुदेवमन्दिर ग्राम बड़ेला के प्रांगण में बैठे हुये समस्त नर नारी गुरु महाराज की असीम दया कृपा-अनुकम्पा आप सब पर है | आपको घना घोर अनुभव हो रहा है | आगे जो जो बाते मालिक ने कही हैं वो सब पूरी होंगी, मालिक प्रत्यक्ष प्रकट भी होंगे और सबको नाम भी देंगे, आगे चलने का रास्ता भी बतायेंगे | मालिक की हर बातें अकाट्य हैं, कोई भी बात काटने वाली नहीं | मालिक की वाणी सर्वपर्य है, सबसे ऊंची है | मालिक में मन लगाते, सुमिरन भजन गाते चलते रहो | और आगे का समय नाजुक है, इस नाजुक जीर्ण शीर्ण घड़ी में गुरु महाराज हीं मदद करेंगे, कोई दूसरा मदद करने वाला नहीं | इसलिये सब लोग लग करके सुमिरन ध्यान भजन करते चलो |

करो मन भजना सतगुरु नन्द लाल||
सत देश के सच्चे प्रीतम, यही हैं प्रभु राम ||
नाम भजन की लगन की लगा लो, बन जावेगा काम ||
नीर जो छलके तेरी गगरी से, उपवन महा सुहान||
क्यारी क्यारी दमक रही है, सच्चा है सत धाम ||
शब्द भेद के सतगुरु मालिक, जिन्होंने दियो है नाम ||
नाम दियो और भेद समझायो, पहुंचायेंगे निज धाम ||
प्रेम करो सच्चे सतगुरु से, बन जाये तेरो काम ||
डूबी तेरी कलमल में सुरतिया, शुद्ध पावन अभिराम ||
नाम सहारे भजन करोगे, मिलेंगे सतगुरु राम ||
सतगुरु सतगुरु नाम पुकारो, बन जाये सब काम ||
सतगुरु चरणन शीश झुका लो, सच्चा पावन काम ||

सतगुरु जयगुरुदेव
तन मन गुरु को अर्पण कर के सब लोग सच्चे भावना के साथ सुमिरन भाजन ध्यान में लग जाओ| कोई कोताही मत करो, चुका चाकी हिला हवाली करने से समय दुखदायी में आपका काम बनने वाला नहीं है | आपका काम तभी बनेगा जब आप सच्चाई के साथ के, कड़ाई के साथ अपने गुरु का नाम जपते रहोगे | खाली स्वांसे निकल रही हैं तो सतगुरु सतगुरु बोलते रहो | अपने सतगुरु को याद करते रहो | सतगुरु को याद करते रहोगे तो सतगुरु तुमको भी याद करते रहेंगे |
याद करो नाम सतगुरु नाम ||

करो फरियाद अपने मालिक से, याद रहे हमें नाम ||
मन चित्त आपके चरणनलागे, हे समरथ गुरु राम ||
सतगुरु मेंरे प्यारे प्रीतम, बिन तेरे क्या काम ||
मधुवन उपवन चमके चमचम, जहाँ पर बैठे प्रभु राम ||
सतगुरु देश अलौकिक अनुपम, सुन्दर छटा निदान ||
भेद भाव का काम नहीं है, सब एक रस है जाम ||
सतगुरु नाम पुकारो बन्दौ, बन जाये सब काम ||
सन्त हमारे सच्चे नामी, शरणागत अभिराम ||
भाव झरोखे करो बन्दना, मिलेंगे सतगुरु राम ||
सतगुरु जयगुरुदेव

ऐ प्रेमियों, ये मानव पोल बड़ा हींअमोलक है | मालिक ने बड़ी हीं दया कृपा करके इस मानव पोल को दिया है |इसमे जो स्वांसो की पूंजी भरी हुयी है,वो आपको भजन करने के लिये दी गयी है | आपकी समझ में कुछ आता नहीं, आप कुछ समझते नहीं कि किसलिये हमे दे दिया गया है | तो आपको समझना चाहिये कि ये स्वांसों कि पूंजी हमें नाम भजन के लिये, प्रभु भजन के लिये मिला है | यह मनुष्य शरीर अमोलक है, अनमोल है बार बार नहीं मिलता | और सबसे बड़ी चीज यह है कि सन्त सतगुरु हर बार नहीं मिलते,सबको बार बार नहीं मिलते | जिसको सतगुरु मिल जाये, उसका सारा काम बन जायेगा,नरको-चौरासी का चक्कर छुट जायेगा और परम धाम कि प्राप्ति होगी | सतगुरु के मिलने पर, सतगुरु में मन लगाना और सतगुरु के भाव भजन को गाना, सतगुरु के साथ रहना, सतगुरु के संग चलना, उनके बतायेहुये मार्ग का मार्गदर्शन करना, प्रभु के वाणियों का अनुशरण करना हीं हमारा तुम्हारा कर्तब्य है | मानव पोल अमोलक है, ऐसा अमोलक तन बार बार नहीं मिलता |अबकी बार मिला है, तो इससे अपने घर चलने का काम करो | और इस मानव अमोलक पोल को सार्थक कर दो, स्वार्थ कर दो, सत्य कर दो | सद्भाव और गुरु की वाणी से, इसको भर दो | पूरा तुम्हारा मानव तन मालिक की वाणियों से भरा होना चाहिये | जब तुम्हारी वाणी निकले तब गुरु कि चर्चा गुरु की बात निकले |

गुरु में ध्यान लाओ सब,हमे तो पार जाना है ||
नाम भजना करेंगे हम, गुरु का नाम लाना है ||
प्रेम और भाव के बस हो, गुरु को हीं रिझाना है ||
बात सच्ची यहीं पक्की, इसी में मन लगना है ||
जो भटके हैं पथिक सारे, रास्ते पर उन्हें लाना है ||
गुरु की बात संगत में, सभी जन को बताना है ||
ध्यान सतगुरु में धरना है, नाम सतगुरु का गाना है ||
सतगुरु जयगुरुदेव

मिलन होयेसतगुरु मेंहरतुम्हार||
नाम नमनी तेरी सतगुरु,पहुंचावे सत धाम ||
सुन्दर और अलौकिक देखै, सच्चा देश तुम्हार||
सदा सर्वदा उसी में खेलै, गंगा बीच मझार||
नाम दियो और भेद लखायो, पहुंचाओ वोहीं पार ||
हे दाता समरथमेंरेसाईं, बिनती सुनो हमार||

सतगुरु जयगुरुदेव
आरती सतगुरु दीन दयाला, दीन बन्द्धू सतगुरु किरपाला||
भाव झरोखे नामी आओ, सूरत हमारी को ले जाओ ||
यहीं दक्षिणा सतगुरु स्वामी, आरती जयगुरुदेवनमामि||
कोटीकोटी तुमको परानामी,मेंरे मालिक मेंरे स्वामी ||
सतगुरुजयगुरुदेवअनामी

बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 14 जनवरी 2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
विनय कर जोर प्रार्थना तेरी ||
हे सतगुरु दयाल मेंरे मालिक, चरण बन्दना फेरी ||
मन चित्त लग जाये श्रीचरणन में, नाहीं होवै देरी ||
सतगुरु मालिक मेंरे ठाकुर, नाम भजन की वेरी ||
खिलकत खिले तेरे अंगना की, नाहीं लागे देरी ||
चंचल चितवन अन्तर माहि, नाम भजन कीढेरी ||
हे सतगुरु दयाल मेंरे स्वामी, हर प्रकार मेंहररी ||
प्रीतम सतगुरु मालिक नामी, नाम भजन नहो देरी ||
सतगुरु जयगुरुदेव

चंचल चितवन अन्तर धुर को, नाम भजन गुरु नाम ||
मेंहर अलौकिक ऐसी बरसी, घट बीच राधेश्याम||
श्याम रंग जब रंगी सुरतिया, निर्मल कंचन जान||
भाग्य अलौकिक खेलै होली, चले हंसन की चाल ||
सत गुरु मूरति देख हर्षाये, कितने परम दयाल ||
रघुपति राघव पति अनामी, सतगुरु सीता राम ||
सत्य विनय की करी प्रार्थना, मन चित्त सतगुरु ठान ||
सतगुरु जयगुरुदेव
समस्त प्रेमी जन गुरु की महिमा का गुणगान करते हुये, अपने गुरु महाराज की चर्चा करते हुये, रोज रोज नित्य जब साधन भजन ध्यान में बैठे तो गुरु की बन्दना, गुरु की आराधना करते हुये गुरु का भजन करें | जब आप रोज गुरु की आराधना करोगे, गुरु मालिक हर प्रकार से दया कृपा करेंगे | पहला सुमिरन, दूसरा ध्यान, तीसरा भजन ये तीनो चीजें हैं, अन्त में जब शब्द रूप से दयाल की दया हो जाती है | सूरत जीवात्मा की आँख खुल जाती है | सुमिरन भजन ध्यान तीनो एक रस हो जाता है | हर प्रकार से दया मेंहर गुरु की बरसती है, सब कुछ एक रस दिखाई पड़ता है | समरथ संत दयाला, सतगुरु कृपाला की मेंहर जब जिस पर बरस जाये, समझो उसी दिन उसका सबेरा हो गया, उसी दिन नया जनम उसको मिल गया | हर प्रकार की कृपा गुरु शाहब करते हैं और अपने जीवों को उठाते हैं, सबका उद्धार करते हैं, सबका बेड़ा पार करते हैं, सब पर दया मेंहर करते हैं | तो सबको चाहिये गुरु नाम भजन करते हुये, गुरु की महिमा सुनते गाते हुये, गुरु में मन लगाते हुये सारे कार्य को करे | गुरु वाणी मालिक का अमृत भरा वचन है, गुरु की महिमा का गुणगान करना कोई छोटी मोटी बात नहीं, बहुत बड़ी बात है | गुरु का एक शब्द समझ में आ जाय तो सारा काम बन जाएगा | प्रेमियों, सब लोग मन चित्त लगते चलो और गुरु का गुण गान गाते चलो | गुरु क गुण गान गाते रहोगर तो सारा काम निष्कंटक निर्विघ्न हो जायेगा |

सतगुरु नाम भजन को गाओ, सतगुरु में मन को लगाओ || अन्तर्घट की है चाभी, गुरु दीन्ह दयाल निधि ने ||
सतगुरु जी में हीं मन को लगाओ, कुछ नाम भजन को गाओ ||
प्रेमियों, एक एक शब्द गुरु के याद करोगे गुरु के सत्संग को याद करोगे, गुरु के दर्शन पर्शन को याद करोगे, गुरु की वाणी को याद करोगे तो तुम्हारी याद ताजा रहेगी | हर समय मन प्रफुल्लित रहेगा कि हमने इन्हे गोहा में इस तरह देखा गुरु महाराज ने ये ये सुनाया | कानपूर में ये सुना, गुरु महाराज की इस तरह दया कृपा बरसी, कि मथुरा में इस तरह दया कृपा बरसी, बस्ती में इस तरह दया कृपा बरसी, इलाहबाद में इस तरह गये तो वहाँ पर गुरु महाराज ने इस तरह सुनाया | तो इस तरह तुम रोज रोज याद करगे तो तुम्हारी यादें ताजा होती चली जायेंगी | गुरु की वाणी ताज़ी होती चली जायेगी | हर प्रकार से आपमें दया मेंहर बरसती चली जायेगी | आपकी यादें ताजा हो जायेंगी, गुरु महाराज भी आपकी नज़रों के सामने तत्काल हाजिर हो जायेंगे | जैसे तुम याद करोगे गुरु महाराज उसी तरह तुमको दिखने लगेंगे | गुरु में मन लगाना हीं सबसे बड़ा काम है | गुरु में मन लग जाय, आपकी यादास्त ताजा होने लगे, आपको दिखाई सुनाई पड़ने लगे | सबसे बड़ी बात है नाम दान जो मिला है, गुरु महाराज ने हीं कहा कि जो नाम दान दिया है इसमें कुछ कमाई करना | तो प्रेमियों नाम दान तो मिल गया, अगर दिखाई सुनाई नहीं पड़ा, आँख नहीं खुली, अन्दर बाहर नहीं जाने आने लगे तो किस काम का, फिर मनुष्य शरीर मिलेगा, फिर जनमना फिर मरना, फिर सुमिरन भजन ध्यान और नाम दान, ये सब काम होगा | तो इससे अच्छा है इसी बार में गुरु महाराज से कृपा मिल जाय, प्रार्थन बिनती कर लिया जाय, गुरु कि मेंहर हो जाय और इसी बार में सब पास हो जाय, सब पार चले चलें, दुबारा नौबत न आये | तो इस तरह से गुरु में मन लगाते हुये, गुरु कि चर्चा करते हुये, गुरु महाराज को याद करते हुये, अपने धुरधाम, अपने देश की तरफ बढ़ाते हुये चलते चलते हैं |

सतगुरु संत अधीन हैं सारे, नाम भजन में चमके तारे ||

हम सब गुरु महाराज के सहारे हो करके, गुरु महाराज के द्वारे, गुरु के सहारे, गुरु के कृपा के साथ साथ जब अंतर में सुमिरन ध्यान भजन करेंगे, गुरु की महिमा को याद करेंगे तो गुरु महाराज की अपार अप्रबल दया कृपा बरसेगी | हर प्रकार से दया कृपा बरसेगी, पूरी की पूरी मेंहर आयेगी और उस मेंहर के साथ अपने घर की तरफ, धुर की तरफ बढ़ने लगेंगे |

प्रथम अलौकिक अदभुत दर्शन, सतगुरु जी का जान ||
सतपथ सत प्रभु जी मिलेंगे, हो पूरा सम्मान ||

सबसे पहले गुरु महाराज के दर्शन पर्शन होंगे, रोज रोज गुरु महाराज के दर्शन होने लगेंगे | गुरु महाराज से आप मिलने लगोगे | गुरु की चर्चा करने लगोगे | गुरु की दया बरसाने लगेगी | तत्पश्चात आपको उस प्रभु मालिक के दर्शन होंगे | गुरु की दया से गुरु महाराज हीं ले जाएंगे दर्शन करवायेंगे | हर प्रकार से दया मेंहर करेंगे और आपका दर्शन पर्शन वहाँ पर प्रभु से होने लगेगा | जब प्रभु के दर्शन होने लगेंगे तो आप रोज स्वर्ग बैकुण्ठ और ऊपरी मण्डलों में आप जाने आने लगेंगे | गुरु की महिमा बरसने लगेगी | गुरु की कृपा आने लगेगी | गुरु कृपा से हीं सारा काम बनता है | गुरु की मौज में हीं हम सब रहते हैं, आते और जाते हैं, रोज नित प्रति जब गुरु के अधारे हैं, गुरु के द्वारे हैं तो गुरु महाराज हीं दया कृपा करेंगे | गुरु महाराज की दया कृपा से हीं हमको सबको आगे बढ़ने को मिलेगा | गुरु की दया से हम आगे चलेंगे | बिना दया कृपा के गुरु के एक पत्ता भी हिलता नहीं है | अगर हम चाहें कि ये हो जाय वो जाय, नहीं होगा | गुरु महाराज चाहेंगे तत्छण होगा और उनकी दया मेंहर से सब कुछ छूट जायेगा | जो चाहोगे कि ये छूट जाय तो वो छूट जायेगा, पर इच्छा शक्ति होनी चाहिए | अगर तुममे विकार है तो अपने गुनाहों की माफ़ी माँगते रहो कि हे मालिक, मुझसे ऐसा नहीं हो रहा, मुझ पे दया कृपा कर दो | आप दयाल हो, हम तो पापी जीव हैं, हम पर दया करो |हे मालिक, हे मेंरे खुदा, हे मेंरे दाता, हे मेंरे सतगुरु हर प्रकार से दया कृपा करो, हर दम दया कृपा करो |

दया निधि सतगुरु दीना नाथ ||
दया मेंहर सतगुरु जी की, निधि हम सबके साथ ||
नाम बताओ भेद बतायो, रख्यो शिर पर हाथ ||
निरमल निरमल भई सुरतिया, चले गुरु के साथ ||
सतगुरु आगे सूरत है पीछे, मंगल देश को जात ||
प्रभु प्रार्थना गाती जाती, रोज होत प्रभात ||
सतगुरु दया बिराजै सब पर, सब पर रक्खै हाथ ||
सतगुरु मालिक परम दयाल, हैं कृपाल रघुनाथ ||

सतगुरु जयगुरुदेव
गुरु महाराज की असीम अनुकम्पा और दया कृपा चौबीसो घण्टे हर प्राणी के ऊपर बरसती है, जो गुरु महाराज को याद करते हैं | उनके शरणागत रहते हैं | उनका चितवन करते हैं, उनका नाम भजन गाते हैं | इन सब चीजों से गुरु महाराज प्रशन्न होते हैं, दया मेंहर करते हैं और उस प्राणी को दर्शन देते हैं | बहुत से प्राणी ऐसे हैं, बहुत से ऐसे जीव हैं, बहुत से गुरु भाई बहन हैं, जिनको नित प्रति गुरु महाराज के दर्शन पर्शन होते रहते हैं | बताते रहते हैं कि आज गुरु महाराज ने ये कहा, कल गुरु महाराज ने ये कहा, परसों गुरु महाराज ने वो कहा | सब कुछ सूचनायें मिलती रहती हैं गुरु महाराज की और गुरु महाराज की दया कृपा बरसती रहती है | सच्ची बात तो ये है हम सब का मन कायदे से नहीं लगता |अगर मन गुरु में लग जय, गुरु शरणागत हो जाय, तो हमारा काम मिनटों में बन जाय | ज्यादा देर की बात नहीं है, मिनटों में काम बनता है |जैसे, एक घड़ी आधी घड़ी, आधी में पुनि आध | गोस्वामी संगत साध की, कटे कोटि अपराध | तो प्रेमियों, हमारे अपराध, हमारी गलतियों को क्षमा करने के लिये, हमारे गुनाहों को माफ़ करने के लिये, हमारे दाता दयाल सतगुरु प्रकट हुये | आज भी हैं, हर प्रकार से दया मेंहर कर रहे हैं |हमको तुमको चाहिये कि इन्हीं के शरणागत रहें और इनके साथ चलें | इनकी बताई हुयी, गुरु की बताई हुयी वाणी को याद करते रहें | हर भाईयों को कुछ न कुछ बताते चेताते चलें और खुद भी चेतते चलें | कहीं गिरने की जरुरत नहीं, गुरु ने जो रास्ता दिया है उसी रास्ते पर चलने की जरुरत है | हर प्रकार से गुरु निधि को लेने की जरुरत है |

नाम निधि सतगुरु जी ने दीन्ह ||
नाम निधि सच्ची है पावन, ध्यान भजन मन लीन ||
चंचल चंचल तेरो स्वभाव, उसको मृदुवल चिन्ह ||
मृदु भाषा उपजी सतगुरु से, नाम भजन मन कीन्ह ||
दया कीन्ह सतगुरु साईं ने, मन चित्त सब हर लीन्ह ||
दिव्य अलौकिक देश दिखायो, सतगुरु मेंहर है कीन्ह ||

सतगुरु की मेंहर से दिव्य अलौकिक सब कुछ दिखाई सुनाई पड़ने लगा, स्वर्ग बैकुण्ठ बहिष्यत और जो भी मण्डल हैं ऊपर के, सब दिखाई सुनाई पड़ने लगे | मालिक की दया कृपा बरसने लगी और ये सूरत जीवात्मा आने जाने लगी | गुरु कि कृपा होने लगी, गुरु की मेंहर होने लगी | जब गुरु की मेंहर होने लगी, गुरु आदेश हुआ कि तुम सबको बताओ कि हमे अनुभव होता है, गुरु महराज इस तरह इस तरह दर्शन देते हैं | जब हम खोल करके बतायेंगे, तभी हमारे गुरु महाराज समरथ होंगे कि उनकी दया मेंहर से हमे इस तरह दिखायो पड़ता है सत्संगी प्रेमियों को चेतना के लिये | जिस तरह सुनाई पड़ता है गुरु की दया बरस रही है, तब तुम्हारे गुरु की समरथता सच्ची होती है | वरना कहेंगे, गुरु महाराज असमरथ थे| तो समरथता के लिये हीं अनुभव कराते हैं और अनुभव की दया मेंहर बताने के लिये हीं गुरु महाराज ने बताया कि तुम्हे अनुभव जो हो वो बताओ खोल करके, उससे तुम्हारा बढ़ेगा, घटेगा नहीं | तो अनुभव यहाँ पर आने पर, सुमिरन भजन ध्यान करने पर, सबको लगभग होता है |जिसका मन ख़राब होता है, जो नहीं चाहता कि हमे भी अनुभव हो तो उसके लिये क्या कहा जाय | और जिसके मन सही होते हैं कि हमे अनुभव करना है, गुरु के सामने रोता है गिड़गिड़ाता है, दो बून्द आंसू के गिरता है, उस पर गुरु महाराज की दया कृपा हो जाती है |

सतगुरु जयगुरुदेव
आरती सतगुरु नामी, की सतगुरु सतनामी की ||
बन्दना सतगुरु नामी की, गुरु मालिक और अनामी की ||
नाम धुन सतगुरु मालिक की, सत्त के दाता स्वामी की ||
सत्त के सतगुरु हैं मालिक, सत्त प्रभात सतगुरु की ||
सतगुरु के संग है जाना, सतगुरु की आरती गाना |
सतगुरू चरणन शीश झुकना, चरण बन्दना सतगुरु की गाना ||
आरती सतगुरु सत्त अनामी की, प्रभु सतगुरु सतनामी ||
सत्त के दाता नामी की, अनामी सतगुरु नामी की ||
मेंहर सतगुरु सतनामी की, आरती सतगुरु नामी की ||
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
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Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 13 जनवरी 2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
सतगुरु नाम आधारे रहो प्रेमियों ||
दया मेंहर पावन सतगुरु की,मेंहर जो बरसे आम ||
आठोयाम ये पावे सुखवा, सुरतिस्त्रोत गुरु धाम ||
सतगुरु जी में लग जाये नेहियाँ, सतगुरु हीं प्रभु राम ||
सतगुरु जी की महिमा न्यारि, सूरत चढ़त है अखण्ड अटारी ||
सतगुरु की देखै लीला भरी,अजब है जहाँ बहार||
सतगुरु प्रीतम बैठे मालिक,अखण्ड देश के मंजार||
सतगुरु चरणनकरीबन्दना,हो गयो घट उजियार||

सतगुरु जयगुरुदेव
सतगुरु नाम पुकारो सभी भईया, सतगुरु है अपने नईया के खेवईया||
नाम बतायो भेद समझायो, हर दुःख सुख में होंवे सहईया||
सतगुरु प्रीतम प्यारे हैं भईया||
लगन लगाकर करो सब भजनियाँ,कटी कटीजावें मैलईया||
सतगुरु नाम भजन को करो भईया||

सतगुरु जयगुरुदेव

अखण्ड अनाम बृहदसतनामा, सच्चा सतगुरु का प्रभु धामा||

अखण्ड अनामी सतगुरु, जो महा प्रभु अपने मानव पोल पर बिराजमान हो करके जिन्होने सत्यनारायण, सत्य के नारायण जन पातक हरणा| जन के कल्याण करने के लिये नर रूप रख करके स्वामी महाराज पधारे | अखण्ड अनामी, सतगुरु सतनामी, आदर्श पुरुष कि उन्होनेसतपथ चलाया, सत मार्ग का काम किया,अध्यात्मवाद जगाया, वो अपने गुरु महाराज, सतगुरु को कोटि कोटि नमन करते हैं | चरण बन्दना और अपने गुरु पर बलिहारी जाते हैं कि हे अनाम पुरुष, हे सतनाम प्रभु, हे अलख अगम अनाम प्रभु, आपने बहुत बड़ी दया मेंहर की जो हमको नाम दिया और नाम के सहारे हमको लगा दिया |

लगो निज चरण सतगुरु के, पार उस घाट पर जाना ||
जहाँ चन्दा न चुटकी है, लगेगा नाम का खजाना ||
सच्चे सतगुरु मालिक प्रीतम, वहीं उस पार ले जायेंगे ||
मेंहर सच्ची गुरु की हो, दया की धार आयेंगी ||

सच्चे सतगुरु, सच्चे मालिक की दया की धार चौबीसो घण्टे बरसती रहती है | हम सब प्राणियों पर, हम सब प्रेमियों पर मालिक की अखण्ड दया कृपा रहती है | मालिक हर प्रकार से दया कृपा करते हैं, अपने बच्चो की देखभाल हर तरह से करते हैं | जिस तरह कुम्हार बर्तन बनाता है और बरतन बनाते समय ऊपर से ठुकाई करता है,निचे से हाथ लगायेरहता है | उसी तरह गुरु महाराज दया मेंहर कल मल साफ करते हुये सूरत जीवात्मा में जान डालते हैं, हर प्रकार से उसको पकाते हैं और सुसज्जित करते हैं अपने देश चलने के लिये| बताते हैं कि तेरा देश, उस देश की तरफ है, सच्चा देश सच खण्ड है | अपने निज धाम चलने की तैयारी कर | लग करके सुमिरन भजन ध्यान में मन लगा करके पूरा भजन करके, अपने कर्म कर्जों को छुट्टी सारा करके, अपने देश को चले चलो | यहाँ का जो लेन देन का कर्जा है उसको निपटाते हुये, अपने देश की तरफ अग्रसर हो | अग्रसर होते हुये अपने निजधाम की तरफ पधारो |निजधाम की तरफ जब चलोगे तो कोई मिलौनी नहीं, कोई दुःख तकलीफ नहीं, कोई हारी बीमारी नहीं, कोई तड़प परेशानी नहीं | वहाँ हर प्रकार से शुखहींशुख है, किसी प्रकार का कोई दुःख नहीं | ऐसा गुरु महाराज बताते हैं और सबका मन अपनी तरफ एकाग्रचित्त करते हुये समझाते हैं कि मन सतगुरु में लगाना और किसी चीज नहीं देखना | सतगुरु को देखोगे, सतगुरु को प्रभु रूप, सतगुरु को गुरु रूप, सतगुरु को बाबा रूप, सतगुरु को जिस रूप में देखोगे तुम्हें उसी रूप में प्राप्ति होगी | अगर सतगुरु को हीं सब कुछ मानोगे प्रभु, भगवान, खुदा, मालिक, ईश्वर, प्रभु तो तुम्हें ईश्वर,प्रभु, मालिक, खुदा, राम, कृष्ण मिल जायेंगे |अगर तुम बाबा को बाबा समझते हो तो बाबा तो बाबा हीं तुमको बाबा हीं समझ आएगा | तो समझने की जरुरत है, लग करके सुमिरन भजन ध्यान करने की ज़रुरत है, गुरु की वाणियों को याद करने की जरुरत है | अपने गुरु पर बलिहारी जाने की जरुरत है कि धन्य हैं दाता दयाल जिन्होंने सच्चा नाम दिया और हर प्रकार से भेद बताया, अपने घर चलने का रास्ता समझाया | तो जब रास्ता समझा दिया, बता दिया तो उस रास्ते पर चलने का हमारा तुम्हारा परम कर्तब्य बनता है कि नाम लिया है तो अपने घर की तरफ चलें |

चलो धुर धाम को भाई, बुलावा आया सतगुरु का ||
भजो अपने नयन नक्श पर, सूरत के साज को देखो ||
पकड़ कर गगन के शब्दा, उधर धुर धाम को देखो ||
महा महिम बैठे हैं सतगुरु, दरशपरष निज धाम को देखो ||
सच्चे मालिक अपने दाता, दाता के धाम को देखो ||


सतगुरु जयगुरुदेव
मिलन करे मनवा सतगुरु नाम ||
साचा नाम बतायो सतगुरु ने, सच्चा है हर काम ||
ध्यान भजन अन्तर की पूंजी, शब्द है अन्तर जान ||
घण्टा शंख बजे गगन मंझारी, किंगरी सारंगी करे किलकलरी||
बंसी बीन की तान ||
चढ़ी सुरतिया सत्त देश में, सच्चा हो गयो ज्ञान ||
पुरे सतगुरु मालिक पायो, हरषानी पद मान ||
सतगुरुचरणनकरीबन्दना, सच्चा सतगुरु जान ||

सूरत जीवात्मा, साधक और साधिकाएँ, प्रेमी सत्संगी गुरु भाई बहन, जिन जिन को गुरु महाराज की दास प्राप्त हो गयी और उन्होंने सुमिरन भजन ध्यान को अपना रास्ता चुन लिया, उसी में मन लगाया | गुरु महाराज ने दया मेंहर की और उनको रास्ता देते गये और नित्य प्रति उनकी चढ़ाई होती चली गयी | धीरे-धीरे वो सत्त धाम को पहुँच गये और अपने सतगुरु को पूरा पाया और सब खोल करके गाना शुरु किया कि हमारा गुरु समरथ है | जिस तरह मीराबाईने गया "पायो जी पायो मैंने नाम रतन धन पायों" | और उस धन के बारे में कहा, कोई न लूटता है और न कोई घटा सकता है | दिन प्रतिदिन ये दूना सवाया होता चला जाता है, घटता नहीं है | हमारे गुरु की देन है, हमारे गुरु की दया कृपा है | गुरु महाराज ने जो कुछ दिया है दिन प्रतिदिन बढ़ता चला जाता है, घटता नहीं है | तो ऐ प्रेमियों, जो गुरु महाराज ने हमको तुमको दिया है, वो नाम भजन करने पर घटता नहीं है, बढ़ता हीं जाता है | सब लोग दिन प्रतिदिन मन लगा करके, अपने नाम भजन को बढ़ाते रहो, गुरु की कृपा पाते रहो, गुरु महाराज दयाल हैं |हर प्रकार से कृपाल हैं, सबको दर्शन देते हैं | सब लोग दर्शन-पर्शन करते रहो अन्तर्घट में और गुरु की महिमा का गुणगान करते हुये, सुमिरन भजन ध्यान करते हुये, निज घाट में अपने धाम की तरफ बढ़ते रहो | जब तक ये स्वासों की पूंजी है, तब तक इस देश में रहते हुये, सांसारिक काम काज निपटाते हुये और गुरु के साथ रहते हुये, सुमिरन भजन ध्यान करते हुये, अपने निज घर की तरफ को हमेशा उन्मुख रहो कि हमे अपने घर जाना है, ये घर बेगाना है | यहां कोई नहीं, वहाँ अपना सच्चा प्रभु, अपना सच्चा मालिक,अपना सच्चा सतगुरु बैठा है | वहीं हमारा घर है, वहीं हमारा मालिक है, वहीं हमारा सतगुरु है | वहीं हमारे दाता दयाल हम पर दया करेंगे और हमे अपने घर ले जायेंगे, पार करवायेंगे, दया मेंहर करेंगे |

दया मेंहर सतगुरु जी की सच्ची, सच्चा बिन्दु अधार||
भज भजवचना मृत के प्याले, नाम लेत उस पार ||
सच्चे सतगुरु मिलै ठिकाना, पहुँच जाओ उस पार ||

सतगुरु जयगुरुदेव

कहने का मतलब हर तरफ से एक हीं बात आती है कि भजन करना हीं है, चाहे इधर से करो, चाहे उधर से करो | गुरु महाराज का नाम लेना है, उस प्रभु का नाम लेना है, सत्य का नाम लेना है, सत्यता को अपनाना है, सत्यता के साथ हीं रहना है, सत्यता के साथ चलना है, सत्यता में हमेमिलना है | ये सराय है, यहाँ सराय में दो दिन का बसेरा है | दो दिन के बसेरे के अन्दर, यहाँ का काम और अपने घर जाने का काम दो दिन में कर लेना है | जैसे गुरु महाराज ने कहानी सुनायी कि एक राज था | उस राज में बादशाह कोई भी मिल जाये नदी के किनारे, उसको पकड़ के लाते थे और उसको बादशाह बना देते थे | जब राजा बुढ्ढा हो जाता था तो, नदी के उस पार छोड़ देते थे | नदी के उस पार घनाघोर जंगल, वहाँ पर जानवर हिंसक रहते थे | उसको मार डालते थे, खा जाते थे | तो धीरे से एक दिन समय आया | राजा बुढ्ढा हो गया तो उस पार नदी के छोड़ दिया | तो दूसरे दिन खोज हुयी कि जो कोई सुबह सुबह मिल जाये उसको पकड़ के लाओ, उसको राजा बनाया जायेगा | तो एक बन्दा नदी के किनारे मिला तो उसको पकड़ करके ले गये | कहा भाई, हमको कहाँ ले जा रहे हो, कहा तुमको राजा बनायेंगे हमारे देश का ये नियम है | तो कहा तुम्हारा पुराना राजा कहाँ गया, कहा भाई वोबुढ्ढा हो गया, नदी के उस पार जंगल में छोड़ दिया गया | तो कहा, जंगल में क्या करेगा | कहा, हिंसक जानवर उसको खा जायेंगे और क्या करेगा | जब राजा वहाँ बन गया तो उसने क्या किया | राज राजाओं से फ़ौज फाटा भेज करके, लेबर, नौकर चाकर भेज करके जंगल के उस पार गया | कहा, इस जंगल को काटो | उसने जंगल को कटवाया और वहाँ बस्ती बसा दी | और वहाँ पर बड़ा राज महल बनवा लिया | जब उसका समय पूरा हुआ तो उसे भी छोड़ने नदी के उस पार गये, तो उसका तो सब कुछ बना था | तो अपने घर में वो चला गया और मौज से रहने लगा | इधर अपना दूसरा राजा बन गया | तो प्रेमियों, अगर तुम्हारा यहाँ शरीर छूटता है और शरीर छूटने के बाद तुम कहाँ जाओगे, किस देश में जाओगे, कहाँ तुम्हार घर है कि कहाँ के रहने वाले हो | इन चीज को तुम सोचोगे नहीं, समझोगे नहीं तो तुम्हार काम कैसे बनेगा | जब ये सूरत जीवात्मा निकलेगी तो कहाँ जायेगी, किसको किस चीज की जरूरत है | तो सबसे बड़ी चीज है भजन की जरुरत है | इसका घर है, इसका स्वरुप है, इसका रूप है | तो ये रूप स्वरुप और जिस स्वरुप में सूरत जीवात्मा निकलेगी, तो अपने घर सत्तधाम, सत्तधाम जायेगी | सत्तधाम तभी जायेगी जब सतगुरु से नाम मिलेगा | भजन करोगे गुरु की दया कृपा होगी, गुरु महाराज तुमको पार करेंगे तुम अपने घर जाओगे| यहाँ रहोगे, करते-करते काम शरीर बूढ़ा हो जायेगा फिर धीरे-धीरे मोह माया में फसते चले जाओगे और एक दिन ऐसा आयेगा कि शरीर छूट जायेगा, यमराज पकड़ करके ले जायेंगे | वहाँ फैसला करेंगे, फैसला सुनायेंगे, जो तुम्हारे भाग्य में, जो तुमने किया होगा, उसी के अनुसार, या तो पाप किया या पुण्य किया | पाप किया है तो नरकों में चौरासी में, पुण्य किया है तो स्वर्ग बैकुण्ठ में भोग करो, उसके बाद मृत्यु लोक में जनम लो | फिर मरो जनमो और मरो | जनम मरण से छुटकारा सिर्फ समरथसन्त सतगुरु, दाता दयाल अपने सतगुरु स्वामी जयगुरुदेव दिलाते हैं | ऐसे तमाम सन्त आये, जिन्होंने जनम-मरण से छुटकारा दिलाया | आगे भी सन्तों का सिलसिला आने का बन्द नहीं होगा | गुरु महाराज आ करके बैठे हुये हैं, जिस दिन उनकी मौज हो गयीवो प्रकट होंगे | हम सब उनके साथ होंगे और गुरु महाराज हमसब पर दया करेंगे, हम सब का उद्धार करेंगे |
सतगुरु जयगुरुदेव

मंगल पावन सतगुरु नामी, चरण बन्दना आरती स्वामी ||
हे सतगुरु सतनाम अनामी, कोटि कोटि तुमको परनामी||
श्री चरणन में शीश झुकाऊँ, आरती बन्दना सतगुरु गाऊँ ||
दया मेंहर मैं आपकी पाऊँ, आपके चरणन घुल मिल जाऊँ ||
सतगुरु चरणन शीश झुकाऊँ ||
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 12 जनवरी 2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
भेद तो सतगुरु जी ने दीन्ह||
सच्चे साईंसमरथ दाता, रघुपति सतगुरु जिन्ह||
दया मेंहर बरसी है उनकी, नाम रतन धन दीन्ह||
एक एक वेद खोल समझायो, शब्द में बाजे बीन ||
शब्द की लड़ियाँ शब्द की झाड़ियाँ, शब्द शिखर लेव चिन्ह ||
सतगुरु जी के नाम भजन में, तुम सब होवो लीन ||
नाम भरोसे रहियो सतगुरु के, बन करके सब दीन ||
नाम भजन के अमृत मोती, बरसे बदरियाझीन||
सतगुरु सतगुरु नाम पुकारूँ, सतगुरु में हो तल्लीन ||

सतगुरु जयगुरुदेव
मनन मन सतगुरु नाम भजनिया||
नाम भजनियाअन्तर्घट की, अन्तर चमके चदनियाँ||
लगन मगन हो नाम पुकारो, सतगुरु नाम भजनिया||
समरथसन्त की बात को जोहो, अन्तर चमके चदनियाँ||
सच्चे मालिक सतगुरु जी से, मिला है नाम भजनिया||
नाम अधारे गुरु के प्यारे, चमके जहाँ पेचदनियाँ||
सतगुरु जी से नेह लगाओ, बन जाये नाम भजनिया||

सतगुरु जयगुरुदेव

उधर का रास्ता देखो, देश सच्चा वो पवन है ||
गगन के बीच एक तारा, घाट कितना लुभावन है ||

गुरु महाराज के कहने के अनुसार, उस तरफ देखो, अपने घर की तरफ, धुर की तरफ देखो | उस तरफ को चलना सुरु करो, अपना घर बड़ा हीं पावन है, अपना देश बड़ा हींलुभावन है, मन मोहक है, अति दया कृपा वहाँ बरसती है | आठोयाम वहाँ से सूरतें अठखेलियां करती रहती हैं | हर प्रकार की दया मेंहर सतगुरु की बरसती रहती है | ऐसे सच्चे धाम को चलने के लिये तैयारी करो | उधर उस धाम में सब कुछ है, कोई चीज की कमी नहीं, हर प्रकार से सुसज्जित तुम्हारा घर तुम्हारा देश है | तुम अपने देश अपने सतगुरु साईं के साथ अपने सत्य धाम की तरफ चलो | अपने सत्य धाम में सब कुछ प्रफुल्लित होते हुये हर प्रकार से साज सज्जा से सजा हुआ देश जो मन मोहक मन्त्र मुग्ध कर देने वाला है | प्रभु की दया कृपा, सतगुरु की दया कृपा उधर हीं ले जाने के लिये है |

प्रथम राम के दरश परश हों, ओंकार की चढ़ाई || अण्ड लोक की महिमा न्यारी, ब्रम्ह पदा है भारी ||

इधर सूरत जीवात्मा स्वर्ग-बैकुण्ठ देखते हुये, प्रभु राम के दर्शन करती, पर्शन करती हुयी धीरे-धीरे से वहाँ राम के यहाँ जाती है | राम प्रभु के देश को खूब देखती है | इस त्रिलोक की महिमा को जानती समझती हुयी सूरत जीवात्मा, साधक साधिकायें वहाँ गुरु महाराज के बताये हुये नियम के अनुसार उनकी दया मेंहर से प्रभु राम के देश पहुँचते हैं | प्रभु राम का दर्शन करते हैं, प्रभु राम बड़े खुश होते हैं | बड़ी हीं दयाल प्रबृत्ति है प्रभु राम की, बड़ी हीं दया मेंहर करते हैं | सतगुरु के साथ में सूरत जीवात्मा वहाँ जाती है | इधर यहाँ से स्वर्ग देखती है, बैकुण्ठ देखती है, शिवपुरी बम बमभोलेनाथ की नगरी को और बम बमभोलेनाथ की दया दुआ लेते हुये आगे को बढती चली जाती है | हर प्रकार से सूरत जीवात्मा साधक साधिकाओं पर गुरु महाराज की दया मेंहर और सभी देवी देवताओं की दया मेंहर बरसती रहती है | गुरु महाराज दया मेंहर करते चले जाते हैं और वोबलवती होती चली जाती है | धीरे-धीरे चलते-चलते वो ओंकार के देश में पहुंचती है जहां सतगुरु ने उसको अण्ड लोक बतलाया है कि अण्ड लोक है | वहाँ सब सूरतें लालो लाल हो जाती हैं | ऊँची नीची घाटियों से होती हुयीबंकनाल से पार हो करके, दरवाजे को फोड़ करके वो ओंकार देश में सतगुरु के साथ पहुँचती है | सतगुरु का दर्शन करती है | फटक शीला पर गुरु महाराज की बैठक है और उस तक पश्चात वहाँ सत्संग सुनती है | गुरु महाराज के सत्संग सुनते-गुनते काफी दिन बितते हैं तब वो त्रिवेणी संगम पर पहुँचती है और वहाँ त्रिवेणी संगम जो है फक्क सफ़ेद, बिलकुल साफ़ निर्मल पवित्र, उसमे स्नान करती हुयीपारब्रम्ह के दर्शन को करती है | ब्रम्ह के दर्शन को करके बड़ा हीं खुश होती है | ब्रम्ह ऋषि कि पावर आ जाती है | दाता दयाल की कृपा हो जाती है | दाता दयाल की कृपा हमेशा बनी रहती है | सूरत जीवात्मा धीरे-धीरे आती जाती रहती है और बलवती होती चली जाती है, और अपने गुरु का गुणगान करती है |

चरण रज पायो सतगुरु दयाल ||
दया मेंहर से देश दिखायो, देशवा रहो लालो लाल ||
भर त्रिवेणी की हो स्नान, कल मल कीन्हो नाथ ||
खूब सत्संग सत गुरु जी ने दीन्हो, दया कीन्हदीना नाथ ||
सतगुरु संत हमारे पुरे, निर्मल धार की दात||
मन चित्त रंग रोगनजावे, नाम रंज के साथ ||
नाम नामनी लगी सतगुरु की, दया मेंहर गुरु हाथ ||

सतगुरु जयगुरुदेव
प्रेमियों, जितना गुरु महाराज प्रेम हमको तुमको करते हैंउतना नहीं कोई करता | गुरु महाराज की दया कृपा के बिना कोई भी हमको कुछ देने वाला नहीं है | सब गुरु महाराज की दया कृपा से मिलता है | गुरु महाराज हीं दया कृपा करते हैं तो हमारे सारे काम बनते जाते हैं | हर प्रकार से गुरु महाराज सर्वज्ञ, हर प्रकार से दया मेंहर करते हैं | सत्य नारायण स्वामी, जन पातक हरणा| सत्य के नारायण हैं, सत्य के स्वामी हैं, सत्य के स्वामी सतगुरु हैं | देखो यहाँ से स्वर्ग ले जाते हैं,बैकुंठ में विष्णु भगवान के दर्शन करवाते हैं | चर अचर में जो कुछ है सब कुछ की गणना महिमा को सतगुरु दिखलवाते हैं | साथ साथ रहते हुये स्वर्ग की गणना,बैकुंठ की गणना,बैकुंठ के दर्शन, स्वर्ग के दर्शन,शिवपुरी के दर्शन, बम बममहादेव के दर्शन, माता पार्वती के दर्शन,आद्या महाशक्ति के दर्शन,सबके दर्शन गुरु महाराज हीं करवाते हैं कोई दूसरा नहीं करवाता | गुरु की दया मेंहर से सारे काम बनते चले जाते हैं | गुरु महाराज हींसबको ले जाते हैं इस पार से उस पार, पार देश में | मालिक की दया मेंहरहीं पार करवाती है | मालिक हीं सर्वज्ञ साथ रह करके, उँगली पकड़ करके इस पार से उस पार करवाते हैं और दया मेंहर करते जाते हैं | प्रेमी साधक धीरे-धीरे गुरु महाराज की मोहन मूरत को देखते हुये, खुश होते हुये आगे को बढ़ता चला जाता है | आगे गुरु महाराज की फटकार लगे तो समझो मीठे वचन हैं | मीठे वचन को सुनते हुये सूरत जीवात्मा बड़ी हीं रसीली और झूमती |

झूमती चली सुरतिया आगे, नाम जहाज जहाँ पर लागे||

सूरत जीवात्मा उस स्थान पर पहुँचती है जहाँ पर नाम जहाज लगा हुआ है | नाम जहाज के मालिक सतगुरु स्वामी जयगुरुदेव हैं | वहीं उस पर बैठने को बताते हैं | नाम जहाज के में बैठने वाले साधक साधिकाये, प्रेमी जीवात्मायें, सतगुरु के बंदे सतसंगी जन होते हैं | और देश दुनिया वाले तो उनकी नकल करके भी असल काम कर लेंगे, पर तुम असल करोगे तो तुम्हारा नकल कर के पास हो सकते हैं | तो प्रेमियों सच्चाई यहीं है, कड़ाई यहीं है कि गुरु महाराज के बताये हुये नियम के अनुसार सारी की सारी बातों का पालन किया जाय| गुरु महाराज के बताये हुये रास्ते पर चला जाय| शाकाहारी शदाचारी का प्रचार प्रसार करते हुये, गुरु महाराज का सत्संग भजन, सुनते सुनाते, भजन करते कराते अपने सूरत जीवात्मा का उद्धार, के उद्धार हेतु सारा काम करें |

विनय मन लागो सतगुरु नाम ||
विनय प्रार्थना कर सतगुरु की, पहुँचो सतगुरु धाम ||
सच्चे मालिक मिल जायें स्वामी,जिननेदियो है नाम ||
नाम के दाता सतगुरु स्वामी, संत हमारे साथ ||
सतगुरु दया मेंहर होये तेरी, खोलो आन करो ना देरी ||
दर्शन हो दीनानाथ ||
दरश परश कर मन हर्षावे,चरणन शीश झुकावे||

सतगुरजयगुरुदेव
अधर की है बतिया सतगुरु दयाल ||
ना संसार जगत में फ़साना, चलना सतगुरु के द्वार ||
ऐसी जतन करो हे भाई, बन जाये सतगुरु काज ||
मंगल चितवन हो अन्तर में, सच्चे बाजै साज ||
सतगुरु मेंहरबिराजैहरदम, दया मेंहर के साथ ||


सतगुरु जयगुरुदेव
आरती सतगुरु सत्त गोसाई, सतगुरु समरथ संत हे नामी ||
दीन दयाला तुम किरपाला, सतगुरु दीनानाथ ||
आरती चरण बन्दना नामी, हे सतगुरु जी नाथ ||
सतगुरु सतगुरु चरण बन्दना, सतगुरु सत्य अनाम ||
सत्त के चरणन शीश झुकाऊ, सतगुरु संत हमार||

बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 11 जनवरी 2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
भजनिया सतगुरु जी का ध्यान ||
भाव भजन सतगुरु का साँचो, अन्तर में कल्याण ||
सतगुरु सतगुरु नाम जुहारो, सत्त प्रेम और भाव ||
लगन युगन की प्यास बुझावे, सतगुरु जी मिल जाय ||
भाव झरोखे करी बन्दना, अंतर्घट के ठाँव ||
सतगुरु स्वामी अपने मालिक, सच्चे सतगुरु राम ||
नाम भजन सच्चा सतगुरु का, शीतल मिलती छाँव ||
कोमल कोमल शब्द की कल कल, अन्तर्घट दरम्यान |
भाव झरोखे साधक सुनियो, सादर चतुर सुजान ||
सच्चे मालिक के भीग जावे, नहीं रक्खें कोई मान ||
मान बड़ाई छोड़ के बंदौ, जपे सतगुरु का नाम ||

सतगुरु जयगुरुदेव
अधारे सतगुरु जी के सहारे ||
सच्चे सतगुरु प्रीतम साईं, मिलन होय घट गुरु द्वारे ||
मालिक जी की मीठी वाणी, सुनियोसचर सहारे ||
नाम को पाओ अन्तर्घट में, नाम जड़ित सब मानो ||
जानो महिमा अपने नामी की, नाम भजन मन ठानो ||
गुरुवर साँचे शब्द सनेही, गुरु का कहना मानो ||
नाम नामनी लगे नामी की, सच्ची बात ये जानो ||
सतगुरु जयगुरुदेव

भाव से सिंधु में जाना, बिंदु प्रमाण सच्चा है ||
भाव से, शीतलता से, अन्तर्घट में बैठ करके, उस बिंदु को निरखते परखते रहते हैं | बिंदु के अधारे और बिंदु से उस पार जाते हैं, गुरु की महिमा को देखने के लिए | गुरु महराज ने जो कुछ बताया है, उस पसारे को उस सच्ची चीज को पाने के लिए | बिंदु आधार पर एकाग्रचित्त होते हैं और बिंदु पर निशाना साधते हैं | फिर बिंदु में निशाना साध करके उस पर निशाना लगा करके, उसी निशान से सूरत-जीवात्मा उस पार जायेगी | वैसा काम करते हैं जैसा सतगुरु बताते हैं |
गुरु का भाव कर भजना, सूरत को चढ़ा दे गगना ||

सच्चे भाव भजन से, सच्ची लगन से, लगन लगा करके, भजन करके इस तरफ जीवात्मा को उस तरफ गगन के बीच में चढ़ा देने का तुम्हारा काम है | गुरु महाराज का पूरा का पूरा कर्तब्य जो बनता है, उस कर्तब्य का निर्वाह गुरु महाराज करते हैं, पूरी दया कृपा करते हैं | पूरी दया कृपा के साथ किस तरह जीवात्मा को आगे बढ़ाते हैं, इस पर विशेष दया कृपा करते हैं | अगर आप मन चित्त लगा करके गुरु का ध्यान करते हो तो गुरु महाराज तुम्हारा ध्यान करते हैं, इसमें कोई शंका की बात नहीं है | और गुरु महाराज की दया कृपा हर प्राणी हो मात्र को मिलता है | हर प्रेमी चाहे वो स्त्री हो या पुरुष हो, सब पर गुरु महाराज की बराबर विशेष दया कृपा बरसती रहती है | जो भाव भजन करता है गुरुमहाराज को हाजिर नजीर मान करके, हर प्रकार से गुरु महाराज में मन लगाता है और गुरु महाराज के चरणो में अर्पित रहत है |

सोच रक्खो समझ करके, चलोगे धाम न्यारे को ||

सोच समझ ऐसी रखो कि हम अपने देश को जायेंगे, अपने गुरु महाराज के साथ जायेंगे, गुरु का हीं भजन गाएंगे और उस धाम को जायेंगे जहाँ पर गुरु महाराज ने बताया है | जो हमारा सच्चा घर है, अपने हीं घर और धुर को चलेंगे गुरु महाराज के साथ | गुरु महाराज पूरी की पूरी दया कृपा करेंगे हर प्रकार से | तो हर प्रकार से गुरु महाराज जब दया करेंगे तो हम गुरु के संग अपने धाम को अपने घर को जायेंगे | ऐसा मन में भाव बना लो, ऐसी अन्तर में तड़प बिरह वेदना पैदा करो कि हमे उस मालिक के साथ हीं जाना है, अपने सतगुरु के संग हीं जाना है |
गुरु संग नेह लगाओ तुम, पार उस देश जाना है ||
मिलेगा नाम का मोती, सतगुरु का खजाना है ||
नाम के असली मोती को, चुन चुन करके लाना है ||
शब्द सुनना गंगन बीचे, और झनकार आना है ||
सनेही सतगुरु सच्चे, देश उनहीं के जाना है ||
प्रेमियों, मन चित्त लगा करके सच्चाई कड़ाई के साथ, भजन करने के सथो साथ उस देश को जाना है सतगुरु के और सतगुरु में मन लगाना है, सतगुरु के हीं भजन करना है | सतगुरु हीं सच्चे हैं | गुरु महाराज ने जो कुछ बताया, वहीं सच्चा जो समझाया | हमारा तुम्हारा मानव पोल का मानव रुपीमन्दिर में बैठ करके सुमिरन भजन ध्यान करने का कर्तब्य है | जो मालिक ने समझाया है, इस मानव पोल पर रहने में, जब गुरु महाराज ने दया कर दिया तो तुमको सबको सुमिरन ध्यान भजन के लिये एकाग्रचित्त हो करके बैठना चाहिये | मालिक ने जो कुछ बताया, उस बताये हुयेकर्तब्य को पालन करना चाहिये सच्चई और कड़ाई के साथ |
सतगुरु जयगुरुदेव
भाव झरोखे लागो मन चित्त से, मन चित्त लागे सतगुरु चरण में ||
काम बने सच्चा इस जग में, सतगुरु जी के नाम भजना में ||
सत्त प्रेम सतगुरु के मिलन में, सतगुरु चरणन शीश झुकाना ||
सतगुरु जी की बन्दना गाना, मुक्ति मोक्ष परम पद पाना ||
प्रेमियों, परम पद तभी मिलेगा जब सतगुरु की दया होगी और हम सब लग करके सुमिरन ध्यान भजन करेंगे | ये सूरत जीवात्मा उस गगन के बीच जायेगी, घट से उस पार होगी, घाट के पार | जब घाट के पार सतगुरु के साथ ये चली जायेगी, ऊपर शरण करेगी, स्वर्ग और बैकुण्ठ को देखेगी, शिवपुरी और ब्रम्हपुरी को देखेगी, आद्यामहाशक्ति देश, प्रभु राम के देश को देखेगी | प्रभु राम के दर्शन पर्शन करने के बाद ओंकार प्रभु के दर्शन करेगी | ओंकार प्रभु के दर्शन पर्शन करने के बाद रारंकार के दर्शन पर्शन करेगी | सतगुरु के साथ चलती चलाती हुयी महाकाल पुरुष के देश में पहुँचेगी | वहाँ महाकाल पुरुष के दर्शन करेगी | तत्पश्चात सत्तलोक धाम सतगुरु के धाम अपने निजधाम जायेगी | निजधाम जाती आती रहेगी जब तक स्वासों कि पूंजी यहाँ पर रहेगी तब तक सूरत जीवात्मा इस पोल में बिराजमान रहेगी | जैसे स्वासों की पूंजी ख़त्म हुयी अपने सतगुरु के साथ अपने निज घर, अपने निज धाम पहुँच जायेगी |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव
आरती सतगुरु नामी की, की सच्चे सन्तअनामी की ||
पुरुष सतगुरु सच्चे नामी, सतगुरु सत्त अनामी की ||
सतगुरु परम दयालु की, धरम ध्वज हे किरपालु की ||
श्री चरणन में शीश झुकाओ, आरती सतगुरु जी की गाओ ||
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

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Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 10 जनवरी 2016

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
नयन बीच देखो बिंदु अखण्ड ||
नैनन में सतगुरु मेंरे प्रीतम, दया कृपा के सिन्धु ||
दीन दयाल नन्द गोपाला, रघुवर हैं गोविन्द ||
सतगुरु संत हमारे प्यारे, निज चरणन लग लेव ||
दया भावना मेंहर कृपा में, मन तन चित्त को देव ||
नाम भजन में मन रम जाये, मेंहर मालिक की लेव ||
सतगुरु प्रीतम जगे हैं सवरिया, चरणन शीर धर लेव ||
सतगुरु जयगुरुदेव
मंगन मन गाओ सतगुरु नाम ||
सतगुरु दीन दयाल मेंरे प्रभु, हैं वो तो कृपाल ||
नाव लगावें पार में सतगुरु, सच्चे हैं कर्णधार ||
ऐसे सतगुरु नाहीं मिलेंगे, जो कर दें बेड़ा पार ||
सब जन लग जाओ नाम भजन में, होवेगा उद्धार ||
सतगुरु सतगुरु नाम पुकारो, होवे बेड़ा पार ||
नाम नामनी हैं सतगुरु की, हो जावै उद्धार ||
सतगुरु सतगुरु नाम पुकारो, चल देव पार पार||
सतगुरु नाम अलौकिक अदभुत, हो जावे उद्धार ||
सतगुरु जयगुरुदेव
चरनिया सतगुरु तेरी पखारुं ||
सतगुरु चरन पखारो बन्दौ, नाम दया की पाओ धार ||
कल-मल कटें तुम्हारे सारे, पहुँच चलो वहीं पार ||
अपने सच्चे सांईं सतगुरु, हो जायेगा उद्धार ||
मन चित्त रंग जाए नाम मंगन में, नाम भजन आधार |
| सतगुरु जैसे संत नहीं है, सत्त देश की धार ||

सतगुरु जयगुरुदेव
प्रेमियों, गुरु में मन लगाना और ध्यान भजन करना, मन चित्त लगा करके मालिक की प्रार्थना-आराधना करना, हम सब दीन बंधुओं का कर्तब्य है | मालिक की दया कृपा चौबीसो घण्टे बरस रही है, उस दया कृपा के अंतर्गत हमको तुमको ओत-पोत होना है | मालिक के बताये हुये रास्ते पार चलना है, मालिक की बतायी हुयी एक एक वाणी को याद करना है | मालिक समरथ हैं, हर प्रकार से दया मेंहर करते हैं | देखो, ये घट है, घट में घाट है, घट पार गुरु की बैठक | गुरु के दर्शन-पर्शन करते रहो अन्तर में चलते रहो, कुछ गुनगुनाते रहो, गुरु महाराज का भजन गाते रहो | जब भजन गाते रहोगे, गुरु में मन लगाते रहोगे तो गुरु की दया कृपा अपार उतरेगी | तुम्हारा बेड़ा पार हो जायेगा, तुम्हारे सारे काम बन जाएंगे और मालिक की मेंहर को आप शीश धरते चले जाओगे, मालिक हर प्रकार से दया करते चले जाएंगे | चिंतामत करो कि हमारा काम नहीं होगा, सारे काम बनेंगे | मालिक की दया मेंहर होगी और मालिक सबको पार करेंगे, सबका उद्धार करेंगे |
उध्दारो मेंरे सतगुरु नईया मजधार ||
तुमहिं दाता दीन दयाला, हम हैं जीव दीन तुम्हार ||
दीन दयाला प्रभु मेंरे सतगुरु, बेड़ा करो उस पार ||
सतगुरु नाम भजन मैं करिहो, आवे दया की धार ||
सन्त हमारे सच्चे समरथ, बरसेगी दया की धार ||
सतगुरु सतगुरु नाम भजनिया, नाम की महिमा बड़ी भाग्य ||
सतगुरु नाम पुकारतरहियो, हो जायेंगे पार ||

सतगुरु जयगुरुदेव
मालिक की असीम दया अनुकम्पा आप सब पार है | आप सब रोज-रोज एकत्र हो करके जो भी दस पाँच मिनट का सुमिरन ध्यान भजन करते हैं बैठ करके, गुरु महाराज की बन्दना करते हैं अखण्ड रुप से बिराजमान मन्दिर के सामने, वो मालिक के यहाँ जोड़ा जाता है | उससे आप लोगों को विशेष दया कृपा मिलती है | हर प्रकार से दया गुरु महाराज कर रहें है, आप लोग भी हर प्रकार से मेहनत करते हुये, सुमिरन भजन ध्यान में मन लगाते हुये, मालिक को हाजीर नाजिर मानते हुये, हर प्रकार से आप काम करते हुये, मालिक के चरणों में रत हुआ करिये और गुरु महाराज की यादगारी सुबह-शाम आठोयाम करते रहो |

सतगुरु जयगुरुदेव
सतगुरु सन्त हमारे नामी, आरती चरण बन्दना स्वामी ||
कोटि कोटि तुम्हे करुँ नमामि, कोटि बार चरणन परनामी ||
आरती सतगुरु सन्त सतनामी ||

बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 22 दिसंबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
मनवा लागे नाम भजन में, सच्चा सुख है फकीरी ||
सतगुरु नाम ध्यान धर देखो, फिर हीं कुछ मिलै जगीरि में ||
मालिक प्रीतम मेंरे सवरिया, मिलिहै तोहै सबुरी में ||
सतगुरु चरणन शीश झुकाकर, करो भजन तुम जरुरी में ||
सतगुरु जयगुरुदेव
अखण्ड रूप से बिराजमान सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ग्राम बड़ेला के प्रांगण में बैठे हुये समस्त प्रेमी जन, मालिक की असीम दया कृपा और बड़ी अनुकम्पा रही कि निर्विघ्न सारा कार्यक्रम गुरु दादा महाराज के पावन भण्डारे के अवसर पर गुरु पूजा संपन्न हो गई और मालिक ने सबको ख़ुशी सौहार्द के साथ रक्खा और अपने अपने स्थानों को प्रेमी प्रस्थान कर गये | मालिक की ऐसे हीं दया कृपा हमेशा बनी रहे और सब लोग सुमिरन भजन ध्यान करते रहें, सबको घनाघोर अनुभव हो | मालिक की दया कृपा बरसे, यहीं हम मालिक से कामना करते हैं | समस्त प्रेमियों को अनुभव हो दिखाई सुनाई पड़े, यहीं मालिक से बन्दना करते हुये और सबसे प्रार्थना करते हैं, सब लोग लग करके सुमिरन भजन ध्यान करते रहो |
सतगुरु जयगुरुदेव
पावन सतगुरु पिया हमारे, इनहीं के संग में रहना ||
नाम दियो और भेद बतायो, पहने हो नाम का कंगना ||
चंचल चितवन हो अन्तर में, नाम भजन को करना ||
सतगुरु स्वामी मेंरे सवरिया, इनहीं के रंग में रंगना ||
ध्यान भजन मन लग जाये सतगुरु, यहीं मांगन मंगना ||
सतगुरु चरण बन्दना तेरी, तेरे संग हीं रहना ||
पद पंकज की करूँ बन्दना, चंचल चितवन रहना ||
शीश झुकाऊँ विनय करूँ ये, मन तेरे में रंगना ||
भाव भाव से भाव उजागर, भाव के साथ में रहना || सतगुरु जयगुरुदेव
विनय मम करते स्वामी तेरी ||
विनय प्रार्थन चरण बन्दना, आरती पद पंकज केरी ||
श्री चरणन में शीश झुकाऊँ, दया मेंहर में न हो देरी ||
सतगुरु सतगुरु नाम पुकारूँ, सूरत तुम्हारी केरी ||
चरण बन्दना और अराधना, हे सतगुरु जी तेरी ||
शीश झुकाऊँ करूँ परनामी, सुन लिजो बिनती मेंरी ||
भूल चूंक मेंरी बिसरा कर, दया की कर दो ढेरी ||
पद पंकज में शीश झुकाऊँ, चरण बन्दना तेरी ||
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
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Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 18 दिसंबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
अखण्ड रूप से बिराजमान जयगुरुदेवमन्दिर ग्राम बड़ेला के प्रांगण में गुरु दादा महाराज के पवन भण्डारे के अवसर पर, जो गुरु महाराज के पूर्व हुकुम के अनुसार गुरु की पूजा होगी | इसमें पधारे हमारे दूर दराज से भारतवर्ष के कोने कोने से समस्त गुरु भाई बहन, प्रेमी जन, सर्वप्रथम जो आप सबका गुरु भाई हूँ, मैं किसी का गुरु नहीं हूँ | गुरु महाराज हींसबके गुरु हैं और गुरु महाराज हर प्रकार से सर्वज्ञ हैं और हर प्रकार से सचर हैं | कोई ये मत समझ ले की गुरु महाराज कहीं चले गये हैं | गुर महाराज जब अनुभव करा रहे हैं तो आपके साथ हैं | जब आपको सोचना चाहिए कि, ये हमारा घट है, घट में घाट है, घाट पर गुरु की बैठक | जब अंतर में गुरु महाराज मिल रहे हैं तो उनसे पूंछो कि हे मालिक क्या मौज है, क्या दया है, क्या आपका आदेश है, तो गुरु महाराज बतायेंगे, समझायेंगे आपको, तो आप सबको समझना चाहिये | ऐसे कोई कह दे, मैं हीं कह दूँ कि ये नहीं ये है, उस बात को ऐसे मत मान लेना | जब आपको अनुभव हो दिखाई सुनाई पड़े तब उस बात को मानो | यहाँ तो प्रमाण है, अनुभव हो तो मानो, अनुभव न हो तो मत मानो | इतने कड़े शब्दों में कोई भी मठाधीश या कोई भी जगदीश, या कोई भी जो भी संगत बना रखे हैं अपने गुरु महाराज की, कोई भी ये नहीं कहता की तुम्हे ये होगा, और होगा तो मानना और नही होगा तो मत मानना | ऐसा कोई कहता नहीं है | केवल जो खानापूर्ति है वो की जाती है और सर्वप्रथम काम, हरु महाराज का आदेश लग करके सत्संग सुनना और लग करके सुमिरन ध्यान भजन करना | सुमिरन ध्यान भजन कि कमायी है उसको धीरे धीरेइकठ्ठा करते हुये, अपने गुरु महाराज के चरणों में लगते हुये, आपको काम करना है | खुद जगना है और जगत को जगा देना है | सतगुरु का नियम दिन और गरीबी में रहो, हारी बीमारी आवे तो गुरु महाराज से प्रार्थना करते रहो, ये कर्मों के बिधान से होता है | ये कर्म कर्जे हैं, धीरे धीरेचुक्ता होगा और इस देश से धीरे से निकल चलोगे | गुरु महाराज के साथ रहे हो तो हमेशा गुरु महाराज के साथ रहो, गुरु महाराज को हीं गुरु मानो, किसी दूसरे को गुरु मत बना लो और गुरु महाराज का हीं भजन करो | गुरु महाराज तुमको पूरा पूरा अनुभव करायेंगे, ये मेंरा सच्चा दृढविश्वाश है, क्योकि जितने भी सारे बन्दे यहाँ आये, उनको सबको अनुभव हुआ, आपको सबको भी अनुभव होगा, दिखाई भी पड़ेगा और सुनाई भी पड़ेगा | मालिक कि असीम दया कृपा से सारा कार्यक्रम निपटता आया है, आगे भी निपटता चला जाएगा | आपकी संगत धीरे-धीरे बढाती चली जायेगी, अनुभवयियों कि जनसंख्या काफी हो जायेगी | गुरु महाराज ने बताया कि जिनको दिखाई-सुनाई पड़ेगा वोहीं आगे रक्खे जाएंगे | २० महात्मा तहसील में तो ३० महात्मा जिले पर | मालिक ने सब कुछ बता रक्खा है, तो जब तुम अनुभव करोगे हींनही, तुम्हे दिखाई सुनाई हींनही पड़ेगा तो तुम किसी का फैसला किस तरह करोगे | इसलिए यहाँ पर एक हीं काम होता है, लग करके सुमिरन भजन ध्यान, अनुभव अनुभूति ज्ञान | इसके अलावा दूसरा कोई काम नहीं |
सतगुरु जयगुरुदेव
ध्यान धार आधार में देखो, गुरु का ज्ञान आवेगा ||
खुले जब ज्ञान चछु है, सारा पसरा दिखायेगा ||

आप लोग जब लग करके सुमिरन भजन ध्यान करोगे और ज्ञान चछु दिव्य दृष्टि आपकी जब खुलेगी तो आपको सारा पसारा दिखाई पड़ेगा, अण्ड लोक, पिण्ड लोक, ब्रह्माण्ड लोक, स्वर्ग बैकुण्ठ, बहिष्यत सब कुछ आपको नजर आयेगा, सब कुछ दिखाई पड़ेगा, सुनाई पड़ेगा और मालिक के दर्शन तुमको घट में रोज होंगे | इस समय हम भी कहते हैं, सब कहते हैं | लेकिन सबसे पक्का सच्चा ज्ञान अंतर का है | अंतर्घट में दिखयी पड़ेगा तो आपकी गुरु महाराज से बात होगी | गुरु महारज अंतर में मिलेंगे तो तुमसे बात हो जायेगी | गुरु महाराज तुमको बता देंगे | बहार से हम चिल्ला कर के बता दें की गुरु महाराज वहाँ बैठे हैं तो आप मान थोड़ी लोगे जब तक आँख से देखोगे हीं नहीं | इस तरह सब लोग कहते हैं कि गुरु महाराज यहाँ हैं, गुरु महाराज वहाँ हैं, गुरु महाराज अब मैं तो सीधे-सीधे कहता हूँ, गुरु महाराज आपको अंतर में मिलेंगे, आपको घाट पर मिलेंगे | और जब बताएँगे, जब वो दर्शन देंगे बाहर से तो पूरी दुनिया को देंगे, सबको देंगे, किसी एक को नहीं देंगे | चोरी से कि एक को दर्शन देकर के अकेले चले गये | गुरु महाराज सबको दर्शन देंगे, जब वो आएंगे तो वहाँ जितनी जमात होगी, जितना भी वहाँ जन सैलाब होगा, जितने भी गुरु के बन्दे होंगे, वो हजार पाँच सौ, दस, बीस, पचास, सौ वोसबको दर्शन देंगे | एक अकेले को अगर बता दिया तो बुलायेंगे, बुला करके ढिंढोरा पिटवा देंगे उससे कि बच्चू मैं फला जगह हूँ, यहाँ चले आओ, यहाँ दर्शन कर लो | गुरु महाराज ने कोई काम चोरी से नहीं किया, सब काम डंके की चोट पे हुआ है, और ये भी डंके की चोट पे होगा | तो प्रेमियों अपने गुरु के साथ लगे रहना और गुरु कि वाणी को याद करना | अपने गुरु महाराज के साथ रहने से हीं हमारी तुम्हारी भलाई है | किसी दूसरे को या किसी गुरु भाई को हम गुरु बना लेंगे तो भी अच्छी बात नहीं है | जो नए प्रेमी हों उनको कहीं कुछ मिल रहा हो तो वो ले लें | जो नये हैं तो उनकी कोई नयी बात नहीं, पुरानों को अपनी जगह पे रहना चाहिये, अपने गुरु महाराज का भजन करें, किसी की निंदा आलोचना न करें | कोई जो भी कर रहा है, जैसा भी कर रहा है, जो करेगा तो भरेगा | तो प्रेमियों, आप लोग थके हो इसलिए अब सब लोग आरती प्रार्थना बोलो, और उसके बाद में आराम से अन्तर में गुरु महराज का नाम लेते हुये धीरे से सो जाना और गुरु महराज का नाम जब बोलते बोलते सोओगे तो गुरु महाराज कि दयामेंहर बरसती रहेगी और वोतुम्हारे भजन में जुड़ जायेगा | तुम्हे भी सब कुछ भजन के हीं बराबर मिल जायेगा |

सतगुरु जयगुरुदेव
आरती सतगुरु सत्त दयाला, सतगुरु शब्द महा किरपाला ||
दया मेंहरकियो नाम धरयो, अन्तर अदभुत दिव्य दिखायो ||
हे सतगुरु मालिक किरपाला, नाम दियो तुम दीन दयाला ||
सब जीवन के तुम हितकारी, डूबतनैयालेव उबरी ||
सच्चे सन्त सनातन धारी, आरती सतगुरु होती तुम्हारी ||
भाव चाव से अंतर्घट में, आरती कोटि बन्दना तुम्हारी ||
सहस्त्रबन्दना कोटि परनामी, सतगुरु जयगुरुदेवअनामी ||
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 17 दिसंबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
पायो नाम सतगुरु जी से, ध्यान लखो धर अन्तर ||
नाम का जन्तर सतगुरु दीन्हा, फूंको अन्तर मन्तर ||
चमक जो अन्तर आवे अदभुत, समझो सच्चा जन्तर ||
गुरु का ज्ञान बिराजे सब पर, नाम भजन का मन्तर ||
प्रभु सनेही सतगुरु दिख जायें, नाम भजन मन जन्तर ||
सतगुरु सतगुरु अन्तर आवे, सतगुरु दया का मन्तर ||

सतगुरु जयगुरुदेव
भजो मन सतगुरु नन्द गोपाल ||
सतगुरु प्यारे राज दुलारे, दियो लखाये सब जन्तर ||
अदभुत नाम नामनी दीन्हा, सच्चा दियो है मन्तर ||
करो जतनीया नाम मिलन की, अदभुत मिल गयो मन्तर ||
सतगुरु जी को लागे देशवा, छोड़ चलो तुम विदेशवा ||
चढ़ै सुरतिया जो गगन मझारी, देख पड़ै सतगुरु अन्तर ||
महल अटारी बाग़ बगीचे, सब घट बिसैमन्तर ||
उपजै ज्ञान गुरु का अदभुत, कुछ ना दिखै अब अंतर ||

सतगुरु जयगुरुदेव
नाम से लौह लगाओगे, पार उस देश जाओगे ||
शब्द सच्चा साईं सच्चा, लगन सतगुरु में लाओगे ||
भेद नामी ने दीन्हा है, पार उस देश जाओगे ||
दया सतगुरु की सच्ची है, पार सब सब समाओगे ||
समागम संत का सच्चा, जो सच्चा भेद पाओगे ||
मंगन और ध्यान चित्त धरके, देश सतगुरु के जाओगे ||

सच्चा मन बना करके जब सुमिरन ध्यान भजन करोगे तो गुरु महाराज की असीम दया कृपा-अनुकम्पा होगी तुम पर, मालिक की मेंहर बरसेगी और तुम सच्चे देश में चले जाओगे | मालिक में कोई मिलौनी नहीं, ना कोई नाम में मिलौनी है, मिलौनी हमारे तुम्हारे अन्तर में है | उसको देखना है, उसी को छाँट करके बाहर करना है | दया गुरु महाराज कर रहे हैं, हमको तुमको किस प्रकार उस दया मेंहर को लेना है, ये सब हमको तुमको देखना है |

सतगुरु जयगुरुदेव
आरती मंगल पावन नामी, हे सतगुरु पावन सतनामी || नाम बिराजे अन्तर राजे, दया मेंहर सब बाजे बाजे|| सतगुरु दया मेंहर को पायो, सतगुरु चरणन शीश झुकाओ || सतगुरु जयगुरुदेवअनामी, कोटि कोटि तुमको परनामी|| कोटि बन्दनासहस्त्रअराधना, मेंरे प्रभु मेंरेसाईं|| सतगुरु चरण शीश झुकाऊँ, मुक्ति मोक्ष परम पद पाऊँ || सतगुरु जी की आरती गाऊँ, उन चरणन बलिहारी जाऊँ || सतगुरु जी को शीश झुकाऊँ ||
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 15 दिसंबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
भरोसो पद पंकज का तेरे ||
नाम भजन का मार्ग दियो है, नाम भजन मन हेरे ||
भरोसो पद पंकज का तेरे ||
मेंरे सतगुरु मेंरेमेंरे नामी, हे साईं सतगुरु सतनामी||
नाम भजन मन तेरे, भरोसो पद पंकज का तेरे ||
दया मेंहर स्वामी हो तेरी, ये है सुरतिया तुम्हारी केरी||
दया करो बारम्बार, भरोसो पद पंकज का तेरे ||

सतगुरु जयगुरुदेव

लखा संसार में अदभुत, अध्यात्म धन हीं सच्चा है ||
मार्ग डोरी विवितनी है, कच्चे धागे सम कच्चा है ||
धरो तुम ध्यान चितवन मन, सतगुरु धाम चलने की ||
दया कर स्वामी आयें हैं, मान तू बात इनहीं की ||
सतगुरु की वाणी, सतगुरु की बात मान करके हम सब प्रेमी सुमिरन ध्यान भजन, जो भी बन पटे, मालिक का ध्यान करते हुये, मालिक के चरणों में चले चलें | मालिक से लौ लगते रहें, मालिक से बिनती प्रार्थना करते रहें | हे मालिक, दाता दयाल हर प्रकार से दया करते हुये, मुझ पापी को उबार लो और अपने चरणों में लगा लो | धीरे-धीरे स्वासों की पूंजी खतम हो रही है तो हमारे ऊपर दया कृपा करके, हे प्रभु, हे दाता दयाल, जो भी जिस तरह दीन गरीबी में बन पड़ता है उसी को सुमिरन भजन ध्यान समझ लो, उसी पर दया कर दो और पास कर दो | जिस तरह से सुमिरन भजन ध्यान तो मन लगता नहीं, जीवात्मा सूरत प्यासी है और ये मन पापी है, इधर उधर भागता रहता है | कुछ काम बनने नहीं देता | तो हे प्रभु, जो भी टूटी फूटी आराधना हो, जो भी टूटी फूटी प्रार्थना हो, एक मिनट, दो मिनट, एक घडी दो घडी, उसी में हमारी साधना को सिद्ध किया जाय, उसी में दया मेंहर कर दिया जाय| हे प्रभु, हे दाता दयाल, हे दयालु हर प्रकार से कृपा करके, दया करके, हमको अपना लिया जाय, अपने बच्चे के समान अपने साथ रखा जाय| किसी प्रकार से किसी प्रकार की ढिलाई ना हो, हम पर दया मेंहर की बरसात होती रहे |

गुरु चरणो में मन लागे, ध्यान चितवन तुम्हारा हो ||
हो अंतर नाम सतगुरु का, ध्यान भी सच्चा सारा हो ||
सार सब भेद नामी के, नाम का हीं सहारा हो ||
बड़े दाता दयालु जी, कृपा के सिंधु सागर हो ||
दया सतगुरु बरस जाये, ख़ाक मिल जाए चरणो की ||
सूरत निर्मल हो जायेगी, चरण तुम्हारी जब आयेगी ||
दयालु सतगुरु मेंरे, सत्य के दाता साईं जी ||
मेंहर हम पर करो नामी, द्वारे तेरे सतगुरु जी ||
हे सतगुरु, हे दाता दयाल, हम तुम्हारे दरवाजे पर पड़े हैं, तुम्हारे सहारे पड़े हैं | कैसे भी रोयें ये दुनिया है, दुनिया में कोई बच नहीं सकता | पापों की गठरी बंध रही है, सच्चई के मार्ग पर चलना कठिन हो रहा है | हर प्रकार से दया मेंहर करोगे तो किंचित मात्र, ये सेवक, ये प्रेमी, ये टुटा फूटा जीव आपके चरणों की तरफ बढ़ सकता है | आपकी दया मेंहर के बिना एक पग भी आगे नहीं चल सकता | तो हे सतगुरु, हे दाता दयाल आप दया करो, आप कृपा करो, हमारा सुमिरन ध्यान भजन बन जाय| जो भी टूटी फूटी आराधना हो मिनट दो मिनट, घण्टे आधे घण्टे, दस मिनट पन्द्रह मिनट की हो बन जाय| इस तरह से गुरु महाराज से प्रार्थना करते हुये, गुरु महाराज की आराधना करते हुये, हम सब प्रेमी गुरु महाराज की तरफ उन्मुख होते हैं और गुरु महाराज से मेंहर की भीख माँगते रहते रहते हैं |
मेंहर करो स्वामी, दाता दयालु मेंहर करो स्वामी ||
दया मेंहर बरसे जब तुम्हारी, रंग जावे ये चुनर हमारी ||
भाव भीनी प्रार्थना करते हैं आज ||
मेंहर करो स्वामी, दाता दयालु मेंहर करो स्वामी ||
स्वांसस्वांस पर लगन लग जाये, जीव तुम्हारे सरणागत हो जाये ||
कृपा सिंधु हे सतगुरु रघुनाथ, दया करो सतगुरु दाता दयाल || सतगुरु से इसी तरह दया की भीख हुये, आगे को बढ़ाते चलते चलते हैं | मालिक से प्रेम लगते रहते हैं, मालिक से हर प्रकार से बिनती प्रार्थना करते रहते हैं | हे मालिक हम पर दया करो, हे सतगुरु हम पर दया करो, हे दाता दयाल हम पर दया करो, हमारे गलतियों को माफ़ करो, हर प्रकार से क्षमा कर दो | हे प्रभु हम तुम्हारे जीव हैं, हमको माफ़ कर दो |
सतगुरु जयगुरुदेव
सतगुरु पुरुष अनामी दाता, सतगुरु मंगल जगत बिधाता||
आरती चरण बन्दना साईं, बार बार चरणन तीरन आयी ||
मेंहर करो सतगुरु मेंरे दाता, सच्चा तेरा जीव ये जाता ||
श्री चरणन शीश झुकाऊं, हे मालिक तेरो पद पाऊँ ||
सतगुरु जयगुरुदेव अनामी, मेंरे सतगुरु मेंरे नामी ||
सहस्त्र कोटि तुमको परनामी, सतगुरु जयगुरुदेव अनामी||
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
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Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 12 दिसंबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
भजन मन सतगुरु सतगुरु ध्यान ||
नाम भजन सच्चा मालिक का, मिलने का यह धाम ||
भाव झरोखे जब बैठोगे, भजोगे मालिक का नाम ||
दया मेंहर बरसे सतगुरु की, बन जाए तेरो काम ||
सतगुरु प्रीतम तुझे पुकारें, नाम लक्ष्य का ठान ||
सतगुरु रहें पुकार तुझे जो, अपना सच्चा नाम ||
सतगुरु सतगुरु नाम भजनिया, कर ले हो आराम ||
सतगुरु जयगुरुदेव
गुरु दरबार में देखो, भाव के मोती सच्चे हैं ||
मिलेगा भाव से सब कुछ, तुझे जो कुछ भी चाहत है ||
ध्यान दे तू गुरु वाणी, भजन मन ज्ञान तू ठाने ||
हो अंतर में सबेरा जब, ज्ञान प्रकाश को जाने ||
मिलो मालिक से जा भीतर, दया निधि धाम को जाने ||
सतगुरु जयगुरुदेव
मालिक के वचनों को याद करते हुए हम सब प्रेमी लग कर के जो कुछ बन पड़े सुमिरन ध्यान भजन करते रहें | मालिक का नाम चौबीसो घण्टे याद करते रहें और समय की सुई धीरे-धीरे घूम रही है | मालिक भी किसी भी टाइम प्रत्यक्ष प्रकट होंगें| प्रकट होंगें और अपनी सांगत को संभालेंगे | दया मेहर करेंगे और आवाज लगाएंगे तो करोड़ो की भीड़ चली आएगी | गुरु महाराज ने कहा था, मैं आवाज लगाउँगा तो देखना कैसे भगदड़ मचेगी, कैसे लोग एकत्रित होंगेंइकठ्ठा होंगे | तो प्रभु ने जो कुछ भी कहा है वो अपनी वाणी को पूरा करेंगे | हम सब भी गुरु से लग करके, गुरु के साथ रह करके अपना काम करते रहें, मालिक पर निशाना रक्खें, मालिक से प्रेम करते रहें, मालिक में मन को लगातें रहें और गुनगुनातें चलें और नाम भजन को गातें चलें | प्रेम प्रतीत की बात करें, किसी की निन्दा आलोचना न करें, जिससे उसको ठेस लग जाय और तुम्हे भी बुरा भला कहे | इसलिए किसी को कुछ मत कहना और ना हैं किसी को समझाना उस तरह का कि तुम इधर मत जाओ, उधर मत जाओ | जिसकी जो मर्जी करेवोकरे| तुम अपने निशाने पे रहो, अपनी बात रक्खो, अपनी बात को बताओ | दूसरे कि बात कोई पूछता है तो कहो कि उसी से पूछो तो ज्यादा अच्छा रहेगा | हम उसके बारे में क्या कहें, जब हम उसके साथ रहतें नहीं तो हमे क्या जानकारी कि वहाँ क्या होता है, क्या नहीं होता है | यहाँ आये हो तो यहाँ देखो जो कुछ होता है और उसको अनुशरण करो | जो अच्छा लगे अपने पास रक्खो, जो बुरा हो उसको निकाल फेंको | मालिक में मन लगाओ, सुमिरन भजन ध्यान करो, सच्चाई से आगे बढ़ते चलो | गुरु महाराज का नाम लेते चलो |

भजो नाम सतगुरु सत्संगा, आठोयाम अमिट अखण्डा||

ऐसे भजो ऐसे दर्शन करो, यहाँ तो अमिट है अखण्ड है, ये अखण्ड हैं, यहाँ से खण्डन नहीं होने वाला | हर प्रकार से दया मेहर आप पर बरसेगी | अब ये तुम समझो कि ये छोटा सा मंदिर है | इसमें पता नहीं क्या है, क्या नहीं है, तब तुममे दुर्भावना आ जायेगी | अगर सद्भावना के साथ छोटे से जगह तुम बैठोगे, पहले गुरु महाराज ने पाँच को, एक को, दो को, पांच को नामदान दिया फिर सौ हजार, पाँच सौ, लाख, करोंड़ हुए | तो धीरे-धीरे सब कुछ हुआ, तो इसी तरह तुम्हारे सब के लिए है ये चीज अखण्ड, सबके लिए है | कोई भी प्राणी हो, किधर का भी हो, गुरु महाराज का जीव हो, सत्संगी प्रेमी है, वो कोई भी आ सकता है | जिसको नाम मिला है, वो बैठ करके सुमिरन भजन ध्यान करे, उसे प्राप्ति हो, दिखाई-सुनाई पड़े, अनुभव अनुभूति हो और मालिक कि दया कृपा जो भी उसको मिले, वो बांध करके ले जाए | उसमे कोई रोक-टोक की बात नहीं है | न कोई रोकने वाला है, न कोई टोकने वाला है | जो तुम्हारे हिस्से का है, तुम अपने हिस्से का सामान ले जाओ |

सतगुरु नाम भजन सत्संगा, होए विवेक आन्तरिक गंगा ||

गुरु महाराज कि चर्चा करोगे, गुरु महाराज का गुणगान करोगे, गुरु महाराज के बारे में बात करोगे, गुरु महाराज कि दया निधि कि बात करोगे तो आठोयाम अमृत गंगा सत्संग कि सत्संगमय सूत्र, ब्रह्म सूत्र गंगा बह रही है | उसमे से शब्द आते रहेंगे, सत्संग कि धार निकलती रहेगी, आप सबको मिलती रहेगी | आप सब उसको पढ़ पढ़ करके, आप सब छक छक पी करके आगे को बढ़ते रहोगे, मालिक में मन लगते रहोगे तो मालिक दया मेंहर करते रहेंगे | दयालु दाता का काम हीं है दया बरसाना | दयालु दाता का काम हीं है सबको एक साथ लगाना, एक धागे में पिरोना और एक साथ ले चलना | यही कहा था, पर अब तो जो है परीक्षा कि घड़ी है, कौन पास होता है और कौन फ़ैल, ये तो मालिक और वक्त हीं बताएगा | तो इसलिए सब लोग सावधान रहो और सुमिरन ध्यान भजन में लगे रहो | जो भी बन पटे, जिस तरह हो सके करते रहो | कोई जरुरी नहीं कि दस घण्टे बैठ जाओ, पर दस मिनट तो बैठो ही | और एक घण्टे का समय नियुक्त कीया है गुरु महाराज ने तो किसी तरह नाम भजन करके सतगुरु जयगुरुदेवजयगुरुदेव बोल करके एक घंटा पास तो करो | दिखाई सुनाई पड़े अथवा ना पड़े, फिर भी उसको पास करो | गुरु के हिसाब में जोड़ा जाएगा | जितनी देर तुम सत्संग में बैठते हो, सुमिरन ध्यान भजन करते हो उतनी देर मालिक में जोड़ा जाता है | मालिक कि दया मेहर मिलती है | मालिक के उस प्रभु के भजन में जोड़ा जाता है |

प्रभु भजन एक सच्चा कामा, सतगुरु मेंहर से रीझें रामा ||

ये सच्चा काम सतगुर कि दया मेहर से होता है | इससे प्रभु राम भी रीझ जातें हैं और सारी दया मेहर बरस जाती है | तो इससे सारा काम हो जाता है, बहुत बड़ी दया मेंहर बरसती है, तो इससे प्रभु रीझ जाते हैं, बड़े-बड़े देवी-देवता प्रसन्न हो जाते हैं | जो आप पर दया मेंहर कर देते हैं, आपको बहुत कुछ देते हैं, आपका कल्याण करते हैं और सतगुरु साथ में रहते हैं महा कल्याण हो जाता है | तो प्रभु में मन लगाओगे, सतगुरु में मन लगाओगे तो पूरी कि पूरी दया मेंहर आप पर होगी |

मन चित्त लागे सतगुरु चरणा,बन्दौ नाम भजन अनुसरणा||

ये मन और चित्त, बुद्धि विवेक को गुर के चरणो में लगा देने के बाद, आप उसकी बन्दना करो और पाँचोधनियों कि बन्दना करो सतगुरु कि बन्दना करो | ऐसा अनुसरण करो, ऐसा काम करो जिससे सारा काम तुम्हारा बन जाय और वो धनी खुश हो जाय, तुम पर दया कि बरसात कर दें, ओत-पोत हो जाओ, चलने लगो निशाने पर और आने जाने लगो, दिखाई भी पड़ने लगे, सिनाई भी पड़ने | पूरी दया मेंहर आने लगे तो गुरु महाराज कि बात बने | गुरु महाराज से आप रोज-रोज जाओ-आओ, रोज-रोज बात करो | रोज दया मेंहर का जो है पावनप्याला आपको मिलता रहे, उसे आप पीते रहो और खुद जगो, दुनिया को जगाते रहो, अपने प्रेमी साथियों को भी जागते रहो कि मालिक की दया हो रही है | मालिक की दया बरसात हो रही है |

सतगुरु बन्दौ मन अनुसरणा, मार्ग है सबका जानो चरणा||

मालिक की दया मेंहरहुयी और सस्ते में तुमको सामान मिल गया | बड़े हीं चाव से आपको मिला, बड़े हीं भाव से आपको मिला | मालिक ने बड़ी हीं दया कृपा करके आपको दे दिया और समझा बता दिया तो आपको भी चाहिए कि जिस तरह बड़े भाव से मिला उससे बड़े आदर और सम्मान भाव के साथ रखना है | मालिक के साथ मन लगाना है, मालिक में हीं घुल मिल जाना है, मालिक के साथ हीं चले चलना है मालिक का हीं गुण गान करना है, मालिक के हीं बताये रास्ते पर चलना है | सारी विद्या मालिक की दी हुयी है तो मालिक के साथ हीं रहना है | मालिक में मन लगाना है और सतगुरु की दया मेंहर को प्राप्त करना है | प्रेमियों हर जगह से यही है कि सत्संग हर जगह सुनाया जाता है, सुमिरन ध्यान भजन के लिए क्या बताया जाता है, क्या नहीं उसको तो हम नहीं कह सकते पर सत्संग सुनाया जाता है, साथ हीं साथ सुमिरन भजन ध्यान हो और सुमिरन ध्यान भजन के अंतर्गत अनुभव हो, दिखाई और सुनाई पड़े तब तो मन लगेगा | जब दिखाई सुनाई नहीं पड़ेगा तो क्या मन लगेगा और क्या आप बैठोगे, रूखे फीके बैठे और रूखे फीके उठ गए | पर अगर तुमको किंचित मात्र तुमको दिखाई पड़ा, कुछ सुनाई पड़ा तो तुम अवश्य हीं उसमें मन लगाओगे और थोड़ा समय उसमें दोगे, ज्यादा करते करते धीरे-धीरे अभ्यास सारा काम तुम्हारा हो जाएगा और सारी बात बन जायेगी | देखो प्रेमियों, कोई भी प्रेमी इतना बड़ा साधक नहीं, कोई भी इतना बड़ा वो नहीं है, कहीं पर कोई गिर सकता है | गिरने के बाद धीरे-धीरे सम्भलता है | जिस स्थान पर था, उस स्थान से गिर गया तो धीरे-धीरे उस चोटी पर पहुचता है | बड़ी मेहनत करके पहले तो सतगुरु की दया मेंहर से अखण्डअनामा भी जा सकता है, पर अगर गिर गया तो बहुत हीं देर लगाती है उसको जाने में | तो प्रेमियों गिरने का काम मत करो, चलने का काम करो, जो गुरु महाराज का हुकुम हो उतना करो, उससे अधिक मत करो और ना कम करो, बस उतना करो जितना गुरु का हुकुम हो |

धरो मन धीर अन्तर में, मिलन साईं से होना है ||

बात बन जायेगी सब हीं, दरश सतगुरु का पाओ जब ||

धीरज धरो धीरज धर करके अपने काम को धीरे-धीरे करते रहो | मालिक दयालु हैं, तुमको दर्शन देंगे, तुमको अपने साथ लगाएंगे, तुमको ऊपर उठाएंगे तुममें दया बरसाएंगे, तुममें पूरी पावर भरेंगे, तुम्हे उदित करेंगे, मुदित करंगे, तुम्हे उठा करके बैठा देंगे | सारी रील दिखा देंगे आगे पीछे की | सबको दिखाते आये हैं, यहाँ हारी में बीमारी में हर चीज में बताते रहते हैं | इस तरह करो उस तरह करो, अगर तुम नहीं करते हो फिर भी दया करते हैं गुरु महाराज | कितने बड़े दयालु हमारे सतगुरु, ऐसा सतगुरु किसी को नहीं मिलेगा, ऐसा दयाल पुरुष किसी को भूल से नहीं मिलेगा | जिसने ऐसे गुरु के पास नहीं गए जो गए और गुरु नहीं माना, वो उनका भाग्य अभागा था | जिन्होंने अपने सतगुरु को सतगुरु मान लिया, अपने गुरु के सहारे हो गए तो सारी दया मेंहर कि बरसात हो गयी |

सतगुरु चरणन लगो सब भाई, अल्प काल तुम्हेमिलै कमाई ||

तुम पर दया मेंहर होये जाई, साधो साधोसाधो भाई ||

देखो साधना करो तुम पर दया मेंहर गुरु महाराज कि होगी और बड़ी जल्दी होगी, बहुत हीं छोटे समय में तुमको प्राप्त हो जाएगा | सतगुरु दयालु है दाता हैं, करतार हैं और अपने मालिक हैं, हर प्रकार से दया मेंहर करेंगे | हमको तुमको लग करके अपने सतगुरु में ध्यान लगा करके नाम भजन को करते रहना है, अपने गुरु में मिले रहना है, अपने गुरु महाराज से प्रार्थना करते रहना है |

सतगुरु जयगुरुदेव
पावन भजन सतगुरु नामु, सत संगत का एक हींकामु||
विरह विवेक भाव उर आवे, मैलाई सब कटी कटीजावे||
सतगुरु चरण गहो एक बारा, हो जाओ इस पार से उस पारा ||
परम दयाल गुरु कि कृपा, अन्तर्घटहोवै उजियारा ||
सतगुरु जयगुरुदेव दयालु, मालिक मेरे हैं कृपालु ||
सतगुरु चरणन मन को लाओ, मुक्ति मोक्ष परम पद पाओ ||
सतगुरु पर बलिहारी जाओ ||
सतगुरु जयगुरुदेव
आरती सतगुरु नामी की, कि सतगुरु पुरुष अनामी की ||
छाँव में सतगुरु के रहना, बन्दना सतगुरु नामी की ||
मेंहर की धार जो आवेगी, सूरत की प्यास बुझ जावेगी||
करो बन्दना सब नामी की, कि सतगुरु पुरुष अनामी की ||
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 11 दिसंबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
दया निधि सतगुरु संत हमारे ||
सब जन रहो इनही के अधारे, जीव काज निज सतगुरु पधारे ||
नाम भेद के गुरु अधारे||
दया की होली इन्हों अपनायी, सबसे बड़ी दया यह भाई ||
नाम दीन्ह और भेद बताओ, चरणन में अपने लिपटायो||
अद्भुत अंतर दिखे बाजे, राग रागनी सब कुछ साजे||
नाम भजन की बात बताई, सच्चे सतगुरु प्रीतम भाई |
|
इनके शरणागत हो जाई, सगरी कट जावै मैलाई|| चंचल चितवन नाम भजन में, नाम भजन को देत लखाई||
शीश धरो सतगुरु चरनन में, सच्ची समझो है प्रभुताई||
सतगुरु जयगुरुदेव
भाग्य अपना अलौकिक बना लो सभी, ध्यान धार के भजन को तो गा लो सभी ||
नाम सच्चा है सतगुरु का प्यारा सही, देने वाला सही दाता रघुवर सही ||
कर लो अंतर भजन काम बन जायेगा, फांस फंदे चौरासी का कट जायेगा ||
तेरा जीवन अब तो सुफल हो जायेगा, सच्चा नर तन सफल तेरा हो जायेगा ||
गुरु की आज्ञा की शर पर धरो गांठ को, मन में शंका किसी भी तरह की ना हो ||
नाव तेरी उस पार हो जाएगी, सदा के लिए सूरत मुक्ति पा जाएगी ||
सतगुरु जयगुरुदेव
गुरु के चरणों में मन लगते रहोगे और मालिक की बताई हुई वाणी को याद करते हुए सुमिरन ध्यान भजन में मन लाते रहोगे, मालिक के वचनों को याद करोगे, सुमिरन ध्यान भजन एक मात्र तुम्हारा काम होगा तो तुम्हारा जीवन सफल हो जायेगा | खेती दुकान दफ्तर के काम करते हुए, सुबह एक घण्टे, एक घण्टे शाम निकालते हुए गुरु के चरणो में दोगे, गुरु में मन लगाओगे तो गुरु महाराज असीम दया कृपा करेंगे |


पावन संगत सतगुरु केरी, सारी सूरतें सतगुरु केरी ||
नाम की किन्ही गुरु बड़ाई, नाम हीं अंतर में उपजाई||
मारग सच्चा सतगुरु दीन्हा, नाम भजन चितवन को कीन्हा||
नाम की कँहा तक करूँ बड़ाई, नाम हीं पार देश ले जाई||
नाम नामनि सतगुरु जी की, ध्यान भजन सतगुरु के नीकी||
जन कल्याण हेतु तन धारा, सत्संग की बहे निरमल धारा ||
सतगुरु की जो करे प्रभुताई, दया मेहर देते बरसाई ||
सच्चे सतगुरु दीन दयाला, इनके शरणागत किरपाला||

हमारे संत सतगुरु सच्चे हैं इन्हीं के शरणागत होने पर तुमको पूरी की पूरी दया मेहर मिलेगी, पूरी की पूरी की दया बरसेगी, दिखाई भी पड़ेगा, सुनाई भी पड़ेगा | अंतर में चलोगे मालिक की दया बरसेगी, मालिक हर प्रकार से समरथ हैं | किसी भी प्रकार से कमी नहीं है | जब तुम गुरु महाराज को सर्वज्ञ सचर हाजिर नाजिर मानोगे तो गुरुमहाराज पूरी की पूरी दया कृपा करते हुए आपको नित प्रति दर्शन देते रहेंगे | अंतर्घट में आपसे मिलेंगे, आपसे बात होगी, सत्संग भी सुनाएंगे, आप पर दया मेहर भी होगी मालिक की पूरी की पूरी और आगे चलने की बात बताएँगे| कल सबेरा होगा कैसे होगा, क्या होगा, क्या नही होगा, सारी बातों की जानकारी आपको होगी | जब आप मन लगा के सुमिरन ध्यान भजन को करेंगे, गुरु के बताये हुए रास्ते पर चलेंगे, सतगुरु ने जिस तरह आपको लगाया, बताया, चलाया उस तरह आप चलते जाएंगे तो मालिक की पूरी की पूरी दया कृपा होती जायेगी |

प्रथम गुरु के संग सत्संगा, नाम भजन दूजे है गंगा ||

पहले पहले आप सतगुरु के साथ सत्संग करोगे, सत्संग को सुनोगे, सतगुरु सत्संग करेंगे, उसको सुनोगे, गुनोगे फिर उसके बाद में आगे नाम भजन जब तुम करोगे तो उसमेंअमृतमयी सतगुरु की दया की गंगा आपको प्राप्त हो जायेगी | उस गंगा में आप स्नान करोगे, आगे को चलोगे, तुम्हे दिखाई पड़ेगा | अद्भुत नज़ारे आएंगे, नदी, नाले, झरने, पहाड़, पर्वत, विपिन और हर प्रकार की चीजें आपको देखने को मिलेंगी | महल, अटारी, सब बाग़-बगीचे दिखाई पड़ेंगे, हर देवी देवताओ के दर्शन होंगें|

सतगुरु मेंहर होवै अति भारी, स्वर्ग बैकुण्ठ दिखावैं क्यारी ||

सतगुरु की दया मेहर जब हो जाती है तो मालिक स्वर्ग और बैकुण्ठ सब कुछ दिखाते हैं | एक एक चीजों को बतातें हैं | वहाँ पर जब आप स्वर्ग बैकुण्ठ जाते हो तो वहां के अधिपतियों से पूरी की पूरी मुलाकात बात होती है | उनकी भी दया मेहर तुम पर बरसती है | गुरु महाराज भी अंग संग होते हैं और सारी चींजेंतुम्हे दिखाई पड़ती हैं | जहाँ पर तुम सतगुरु जयगुरुदेव बोलते हो तो वो सब खुश हो जाते हैं, जाने का रास्ता दे देते हैं | बताते हैं आगे बढ़ जाओ आगे हीं सब कुछ मिलेगा | धीरे-धीरे करते-करते आगे तुम बढ़ते रहते हो और रास्ता मिलता चला जाता है | स्वर्ग को देखते हो, बैकुण्ठ को देखते हो, सारी संरचनाएँ देखते हुए आगे को बढ़ते जाते हो और गुरु की दया मेहर बरसती जाती है | गुरु दयाल है कृपाल है, हर प्रकार से कृपा करते हैं |

कृपा सिंधु सतगुरु रघुनाथा, इनके संग हीं जगत बिधाता||

बड़े कृपालु बड़े दयालु सतगुरु संत सनातन अपने मालिक हैं और इन्हीं केसाथ जगत बिधाता ईश्वर प्रभु भी इन्हीं के साथ मिले हुए हैं | इनकी बातों में, इनकी कथनी में, अगर करनी करोगे तो पूरी सच्चाई और पूरा का पूरा फल तुमको मिलेगा पुरे विवेक और बुद्धि के साथ जब तुम सुनोगेइन्ही में ईश्वर को देखोगे तो ईश्वर दिखाई पड़ेगा, प्रभु दिखाई पड़ेगा, सच्चा सचर दिखाई पड़ेगा, सतगुरु दिखाई पड़ेंगे ज्ञान और विराग हो जाएगा |

ज्ञान विराग सतगुरु गहना, सच्चाई से कुछ में पहना ||

ज्ञान और विराग, वैराग्य का जो रास्ता गुरु महाराज ने बताया है, ब्रह्मचर्य का पालन करना अपने गृहस्थ आश्रम में रहना |उसमे बड़े हीं नियम हैं, नियम के साथ रहने पर गुरु महाराज ने बताया है कि एक महीने ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए तुम सुमिरन ध्यान भजन करोगे तो तुम्हें ज्ञान और वैराग्य दोनों चीज प्राप्त हो जाएगा, सारी की सारी दया कृपा तुमको मिल जाएगी, आगे को चलोगे प्रभु के दर्शन होंगे, ईश्वर के दर्शन होंगे, सबसे तुम्हारी मुलाक़ात होगी |

कुल कुलपतियों के हों दर्शन, दया मेहर सतगुरु के परछन||

पूरे धनियों के दर्शन होंगे हर प्रकार से तुम वहाँ मिलोगे साज सज्जा के साथ और आगे बढ़ोगे | तुम्हें कोई रोकेगा नहीं तुम्हारी मदद हर कोई करेगा और हर जगह पर तुम जाओगे | कोई तुम्हें रोकने वाला नहि मिलेगा | सब गुरु महाराज कि दया मेहर से सारा का सारा काम तुम्हारा होता जाएगा| तुम धीरे धीरे आगे बढ़ते जाओगे | मालिक कि दया मेहर तुम पर बरसती जाएगी | मालिक के हर स्थान पर पहुँचोगे | जहाँ जहाँ बताया है गुरु महाराज ने सब स्थानों पर धीरे धीरे पहुँच जाओगे और हर जागे कि जानकारी हो जाएगी | तुम्हें जो चीज चाहिए, तुम्हें उस चीज कि प्राप्ति होगी | मालिक के अंग संग रहोगे अंतर में और बाहर से भी तुम्हें ज्ञान वैराग्य हो जाएगा | तो इस तरह धीरे धीरे चलते-चलते उस मालिक के सच खंड पर पहुँच जाओगे सच्चे मन से |

सत्य सत्यता सतगुरु साईं, सतगुरु मेंहरकटी ये खाई ||

सत्य का नाम मिला, सत्य की सब कुछ मिली तो कूड़ा कचरा साफ हो गया | गुरु महाराज कि मेहर से जो मैलाई थी वो कट गयी | सारी दया मेहर हो गयी, रास्ता मिल गया नाम भजन का, आप आगे जाने लगे, और आगे को जब चलाने लगे तो गुरु महाराज पूरी कि पूरी दया मेहर करने लगे कि बच्चे ने थोरी मेहनत की है, अब थोरी मेहनत हम भी कर दें, ये भी आगे बढ़ जाय| तो मालिक पूरी दया मेहर करते हैं | आगे को बढ़ाते हैं और आगे जहाँ जहाँ तुम जाते हो अद्भुत नजारे को देखते हो, अद्भुत चीजें मिलती हैं | और सबसे बड़ी सच्ची चीज है कि गुरु महाराज ने तुमको नामदान दिया तो केवल एक हीं चीज कही कि बच्चा नाम भजन करना, भजन करना | अब आप लोग कितने लोग भजन करते हो कितना करते हो | इसके बारे में तुम अच्छी तरह से समझ सकते हो | अगर सच्चाई से भजन करते तो अनुभव होता दिखाई सुनाई पड़ता | पर अब नहीं करते हो तो उसके लिए अनुभव केन्द्र “बनाया अखण्ड रूप से बिराजमान सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ग्राम बड़ेला” |यहाँ पर जो प्रेमी आएंगे सच्चे मन से ध्यान भजन करेंगे उन्हें अनुभव होगा दिखाई पड़ेगा, सुनाई पड़ेगा | दिखाई सुनाई पड़े तो मानो, अनुभव हो तो मानो, अनुभव न हो तो मत मानो | सच्चे मन से अगर तुम करोगे तो तुम्हें दिखाई पड़ेगा, सुनाई पड़ेगा, अनुभव भी होगा, सारी दया मेहर बरसेगी | यहाँ सेवादार हैं, सेवादार आपको अनुभव कराएंगे, बताएंगे| अनुभव तो गुरु महाराज करवाएंगे पर वो सारी बात आपको समझा देंगे कि किस तरह क्या करना है, किस तरह सुमिरन करना है , किस तरह ध्यान करना है, किस तरह भजन करना है, किस तरह बैठना है| उसी तरह आप बैठने लगोगे, उसके बाद में जब तुम्हारा सुमिरन ध्यान भजन बनने लगे, चाहे घर बैठ करके करो और मर्जी तुम जहाँ आओ जाओ, कहीं आने जाने के लिए कोई रोक टोक नहीं है | जब सुमिरन भजन ध्यान कि जरूरत समझो कि अब हमको दया मेहर कम आ रही है तो फिर एक बार बड़ेला चले आओ | वहाँ गुरु महाराज के अखण्डस्वरूप का दर्शन करो | जब-जब तुमको दया मेहर कि जरूरत पड़े, कमी महसूस हो तब-तब तुम यहाँ आ करके दर्शन करो और घर जा करके सुमिरन भजन ध्यान करो और यहाँ पर भी करो |

मेंहरिया करते सतगुरु दयाल ||
दीन दयाल सतगुरु मेंरे प्यारे, संगत रहे इनही के अधारे||
बन जाए पुरो काम ||
दया मेंहरआवै मालिक कि, जब तुम भेजोगे नाम ||
यह भाव झरोखे करो यादगारी, हे सतगुरु मेंरे श्याम ||
दीन दयाला सतगुरु कृपाला, सतगुरु मेंरे राम ||
दया मेंहर पाऊँ हे मालिक, बन जायोमेंरो काम ||
दीन दयाला सतगुरु स्वामी, हे मेंरे मालिक राम ||
शीश झुकाऊँ तुम्हरेचरनन, दया मेंहर हो आठोयाम||
सतगुरु जयगुरुदेव

कृपा सिन्धु सतगुरु रघुराई, आरती इनकी सुगम सुहाई ||
कंचन थाल कपूर कि बाती, आरती करे जो संगत साथी ||
नाम भजन उत्तम फल पावे, कटे चौरासी के फंद भी जावे||
सत्य धाम सतगुरु का पावे, सतगुरु चरणन शीश झुकावे||

बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 30 दिसंबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
भजो मन सतगुरु सतगुरु नाम |
संत हमारे सबसे न्यारे, जिन्होंने दियो है नाम |
भजो मन सतगुरु सतगुरु नाम |
अंतर का सब भेद बतायो, कलमल कटे यही समझायो|
सच्चा दियो है नाम, भजो मन सतगुरु सतगुरु नाम |
दया मेहर आवे नामी की, अंतर घट दरम्यान |
भजो मन सतगुरु सतगुरु नाम |
सतगुरु प्रीतम अपने मालिक, इन्ही चरणो में कल्याण |
भजो मन सतगुरु सतगुरु नाम |
सतगुरु संत हमारे प्यारे, रहियो सब जन इन्ही के अधारे|
नाम भजन मन ठान, भजो मन सतगुरु सतगुरु नाम |
सतगुरु जयगुरुदेव
मिलन नामी से सच्चा हो, यही आधार पक्का हो |
बनाओ भाव अंतर में, मिलन घट घाट सच्चा हो |
गुरु की मेहर को पावो, भजन में नाम सच्चा हो |
मेहर नामी की आवे जब, दया की धार की सच्चा हो |
भजन मन ध्यान दे तू जो, गगन का काज सच्चा हो |
अगम अलौकिक पुरुष सतगुरु, अनामी नाम सच्चा हो |
झुको सतगुरु के चरनन में, दया की धार सच्चा हो |
सतगुरु जयगुरुदेव

गुरु वाणी में अमृत भरा है, जो ज़माने मिलता नहीं है |
कर लो सिजदा गुरु प्यारे सतगुरु को, भाव तुम बिन बनता नहीं है |
सतगुरु जयगुरुदेव

गुरु मालिक की असीम दया कृपा से सत्संग के जो भी समय हैं, निर्धारित होते हैं, जितना समय गुरु महाराज चाहते हैं, गुरु महाराज की मौज होती है उतने समय का सत्संग हमको तुमको आप सबको मिलता है | गुरु महाराज की वाणी जो भी उतरे, कोई भी साधक प्रेमी या सत्संग का वक्ता जब सुनाने बैठता है तो गुरु महाराज की पूरी दया कृपा उसपे लागू होती है | जब वो गुरु महाराज को सच्चा हाजिर नाजीर, हर प्रकार से सर्वज्ञ मनाता है तो सच्चे गुरु की दया की धार उस पे उतरती है और वो जो कुछ कहता है उस समय गुरु की वाणी होती है | गुरु की वाणी अकाट्य होती है, कटने वाली नहीं होती है, ना मिथ्या वाणी होती है | गुरु महाराज सबको समझाते बुझाते सबको साथ में रहने की बात बताते आगे को चलने के लिए कहते हैं कि सब लोग उस मण्डल की तरफ चलो जहां तुम्हारा घर है | अपने घर की तरफ चलो यहां कूड़े कचरे से धीरे से अपने को अलग करके, थोड़ा सा लग करके ध्यान भजन करके अपने गुरु महाराज की तरफ चलो | गुरु में ध्यान लगाओगे, गुरु में मन लगाओगे सारी दया कृपा उतरेगी और गुरु की वाणी आपको याद रह जायेगी | गुरु की वाणी बड़ी हीं परम पुनीत है और सच्ची है | गुरु के द्वारा बताया हुआ सारा काज सफल होता चला जाता है | अगर अपने मन तुम अनर्गल करते हो तो उसके जिम्मेदार आप होंगे, गुरु महाराज नहीं, गुरुमहाराज तो हर दम आदेश निर्देश करते रहते हैं, समझते बताते रहते हैं, हर प्रकार से दया कृपा रहते हैं, फिर भी प्रेमी कहते हैं हमारे ऊपर दया मेहर नहीं हुयी| तो प्रेमियों गुरु की हर प्रकार से दया मेहर है, तो आप सब गुरु के साथ रहो, गुरु में मन लगाओ और आगे की चलने की सोचो |

समरथ संत सतगुरु प्यारे, जिनने नामधरायो|

सच्चे सतगुरु, समरथ संत हमारे दाता दयाल स्वामी महाराज परम संत बाबा जयगुरुदेव जी महाराज, सतगुरु जी महाराज ने हमको तुमको सबको नाम दिया और नाम धरवा दिया, नाम हम लोगों को मिल गया | बड़ी हीं भाग्य थी, बड़ी हीं दया कृपा थी उस दाता दयाल की जिन्होंने अपने पास बुला करके हमको तुमको सबकोनामदान दिया, रास्ता बताया, भेद बताया कि अपने घर की तरफ चलो सच्चाई और कड़ाई से मेहनत करके निकल चलो अपने घर की तरफ, उस तरफ चलते चलो जिधर तुम्हारा देश है |

चलो धुरधाम का रास्ता, बड़ा सच्चा बड़ा सस्ता |

उस अधर बेल की तरफ, उस अधर सेन की तरफ, उस अपने मण्डल घर की तरफ, उस अनाम पुरुष प्रभु की तरफ चलते चलो | बड़ा ही सस्ता है और बड़ा हीं अच्छा देश है, तुम्हारा हीं घर है किसी दूसरे का नही| नामी बिराजमान हैं नामी के साथ आगे को बढ़ो और उस मालिक में मिल जाओ, उस प्रभु की गाथा गाओ, उस प्रभु की दया कृपा से सारे भेद को जानो समझो और उस मालिक में मन को लगाओ, आगे को बढ़ते चलो भजन ध्यान करते हुए | एक मात्र काम हीं स्वामी महाराज ने बताया सुमिरन-ध्यान-भजन और दूसरा शाकाहारी सदाचारी का प्रचार |सुमिरन ध्यान भजन नही करोगे तो कैसे काम बनेगा, कैसे दूसरों को बताओगे समझाओगे, कैसे अपने कर्जों को जलाओगे | उस प्रभु मालिक में मन नहीं लगाओगे तो कैसे काम बनेगा |

सुरतिया सतगुरु संग में लाओ |
नाम मनन करो अंतर मंतर, तुम जंतर को जगाओ |
सुरतिया गुरु चरणन में लाओ |

प्रेमियों अपनी सूरत जीवत्मा को जागा लो, ऊपर उठा लो, गुरु के पास चलो |उन्होने जो जंतर मंतर तुम्हें दिया है उस मंत्र से सारा काम बना लो, आगे को बढ्ने लगो, आगे को चलने लगो तो मालिक की पूरी दया कृपा मिलने लगेगी | देखो गुरु महाराज ने हमको तुमको सबकोअच्छा पाठ पढ़ाय, सत्संग सुनाया ऊँचा से ऊंचा, सब प्रकार के भेद बताये और ये बताया कि बच्चू आगे को चलते चलो | निशाना मुजसे रखो किसी दूसरे से नहीं | यदि किसी दूसरे से निशानारखोगे तो तुम्हारा निशाना चूक जाएगा | तुम्हें कुछ मिलने वाला नहीं|वो जो फसावे में रखे है तुमको फंसा करके परेशान कर देगा बरबाद कर देगा| इसलिए गुरु महाराज में मन लगाओ और निशाना मुझसे रखते हुए सारे काम करते चलो |

भेद दो बात को समझो, निशाना धुर की तरफ रखना |

दो बातें एक तो गुरु महाराज को याद करते हुए, दूसरी बात धुरधाम की तरफ, अपने घर की तरफ सतधाम की तरफ को निशाना रखोगे, मालिक में मन लगा करके उस तरफ चलते चलोगे तो पूरी की पूरी दया कृपा होगी कोई कठिनाई नहीं होगी| हर प्रकार से आप उस तरफ बढ़ने लगोगे पूरी दया मेहर गुरु महाराज की आएगी और गुरु सर्वज्ञ है तुम्हे पार जरूर कर देगा | ऐसा बिस्वास अपने अंतर में रखो कि मालिक हमें पार करेंगे उस पार ले जाएंगे |

पार उस देश जाएंगे, सतगुरु की कृपा होगी |

उस देश कि तरफ चले,जाएंगे पार हो जाएंगे, हमारे सतगुरु कि दया कृपा होगी, हमारे सतगुरु कि मेंहर होगी,उन्ही कि दया कृपा से हम जरूर पार हो जाएंगे | ऐसा दृढ़ विश्वास दृढ़ निश्चय अपने अंतर में रखो और गुरु मालिक के बताए हुए रास्ते पर आगे को धीरे धीरेधीरेधीरे बढ़ते चलो |

बढ़ो धुरधाम कि ओरि, पड़ी सतगुरु कि सच्ची डोरी |

मालिक कि डोरी पकड़ करके नाम की धीरे धीरे उस तरफ बढ़ना शुरू करो आगे को चलते चलो | किसी प्रकार कि तुमको दिक्कत परेशानी नहीं होगी | हर तरफ मंगल हीं मंगल होगा अमंगल कहीं नहीं होगा | हर प्रकार से दया मेहर बरसेगी और हर धामों को देखते हुए, सुनते हुए चलते चलो | देखो मीराबाई ने कितनी कुशलता से और कितनी परिश्रम वादी बन करके उन्होने काम किया | सारे भारत में उनका नाम है और विदेशों में भी उनका नाम है कि उन्होने गया “पायो जी मैंने पायो नाम रतन धन पायो” उसी तरह तुम्हारा भी नाम हो जाय, तुम्हारा भी काम बन जाये | हृदय अहीर काशी में रहते थे और उनके गुरु महाराज गोस्वामी जी जिन्होने उनको नामदान दिया था, काशी में उनके साथ बहुत वाद विवाद हुआ, बहुत परेशान किया लोगो ने कि ये गंगा जमुना को नही, मानता राम को नही मानता, कृष्ण को नहीं मानता | नाना प्रकार के लोग प्रलोभन लगाए नाना प्रकार कि परेशानियाँ पैदा की, जबकि गोस्वामी जी ने राम नाम हीं जगाया था और राम नाम से हींनामदान देते थे | हर प्रकार से फिर भी लोगों ने उनको बहुत परेशान किया और संत महात्माओं को परेशान करने की तो इस दुनिया की आदत है | तो प्रेमियों तुम भी साधक हो तुम भी गुरु के बन्दे हो तुम्हारेमुह भी लोग लगते होंगे, पर उनको मत देखो अपने निशाने पर लगे रहो |

चलो सतगुरु के संग में सब, भेद को छोड़ कर सारे |

अपने गुरु महाराज के संग सब लोग चलो | किसी प्रकार का भेद भाव मत रक्खो, ना किसी प्रकार की विविधा को पालो | अपने साथ आगे को बढ़ते रहो, जो सामने मिल जाय उससे श्रद्धा से भाव से सतगुरु जयगुरुदेवजयगुरुदेव बोलो | और वो जवाब दे तो दे न दे तो कोई बात नहीं | तुम्हारा कुछ घट नहीं जाएगा और वो जवाब नहीं देगा तो उसका परिणाम उसके साथ होगा | तुमसे उससे क्या लेना देना, तुमको तो अपने गुरु महाराज से लेना देना है | गुरु महाराज ने बहुत कुछ सिखाया बताया है | उस बताने के अनुसार एक आदर्श बन करके आगे की तरफ बढ़ो और चलो |

चलो धुर की सबरिया, जगवा से नाता तोड़ कर |
चलो गुरु की डगरिया, जगवा से नाता तोड़ कर |
सतगुरु तुम्हे बुलाने आये, सच्चे सतधाम से |
जल्दी जल्दी करो तैयारी, अपने गुरु के काम से |
सतगुरु में लगाओ तुम लगनिया, जगवा से नाता तोड़ कर |

सतगुरु जयगुरुदेव

गुरु के वचन को मनन तुम करो, सतगुरु नाम का भजन सब तुम करो |
सच्चे मन से गुरु में मंगन तुम चलो |

प्रेमियों देखो, जब गुरु में मन मंगन हो करके चलोगे, गुरु में मन लगाओगे और गुरु को हीं सब कुछ मान करके आगे बढ़ोगे तो तुम्हारा बड़ा कल्याण होगा, तुम्हारा बड़ा लाम बन जाएगा और तुम्हारा मन बुद्धि चित्त सब कुछ निर्मल पवित्र हो जाएगा | हर प्रकार से तुम पर दया मेहर हो जाएगी | तुममे कोई त्रुटि नहीं रह जाएगी | लोग तुमको आदर्श मानेंगे और तुम्हारी बातों को सुनेंगे और उस प्रभु को सतगुरु को सिजदा करेंगे | तो ऐसा काम करो, ऐसा आदर्श बनो, जिससे गुरु का सर ऊँचा हो, उनकी पगड़ी ऊँची हो | उनकी बात को सब कोई सुने और आपके मुख से सुनाई जाए तो अच्छी लगे, ऐसा काम करो |

प्रीत प्रतीत सतगुरु की, रीत की बात यह सच्ची |

प्रेम अपने मालिक से प्रभु से करो किसी और से नहीं | यहीं प्रेम प्रतीति है यहीं रीति है कि जिससे नाम लिया है उसी के गुण गाओ, उसी में मन लगाओ |

सतगुरु नाम भजन मन गाओ, सतगुरु में मन को लगाओ |

बारम्बार सतगुरु में मन लगाओ और सतगुरु का भजन करो | देखो प्रेमियों हम सब ने गुरु महाराज से नाम दान लिया | नाम दान लेने के वक्त वक्त गुरु महाराज ने बहुत कुछ सुनाया और समझाया | और नामदान लिया हमने तुमने मुक्ति मोक्ष के लिए कि मुक्ति मोक्ष मिलेगा, परम पद मिलेगा, पिया का घर मिलेगा | पर हमको आपको देखना है कि हमारा आपका सुमिरन ध्यान भजन कितना बनता है | किस प्रकार हम सुमिरन ध्यान भजन करते हैं, बनता है अथवा नहीं बनता है | तो जब बन रहा है तो कोई बात नहीं, अगर नहीं बनता है तो किसी साधक प्रेमी से मिल जाते हैं और पूछते हैं | लिखा हुआ है "साथ संग मोहिं देव निधि परम गुरु दातार " | किसी साधक से किसी गुरु भाई प्रेमी से पूछते "भईया हमारा भजन नहीं बन रहा है, किस तरह क्या करें", अगर उसका बनता है तो समझ करके बताएगा इस तरह इस तरह से करो तुम्हारा भी बनने लगेगा | तो प्रेमियों जब तक भजन नहीं बनेगा तो कोई काम बनने वाला नहीं | इसलिए भजन हीं सबसे जरुरी काम है, भजन बनना चाहिए | हमने तुमने नामदान लिया है भजन बनने के लिए | भजन सबसे बड़ी कुंजी है, सबसे बड़ा गुरु का मंत्र है और इस भजन को जरूर करना |

सतगुरु जयगुरुदेव
आरती सतगुरु परम दयाला, सतगुरु जय अनाम कृपाला|
सत विनय मम कर को जोरि, विनय प्रार्थना सतगुरु तोरी|
श्री चरनन में शीश झुकाऊँ, दया मेहर नामी तेरी पाऊँ |
हे सर्वज्ञ हो जगत बिधाता, हे अनाम श्रुति सबके दाता |
चरण बन्दना कोटि नमामि, कोटि कोटि तुमको परनामी|
मेरे मालिक मेरे नामी, सतगुरुजयगुरुदेवअनामी|

बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 29 दिसंबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
भजन करो सब जन पाओ कल्याण |
नाम भजन होवै सच्चे स्वामी का, सतगुरु नाम अधार |
जुड़े तार से तार अलौकिक, अंतर घट संचार |
भाव से भूंखे सतगुरु प्यारे, भाव करो तैयार |
भाव झरोखे रीझैं प्रितम, नाव न फंसे मजधार |
नाम नामनी मोरे साईं की, कर देंवै उद्धार
भजो मन सतगुरु सतगुरु नाम |
सच्चे सतगुरु अपने समरथ, सच्चा स्वामी का नाम |
नाम भजन में लगो प्रेमियों, हो जावे कल्याण |
सतगुरु जयगुरुदेव

ध्यान मन गुरु चरणन में, ज्ञान की गंगा आएगी |

अगर आप सब लोग ध्यान गुरु महाराज के चरणो में दोगे, गुरू महाराज से मन लगाओगे, गुरु महाराज को हीं सब कुछ मानगो और अंतर के तार को जोड़ोगे, गुरु महाराज से अरदास करोगे की हे मालिक हमारी भी दिव्य दृष्टि खुल जाय, हमे भी दिखाई सुनाई दे, हमे भी अनुभव हो तो उसके लिए आप यत्न करोगे, मालिक से प्रार्थना करोगे, दो बून्द आंसू के गिराओगे और मालिक से भाव से लग कर के प्रार्थना करोगे तो पूरी ज्ञान की गंगा आपके अंतर में उतर आएगी | मालिक की पूरी की पूरी दया कृपा होगी, हर प्रकार से जागृत हो जाओगे आगे को चलने लगोगे |

उधर देश सच्चा साईं का, मिलन होवे संत सार |

उस तरफ जब चलोगे तो गुरु महाराज की बैठक मिलेगी | बैठक पर गुरु महाराज की बैठक है, गुरु महाराज वही रहते हैं | आप को सत्संग सुनने को मिलेगा | संत का सार भेद भी जानने को मिलेगा | गुरु की पूरी की पूरी दया कृपा होगी | आप निर्मल पवित्र हो जाओगे, गुरु की चर्चा करोगे, गुरु का सत्संग सुनोगे | फटकशिला पर गुरु महाराज की बैठक है | उधर अंतर में जब तुम जाओगे तो सब कुछ देखोगे और सुनोगे, आओगे-जाओगे और मालिक की दया कृपा रहेगी |

कृपा सिंधु सतगुरु जी नामी, नाव चलायी उस पार |

दया मेहर के सागर कृपा सिंधु रघुनाथ सतगुरु प्रितम ने अपने नाव में धक्का लगाया, उस नाव को उस पार में ले जा करके खड़ा कर दिया | जहाँ सब सूरतें खड़ी है, हर प्रकार से हर्षित हो रही हैं, प्रफुल्लित हो रही हैं | तुम भी पुलकित प्रफुल्लित होवोगे, तुम भी हर्षित हो जाओगे, तुम गुरु के चमत्कार को देखोगे | गुरु महारज की दया कृपा आपको मिलेगी, पर दया कृपा आपको तभी मिलेगी जब सच्चे मन से गुरु की साधना करोगे, गुरु की आराधना करोगे गुरु की चरण बन्दना करोगे, गुर में मन लगाओगे, गुरु चरणो में रत हो जाओगे और गुरु को ही सब कुछ मानोगे, गुरु को हीं सर्वप्रथम सब कुछ अर्पण करोगे और गुरू से हीं नेह तुम्हारी लगी रहेगी तो तुमको सब कुछ मिलता रहेगा |

मिलै तुम्हे सच्चा शब्द आवाज || अधर बेल की अधर सेन से, हो शब्दन बरसात ||

उधर ऊँचे ऊँचे ब्रम्हाण्डो से उधर के मण्डलों से तुमको आवाज आएगी | तुम्हे सुनाई पड़ेगा, अद्भुत बाजे बजेंगे, तुम्हारा मन मन्त्र मुग्ध हो जायेगा, सूरत जीवात्मा जाग जाएगी | ब्रह्माण्ड से जब तुमको आवाज सुनाई पड़ेगा उधर गुरु महाराज आवाज देंगे, तुम्हे बुलाएँगे, अपने पास बैठाएंगे, हर प्रकार के शब्दों को आपको सुनाएंगे | आपकी जीवात्मा सूरत उसको सुन करके बड़ा हीं मंगन होगी ||

मगन मन गावे सतगुरु नाम || मेहर कियो मेरे सतगुरु साईं, पायो शब्द का नाम| |

सूरत जीवात्मा वहाँ पर झूम झूम कर के नाचती है और अपने गुरु महाराज की चरण बन्दना करती है, सिजदा करती है, शुकराना अदा करती है | गुरु महाराज से कहै है आपने जिस प्रकार से दया कृपा की है कोई नहीं कर सकता | आपने जिस प्रकार हमको उठाया है कोई नहीं उठा सकता | हमको जिस स्थान पर खड़ा किया है कोई नहीं ला सकता | हे प्रभु आप धन्य हो, आप हीं दाता दयाल हो, आप ही सच्चे समरथ साथी हो, आप हीं सच्चे मालिक हो, आप की मेहर हो गयी तो हम इस पार इधर आ गए ||

स्वर्ग बैकुण्ठ ब्रम्हपुरी देखा, माता आद्या का देश | प्रभु राम से मिलन हो गयो, काट गयो सारे कलेश ||

इधर गुरु महाराज की दया कृपा हो गयी तो अंतर में घाट खुल गया | घाट पर गुरु महाराज मिले, गुरु की बैठक को, गुरु के दर्शन को सूरत जीवात्मा ने, साधक प्रेमियों ने किया | तत्पश्चात प्रभु राम के दर्शन हुए, प्रभु राम के दर्शन करने के बाद पलट करके सूरत जीवात्मा देखती है प्रभु राम के देश को, स्वर्ग और बैकुण्ठ शिवपुरी और ब्रम्हपुरी आद्यामहाशक्ति के देश को, सब कुछ धीरे धीरे थोड़ा थोड़ा करके जितनी इच्छा होती है हर प्रांतो को हर देशों को देखती है और हर्षित होती है और गुरु महाराज को देख करके उनके पद चुम चुम करके हर्षाती है ||

पद पंकज चूमै हर्षावे, गुरु बन्दना करती जावे ||

साधक प्रेमी सूरत जीवात्मा गुरु महाराज के चरणों को चूमती है और खूब हर्षित होती है, प्रफुल्लित होती है और गुरु महाराज को धन्यवाद देती हुयी बड़ा खुश होती है, बड़ा आनंदित होती है, बड़ा मंगलमय दृश्य होता है | ऐसा अद्भुत नजारा तो कभी देखा नहीं था, जो उसने देखा है | अपने गुरु महाराज के साथ गुरु महाराज को हर स्वरूपों में देखती है और खुश होती है और गुरु महाराज से कहती है ||

हे प्रितम सतगुरु रघुनाथा, तुमने खोलो मेरा खाता ||

कहती है सूरत जीवात्मा, हे प्रभु हम इस लायक नहीं थे, हम तो पापी नीच कीच जीव थे | हमारे पास तो कुछ भी नहीं था | हम बड़े पापी अधम नर जीव थे | आपने दया मेहर करके हमारा खाता खोला, हमको ऊपर उठाया और इस देश तक लाये, आपकी बड़ी बड़ी दया कृपा है | आपको बड़ा बड़ा धन्य, कोटि कोटि बन्दना है, कोटि कोटि प्रणाम है| आपको सब कुछ आप पर न्योछावर है | हे प्रभु दयाल, आपने कितनी बड़ी दया मेहर कर दी और आपने किस तरह से हमको ऊपर उठा दिया, इसके बारे में तो कभी सोचा हीं नहीं था की हमारे साथ भी ऐसा होगा | हमे भी अद्भुत दृश्य दिखेंगे, हमे भी प्रभु के दर्शन होंगे, हमे भी रघुनाथ के दर्शन होंगे | ऐसा कभी नहीं नहीं सोचा था, पर आपके दया मेहर से हे प्रभु, हे सतगुरु, हमने सब कुछ देखा | आपके देश को देखा, आपके बनाये हुए संरचना को देखा, प्रभु राम के देश को देखा, अब आगे आपकी जहाँ मरजी होगी आप ले चलोगे ||

ब्रम्हपुरी की कीन्ह तैयारी, लाल देश की महिमा न्यारी ||

उधर ब्रम्हपुरी है, अण्डलोक है | गुरु महाराज उधर को सूरत जीवात्मा को ले जाते हैं | वो देश पूरा लाल है, पुरे लाल देश को देख करके खुद भी लाल हो जाती है और सूरत जीवात्मा गुरु महाराज भी लाल लाल दिखाई पड़ते है | खुद भी लाल लाल रहती है | वहाँ फटक शीला है, गुरु महाराज की बैठक है, वहाँ पर बैठती है, सत्संग को सुनती है, गुरु महाराज के वचनो को पूरा सुनती है, हर्षित होती है, देखती है, त्रिवेणी में स्नान करती है | वहाँ ओंकार प्रभु महाराज के दर्शन करती है | वहाँ पर विचरण करती है, वहाँ के मणि-मणिक्यों वाली क्यारियां, बाग़-बगीचे, पहाङ, नदी-नाले, झरने हर चीजो को देखती है और बड़ा हीं अपने आपको आनंदित महसूस करती है | अपने गुरु महाराज पर बार बार बलिहारी जाती है की धन्य हैं दाता दयाल जो ब्रम्हपुरी दिखाया और ब्रम्ह का पद दिलाया | ब्रम्ह की ताकत जो सूरत जीवात्मा में आई पर कुंजी तो गुरु महाराज के पास है | सारा का सारा खजाना तुम्हारे पास जमा रहेगा बैंक में, कुंजी ताला गुरु महाराज के पास रहेगा | कहीं तुम लूटा न दो, इधर इधर उधर न फेंक दो, गुरु महाराज धीरे धीरे सबको ऊपर उठाते चढ़ाते हुए आगे को चलते हैं ||

सतगुरु दया मेहर हुई भारी, पारब्रम्ह की कीन्ह तैयारी ||

सतगुरु की दया मेहर हो गयी | सारी सूरतों को जीवात्माओं को, साधक साधिकाओं को, साधक प्रेमियों को, जो भी सत्संगी गुरु भाई-बहन, जिनकी जीवात्माएं आने जाने लगी, उसमे बहुत से लोग आने जाने लगे तो उन आने जाने वालो को, उन सूरतो को, जीवात्माओं को, ब्रम्हपुरी की तरफ ले गए | फिर पारब्रम्ह के देश को ले जाने के लिए तैयार करवाया और पारब्रम्ह के देश में जब गुरु महाराज ले करके गए तो वहाँ मान सरोवर पर खड़ा कर दिया और कहा, सब लोग इसमें स्नान करो तो बड़ा खुश हो करके हर्षित हो करके सूरत जीवात्माएं स्नान करने लगीं | स्नान करते हीं उनके कर्म कर्जे सारे जो कुछ थे वो सब ख़त्म हो गए | सूरत जीवात्मा निर्मल पवित्र हो गयी और बड़ी बलवती हो गयी | अब गुरु महाराज के चरणों में बन्दना करती है | वहाँ पर की सूरतो से प्रेम मुहब्बत से बात करती है | वहाँ झूला झूलती है और हर सखियों से सत्संग करती है ||

सखींन साख करती सत्संगा, बरनै सतगुरु रूप अखण्डा ||

सूरत जीवात्माएं वहाँ की सूरत जीवात्माओं से कहती हैं, हे सखी, हे भाई, हे बहन, मैं तो बड़ी पापी जीव थी | मैं बड़ा पापी जीव था और गुरु महाराज की दया कृपा से, अपने संत सतगुरु की दया कृपा से, हम यहाँ आएं हैं | वहीं हमको ले करके आएं हैं | हमारे में कोई बल नहीं था, हम तो कुछ जानते नहीं थे | गुरु महाराज हीं इस चमचम चूमचूम देश में आये हैं और हमने इसको कभी देख नहीं, न सुना न समझा, पर गुरु महाराज बताया भेद तब हमको जानकारी हुई | गुरु महाराज हीं यहाँ ले करके आये और इस सर सरोवर में स्नान कराया, हमारे कर्जों को मुक्त कराया | अब हम बिलकुल सफ़ेद फक्क हो गए हैं, एकदम निर्मल पवित्र | अब गुरु महाराज ही जहा चाहेंगे वहां ले जायेंगे और गुरु महारज के साथ हीं रहेंगे और यहाँ के प्रभु राम के दर्शन करंगे | मालिक की जब मेहर होगी तो सारा काम हमारा बनता चला जायेगा और मालिक ने हीं सारा काम बनाया है | यहाँ की जो मणि मणिक्यों वाली क्यारियाँ हैं, हमने कभी नहीं देखि थी, आज पहली बार हम देख रहे हैं | ये सब गुरु की महिमा से, अपने गुरु महाराज की दया कृपा से, हम ये सब देख रहे हैं ||

परम दयाल सतगुरु प्यारे, इनकी मेहर से खेल हैं सारे ||

हमने अपने गुरु महाराज की दया कृपा से इन खेलों को देखा है और इन्ही की मेहर से ये सारा खेल है | इन्ही का बताया हुआ ये सब कुछ है | गुरु महाराज ने हीं सब कुछ बताया है | उन्होंने हीं कहा था ऐसा गियर फसाऊँगा टूट जाएगा पर छूटेगा नहीं तो गियर फास चूका है प्रेमियों, टूट भी गया है, छूटने वाला नहीं | जब तक गुरु महाराज नहीं आएंगे तब तक गियर कोई छुड़ा भी नहीं सकता | चूँकि फ़साने वाला हीं गियर को छुड़ा सकता है | गुरु महाराज ने बताया था की ऐसी लीला मौज करूँगा, ऐसी जगह चला जाऊंगा, जहाँ चाह कर भी हमें नहीं खोज पाओगे, तो प्रभु सतगुरु को सबके बस की बात नहीं, उस्ताद को कोई नहीं खोज सकता, गुरु को कोई नहीं खोज सकता | पर गुरु महाराज ने एक रास्ता बताया था कि हमसे तुमसे मिलन रोज नित्य प्रत्य होगा | वो मिलन होगा अंतरघट में, घट में घाट है प्रेमियों, घाट पर गुरु कि बैठक | जब अंतर में तुम चलोगे तो गुरु महाराज वहाँ हर चौबीसो घण्टे हाजिर नजीर हैं और चौबीसो घण्टे वहाँ मिलेंगे | जब हम-आप जीवित है तो अंतर में जो बैठे गुरु जीवित हैं कि नहीं हैं ? जब वो जीवित हैं तो उन जीवित गुरु से हम बात चित करेंगे अन्तर में और गुरु महाराज से पूछेंगे कि क्या आपकी मौज मेहर है, आप कहा हो | हे प्रभु, जल्दी करो हमको सम्हाल लो, सत्संग को सम्हाल लो, अपनी दया मेहर करो | यहाँ ग्राम बड़ेला में अखण्ड रूप से बिराजमान सतगुरु स्वामी जयगुरुदेव सतगुरु जयगुरुदेव सबको अनुभव कराते हैं, सबपर दया मेहर देते हैं, सबको अनुभव अनुभूति होती है, सबको दिखाई सुनाई पड़ता है | सारे बिस्व के लोग आ जाएँ तो सबको अनुभव हो जायेगा | कोई खाली नहीं रह जाएगा | सारी संगत कहीं भी जाती आती हो, कहीं का भी प्रेमी हो, किसी भी प्रान्त में रहता हो, जो जब चाहे जब आ सकता है | गुरु महाराज कि पूरी दया कृपा होगी उसको, दिखाई और सुनाई दोनों पड़ेगा | जैसे वो दर्शन करेगा और यहाँ गुरु महाराज का भजन करेगा, पौ फ़ौरन उस पे पूरी की पूरी की दया हो जाएगी | उसकी आँख और कान को खोल देंगे | उसे दिखाई और सुनाई पड़ेगा, पूरा का पूरा अनुभव होगा | ऐसा कुछ नहीं है कि अनुभव ना हो | जब तुम्हारा मन सच्चा है और सच्चे मन से तुम चाहोगे की सुमिरन ध्यान भजन करेंगे, हमें भी अनुभव अनुभूति हो, हमें दिखाई सुनाई पड़े तो आपको पूरा का पूरा पसारा दिखेगा और पूरा का पूरा अद्भुत नजारा अंतर में दिखेगा | स्वर्ग-बैकुंठ, प्रभु राम, ब्रम्ह, पारब्रम्ह, महाकाल पुरुष, सतधाम सब कुछ दिखाई पड़ेगा | सब पर दया गुरु महाराज की होगी, हर प्रकार से दया की बरसात होगी | पर अगर तुम समझते हो की हमारा काम ऐसे में बन जाएगा, बाहर से हीं करते रहेंगे तो बाहर से कोई काम न किसी का बना है ना आपका बनने वाला है | भजन तो अंतर का करना हीं पड़ेगा, भजन किये बिना कोई काम नहीं बनेगा, न किसी का बना है न आपका बन सकता है | तो प्रेमियों सब लोग लग करके सुमिरन ध्यान भजन करो ||

भजन करो सब जन होए उद्धार ||
नाम दियो सच्चे साईं ने, नाम पकड़ चलियो उस पार | |
भजन करो प्रेमियों होवै उद्धार ||
नाम भजन सच्चे साईं का, समरथ करेंगे पार ||
भजन करो प्रेमीयों होवै उद्धार ||
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: २५/१२/२०१५ समय: ७:५४ am

गुरूमालिक ने गुरूबहन बिन्दू सिंह को अन्तर में सभी प्रेमियों के लिये संदेश लिखवाया
सतगुरु जयगुरुदेव :
सतगुरू अपनी सेवा से नही संगत की सेवा से खुश होता है| सतसंगत ही सतगुरू है| प्रचार करो प्रचार, प्रचार में तेजी लाओ, मेरे पास वक्त बहुत गिनती का है| सबको बार- बार, दो बार, दस बार अनगिनत बार बुलावा भेजकर सत दरबार में हाजीर कराओ| जिसके पास भाड़े के पैसे न हो मदद करो सब लिखा जा रहा है|
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All together talk to me, u can go new bounce no money
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पल पल का, वो इंसाफ करता बड़ा न्यायी है| न्याय की सच्ची अदालत पर सबको आना है| इधर उधर भागम भागी करने का वक्त गुजर गया| अब तो वो होगा जो सबको हिला के रख देगा| संदेश पर संदेश दे रहा हुँ, दिलवा रहा हुँ| अब भी न चेते तो जाने भाग्य तुम्हारा| प्रचार प्रसार करते रहो जो भी जिसके पास सुविधा हो मेरे मन्दिर अखण्ड मन्दिर का प्रचार करे कराये| जीवों की सेवा करने के लिये ही साथ लाया हुँ सच्ची सेवकायी करो कराओ|मेरा जीवन बीते सारा अखण्ड अर्न्तघट मन्दिर का प्रचार करते करते| सुहानी सतयुगी घड़ी निकट आ गयी है| अनुभव करो कराओ| अनुभव बाटने की चीज है| अनुग्रह बढ़ता ही जायेगा|

सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरू बहन : बिन्दू सिंह
सोहावल , फैजाबाद

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 10 दिसंबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
सतगुरु नाम भजन में लागो, बन जावे सब काज |
लोक परलोक को गरु संवारे, ना होये कोई अकाज |
काज सफल सगरी हो जावें, अंतर मन सतगुरु राज |
दया मेहर अंतर की बरसे, बाजे सारे साज |
मधुर-मधुर जब शब्द सुनावे, रंगत सतगुरु हाथ |
नाम भजन सच्चा मोती है, भजन में ना करो अकाज |
नाम भजन सच्चे सतगुरु का, सच्चा सुख मन राज |
सतगुरु जयगुरुदेव |
ध्यान दे बात को सुन लो, अधर से शब्द आता है |
घाट पर बैठ कर देखो, तुझे सतगुरु बुलाता है |
नाम की सिख दो बातें, ध्यान और भजन में लगाना |
नाम की पायेगा पूंजी, सदा तो तुम्हे रचे रहना |
गुरु का योग सच्चा है, मेहर की खान सतगुरु हैं |
ध्यान दे भजन मन में ला, काम बन जायेगा तेरा |
यही सच्ची प्रीत तेरी, मिलन सतगुरु से होना है |
ध्यान जब देगा तू बच्चा, भजन बन जाये अंतर में |
भजन ही सार मुल्ला है, पार तुझको ले जायेगा |
सतगुरु जयगुरुदेव
नैन नैन में बात करो सब, बैन भजन मन लाओ |
सैन ध्यान की चाभी सच्ची, जिसमे लगन लगाओ |
पार देश एक अद्भुत बंगला, पहुँचो वहां तुम जाओ |
सतगुरु दया विराजे तुमपर, नाम भजन को गाओ |
सतगुरु जयगुरुदेव
सुमिरते चलो तुम सुमिरते चलो, सतगुरु नाम तुम सब सुमिरते चलो |
दुनिया के तुम झकोलो में जाना नही, छोड़ अपना ना देना खजाना कही |
नाम मन को भजन में लगा दे जरा , पार उस पार नैया हो तेरी सदा |
सतगुरु हैं विराजते उसी नांव पर, पार उसे वही ले जायेंगे |
तेरा नर तन सफल जब हो जायेगा, जीवात्मा चैन तेरी पा जायेगी |
दुःख और सुखदा सभी सतगुरु हाथ में, है दया और मेहर सतगुरु साथ में |
नाम का तु वचना अमृत प्याला पिये |
ध्यान धर कर सतगुरु तुम सदा, देश अपने चलन की तैयारी करे |
सतगुरु की सुधि तुमको लग जायेगी, नाम की भी निधि तुम्हे मिल जायेगी
| काम सच्चा सही सतगुरु का यही, कर ले अंतर मन में भजन जरा |
मान दे बात सतगुरु सच्ची सही, काम तेरा भी जल्दी से बन जायेगा |
सतगुरु जयगुरुदेव
गुरुमहाराज ने हमसब प्रेमियों को बहुत कुछ चेताया बताया समझाया, उठना बैठना सिखाया और बोलने कि तार्विज दी | गुरुमहाराज ने सारी बाते बताई सुमिरन भजन ध्यान का रास्ता बताया और संसार में प्रचार प्रसार की भी व्यस्था बनाई और तुम्हारी पहचान गुरुमहाराज ने बनाई तुम्हारी पहचान गुरु से है, ना की गुरु की पहचान तुमसे है | रास्ते में जब तुम निकलते हो तो तुमसे लोग “जयगुरुदेव” “सतगुरु जयगुरुदेव” कहते हैं प्रेम से “सतगुरु जयगुरुदेव” वो भी बोलते हैं आप भी बोलते हैं प्रभु परमात्मा का नाम वो भी लेते हैं आप भी लेते हो और कहते हैं भाई ये बाबा जी के वन्दे हैं सच्चे वन्दे हैं | ऐसा कोई भी काम मत करो जिससे गुरु को हमारे, तुम्हारे गुरु को आंच आये गुरु का काम ऐसा करो जिससे तुम्हे देखकर के दुनियां बदल जाये और सतगुरु का नाम लें गुरुमहाराज का नाम लें की भाई बाबाजी के शिष्य जिस तरह हैं हम भी उसी तरह रहेंगे और हम भी सदाचारी शाकाहारी बनेंगे गुरुमहाराज के चरणों में हम भी मन लगायेंगे | जो लोग कहते हैं बाबाजी की दया नही बरसती वो गलत कह रहे हैं | सच्चे मन से “सतगुरु जयगुरुदेव” बोलने वाले को पूरा का पूरा अनुभव होता है उसे गुरुमहाराज अपने दर्शन देते हैं दिखाई भी पड़ता है सुनाई भी पड़ता है अरे नामदान तो गुरुमहाराज ने दिया ही है आगे बहुत बड़ा नामदान मिलेगा | एक अनामा का एक नाम, एक ही नामदान होगा पूरा का पूरा सच्चा नाम सच्चे नाम से जैसे वो सुमिरन करेगा उसको परमात्मा प्रभु के दर्शन होंगे सतगुरु के दर्शन होंगे दिव्य अलौकिक चीजें दिखाई पड़ेगी सुनाई पड़ेगी | उसको कौन रोक सकता है गुरुमहाराज की जब दया कृपा है तो उनके दया कृपा के आगे कोई नही टिक सकता | गुरु से बड़ा कोई होता नही जिस पर गुरु की दया उस पर प्रभु की दया राम की दया, कृष्ण की दया सबकी दया होती है ब्रह्मा बिष्णु महेश की दया सभी देवी देवतओं की दया, इस दया में आप भी शामिल हो जाओ | लग कर के सुमिरन भजन ध्यान करते रहो गुरुमहाराज को याद करते जाओ यादगारी सुमिरन भजन ध्यान गुरु की |
यादगारी करो सतगुरु की सदा, काम बिगड़े तुम्हारे जो बन जायेंगे |
संसार में तुम चलोगे जिस भी तरह, नाम पहचान तेरी भी बन जायेगी |
मान सम्मान सबकुछ मिलेगा तुम्हे, जरा अंतर भजन ध्यान देना जरा |
दुनिया के झकोले जो आते यहां, सतगुरु की मेहर से हट जायेंगे |
होगी पूरी दया मालिक जाने जहां, काम तेरा सफल हो जायेगा |
नाम सच्चा भजन कर ले सतगुरु की, मान कर बात गुरु की यही काम कर |
तेरा नर तन भी सुन लो सुधर जायेगा, काम बिगड़े हैं जितने वो बन जायेगे |
मन लगाते रहो सतगुरु सदा, सत्य की मेहर भी तुम पर हो जायेगी |
अंतर्घट का खुले तेरे ताल्ला सदा, काम बिगड़े जो तेरे सारे बन जायेंगे |
शिव और शम्भु अराध्य नाग नाथ जी, काम सारे सफल तेरे करवायेंगे |
जो दिया है वचन उन्होंने, वो अपना वचन तो निभायेंगे |
मान बात सतगुरु की तू लग जा जरा, काम अद्भुत अलौकिक भी हो जायेंगे |
इस धरा पर तेरी जय भी हो जायेगी, नाम सतगुरु का सदा अमर हो जायेगा |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 09 दिसंबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
भाव भरोसे सतगुरु मिलेंगे, रूखे फीके मन काम |
लगन लगाओ गुरुचरनन में, बन जाये सारे काम |
सच्ची मालिक जगत विधाता, मिलन होये आराम |
भाव सहित नित घाट में बैठो, दरश परश सतगुरु राम |
नैन झरोखे देखो सतगुरु, लेकर हरदम ध्यान |
भाव बहुत ही है ये जरुरी, विना इसके नही काम |
भाव लगाओ सतगुरु चरनन में, होयेगा कल्याण |
सतगुरु जयगुरुदेव
देखो तुम अंतर सतगुरु को, मेहर सच्ची अनामी है |
खुलेंगे नैन जब तेरे, दृश्य अद्भुत लखानी है |
बड़े ही भाव संग में, मिलना सच्चा हो नामी का |
ध्यान दो तुम गुरुचरनन, पार भवपार स्वामी हो |
घाट पर बैठे सतगुरु हैं, मिलन में तो असानी हो |
चाह और भाव से भजना, नही मन की लगानी हो |
लगेगा मन तभी तेरा, भाव की जब खानी हो |
सतगुरु जयगुरुदेव
भजन मन सतगुरु भज सतनाम |
नाम भजन करो सतगुरु जी का, अंतर चितवन ध्यान |
वेग अलौकिक आवे साईं कि, अंतर धारियों ध्यान |
सतगुरु प्रीतम सुरत में रीझे, भाव झरोखे होये ध्यान |
मेहर से उनके ज्ञान जो उपजे, जगत बिधि को कल्याण |
सतगुरु प्यारे प्रीतम सांवरिया, सच्ची मीठी छांव |
नाम भजन में मन को लाओ, तब सच्चा कल्याण |
सतगुरु जयगुरुदेव
कल्याण हमारा तुम्हारा तभी होगा जब गुरु के चरणों में मन होगा गुरु से प्रेम प्रतीत लगाओगे गुरु का नाम भजन करोगे गुरु की महिमा सुनाओगे खुद सुनोगे और दुसरे को सुनाओगे मालिक के रास्ते पर चलोगे कोई निंदा आलोचना कपट गद्दारी नही करोगे तो मालिक की पूरी दया कृपा अंतर में बरसेगी | यह देश है मिलौनी का, यहाँ छीन छीन पग पग पर मन भटकता है लालसा करता है और हरकते करता है गिरी से गिरी हरकते करता रहता है तो मन को बस में करो मन को रोको और मालिक से प्रार्थना करते रहो की हम कहीं कूड़े कचड़े में न गिरें कहीं गढ्ढे में न गिर जायें मालिक हमेशा दयालू हैं दया के सागर हैं दया करते रहते हैं हमसब पापी जिव हैं जो इस बात को नही समझ पाते | मालिक में मन लगाते चलो और सदा गुनगुनाते चलो गुरु की गीत को गाते चलो गुरु की वाणी को याद करते चलो गुरु में मन लगाओगे तो सच्चा फल आपको प्राप्त होगा गुरु की वाणी को याद रखोगे तो तुम्हारा काम बनता चला जायेगा तुमसे कोई गलती नही होगी अगर तुम गुरु की वाणी को भूल गये तो तुमसे गलती होगी गलती में अपराध बनेगा अपराध बनेगा तो इसकी सजा मिलेगी इसलिए प्रेमियों हमेशा अपने मालिक के वचनों को याद रखो और ये सोचते रहो गुरु अंग संग है २४ घंटे हर प्रकार से दया मेहर कर रहे हैं | हमारे नामी हमारे गुरु सतगुरु हमारे साथ हैं सच्चे प्रीतम हैं सच्चे साईं हैं वो हमारा साथ कभी नही छोड़ते, हम और वो एक अंग संग हैं | जबसे नामदान मिला तब से हमारी संभाल पूरी की पूरी गुरुमहाराज के हाथ में है गुरुमहाराज हमारी पूरी संभाल कर रहे हैं अपने गुरु को याद करते रहें अपने गुरु को गुनगुनाते रहें अपने गुरु को मनाते रहें अपने गुरु में लय लगाते रहें और गुरु का भजन करते रहें आगे आगे चलते जायें और मालिक का नाम भजते जायें मालिक के वचन को याद करते जायें मालिक में मन लगाते रहें मालिक की बात को याद करते रहें मालिक की वाणी को सर माथे रखते हुये अपना भजन सुमिरन ध्यान का कार्य करते रहें और मालिक के वचनों को उलट पलट कर के पत्रिकाओं को देखते रहें | सत्संग मालिक का अद्भुत अलौकिक अनोखा है उसको पढ़ते रहें और सुनते समझते रहें जहाँ पर सत्संग हो, मालिक का गुरु का सत्संग सुनाई जाये वातावरण बना कर के गुरुमहाराज का चर्चा हो गुरु महाराज का ध्यान भजन हो गुरुमहाराज का नाम गुंजायमान हो वहां पर सत्संग सुन लेना चाहिये गरुमहाराज में मन लगा लेना चाहिये और सदा गुरुमहाराज से प्रेम प्रतीत करते रहना चाहिये |
प्रेम सतगुरु से सच्चा हो, यही अनमोल मोती है |
अंतर मन ध्यान सतगुरु का, जले तन मन में ज्योति है |
गुरु कृपा मिले हरदम, यही तो सच्ची मोती है |
लगन और ध्यान सतगुरु का, सांवरियां प्रीतम प्यारे का |
भजन मन ध्यान रखकर के, गुरु में मन लगाने का |
गीत जब भी कोई गाओ, गुरु चरणों की बातें हों |
याद सतगुरु मेरे साईं, यहीं पर सच्ची राते हों |
करो चंचल जरा चितवन, दरश सतगुरु का अंतर हो |
ध्यान देकर जरा देखो, बात अंतर में सतगुरु हो |
सतगुरु जयगुरुदेव सच्चे मालिक सच्चे सतगुरु से मिलने के लिये हमे भावपूर्ण प्रार्थनायें बोलनी हैं दो बूंद आँसू के गिराने हैं गुरुमहाराज से प्रार्थना करनी है हे मालिक हे दाता दयाल हम पर दया करो हे प्रभु हम पर दया करो हम पापी जिव तुम्हारे हैं हमारा कल्याण करो हमारा उध्दार करो दया करो की हमारा स्वास्थ निरोगी और स्वस्थ रहे और हमारा मन तुम्हारे सुमिरन भजन ध्यान में लगे | सांसे निकल रही है जब जब आपकी याद आये तब तब पूरा मन भाव विभोर हो जाये आपके श्रीचरणों में हमारा मन लग जाये | हे मालिक हमसे मिनट २ मिनट ५ मिनट जो भी आपकी अराधना प्रार्थना हो सच्चे मन से हो आपकी यादगारी हो आपसे मिलन हो आपका दीदार हो आपका दर्शन हो हे मालिक आप हममे मिल जायें और हम आपमें मिल जायें हम पर पूरी मेहर हो हम कहीं जगत में भटके ना हम आपके साथ चलें |
मालिक ने जब नामदान दिया तब हमको तुमको सबको समझाया की देखो ये अमोलक रतन धन हम आपको दे रहे हैं इससे तुम कमाई करना सुमिरन भजन ध्यान कर के कमा कर के लेकर आना पर हमने आपने कुछ सच्चाई से किया नही कड़ाई से किया नही यही समझते थे गुरुमहाराज के पास जायेंगे चरण छू लेंगे बस वही सब कुछ दे देंगे पर गुरुमहाराज ने मेहनत करने के लिए कहा की कुछ कमा कर के ले आना पर हमलोगों ने नाम भजन नही किया अब भी मौका है गुरुमहाराज का आदेश है की लगकर के सुमिरन भजन ध्यान करो जब बैठकर के “सतगुरु जयगुरुदेव” बोलोगे मैं आत्मबोध आत्मज्ञान कराऊंगा अंतर में तुमको दिखाई सुनाई पड़ेगा तुम अब भी चेत जाओ और लगकर के ध्यान साधना करो और सतगुरु को याद करो |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
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Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 03 दिसंबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
पावन भजन नाम सतगुरु का , सच्ची गुड़ की खान |
सतगुरु दया विराजे तुम पर , खुल जाये घट के आँख |
भजो मन सतगुरु जयगुरुदेव , सतगुरु जयगुरुदेव अनामी |
नामी प्रीतम मेरे स्वामी , नाम भजन कल्याण |
भजो मन सतगुरु जी को नाम , नाम भजन ये सनातन रास्ता |
दूजो न काम , भजो मन सतगुरु जी का नाम |
नाम दियो और भेद बतायो , मिले पुरुष सतनाम |
भजो मन सतगुरु जी को नाम |
सतगुरु जयगुरुदेव |
मालिक की अशीम दया अनुकम्पा से हम सभी को मालिक दे वचन सुनने को मिलते हैं और मालिक के सत्संग में बड़ी ही दया कृपा गुरु की होती है , तब एक घड़ी आधी घड़ी आधी में पुनियाद , गोस्वामी संगत साध की कटे कोटि अपराध , तो ये जो संगत है तो जो ये सत्संग है मिल जाता है तो ये बड़ी ही गुरु महाराज की दया कृपा है और उन्ही की दया मेहर से ये चीजे मिलती हैं , अगर हम आप सतगुरु के साथ नही होते गुरु के साथ नही होते, गुरु से नामदान नही मिला होता , तो हम भी सांसारिक काम में लगे होते और भजन सत्संग से बड़ी दूर रहते |

सत्संग सतगुरु संत गोसाई , दया मेहर किन्ही अपनाई |

सत्संग जो हमको आप को मिलता हैं ओ सतगुरु गोसाई की दया कृपा से मिलता है | उन्होंने बहुत बड़ी दया कर दिया तो हमको आप को अपना लिया | और गुरु महराज की दया कृपा से ही हम सबको सत्संग मिलता हैं | सत्संग सतगुरु की दया मेहर से मिला, सतगुरु ने बड़ी ही दया कृपा करके एक एक चीजे जो को समझाया और बुझाया |

सत्य गोसाई सतगुरु नामी , सत्य वचन अंतर में जानी |

सतगुरु सत्य के गोसाई है सत्य के गुरुदेव है , सत्य को बताने वाले , सतपथ पर चलने वाले सतगुरु हैं उनकी दया मेहर से हमको सबकुछ मिला है उन्ही की दया मेहर से हमने सारे भेद को जाना और समझा है |

सतगुरु मेहर हुई यह भारी , अंतर बाहर सोच विचारी |

सतगुरु की बहुत बड़ी दया कृपा हो गई उन्होंने हमको लगा लिया और हमने आपने सोच विचार करते हुए आगे पीछे आज करेंगे कल करेंगे ये करेंगे ओ करेंगे ये करेंगे ओ करेंगे इसी में दिन गुजारते चले गए और गुरु महाराज ने अपनी दया मेहर करके जोड़ दिया |

दया कीन्ह घट माहि सतगुरु , घट के फाटक खोले |

दया मेहर कर दिया सतगुरु ने और घट में जो घाट है उसका फाटक खोल दिया | जब फाटक खुल गया तो गुरु महाराज के दर्शन होने लगे |

खोलेव् नयन पसारे को देखो , सकल पसरा सब तुम पेखो |

गुरु महाराज ने दया मेहर करके घट का फाटक खोल दिया और बोले बच्चू अंतर अब चले चलो धीरे धीरे अंतर अब सबकुछ देखो और अंतर में जो कुछ मिल रहा है उसको जानो और समझो और मालिक की विशेष दया होती चली गई और सुरत जीवात्मा धीरे धीरे आगे बढती चली गई |

प्रथम भयो दर्शन गुरु जी का , ता सतगुरु प्रभु राम लखाई |

सब से पहले अपने सतगुरु अपने गुरु महाराज का दर्शन हुआ , दर्शन करके जीवात्मा बड़ी खुश हुई तब गुरु महाराज ने प्रभु राम को लखाया और उस तरफ जाने का भेद और रास्ता बताया और प्रभु राम के दर्शन किये |

धन्य हुई वह सूरत वेचारी , चढ़कर पहुची महल अटारी |

वह अपने को धन्यभाग, वह अपने को बड़ा सफल मानती हैं और अपने गुरु महाराज को कोटि कोटि बार धन्यवाद् देती है कि हे मालिक आपने दया कर दिया तो हमें पहले धाम के दर्शन हो गये और आप के दर्शन हो गए तो गुरु महाराज दया करते है और वहां बड़े बड़े महल और बंगले और अटारी हैं उनको सुरत ने देखा और मालिक से प्रार्थना विनती करती रही की हे मालिक आप की दया मेहर से हमने सब कुछ देखा है |

दर्शन भयो भाई प्रफुलित , मन्त्रमुग्ध होय जहा सुसलित |

सतगुरु की दया मेहर से सुरत बड़ी खुश हो गई बड़ी प्रफुलित हो गई और गुरु महाराज के साथ हो गई अंतर में देखने लगी की कितना अद्भुद है कितनी सुगंधी है कितना अच्छा हैं | और वहां का वातावरण बहुत की अच्छा है येसा देखकर ये सूरत बहुत ही प्रफुलित हो जाती है की मालिक ने दया कर के मेरे घट का घाट खोल दिया |

घट घट वासी सतगुरु अभिनासी , खोलेव घट का केवड़ |

दया मेहर आई सतगुरु की , पहुचेव उनके द्वार |
घट पार सब महल अटारी , देखेव उनके द्वार |
अद्भुद सज्जा है वह पारा , अरे लखानी धाम |
सतगुरु दया मेहर से पायों , प्रभु दर्शन करी राम |
दिव्या अलौकि चमके ज्योति ,पुष्पकमल हैं ज्यां राम |
नाम नयन तर सतगुरु वाणीं , सत के हैं सतधाम |
सतगुरु प्यारे निकोलागे , खोले द्वार कवर |
सतगुरु चरनन शीश झुकयों , पायों हैं निज धाम |
सतगुरु जयगुरुदेव |
सतगुरु की दया मेहर से सुरत को बहुत कुछ मिलता हैं , उसको सारे पसारे की जानकारी होती हैं | उसको ब्रम्हा , विष्णु , गणेश , दिनेश सभी के दर्शन होते हैं , शिव पुरी, ब्रह्म पूरी , विष्णु पुरी देखती हैं तत पश्चात् अध्यामहाशाक्ति के दर्शन करती हैं , तत पश्चात् प्रभु राम के देश में जाती है , प्रभु राम के दर्शन करके प्रफुल्लित हो जाती है अपने गुरु के दर्शन करके प्रफुल्लित होती हैं | सारे प्रकार से ओ सुसजित होकर वह आगे जाने लगती है और गुरु महाराज से दया मेहर की भीख मागती रहती हैं की हे मालिक हम पर बराबर दया मेहर बनाये रखो , हम पर यदि दया मेहर नाही करोगे तो हम कैसे जायंगे , सुरत बराबर दया की भीख मांगती रहती हैं |
मांगत दया दुआ सतगुरु से , हे मालिक वही पार करो |
अब यह देसवा वेगाना लागे , अपने घर उधात |
करदो मेहरिया सतगुरु मेरे , बेड़ा मेरा पार करो |
हे सतगुरु प्रीतम मेरे दाता , मुझको तुम उधार करो |
सतगुरु मेरे हे मेरे साईं , इस घट में उस पार करो |
सुरत जीवात्मा बहुत ही विनती प्रार्थना करती हैं सतगुरु दयाल सुरत जीवात्मा को उस पार करते हैं |
और प्रेमी को साधक को जो भी सत्संगी प्रेमी हैं जिस तरह से दया मेहर की सतगुरु से दया की विनती प्रार्थना करते है और निशाना गुरु महाराज से रखते हैं तो गुरु महाराज दया करके उसको उस पार कर देते हैं |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 02 दिसंबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
भजो मन सतगुरु जी का नाम |
दया मेहर सतगुरु की बरसी, जो पायो है नाम |
दीन दयाला सतगुरु साईं, भेद दियो और नाम |
ध्यान भजन में मन चित लाओ, पहुंचो अपने धाम |
दीन गरीबी में भजन बनत है, सतगुरु जी को नाम |
दया मेहर से मिले तुझे नर तन, जो घमण्ड यही मान |
सतगुरु प्रीतम मिले सांवरियां, नाविक सच्चा जान |
मनवा लागे गुरुचरनन में, बन जावे सब काम |
शीश धरो सतगुरु चरनन में, काहे का अभिमान |
सतगुरु जयगुरुदेव
अखंड रूप से विराजमान सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ग्राम बड़ेला के प्रांगण में बैठे हुए समस्त प्रेमीजन, मालिक की अशीम दया कृपा आप सब पर बरस रही है आप सब लग कर के सुमिरन भजन ध्यान को करो अपने अंतर आत्मा में रोज टटोलते चलो की मुझमे क्या कमी है किस प्रकार की दिक्कत हममे आ रही है क्या परेशानी है उसको अपने परेशानी को दूर करते चलो जो भजन में अरचन डालती हो उसको निकाल कर फेकते चलो गुरुमहाराज में मन को लगाते चलो और गुनगुनाते चलो गुरु महाराज के नाम को गुरुमहाराज के वाणी को याद करते रहो, गुरुमहाराज में रत हो जाओ ध्यान भजन के लिए हीं प्रार्थना करो की हे मालिक दया करो की हमारा सुमिरन भजन ध्यान बन जाये हमारी लगन लग जाये और जब लगन लग जाये तो मालिक से विनती प्रार्थना करते हुए अपने निज घर की ओर चलो | निजधाम और निजघर बहुत दूर है यहाँ से, जब आप अंतर में साधना करोगे मालिक जब दया करेंगे तो अपने घर की तरफ चलोगे जब तक आपका मन भाव नही लगेगा नही बनेगा तब तक तुम्हारा सुमिरन भजन ध्यान नही बनेगा और धीरे धीरे आप गुरु की तरफ उन्मुख होयिये गुरु के तरफ बढ़ते चलिये गुरु से प्रेम और सौहाद्र की भिक्षा मांगते चलिये गुरुमहाराज दयालू हैं हर प्रकार से दया मेहर करते जायेंगे और आपका सुमिरन भजन ध्यान बनता चला जायेगा गुरुमहाराज ने अनेको बार हमको आपको सबको समझाया बताया तरह तरह से भेद का रास्ता दिया रामायण सुनाई और सार भेद सत्संग सुनाया हर चीज सुनाते हुये समझाते हुए बताते हुये और ये भी कहा की भजन के बिना कोई काम बनने वाला नही है तो सबलोग लग कर के भजन करो और गुरुमहाराज का ध्यान करो |
चरण मन लाओ भजन गुरु का नाम |
सतगुरु चरणन जब मन आये, भाग्य तुम्हारा तब जग जाये |
बन जाये अंतर काम |
घट में घाट घाट पर सतगुरु, बाट निहारत आठो याम |
नाम भजन में लगो प्रेमियों, भजन करो आठोयाम |
शब्द सुनावत मन चित धारो, ध्यान भजन अधार |
सैन बैन में सतगुरु पुकारो, बन जाये सब काम |
सत्य सनेही प्रीतम प्यारे, यही सतगुरु यही राम |
सतगुरु प्रीतम मिले सांवरियां, ऐसो विधि क्या काम |
सतगुरु प्रीतम प्यारे मालिक, भेद दियो और नाम |
सतगुरु जयगुरुदेव
गुरु में मन लगाना गुरु को याद करना गुरु से निशाना रखना हीं हमारा काम है हमको आपको जो कुछ समझाया बताया निशाने पर चलने के लिये उस निशाने पर चलते रहें गुरु का भजन करते रहें गुरु की ध्यान करते रहें और आगे की दिनों के बारे में सोचते रहें की मालिक ने बताया है कि सांसो की पूंजी हमारी घट रही है और मालिक ने बताया चेताया है की समय बड़ा नाजूक खराब आने वाला है तो उस खराब समय में भजन हीं काम करेगा तो सबलोग साधन भजन की तरफ बढो मालिक की रास्ते पे ध्यान दो और बढ़ो, की मालिक ने किस किस तरह से समझाया किस किस तरह से मुसीबतों से बचाया और किस किस मुसीबतों से आगे बचायेंगे मालिक हर मुसीबतों से बचाते हैं और हर प्रकार से रक्षा सुरक्षा गुरुमहाराज ने की है जिस तरह उन्होंने अपने बच्चे की तरह तुमको पाला है तुम भी अपने पिता की सेवा ठीक से करो मन लगा कर करो गुरु में मन लगाओ और गुरु में मन लगाने से हीं तुमको मिठ्ठा फल मिलेगा तुमको उतम साधना में प्राप्ति होगी गुरुमहाराज की विशेष मौज होगी तुम सदा गुरु के और गुरु तुम्हारे होंगे इसलिए मनवा लगाओ गुरु में...
मनवा लागे सतगुरु चरनन में |
सतगुरु सतगुरु गाओ |
आठो याम पुकारो सतगुरु, भाग कही मत जाओ |
सतगुरु दीन्ही नाम जड़ी को, इसी से मड़ी चमकाओ |
देखो चमक अलौकिक अद्भुत, उसी रंग में रंग जाओ |
ध्यान रखो अपने साईं की, कभी भूल मत जाओ |
सतगुरु नामी प्रीतम ठाकुर, श्रीचरनन में जाओ |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

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Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 21 नवम्बर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
पावन निर्मल सतगुरु प्यारे , सब जन रहो सतगुरु के अधरे |
दया मेहर सतगुरु की पाओ , मन चित सतगुरु जी में लगाओ |
भाव भजन और गुरु की सेवा , मिले तुम्हे तो नाम की मेवा|
सतगुरु के तुम रहो अधरे , जानो गुरुवर के हो द्वारे |
मन चित तुममे लगाऊं गुरुवर , तुमको मालिक रिझावाऊ सतगुरु |
तुम्हरे चरनन कोटि बन्दना , नाम भजन गाऊं सतगुरु |
सतगुरु जयगुरुदेव
प्रेमियों मालिक के वचन अमूल्य है और हम सभी को उन बचनो पर चलना है उसकी विवेचना करते हुए , एक एक वाणी को समझते हुए , आगे को बढते रहना है | गुरु महाराज ने हमारे कितनी मेहनत से कितनी बड़ी संगत तैयार की ये कोई छोटी-मोटी बात नही हैं | हम सब को लग करके एक एक तार को जोड़ करके रखना है | इस समय संगत में हर जगह तोड़ना मरोड़ना लगा हुआ हैं | पर हम लोग एकछ्त्र बैठकर सुमिरन ध्यान और भजन करते रहे, मालिक का आदेश जिधर हो वहां सब लोग बैठे | अभी तक मालिक का आदेश यही है की अखण्ड रूप से विराजमान सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ग्राम बड़ेला में जो अंतर आदेश है की अंतर में बैठकर सुमिरन ध्यान और भजन करो और जो भी प्रेमी आएगा उसे दिखाई सुनाई पड़ेगा उसका भी भजन यहाँ पर बन जायेगा | यहाँ से किसी को कहीं जाने की कोई रोक या मनाही नाही है | गुरु के आधारे गुरु के द्वारे आते जाते रहो कहीं आओ कहीं जाओ कोई रोक टोंक नही हैं | पर सुमिरन ध्यान और भजन के लिए एक बार यहाँ भी आओ और आप का सुमिरन ध्यान और भजन बन जाये तब अपने घर बैठकर करो और गुरु द्वारे आओ और कहीं भी जाओ | प्रेमियों शाकाहारी और सदाचारी बने रहो और बनाते रहो | सुमिरन ध्यान और भजन करते रहो और कराते रहो , दुसरो को भी बता दिया करो की किस तरह से सुमिरन ध्यान और भजन किया जाता है और किस तरह सुमिरन ध्यान बनता हैं |
मन बन जाये ध्यान भजन में , तो ये सच्चा काम |
निर्मल काया ध्यान भजन की , अंतर मिलिहै राम |
गुरु गोसाई समरथ अपने , पहुचावे निज धाम |
मनवा लगाओ ध्यान भजन में , बन जावें सब काम |
सतगुरु प्यारे रहो अधारे, मेहर जो वरसे आठोयाम |
सतगुरु के दरवाजे जाओ , मिले दया का जाम |
नाम भजन में मन चित लाओ , मिलेंगे पुरुष अनाम |
शीश झुकाव सतगुरु चरनन में , बन जाएँ सब काम |
सतगुरु जयगुरुदेव |
प्रेमियों ध्यान भजन करना और कराना हमारा आप का कर्त्यव है गुरु महाराज ने यही बताया है की एक एक बन्दे को जोड़ते चलो तो बहुत संगत हो जाएगी | एक प्रेमी एक को जोड़ेगा तो दो हो जायेंगे दो से चार चार से छः इसी तरह जोड़ते चलो , धीरे धीरे बताते चलो और जो नया प्रेमी है और उसको नामदान नही मिला है तो उसको बोल दो की आप सतगुरु जयगुरुदेव सतगुरु जयगुरुदेव नाम की माला भजो तो परम संत सतगुरु गुरु महाराज जी महाराज दर्शन देंगे और अंतर में ही नामदान दे देंगे और वो हमारा गुरु भाई हो जायेगा और संगत में एक नया प्रेमी जुड़ जायेगा तो जब आप लोग इस काम पूर्ण समरथ्ता से करोगे तो गुरु महाराज भी पूर्ण समरथ्ता के साथ अनुभव और अपना परिचय उसको करा देंगे और उसका भी ध्यान और भजन बनेगा | उसे भी दिखाई सुनाई पड़ेगा और आप के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर आप के साथ चलेगा |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
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Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 06 नवम्बर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
मन चित लागे नाम भजन में , ऐसी करो मंजूरी |
चंचल चितवन नाम भजन की , हो सुधि तेरी पूरी |
कंचन निर्मल नामी प्यारो , नहीं नाम में दुरी |
चमक अलौकिक अंतर आवे ,नाम भजन सिंदूरी |
मन चित रखियो नाम भजन में , सतगुरु दिए मंजूरी |
सतगुरु जयगुरुदेव |
आप सब पर गुरु महाराज की विशेष दया कृपा बरसे , आप सभी पर मालिक की दया बरसे , साथ ही साथ मालिक ने जो बताया शाकाहारी सदाचारी प्रचार करते रहो और लग करके सुमिरन ध्यान भजन करो वक्त नाजुक घड़ियों से गुजरने जा रहा है , आप सब ज्यादा से ज्यादा समय निकल कर सतगुरु जयगुरुदेव नाम का जाप करो भजन करो , अपने सतगुरु तो वही है जिन्होंने नामदान दिया उन्ही को नाम दान दिया उन्ही को सतगुरु कहा जाता है और जयगुरुदेव प्रभु ही वही हैं सब कुछ मालिक में ही जाकरके देखो तो एक मिलेगा | अपने सतगुरु जो अपने मालिक को तुम प्रभु मानोगे या जिस तरह से तुम्हारी मान्यता होगी, अनाम मानोगे सतनाम मानोगे जिस तरह तुम्हारी चाहत होगी उस तरह से प्रभु तुमको पार लगाएंगे | अगर तुम गुरु महाराज को बाबा समझते हो की ये बाबा है तो बाबा तो बाबा है , अगर भगवान मानते हो गुरु मानते हो प्रभु मानते हो तो सब कुछ आप को मिल जायेगा | अखंड रूप से विराजमान सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ग्राम बदला के प्रांगड़ में आगे गुरु दादा महाराज के पावन भंडारे के शुभ अवसर पर १८ दिसंबर २०१५ से २२ दिसंबर २०१५ के बीच ऐतिहासिक कार्यक्रम ग्राम बड़ेला में होगा | यहां पर विशेष अलौकिक दया कृपा गुरु महाराज की बरसेगी , जिसमे विशेष अनुभव अनुभूति , बरक्कत और गुरु महाराज हारी बीमारी , भूत प्रेत बाधा हर चीजो में पूरी की पूरी दया मेहर करेंगे ऐसी गुरु महाराज की मौज हैं | यहां पर जो प्रेमी पधारे गें उनको पूरा पूरा भौतिक और आध्यात्मिक दोनों प्रकार का लाभ होगा | गुरु महाराज ने कहा है की जो यहां पर आएगा तीन बार और सच्चे मन से ध्यान और भजन करेगा उसकी दिव्य नेत्र खुल जायेंगे और उसे दिखाई सुनाई देने लगेगा | अनुभव हो तो मानो और अनुभव न हो तो न मनो | जो प्रेमी कहते हैं की मई भटक गई वहां गए और भटक गए , तो जो यहाँ आने के बाद यदि भटक जाते हो तो कही और जाने पर सुधर नहीं जाओगे वहां जाने पर कोई अनुभव तो होगा नहीं | न कोई अनुभव की बात करेगा , न तुम्हे कोई सुमिरन ध्यान भजन का सही तरीका बताएगा , यहाँ तो आप को सब कुछ खोल खोल के बताया और समझाया जाता हैं | यहां पर केवल गुरु महाराज का गुरुगान होता है | यहाँ पर सतगुरु के हाजिर नाजिर का ही प्रोग्राम होता हैं | सतगुरु का अंत नहीं होता गुरु महाराज ने की कहा की संतों का आने का शिलशिला बंद नहीं होगा और संतों का अंत नहीं होता इसलिए सतगुरु चौबीसों घंटे हाजिर और नाजिर होता हैं | गुरु महाराज इसी धरा पर मानव शरीर में हाजिर नाजिर हैं और हर प्रकार से हाजिर और नाजिर का प्रमाण ओ दे रहे हैं पर ओ प्रमाण आप को अंतर में मिलेगा | बाहर से जब उनकी मौज होगी तो बहार से भी आप को साडी चीजे बहार से भी मिल जाएँगी लेकिन अभी तो सबकुछ अंतर की बात हैं , अंतर की विद्या पड़े जा रही है और अंतर से मिल रहा है | जयगुरुदेव नाम का प्रचार बहुत से लोग भारत में करते हैं जो की अच्छा हैं और जो शाकाहारी सदार्चारी का प्रचार करते हैं ओ भी बहुत उचित हैं | हम में उनमे कोई फर्क नहीं है, फर्क केवल इतना ही है की हम सुमिरन ध्यान और भजन और गुरु महाराज को हाजिर नाजिर मान करके काम करते हैं | आगे उनका मत ओ जैसे काम करते हैं पर गुरु धाम का प्रचार करते हैं | हम में और उनमे कोई ईर्षा द्वेष और जलन नहीं होनी चाहिए , कोई भी मिले तो उससे गुरु की बंदना सतगुरु जयगुरुदेव , जयगुरुदेव बोलना चाहिए | अगर ओ नहीं बोलता है तो आप के मुह से तो निकले| अगर ओ नहीं बोलेगा तो कोई बात नहीं हमारे कहते में तो जुड़ जायेगा की हमने एक बार गुरु का नाम लिया | प्रेम और सौहार्द से सुमिरन ध्यान और भजन करना और गुरु की एक एक वाणी को याद करना और गुरु महाराज के वचनो पर नेवछावर होना, गुरु की वंदना करना , गुरु के काम को आगे बढ़ाना , गुरु की शेवा करना | गुरु की वाणी अकाट्य है जो ओ कहेंगे सो होगा | आप सब संभल कर लगे रहो और गुरु महाराज का चितवन करते रहो |
सतगुरु जयगुरुदेव :

बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

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सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 03 नवम्बर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
ध्यान करो सतगुरु जी के चरना ,उन चरणन बलिहारी जाओ |
दियो नाम का कंगना , नाम रतन अति निको लगे |
दियो है मिठो गहना , अंतर घाट का नाम भजन हो |
मिलो सूरत क्या कहना , मन चिट धरो नाम भजन में |
नाम का पहनो गहना , नाम रतन धन मिले सतगुरु का |
दियो बड़े गहना , पूर्ण प्रताप हुए तेरे |
सतगुरु गुरु चरणन में प्रेमियों , सबको हमको रहना |
चरण बंदना गुरु प्यारे की , बाद में बादक कहना |
बंदौ सतगुरु परम परगो , जो चरणन हो अनुरागो |
शीश झुकाओ सतगुरु चरणन में |
सतगुरु जयगुरुदेव |
प्रेमियों बड़े ही भाग्य से सतगुरु मिलते हैं और नामदान मिलता हैं | नाम का दान सतगुरु समरथ संत अशीम दया कृपा करके दे देते हैं , की जिससे जीव नाम भजन करके इस पार से उस पार निकल जाये और उस सतगुरु के सरनागत हो जाये जिसने उसे नाम दिया | संतों की महिमा निराली हैं , हर छन हर पल अंतर्घट में दिवाली होती रहती हैं | दिवाली से काम मनोरम नहीं होता है और इससे कही अधिक अद्भुद अलौकिक चीज होती हैं | मालिक की दया कृपा चौबीसो घंटे अनावरत बरसती रहती हैं , जिसको प्रेमी जन समझ नहीं पाते | सुमिरन भजन ध्यान लगन से करना ही हम सभी का कर्तव्य हैं | गुरु महाराज ने हमेशा बताया की बच्चों सदा शाकाहारी सदाचारी रहते हुए नाम भजन को करना | यह मनुष्य शरीर साधना का द्वार हैं साध करके निशाने पर बैठकर के अपने निज घर अपने निज धाम चलने का रास्ता ऐसी मनुष्य रुपी मंदिर में हैं | प्रेमियों लगन सतगुरु से लगाना , गुरु की वाणी पर अटल रहना , गुरु की वाणी पर विश्वास करना ही हमारा आप का परम कर्त्तव्य हैं | मनचित लागे नाम भजन में , मिल जाये नाम खजाना |
सतगुरु मेहर जो बरसे बदरिया , सतगुरु में मन लगाना |
घाट के ऊपर चले सुरतिया , अद्भुद दृश्य दिखाना |
नाम का रोगन सतगुरु का हैं , दियो सतगुरु ने खजाना |
अंतर बहार करो जटनिया , सतगुरु मन को लगाना |
चरणन में बलिहारी जाना , चरणन शीश झुकना |
नाम बंदना मेरे मालिक की , इन्ही में मन को लगानां|
तित प्रतीत सतगुरु से , मिल जाये नाम खजाना |
दया मेहरिया बरसे सतगुरु की , इन्ही में मन को लगानां |
सतगुरु प्रीतम मेरे मालिक , मिल जाये दिव्या खजाना|
शीश झुकाऊ तुम्हरे चरण में , नाम भजन गाना |
सतगुरु जयगुरुदेव |
साधना करके अपने देश को चलना ही , हम सब का एक आधार हैं , और अपने घर चलने का आधार गुरु महाराज हैं , गुरु महाराज के चरणो से बंधे रहने से हम अपने घर जा सकते हैं , इसके शिवा कोई दूसरा रास्ता नहीं की उस ओर ले जाये | गुरु महाराज ने जो बताया समझाया उसी के मुताबिक हम लोग जा सकते हैं , गुरु महाराज एक अद्भुद प्रा विद्या के दाता नामी हमारे सतगुरु हैं | हमसबको अपने सतगुरु में सदैव के लिए लीन रहना हैं | निशाना गुरु महाराज से रखना है , दुनिया से नहीं | देखना अपने गुरु की वाणी को है और गुरु में ही विश्वास करना हैं | सतगुरु कोई नया पुराना नहीं होता हैं सतगुरु वही होता है जो सत्य का नाम दान देता है जो सत्य पथ पर चलता है वही सतगुरु होता हैं | सतगुरु उसी को कहते है जिससे प्रेमी को नाम दान मिला होता है, उस प्रेमी का सतगुरु उसके गुरु होते हैं , फिर आगे जो नाम जागृत होता हैं उस नाम का उच्चारण होता है , अगर सतगुरु नाम नहीं लिया जाता तो सतगुरु की जगह पर कौन आएगा, सादा जयगुरुदेव कहने से काम नहीं चलता, इसलिए अपने सतगुरु को याद करना , जिसने सत्य पथ पर चलाया सत्य पथ बताया सत्य का नामदान दिया वही हमारे सतगुरु है |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

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सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 27 अक्टूबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
मंगल पवन सतगुरु नामू, नाम भजन में मिले प्रमानु ,
चंचल चितवन अंतर मन में , अंतर नाम भजन कर नामु ,
सतगुरु शब्द स्नेही प्यारे , ध्यान भजन मन करो दुलारे ,
अंतर घट में होय उजियारे , मन चित दो सतगुरु को डारे ,
तन मन अर्पण सतगुरु जी को , ध्यान भजन करो सब जन प्यारे ,
सतगुरु चरनन शीश झुकना , नाम भजन सतगुरु का गाना,
सतगुरु जयगुरुदेव |
अखंड रूप से विराजमान सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ग्राम - बड़ेला के प्रांगड़ में बैठे हुए दूर दूर से आये हुए हमारे गुरु भाई - बहन सब को सादर सतगुरु जयगुरुदेव, मालिक की अशीम दया अनुकम्पा से प्रत्येक पूनम पर गुरु महाराज की दया से सत्संग का कार्यक्रम चला आ रहा है और आगे भी चलता रहेगा | प्रेमी कोई भी हो सत्संग सुनाने वाला, गुरु की दया की धार जो से अंतर से उतरेगी वही सत्संग सुनाया जायेगा | अंतर का जो भी आत्म बोध है आत्म ज्ञान है | वही सच्चा आत्म बोध आत्म ज्ञान हैं | अगर कोई कहता है की उसको अनुभव होता है और उसको अनुभव नहीं, इसको इसतरह होता और उसको उस तरह होता हैं, तो जो कुछ अनुभव होता है ओ मालिक की दया कृपा से होता हैं , किसी के कहने और सुनने से कुछ नहीं होता | कोई भी साधक प्रेमी किसी भी प्रेमी को मार्ग दर्शक हो सकता है और बता सकता है की इस तरह सुमिरन ध्यान और भजन करो और इस तरह अनुभव अनुभिति होती है | लेकिन अनुभव तो गुरु महाराज ही कराते हैं , दया मेहरा तो गुरु महाराज ही देते हैं | गुरु महाराज ही सब चीजों को बताते हैं और समझाते हैं और वही बताएँगे और समझायेंगे | आगे भी बताते रहेंगे और हम लोगो को चाहिए की गुरु के अधारे गुरु के द्वारे रहकर जो कुछ गुरु महाराज ने बताया है उसे करना और सच्चा नाम भजन करना| साथ ही साथ शाकाहारी सदाचारी का प्रचार करते रहना है | खुद भी जगो और जगत को जगाते चलो यही गुरु महाराज का आदेश है | मालिक के चरणो में अपनी आस्था को बनाये रखना ही मुख्य है | किसी भी प्रेमी को निचा न दिखाए, चाहे ओ छोटा हो या बड़ा हो | मान सम्मान सबका करो और सबका मान रखो | आप यदि किसी को सम्मान दोगे तो आप को भी सम्मान मिलेगा | मीठी वाणी का सभी लोग उपयोग करेंगे जिससे सभी लोग प्रेम से रहे | तुम अपना काम करो और दुसरो को भी काम करने दो और कोई किसी के लिए अड़ंगा न बने यदि कोई आप के लिए अड़ंगा बनता है तो आप को अपने सामने के अड़ंगे को साफ करने का कर्तव्य बनता हैं | मालिक के चरणो में मन लगाना और मालिक का चिंतन करना और मालिक की आराधना करना हमारा आप का परम कर्तव्य हैं , साथ ही साथ दूसरों को भी बताते रहे की मै भी नाम भजन करता रहू और आप भी करते रहो | गुरु महाराज ने नाम की दात दी है और ये नाम की दात बड़ी ही अमोलक है |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
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सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 16 अक्टूबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
सतगुरु में मन को लगते चलो , गुन गुनाते चलो गुनगुनाते चलो |
नाम अंतर के सतगुरु का गाते चलो , भाव भक्ति में खुद को लुटाते चलो |
नाम धन का खजाना जो तुमको दिया , उसको थोड़ा थोड़ा लुटाते चलो |
शीश चरणो में सतगुरु के झुकाते चलो|
सतगुरु जयगुरुदेव ||
मंगल नमवा नाम प्रभु का , धर कर नाम जो गावे |
अंतर्घट में गुरु की कृपा , नित प्रति समझो पावे |
नाम भजन में मन चित लग जाये , शब्द भेद सुन पावे |
सतगुरु प्रीतम मालिक मिल जाये , नाम भजन को गावे |
चढ़े सुरतिया अम्बर दिखे , सच्चे सुख को पावे |
मंगल मनवा करे वंदना , चरण शीश झुकावे |
सतगुरु जयगुरुदेव|
प्रेमियों, अखंड रूप से विराजमान सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ग्राम - बड़ेला के प्रांगड़ में बैठे हुए समस्त प्रेमी जन, मालिक की बताई हुई वाणिया बड़ी अनमोल और अमोलक हैं | हर वाणी गूढ़ रहस्यों से परिपूर्ण हैं | एक एक वाणी का रहस्य अभेद हैं जिसको जानना समझना कठिन हैं | जो गुरु महाराज अंतर में बताएं वही सत्य है | जो लोग कहते है की अनुभव नहीं होता और दिखाई सुनाई नहीं पड़ता उनसे वास्तव में भजन से मतलब है ही नहीं और जब भजन करते ही नहीं तो उन्हें दिखाई सुनाई कहा से पड़ेगा | मालिक के बताये हुए रास्ते पर जब चलेंगे लग कर सुमिरन ध्यान और भजन करेंगे | गुरु ने कहा की बच्चू लग करके करो तो १५ दिन में दिखाई सुनाई पड़ने लगेगा , फिर गुरु महाराज ने १५ दिन से घटा कर ७ दिन कर दिया और कहा की बच्चू मन चित को रोक कर ठीक से सुमिरन ध्यान और भजन करो आप को दिखाई सुनाई पड़ने लगेगा | तो जब गुरु महाराज ने ये बता दिया की इतने दिन में ये होने लगेगा तो ओ ओ होने लगेगा | गुरु महाराज ने यहाँ एक बैठक बनाई और बताया की जो भी प्रेमी यहाँ आएगा और सच्चे मन से ध्यान और भजन करेगा उसकी आँख खुल जाएगी | तो जो प्रेमी आते हैं सच्चे मन से ध्यान और भजन करते हैं तो उनकी आँख गुरु महाराज खोलते है न की अनिल कुमार गुप्ता खोलते हैं | जब उसकी आँख खुल जाती है दिखाई सुनाई पड़ने लगता है तो कही भी सुमिरन ध्यान और भजन करे , उसे हर जगह सुनाई दिखाई पड़ेगा | और जब कर्मो का आवरण आ जाये तो गुरु महाराज के पास चला आवे , अखंड रूप से विराजमान मालिक के दर्शन करे और अपने आवरण को साफ करे और लग कर सुमिरन ध्यान और भजन करे तो जैसे पहले सुनाई दिखाई पड़ता था वैसे ही उसे फिर से दिखाई सुनाई पड़ने लगेगा | जैसे जैसे मन गुरु चरणो में लगता जायेगा , वैसे वैसे अनुभव होता चला जायेगा | मालिक ने एक बार खेतौरा आश्रम पर कहा बच्चू ये कर्मो का देश है यहां कर्मो का लेन देन चुकता करना पड़ता है | तो जो लिया है किसी से उसे देना पड़ेगा | और जो कुछ है हारी में वीमारी में इधर उधर करके सब ख़त्म करवाया जाता है | उसके बाद जब जीवात्मा सूरत निर्मल पवित्र हो जाती है , और कोई कर्म कर्ज नहीं बचता तो अपने निज घर को प्राप्त कर लेती हैं और गुरु के साथ अपने देश चली जाती है | गुरु महाराज हमेशा जीव के अंग संग रहते हैं और हर प्रकार से दया मेहर करते हुए | अपने निज घर अपने निज धाम पंहुचा देते हैं | किसी प्रकार की शंका नहीं होनी चाहिए , अपने गुरु पर , गुरु पुरे होते है उनमे किसी पारकर की कमी और मिलौनी नहीं होती है | ओ सर्वज्ञ और मालिक है और हर प्रकार से समरथ मालिक हैं ओ जो चाहे सो कर सकते हैं | आप को पाने सतगुरु में पूर्ण विश्वास होना चाहिए |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

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सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 15 अक्टूबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
भजो मन सतगुरु जी का नाम |
नाम भजन में मुक्ति मोक्ष है, दूजो न कोई काम |
नर तन पायो बड़े भाग्य से, सतगुरु का गुणगान |
प्रीतम तुमको मिले सांवरियां, समझो सतगुरु राम |
मनवा राखो नाम भजन में, येही कियो कल्याण |
सतगुरु सतगुरु रोज पुकारो, भजो सतगुरु का नाम |
सतगुरु जयगुरुदेव
देश निर्मल पवित्र नामी, नाम को तुमको भजना है
देश बड़ा ही निर्मल और पवित्र है जिस देश के नामी हैं और नामी भी उतना ही निर्मल हैं जितना वो देश निर्मल है उज्जवल फक्क सफ़ेद चमचम देश है उसी तरह के नामी भी उज्जवल सफ़ेद हैं कोई मिलौनी नही दया की बरसात २४ घंटे होती रहती है शीतलता की छांव हमेशा बरसती रहती है हमसब को लगकर के अपने सतगुरु के वचनों को ध्यान देना परम आवश्यक है और उन्ही की वाणी को याद रखना है
चलो सब देश को अपने, सतगुरु लेने आये हैं
काम चुकता करो तुम तो, नाम धन देने आये हैं
सबलोग अपने देश को चले चलो अपने संत सतगुरु के अपने परम पिता के साथ में जो कुछ तुमने यहा पर ले रखा है कर्म कर्जा उसको देते हुये अपने प्रभु के साथ चले चलो नाम भजन करते हुये उस देश में निर्मल और पवित्र देश में चले चलोगे वहां कोई दुःख तकलीफ कोई पीड़ा कोई परेशानी नही, न कोई कुछ कहने वाला है न कोई तुमको दबाने वाला है वहां ख़ुशी ही ख़ुशी है सौहाद्र ही सौहाद्र है अपने सुन्दर पवित्र देश में जब तुम पहुँच जाओगे तो तुम्हारा पूरा का पूरा काम बन जायेगा इसीलिए सतगुरु तुम्हे लेने आये हैं तुम अपने देश को चले चलो
नाम निर्मल मिला तुमको, नाम को तुम भजन कर ले
ध्यान दे घट के भीतर तु, और कुछ तो जतन कर ले
तुमको परम अलौकिक नाम मिल गया है रास्ता मिल गया है तो ये तुम्हारा कर्तव्य है की तुम नाम भजन तो कर लो कुछ ऐसा जतन करो जिससे घट के भीतर अंतर में तुम्हे दिखाई सुनाई पड़ने लगे घट का दरवाजा खुल जाये घाट खुल जाये और तुम्हे तुम्हारा प्रीतम मिल जाये तुम अपने सतगुरु से मिल जाओ तुम अपने प्रीतम से मिल जाओ तुम्हे राम दिखाई पड़ने लगे तुम्हे सब प्रभु दिखाई पड़ने लगे प्रभु को देखोगे तो तुम्हारा मन कितना खुश होगा कितना तुम गदगद हो जाओगे की हमने प्रभु के दर्शन पाये हमने गुरु के दर्शन पाये हमने सतगुरु के दर्शन पाये जब तुमको सतगुरु के दर्शन होंगे तो तुम्हे परम अलौकिक अनुभूति अंतर में प्राप्त होंगी गुरु के दर्शन मिलते हीं सारी मैलाई कट कट जायेगी
निर्मल पावन सतगुरु नामी, नाम भजन अंतर प्रमाणु
निर्मल पवित्र नाम जो तुमको मिला है उसका जब तुम भजन करोगे तो अंतर में तुमको प्रमाण मिलेगा अंतर में ज्ञान मिलेगा अंतर में दिखेगा अद्भुत अलौकिक दिखाई पड़ेगा अद्भुत अलौकिक सुनाई पड़ेगा
शब्द सुहाना अंतर आवे, शब्द वेग अंतर में सुनावे
कितना प्यारा कितना मोहक कितना सुहाना नाम अंतर में सुनाई पड़ेगा शब्द अंतर में सुनाई पड़ेगा बाजे अंतर में सुनाई पड़ेंगे जिससे तुमको बड़ी ही प्रेम और प्रतीती होगी बड़ी ही अलौकिक उसमे रीत होगी ऐसा अद्भुत लगेगा ऐसा लगेगा की तुम्हरी इक्षा नही होगी की तुम उससे उठ जाओ तुम्हारी इक्षा होगी की १० मिनट और कर ले, १५ मिनट और कर ले, जितना अधिक समय मिल जाये, उतने अधिक से अधिक कर लें, ऐसा तुम काम करोगे अपने भजन के लिए अपने सतगुरु के लिए यही उचित और अलौकिक प्रमाण अंतर में मिलता है
गुरु ज्ञान कृपा बर्षा दीजिये, मुझे चरणों में अपने लगा लिजिये
मै दुखियारी इस जगत में भटका, डग डग कहाँ कहाँ नही मै अटका
चरणों में अपनी बिठा लिजिये, सतगुरु दया मेहर बर्षा दीजिये
नाम दिया है अलौकिक नामी, दया मेहर किया तुमने हे स्वामी
अंतर दरश दिखा दीजिये, गुरु चरणों में अपने बैठा लिजिये
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
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Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 14 अक्टूबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
नैन बिच देखो सतगुरु मालिक |
अंतर विंदु बतायो सतगुरु, चहु दिश है हरियाली |
नाम भजन सतगुरु की कृपा से, निति सब हैं मटियारी |
सतगुरु सब जन पर हैं मालिक, दया करत अधिकारी |
नाम भजन और नाम दिया है, ये समझो अविकारी |
मन चित धारो गुरुचरनन में, नाही रहे विकारी |
सतगुरु जयगुरुदेव
अखण्ड रूप से विराजमान सतगुरु जयगुरुदेव मन्दिर ग्राम बड़ेला के प्रागंण में बैठे हुये इस नवरात्री के पावन पर्व पर समस्त प्रेमीजन दूर दूर से आये हुये हमारे गुरुभाई बहन | सब लोग बड़े ही विनम्र भाव से बड़े ही ध्यान से बड़े ही चाव से गुरुमहाराज की वंदना प्रार्थना अराधना करेंगे और गुरुमहाराज से अपनी गुनाहों की माफ़ी मांगते हुये लगकर के सुमिरन भजन ध्यान करेंगे गुरुमहाराज ने कहा है जो सच्चे मन से सुमिरन भजन ध्यान करेगा उसे पूरी की पूरी अनुभव अनुभूति होगी उसे दिखाई भी पड़ेगा और सुनाई भी पड़ेगा तो प्रेमियों हमारा आपका कर्तव्य है जब गुरुमहाराज ने कह दिया है दिखाई सुनाई दोनों पड़ेगा तो दिखाई सुनाई तो पड़ रहा है और जो नये आये है जिन्हें दिखाई सुनाई नही पड़ रहा तो वो भी लगकर के करें उन्हें भी दिखाई सुनाई पड़ेगा गुरुमहाराज की पूरी की पूरी दया कृपा होगी और साथ ही साथ आपको अपने आचार विचार को बदल लेना है सतगुरु के मत के हिसाब से बदल लेना है सतगुरु मत के हिसाब से करना है सतगुरु के हिसाब से चलना है

भजन मन सतगुरु नीम अटार |
चरण वंदना प्रथम नमामी , अपने सतगुरु प्रीतम स्वामी |
पांचो धनी हैं अराध्य |
सतगुरु माला ऐसी फेरो, रह जायें राधेश्याम |
श्याम व राधा की अमिट बजरिया, सत्य धाम अविराम |
मन चित खिलके फुल्के कलियाँ, दिखे सतगुरु राम |
शीश धरो सतगुरु चरनन में, सत्य का मिले प्रभाव |
सतगुरु जयगुरुदेव

प्रथम सतगुरु वंदना हो, बाद अंतर करो चारी |
नाम का मनका जो फेरो, मनन में नाम के धारी |
सर्वप्रथम गुरु का ध्यान करके जब सुमिरन करने बैठे तो जो मनका फेरो तो अपने नामधारी को, नाम जिससे धारण किया है उसे याद रखो और जिसका नाम लो उसका स्वरुप याद रखो और उसका भजन करो तो नाम स्वरुप याद कर के जब काम करोगे तो जल्दी से तुम्हारा सुमिरन भजन ध्यान बनेगा

गुरु के साथ में चलना, परम दिश होये मंगलाचार्य
गुरु के साथ जब चलोगे तो सब मंगलाचार्य हीं मंगलाचार्य, अंतर में कहीं अमंगल नही है बाहर की ये दुनिया नही है की यहाँ वहां अमंगल हो, अंतर की दुनिया में कोई अमंगल नही है हम सब को गुरुमहाराज साथ लेकर चलते हैं तो मंगल हीं मंगल होता है
देश सुन्दर पुरुष सुन्दर , सुरत सुन्दर संवारी है |

अधर की तरफ बढ़ देखो, उजारी हीं उजारी है
गुरुमहाराज का ध्यान भजन करते हुये सुरत जीवात्मा धीरे धीरे गगन मंडल में अंतर में आगे की ओर बढती है जहां उसको उजियारी ही उजियारी दिखाई पड़ता है बड़ा अद्भुत बड़ा चमचम बड़ा हीं सुन्दर उसको मिलता है वो यहाँ से पहुंचती है स्वर्ग को देखती है मंत्रमुग्ध हो जाती है फिर स्वर्ग के देवता और शक्तियों को “सतगुरु जयगुरुदेव” “जयगुरुदेव” बोलकर प्रणाम करती है इसी तरह धीरे धीरे सुरत जीवात्मा दर्शन करते हुये फिर आगे विष्णु पूरी को जाती है वहां जाकर के वह विष्णु भगवान को “सतगुरु जयगुरुदेव”, “जयगुरुदेव” कह कर प्रणाम करती है वहां की खिलकत को देखती है समझती है सत्य नारायण स्वामी से मिलती है , सत्यनारायण स्वामी जनपातक और देवी लक्ष्मी को प्रणाम करती है माता सरस्वति को प्रणाम करती है जब ब्रह्म लोक में जाती है तो ब्रह्माजी को देखती है वहां प्रणाम करती है “सतगुरु जयगुरुदेव” बोलती है और जब वहां, जब पूछते हैं तो बताती है की हमे अपने गुरु के यहाँ जाना है धीरे धीरे शिव पूरी पहुँचती है शिव भोले नाथ भोले भंडारी दया के भंडार अथाह सागर माता अनपूर्णा पार्वती उन्ही के साथ विराजमान महामाई दयावान कृपावान वो भी दया करती है और मार्ग बता देती हैं की इधर चले जाओ धीरे धीरे सुरत जीवात्मा आगे गुरु के संग गुरु के बल से देवी अध्यामहाशक्ति महामाई के दरबार जिनको दुर्गा जी कहते है अध्या महाशक्ति जिन्हें कहते हैं इस समय उनका पर्व चल रहा है उनके उधर पहुंचती है उनकी दया कृपा लेकर के उनके साथ उनको प्रणाम कर के उनसे चरण वंदना कर के गुरुमहाराज की दया कृपा से आगे को बढती है आगे जब रास्ता मिल जाता है गुरु के साथ निकल जाती है तब वो फिर छोटा बनाकर के गुरुमहाराज ले जाते हैं फिर सुरत जीवात्मा प्रभु राम अपने राम राजा राम के दरबार में पहुंचती है और बड़ा ही खुश होती है और प्रभु राम भी खुश होते हैं प्रभु राम खुश होते हैं और बड़ी ही दया कृपा करके रास्ता दे देते हैं की आगे की चले जाओ और आगे भी देख आओ की क्या है क्या नही है तो सुरत और प्रभु राम के बिच क्या बात चित होती है क्या क्या होता है वो सुरत और जीवात्मा, जीवात्मा और राम , आत्मा और परमात्मा हीं जानता है या तो सतगुरु जो शब्द संग में रहता है गुरुमहाराज जानते हैं

सतगुरु मेहर होये सब भांति, मिले प्रभुजी निर्मल हुई छाती
सुरत जीवात्मा कहती है की गुरु की कृपा से हमको प्रभु परमात्मा मिल गये हमारी हृदय में हमारे जो है छाती हमारे अंतर में ठंडक आ गई हमको बड़ा ही शीतलता और बड़ा ही अद्भुत अविरलता हमारे अंदर आई और ततपश्चात गुरुमहाराज की कृपा से हम आगे बढ़े |

लाल देश एक लाल है मुकामा,देख्यों देश लाल प्रमाणा गुरु महाराज की दया से आगे गये तो अंड की जो रचना है लाल देश को देखा लाल मुकाम को देखा गुरुमहाराज को देखा गुरुमहाराज भी लाल और सारा देश लाल हम भी लाल

“लाली देखन मैं गई मैं भी हो गई लाल “
तो मीराबाई जब वहां गई थी तो वो भी लालो लाल हो गई तो उन्होंने लिखा वैसे जो भी जायेगा वहां वो भी लालो लाल हो जायेगा वो भी लिखेगा और रास्ता तो एक ही हैं पहले से और आगे भी एक हीं रहेगा कोई २-4 रास्ता नही हो जायेगा बस समरथ संत होने की जरूरत है संत सच्चा हो तो रास्ते पर तुमको पहुंचा देगा और संत अगर कच्चा है तो तुमको कहाँ से पहुँचायेगा |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 13 अक्टूबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
नाम धन अधर सेन की देन, नाम मिले कोई प्रेमी को,
नाव में जावे खेय , अद्भुद सुनावे जब इस धरा पर ,
लागे मेलो की रेल , नाम धनी सतगुरु प्रीतम हैं,
आधार देश के सेन , भेष भूषा सतगुरु की अलौकिक ,
नाम रतन की देन , मन चिट खोजो नाम रतन धन,
अंतर बजे बीन , बजन बजे अद्भुद सुन्दर ,
उसी में होवो लीन , सतगुरु प्रीतम मेरे श्वरिया ,
जिन ने नाम को दिन , श्री चरण में शीश झुकाओ
दया मैहर को कीन्ह

सतगुरु जयगुरुदेव
जब जब महान आत्माओ और संत सतगुरुवाओ की दया मेहर होती है और उनके गुरु जब अंतर में दात बक्श देते है तब दात बख़्शने के बाद अंतर हुक्म कर देते है की बच्चू हमारे इस धन को तुम्हे इस संसार में बांटना है तब वह येणी से चोटी तक जोर लगा करके वह उस कार्य को करना प्रारम्भ करते हैं, जीवो पर दया करते हुए सबको नाम रतन धन देते हैं , नाम को बाटते हैं शिष्यों को बनाते हैं , स्वयं को गुरु न कहते हुए अपने को सेवक कहते हैं और सब को नाम रतन धन देते हुए सांगत को जोड़ते हुए काम सुरु करते हैं , ऐसे ही हमारे गुरु महाराज ने सं १९५२ से ये काम सुरु किया और धीरे धीरे संगत को जोड़ने का , बड़ी ही कठिनाई के साथ पैदल चल कर , लाल टेन लेकर , रातो में बुलाकर लोगो को , साईकिल चला करके , फिर दो पहिये से चल करके , फिर चार पहिये से चल करके धीरे धीरे मालिक की संगत बढ़करके अथाह सागर की तरह हुयी| गुरु महाराज ने हमारे सन १९५२, १९५४, १९५६ , १९६० तक बहुत बड़ी मेहनत की, तब धीरे धीरे संगत बढ़ी | गुरु महाराज ने अथक प्रयास करके दादा गुरुमहाराज के आदेश का पालन किया | इस तरह का आदेश का पालन आज तक कोई प्रेमी हमारे गुरु महाराज परदे के पीछे है कोई नहीं कर पाया | गुरु महाराज एक एक प्रेमियों के पास जा जा करके उसकी बात को सुन सुन करके सब को दया देकरके और सब प्रेमियों को जोड़ करके एक साथ रक्खा | गुरु महाराज अब भी सबको पूरी की पूरी दया कृपा दे रहे हैं , और एक तरफ से जोड़ रहे हैं | नाम भजन का जो रास्ता बताया ओ सच्चा हैं , सच्चा रास्ता हमारे सतगुरु ने बताया और गुरु महाराज ने बताया की कलयुग में कलयुग जायेगा और कलयुग में सतयुग आएगा और सतयुग आने पर 1 बीघे में 100 मन गल्ला होगा | उससे पहले सफाई होगी , शाकाहारी सदाचारी बचेंगे और पापाचारी यो की सफाई हो जाएगी तो प्रेमियों इस तरह से हमारे गुरु महाराज ने बड़े बड़े जलसे रचाये बड़े बड़े काफिले निकले बड़े बड़े कर्यक्रम किये , त्रिवेणी संगम , नैमिसरण , अयोध्या , काशी , मथुरा में बड़े बड़े प्रोग्राम किया और वहां पर करोड़ो का जन सैलाब उमड़ा , मालिक ने हमारे अथक प्रयास करके सब को जोड़ा और एक दिशा, एक निर्देश दिया और सबको सुमिरन ध्यान और भजन का रास्ता बताया , प्रभु प्राप्ति का रास्ता बताया और कहा मेरे सामने लगकरके सुमिरन ध्यान और भजन करलो तो तुमको उच्ची कोटि की प्राप्ति होगी, तुम शाकाहारी रहते हुए प्रभु को प्राप्त कर लोगे , प्रभु मय हो जाओगे और गुरु मय तब हो जाओगे जब गुरु के चरणो में लग जाओगे , गुरु को देखते हुए सतगुरु को देखते हुए जब प्रभु को देखोगे तो प्रभु जरूर मिलेगा , प्रभु जीता जगता है और पूर्ण रूप से सचर है, प्रभु दया वैन है | प्रभु हाजिर नजीर एक पराविद्या एक शक्ति है , प्रभु को पुकारोगे तो प्रभु अवश्य मिलेगा | प्रभु तो वही होता है नर रूप में हरी, नर रूप में सतगुरु हरी होते हैं , नर रूप में नारायण होते है , वही परमात्मा होते हैं,उन्ही में परमात्मा संलिप्त रहते है , उन्ही में परमात्मा समाहित रहते है और उन्ही की जबानी परमात्मा बोलते रहते हैं , उन्ही को परम आत्मा कहा जाता हैं | परमात्मा के दर्शन संत सतगुरु ही करवाते हैं , संत सतगुरु के द्वारा ही परमात्मा का दर्शन होता हैं | हे प्रेमियों आअप जब जब लगकरके सुमिरन ध्यान और भजन करोगे और जयगुरुदेव सतगुरु जयगुरुदेव बोलोगे तो तुम्हे प्रभु के दर्शन होगे मालिक के दर्शन होगे , और हरप्रकार की गुरु महाराज आप पर दया करेंगे |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

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Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 8 अक्टूबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
भजन मन नाम गुरु का ध्यान , ध्यान मनन हो गुरु चरण की ,
जिन्होंने दियो है नाम, हाजिर नजीर मान के प्रेमियों,
करो सब सुमिरन ध्यान , अंतर रूप अलौकिक गुरु का ,
सब को मिलेगा प्रमाण , नाम भजन मन धारो प्रेमियों ,
यही सतगुरु का काम , नाम अलौकिक है मालिक का ,
नाम भजन मन ध्यान , शीश झुकाओ सतगुरु चरण में ,
मिले दया का प्रमाण||
सतगुरु जयगुरुदेव |
भाव झरोखे सतगुरु देखो , करो ध्यान मन ज्ञान ,
दिव्या अलौकिक देश दिखाए , सतगुरु का प्रमाण,
विनय प्राथना गुरु चरण की , सब बन जाये काम ,
सतगुरु संग हमेशा रहियो , एहि अंतर का काज ,
शीश झुकाओ सतगुरु चरनन में , बन जाये सरे काम ,
सतगुरु जयगुरुदेव |
भजन मन ध्यान कर देखो , गुरु की मेहर आएगी ,
दिव्य देशों की गड़ना जो , सूरत उस पार जाएगी |
जब आप सब लोग सुमिरन ध्यान भजन करोगे और मन चित लगाओ गे और गुरु महाराज के बताये हुए रास्ते पर चलोगे तो तो तुम्हारी साधना बनेगी और तुम्हे दिव्य अलौकिक रचना दिखेगी जिसको गुरु महराज ने बताया है , तुम्हारी सूरत उस पार देश में जाएगी जहां के बारे में गुरु महाराज ने समझाया है और अंग संग गुरु महाराज होगे और तुम्हे वहां की चीजे देखने को मिलेंगी, जो हमारे गुरु मालिक ने बताया है |

देश अद्भुद बना न्यारा , चमक का सकल पसारा है,
श्वेत नामी श्वेत धारा, श्वेत ही सब उजियारा है |
वहां पर सबकुछ निर्मल पवित्र एकदम साफ़ सफ़ेद है , वहां का मालिक रूहानियत से लबरेज बिलकुल सफ़ेद है , वहां पर कोई दूसरा नहीं दीखता अपने सतगुरु अपने दाता दयाल अपने मालिक का देश हैं , सच्चा अविरल देश , जिस देश के लिए गुरु महाराज बताते हैं और साधक प्रेमी वही को चलने के लिए तयारी करते है और वही चलने के लिए इक्क्षा रखते हैं |

सुनो पवन बचन मेरा , ध्यान धर इसको देखो |
गुरु का देश निर्मल है , ज्ञान ध्यान कर इसे देखो |
गुरु का देश इतना पावन पवित्र है की उसको ध्यान करके देखोगे और ज्ञान करके चलोगे तो मालिक की अलौकिक दया कृपा बरषेगी और आप को ऐसा मंत्रमुग्ध कर देगी की तुम्हे कोई और दूसरी चीज याद नहीं रहेगी , आप को केवल गुरु महाराज की वाणी याद रहेगी और गुरु महाराज दिखेंगे और गुरु महाराज ही आप को सबकुछ बताएँगे और समझायेंगे |
गुरु महाराज कोई हांड़मांस का पुतला नहीं है गुरु महाराज ने कहा की जहां भी आप जयगुरुदेव या सतगुरु जयगुरुदेव बोलोगे मई आप को वहीँ मिलूंगा | गुरु महाराज हर तरह से हाजिर नजीर है और सर्वव्यापी है | गुरु महाराज जहां के लिए कुछ भी कहेंगे वह सिद्ध करके दिखाएंगे , गुरु महाराज समरथ संत हैं | गुरु महाराज ने बहुत बड़ी संगत खड़ी कर दिया और सभी पर बहुत बड़ी दया कर दिया और सब को नाम दान दे दिया और अब सब का काम है की लग कर सुमिरन ध्यान और भजन करें |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

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Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 7 अक्टूबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
भजन मन अंतर होवे ज्ञान |
नाम भजन सच्चे सतगुरु का, अंतर मन में ठान |
दिव्य अलौकिक देश दिखेगा, धनियों का प्रमाण |
सतदेश के सतगुरु मालिक, गुरु से रखो आश |
कर विश्वास ध्यान मन जोड़ो, मन नही करो उदास |
नाम भजन सच्चा साथी है, सच्चा सतगुरु साथ |
प्रेम सहित सब शीश झुकाओ, इन्ही से राखो आश |
सतगुरु जयगुरुदेव
नाम मन चितवन अंतरयामी |
अंतर के स्वामी हैं नामी, येही अन्तर्यामी |
तन मन जोड़ोगे स्वामी से, मिलेंगे तुमको नामी |
नाम भजन सच्चे सतगुरु का, येही है सच्चे स्वामी |
नामी मालिक सतदेश के, सतगुरु येही हैं नामी |
करो अराधना मन चित लाई, येही हैं अपने नामी |
नाम भजन सतगुरु से जोड़ो, आदि अंत के स्वामी |
चरणन इनके शीश झुका लो, येही हैं अपने नामी |
सतगुरु जयगुरुदेव
प्रेमियों, अखण्ड रूप से विराजमान सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ग्राम बड़ेला के प्रागंण में बैठे हुये प्रेमियो, प्रेमियों जब तुम्हे लगन लगती है सुमिरन भजन ध्यान की तो उसी छण तुम्हे लगन लग जाये तुम्हारी मन आ जाये तुम कही भी हो वहीं पर बैठ जाओ और सुमिरन भजन ध्यान में जो भी समय देना है दे दो वो सच्चे मालिक की परमार्थ में जुड़ेगा और आपका नाम भजन बन जायेगा और जिनकी जिनकी साधना नही बनती वो पहले भावपूर्ण प्रार्थना बोले गुरुमहाराज की प्रार्थना अराधना बोलने के बाद सुमिरन भजन ध्यान के लिए बैठे जब गुरुमहाराज की प्रार्थना अराधना बोलेंगे जब सुमिरन ध्यान भजन के लिए बैठेंगे तो मालिक की विशेष दया कृपा होगी और उनकी अनुभूति होगी मालिक ने बहुत कुछ बताया और समझाया की मेरी एक एक वाणी अकाट्य है कोई काट नही सकता कोई माई का लाल इधर का उधर नही कर सकता जो काम मै करने आया हूँ कर के ही जाऊंगा चाहे मुझे ४०० साल रहना पड़े अब हमको आपको सोचना पड़ेगा गुरु मत के हिसाब से यहाँ तो जीवन १०० वर्ष १२० वर्ष का आयु तो ४०० साल कैसे रहेंगे तो इसलिए वो ४०० साल रहेंगे इन कपड़ो को बदल बदल कर के और अपना प्रमाण दे देकर के बतायेंगे और सारा काम करते जायेंगे पर गुरुमहाराज ने कहा है की मैं इसी तरह सारा काम कर दूंगा तो उस तरह का कोई ना कोई भी अधार निराधार होगा, देखो पूरे देश में इस समयजगह जगह कार्यकरम हो रहे हैं इधर भी उधर भी उधर भी उधर भी सब जगह हो रहे हैं कोई कह रहा है इधर आओ कोई कह रहा है उधर आओ सच्ची बात तो ये है अनुभव अनुभूति आत्मबोध आत्मज्ञान, आत्मबोध आत्मज्ञान नही, तुम्हे दिखाई सुनाई नही पड़ा तुम्हारा भजन नही बना तुमको अनुभव नही हुआ तो मुक्ति मोक्ष किस प्रकार से प्राप्त होगा अगर कान पे अंगुली रखते हो अंतर में जाते हो शब्द सुनाई नही पड़ता तो फिर तुमको कैसे शब्द पकड़ के अंतर ले जायेगा और अगर तुम्हारे शब्द अंदर उतर रहा है तो नामी से तो वैसे लगन लगी है नामी की दया मेहर से शब्द आता है और शब्द नामी की हीं दया मेहर से उतरता है जब मन चित प्रेमियों का लगता है तब शब्द उतरता है और जब मालिक की दया मेहर होती है तो दिव्य आँख खुल जाती है अंतर दिखाई भी पड़ता है और सुनाई भी पड़ता है सतगुरु पूरी तरह दया मेहर करते हैं और सारी चीजे दे देते हैं दया की बरसात करते हैं दुखों का निवाड़ करते हैं हारी बिमारी का नाश करते हैं सब पर दया करते हैं ऐसे दाता दयाल ऐसे सतपुरुष धन्य हैं जो की खुद सर्वसत्ता के मालिक है सनातन धर्म के प्रतिक हैं और उसके पथ पालक हैं उस पथ पर चलाने वाले हमारे संत सतगुरु हमारे मसीहा परम संत स्वामीजी महाराज सतगुरु जयगुरुदेव जिन्होंने इतनी बड़ी संगत तैयार कर दी और निष्कंटक निष्कलंक सारा काम होता आया है आगे भी होता रहेगा आप सबलोगों को ध्यान देना चाहिये की जब मालिक ने बता दिया की बच्चू तुमने ये मेरे जीते जी मंदिर बनवाया है मंदिर में मै अखण्ड रूप से विराजमान हूँ यहाँ पर जो प्रेमी आयेगा सच्चे मन से ध्यान भजन करेगा उसकी आँख खुल जायेगी तो अखण्ड रूप से विराजमान का खण्डन नही होता अखण्ड तो अखण्ड है वो २४ घंटे यहाँ मिलेंगे कोई कहता है की क्या खूंटे से बंधे हैं तो गुरुमहाराज तो २४ घंटे शब्द रूप से अंतर में रहते हैं तो क्या उसके अंदर कोई खूंटा है, खूंटा है नाम का अगर तुम सतगुरु जयगुरुदेव बोलोगे तो वही खूंटा है वही नाम का खूंटा और उसी के अंतर्गत गुरुमहाराज बंधे हुये हैं और जब गुरुमहाराज का नाम तुम लोगे और, जब अपने मुख से सतगुरु ये कहे की मैं इस तरह से हूँ उसमे उस तरह से हूँ उसमे उस तरह से हूँ तो उसका प्रमाण लो वहां पर जाकर के सुमिरन भजन ध्यान करो अपना आत्म कल्याण करो अपना आत्मबोध करो सदा सर्वदा के लिए जब कहा मै इसमें अखण्ड रूप से विराजमान हूँ तो अखण्ड रूप का तो खण्डन होगा नही जो भी रहेगा हमेशा हमेशा के लिए सन्देश बना रहेगा मंदिर में कोई टूट फुट होगी तो उसका जीर्णोधार होगा पर स्थान पर कहा गुरुमहाराज ने तो हमेशा हमेशा के लिए तो रहेंगे ही भूते ना भविष्यते कभी इसका खंडन नही होने वाला | गुरुमहाराज के साथ रहोगे लगे रहोगे सुमिरन भजन ध्यान बनता रहेगा आप लोगो की आँखे खुल जायेगी आप लोगो को दिखाई सुनाई पड़ने लगेगा और जितने लोग आते हो सबको अनुभव होता है और तुम्हारे साथ साथ तुम्हारे बच्चे बच्चियों को भी अनुभव होता है जिनकी जिनकी शादीयाँ हो होकर के यहाँ से चली गईं उन्हें भी गुरुमहाराज ने जा जाकर के बताया है की देखो ये काम कर लो तुम सही हो जाओगे वो काम कर लो तुमको ऐसा हो जायेगा तो तुमलोग गुरु के निशाने पर रहो सुमिरन भजन ध्यान करते रहो आगे कार्यकरम आ रहा है १३ से २२ तारीख तक कार्यकरम है साधना शिविर का सुमिरन भजन ध्यान का नवरात्र में नव दीन का कार्यकरम है और जिसको जितना समय हो उतने समय के लिए आये और हवन पूंजन करे सुमिरन भजन ध्यान करे और यहाँ पर कुछ अनुष्ठान कर दिया जायेगा मालिक के बताये अनुशार कुछ संकल्प के अनुशार एकाद दो मूर्तियाँ बना दी जायेगीं जैसे काशी में गुरुमहाराज ने बिष्णु जी की बनाई थी वैसे हीं किसी देवी देवता की जो बतायेंगे गुरुमहाराज तो मिट्टी की बना दी जायेगी और हवन पूजन होता रहेगा बाद में कल्याणी में उसका विसर्जन कर दिया जायेगा |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
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सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 6 अक्टूबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
नाम धन सतगुरु जी ने दी |
बड़ी मेहर और बड़ी कृपा कर, लिन्हा तुमको चीन्ह |
भेद बतायो नाम भजन का, उसमे होवो लीन |
मन चित धारो नाम भजन में, अंतर बाजे जो बीन |
मनवा लागे गुरुचरणन में, बने काम तब धीन |
सतगुरु मेहर विराजे तुम पर, तुम भी सतगुरु संग लीन |
पद पंकज में शीश झुकाकर, बन जाओ तुम दीन |
सतगुरु जयगुरुदेव
धरम और करम की रेखा, संत हीं सार भेदी हैं |
भेद बतलाते हैं सतगुरु, वही तो सच्चे भेदी हैं |
भाग्य के करम के बारे में सबकुछ संत सतगुरु समझाते हैं सकल पसारे की बात बताते हैं वही असली भेदी हैं वही असली नेमी हैं वही असली संत हैं संत हीं सब चीजों के गड़ना करते हैं गड़ना कर के सारे बातों को समझा देते हैं और सब कुछ समझा देते हैं की तुम्हे किस तरह से रहना है किस तरह से करना है कैसे तुम्हे चलना है कहाँ पर तुम्हे जाना है क्या तुम्हे देखना है क्या नही देखना है किसमें लगन लगाना है किसमें नही लगाना है ये सारी चीजें संत सतगुरु हीं बताते हैं
शब्द भेदी सचर साईं, सखी के संग संता हैं
संत बिन संसारा सुनी, कोई भी काज ना बनता
संत की हीं साख है संत के बतायी हुई शाखाएँ हैं सारे रास्ते है सखी सुरत को कोई ज्ञान नही है संत ही सबकुछ समझाते बताते हैं संत ही सबको ले चलते हैं संत ही सारे भेद को बता देते है उनके बिना कोई भी रास्ता हम लोग नही चल सकते हैं सुरत जिवात्मा उधर नही जा सकती संतों के द्वारा ही सारा निर्माण और कार्य है संत के बताये हुये रास्ते और भेद से ही हमको उस देश की तरफ जाना है प्रभु से मिलना है हरी से मिलना है
हरी गुणगान संत सत्संगा, आठों अमित नाम जहाँ गंगा |
प्रभु राम ओंकार रारंगा, सोहंग सतनाम सत्यधारा |
सतगुरु जी का सकल पसारा |
सत का भजन करो एक वारा, हो जाये सारा विस्तारा |
सगुण निर्गुण का ज्ञान सतगुरु, ध्यान अराधना की ज्ञान सतगुरु
| निर्मल मन कंचन जो होवे, सतगुरु चरनन नित सो सेवे |
सतगुरु चरनन शीश झुकावे, मुक्ति मोक्ष परमपद पावे |
प्रेमियों सबसे बड़ा गुरु है, गुरु से बड़ा कोई नही कर्ता कुछ ना कर सके, गुरु करे सो होये तो सतगुरु ही सबकुछ करते हैं सतगुरु ही सबकुछ बताते हैं सतगुरु हीं सबकुछ लगाते हैं और अभी धीरे धीरे महान पर्व नवरात्र का आ रहा है तो नवरात्र में क्या करते हैं तीन तीन दीन व्रत रहते हैं तो रजो गुण तमो गुण सतो गुण एक एक गुण को मार देते हैं और जो सत्य चीज है उसको प्राप्त कर लेते हैं और नवरात्रों में सुमिरन भजन ध्यान का विशेष समय होता है विशेष मुहुर्त होता है तो नवरात्रों में विशेष सुमिरन भजन ध्यान होगा और समस्त भारत के प्रेमियों को आमंत्रित किया जाता है सुमिरन भजन ध्यान करने के लिए अखण्ड रूप से विराजमान सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ग्राम बड़ेला के प्रागंण में आप सब आइये जिनका जिनका सुमिरन भजन ध्यान नही बनता यहा बनेगा मालिक ने ऐसा हुक्म फरमा रखा है आप सब को दिखाई भी पड़ेगा सुनाई भी पड़ेगा आप का सुमिरन भजन ध्यान बनेगा आपका सुमिरन भजन ध्यान बन जाये यही हमारी सेवा होगी मालिक ने जो चीज बताई है वो चीज आपको बताई जायेगी समझाई जायेगी और सबलोग समझ कर के उस तरह से करो की तुम्हे भी पूरा का पूरा प्रताप पूरा का पूरा फल प्राप्त हो जाये |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
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Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 5 अक्टूबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
नाम को भजते चलते चलो वंदो, पार उस देश जाओगे |
दया बरसेगी नामी की, नाँव उस पार जायेगी |
बड़ा सच्चा बड़ा प्रीतम, तुम्हारा सतगुरु प्यारा |
सत्य कामी सतगुरु से, सत्य का है यही सारा |
सतगुरु नाम को भजना, होये भाव पार को जाना |
भजन मन ध्यान चिंतन कर, ज्ञान सतगुरु मेहर लाना |
सतगुरु जयगुरुदेव
सतगुरु संग नेहियाँ लगाते चलो, अपने दिल की वृध्दा सारी गाते चले |
नाम मजधार में है निकालो इसे, पार ले जाने की विनती गाते चलो |
नाम सतगुरु सब गुनगुनाते चलो, सतगुरु प्रीतम से बड़ा है कुछ नही |
नाम सतगुरु का हर छण में गाते चलो |
सतगुरु नाम सत से लगाते चलो , सतगुरु को दया से रिझाते चलो |
है दया सतगुरु की तुम्हारी नही, करम कुछ ऐसे तुम तो बनाते चलो |
सतगुरु जयगुरुदेव
मनवा लाओ नाम भजन में, है दुःख यहाँ की जागीरी
मन चित लग जाये गुरु चरनन में , खुल जाये द्वार फकीरी |
दया मेहर बरसे मालिक की, आलम सतगुरु जंजीरी |
प्रीतम जी का लगा आईना, कर गुजरान गरीबी |
नर तन सफल भजन बिन नाही, सतगुरु संग सबुरी |
सतगुरु जयगुरुदेव
जान कर भजन ना करना, गुरु का द्रोह सच्चा है |
नही मन साथ देवे जो, भजन तो तेरा कच्चा है |
नाम मुख से उच्चारे तो, नाम तो सबसे सच्चा है |
ऐ प्रेमियों अगर मन साथ नही देता सुमिरन भजन ध्यान करने को मन नही करता तो वो धोखा है इसलिए सुमिरन भजन ध्यान करो नही मन मानता तब भी नाम बोलते रहो मुख से मालिक का नाम बोलो
भजन की तान अंतर में, शब्द की तान अंतर में |
जरा तुम ध्यान से देखो, भजन की तान अंतर में |
जब तुम बुध्दि लगाकर के सुमिरन भजन ध्यान के लिए अंतर में बैठोगे और सुनोगे तो तम्हे शब्द जरुर सुनाई पड़ेगा और जब शब्द सुनाई पड़ेगा तो बड़ा ही मिठ्ठा मनमोहक शब्द आपको सुनाई पड़ेगा जिससे आपकी जिवात्मा सुरत ठंडी हो जायेगी निर्मल हो जायेगी पवित्र हो जायेगी आप पर दया मेहर होगी उस मालिक की तो आपलोग लग कर के करो सुमिरन ध्यान भजन |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

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Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 4 अक्टूबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
ध्यान कर नामी को देखो, नाम की मेहर आयेगी |
करम जो हैं टूटे फूटे, भाग में चमक आयेगी |
दयालू सिन्धु सतगुरु की, सत्य के संग चलना है |
नाम सतगुरु का जपते चल, काम एक एक करना है |
विनय कर सतगुरु से अपने, नाम की चमक आवेगी |
अंतर्घट में चमक जाये, ज्ञान ताली खुल जावेगी |
दया के सिन्धु सतगुरु जी, अनामी हैं महाप्रभु |
नाम सतगुरु का भजते चल, चरण में आस लगाते चल |
दया प्रभु तुम्हें देंगे, नाम की मेहर की गठरी |
धरो सब शीश चरनन में, सिख लो तुम भजन करना |
गुरु आदेश ये सच्चा, नाम है तार अंतर में |
सतगुरु जयगुरुदेव
सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ग्राम बड़ेला अखण्ड रूप से विराजमान मालिक के प्रागंण में बैठे हुये समस्त प्रेमीजन देखो प्रेमियों गुरुमहाराज की बताई हुई एक एक वाणी अकाट्य है वह कट नही सकती सारी बातें सच्ची होती चली जा रही हैं चाहे वो राजनितिक मामले में बोला हो, समाज के हित में बोला हो, किसी चीज के लिये कहा हो वो सब एक एक वाणी अकाट्य है कटनेवाली नही सब सत्यता के तरफ बढ़ रही हैं हमको तुमको बताया है नाम भजन करना तो हम सब तुम सब भी नाम भजन करते हुये सत्यता के तरफ बढ़ें अपने गुरु की तरफ बढ़ें अपने गुरु में मन लगावें शाकाहारी सदाचारी का जो पाठ पढाया है उसकी भी चर्चा करते चलें अगर उसकी चर्चा नही करेंगे तो गुरुमहाराज कहेंगे की हमने जो बताया उसका एक अध्याय छोड़ दिया तो इसकी भी चर्चा करते चलो सबलोग तन मन धन से गुरु की सेवा करो नाम भजन करो गुरु सर्वग्य है गुरु में मन नही लगाओगे तो तुम्हारा काम नही बनेगा गुरु ही सबसे बड़ा मालिक है गुरु ही सबसे बड़ा नामी है गुरु हीं अनामी है गुरु के साथ चलने में कोई दिक्कत परेशानी नही होती गुरु का नाम भजोगे सारा काम हो जायेगा |
“सतगुरु नाम भजन मन गाओ, सतगुरु में मन लगाओ |
इस सुरत के लिए अपने, कुछ धर्म काज कर जाओ |
खुल जायेगी जब सुरतिया, तब चमके अंदर तारा |
सतगुरु ने जो बतलाया, दिखे तुमको सकल पसारा |
सतगुरु में मन को लगाओ, सतगुरु में मन को लगाओ |”
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

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सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 2 अक्टूबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
अनुभव मनन ध्यान सतगुरु का, अंतर मन हो ज्ञान |
ध्यान भजन जो बन जावे, प्रथम सतगुरु को मान |
काल जाल से भरम मिटा कर, ले जाते निज धाम |
सतगुरु प्यारे प्रीतम नामी, उन्ही के आज्ञा मान |
शीश झुकाओ सतगुरु चरनन में, ध्यान भजन मन ठान |
ध्यान की कुंजी अंतर पट की, खोले मोरे सतगुरु सुजान |
दया मेहर आवे प्रीतम की, शब्द को सच्चा मान |
सतगुरु चरनन शीश झुका कर, धरो शब्द प्रमाण |
सतगुरु जयगुरुदेव
सतगुरु के निर्मल वचन पावन पवित्र वाणी अपने आत्मा में उतारना मालिक के बताये हुये रास्ते पर चलना हीं प्रेमियों का सर्वप्रथम काम है शाकाहारी सदाचारी रहते हुये शाकाहारी सदाचारी बनने की दूसरों को सकल समाज में प्रेरणा देना यही तुम्हारा हमारा कर्तव्य है गुरु के आदर्शों पर चलना गुरु की वाणी का पालन करना यह हमारा तुम्हारा परम कर्तव्य है सब कुछ गुरु अधीने गुरु अधारे गुरु द्वारे रह कर हीं होता है मन चित में लगन लगा कर गुरु महाराज से प्रार्थना कर के हम सब, जब मालिक में रत रहेंगे तो हममे कोई विकार नही आयेगा मालिक की प्रार्थना करते रहेंगे मालिक की अराधना करते रहेंगे मालिक का ध्यान भजन करते रहेंगे तो हम पर कोई दुःख तकलीफ नही आयेगी मालिक के चरणों में लगे रहेंगे तो कोई दिक्कत नही होगी मालिक से वंदना करते रहेंगे तो मालिक की विशेष मेहर आती रहेगी मालिक को हाजिर नाजिर मानकर हीं वंदना और साधना होती है गुरु हाड़ मांस का पुतला नही होता वह सर्वग्य सचर विदित दाता होता है इसलिए अपने सतगुरु पर हरदम फक्र और नाज होना चाहिये की हमारे गुरुमहाराज समरथ हैं हमपर विशेष दया कृपा करेंगे पूरी कृपा के साथ हमारा साथ देंगे तो प्रेमियों लग कर के सुमिरन भजन ध्यान करते हुये अपने गुरु की मान मर्यादा के साथ अपने गुरु के आन बान के साथ उनमें में लव लगाते हुये आगे को बढ़ते रहते हैं और अपने गुरु के मान सम्मान को रखते हैं मालिक में लगन लगाते है सुमिरन भजन ध्यान में विशेष मन लाते हैं दुनियादारी को कम करते हुये अपने गुरु के बताये हुये आदेशो का पालन विशेष रूप से करते हैं
सतगुरु जयगुरुदेव
“मंगल पवन सतगुरु नामु, नाम भजन अंतर प्रमाणु |”
महामंगल महापवित्र सतगुरु का नाम है और जो नाम दिया है उसका भजन करोगे तो अंतर में प्रमाण मिलेगा अंतर में ज्ञान होगा अंतर का पट खुलेगा तब तुम्हे पता चलेगा की सतगुरु ने हमे क्या अलौकिक जड़ी दिया है गुरु ने हमको बताया है
“दिव्य देश सुमिरत्नन ज्योति, सुन्दर सतगुरु मूरत होती |”
दिव्य प्रकाशमयी सतगुरु अंतर में मिलते हैं उनकी दया मेहर अंतर में बरसती है ऐसा सतगुरु का सुहावना रूप मिलता है उसे देख कर के सतगुरु का दर्शन कर कर के प्रेमी साधक गदगद हो जाते हैं और उनकी दया मेहर में ओत पोत हो जाते हैं मालिक से वंदना और प्रार्थना करते रहते हैं हे मालिक दया करो हमको इसी प्रकार से आपके दर्शन होते रहे आपके निज चरणों में लगे रहें और आपकी गाथा को गाते रहें गुनगुनाते रहें “सतगुरु नाम भजन जो करई, सो तो जिव भव पार करई |”
जो जिव सतगुरु का नाम भजन करता है सतगुरु में लव लगता है गुरु में मन लगता है सतगुरु में मिल जाता है उसका त्रंतार आवश्यक है परम आवश्यक है उसके जिम्मेदार गुरुमहाराज होते हैं उसको पार करते हैं उध्दार करते है उस पार ले जाते हैं उसकी नैयाँ को पार कर देते है उसपर गुरु विशेष दया करते हैं और उसको चरणों में लगाये रहते हैं |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

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सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 29 सितंबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम ( https://youtu.be/dHtwlP0gOq4 )
सतगुरु जयगुरुदेव :
भजन मन अंतर सतगुरु ध्यान |
अंतर ध्यान गुरु का जो रखियो, पूरा हो कल्याण |
नाम भजन मन चित लग जावे, अंतर सतगुरु ध्यान |
नाम भजन में लगोगे सब जन, हर पल कर कल्याण |
नामी की तुम्हें दया मिलेगी, नामी नाम अधार |
कोटी जन्म की रही तपश्या, भजो सतगुरु का नाम |
सतगुरु मेहर विराजे अंतर, अंतर मन कल्याण |
दिव्य देश सतगुरु का प्रेमियों, नामी नाम अधार |
मन चित रखियो नाम भजन में, होवे वेड़ा पार |
सतगुरु जयगुरुदेव
भजन मन सतगुरु में तुम लाओ |
नाम भजन सतगुरु का करियो, पुरे सुख को पावो |
दिव्य अलौकिक परम देश को, सब जन अंतर जाओ |
नाम प्रभु का गाओ मिलकर, नही तुम भेद छुपाओ |
उत्तम फल हो सतगुरु नामा, धूर की रास्ता पाओ |
चंचल चितवन नाम भजन की, नाम भजन मन लाओ |
सतगुरु जयगुरुदेव
देखो प्रेमियों, अखण्ड रूप से विराजमान सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ग्राम बड़ेला के प्रांगण में बैठे हुये, गुरुमहाराज ने बहुत पहले ही बता रखा था की बाढ़ अकाल सुखा भुखमरी महामारी बिमारी, अभी तुमने कहा देखा आगे आ रही है तो जो जो कुछ गुरुमहाराज ने बताया है वो सब हमको तुमको देखने को मिलेगा झेलना तो पड़ेगा दुनिया को ज्यादा आग लगेगी तो हमको तुमको भी उसकी आंच लगेगी उसको सहना पड़ेगा और अगर तुम नाम भजन करते रहोगे तो हमको तुमको कम तकलीफ होगी नही करोगे तो तकलीफ तो होगी ही होगी, मानव जात एक ही तरह के है फर्क इतने ही होता है आप शाकाहारी सदाचारी और दूसरी तरफ हैं मांसाहारी, तो शाकाहारी सदाचारी बने रहोगे नाम भजन जपते रहोगे गुरु के निशाने पर रहोगे तो पूरा कल्याण होगा पूरी की पूरी दया मेहर रहेगी कर्म कर्जे तो निपटने ही पड़ेंगे हर प्रकार से दया मेहर गुरु महाराज करते रहेंगे पर हमको तुमको बस अपने निशाने से रहना है अपने गुरु का भजन करना है गुरु की वाणियों को याद करना है गुरु महाराज ने जो जो कुछ बताया है उसे बराबर याद करते चलना है गुरु के अंतर हुक्म से सारा काम होता जा रहा है धीरे धीरे नये नये प्रेमी उठ कर के, अंतर में मालिक बहुतो को करोड़ो को बताते सुनाते हैं समझाते हैं बच्चू ये करना है बच्चू ये करना है तो वो काम हो रहे हैं हर प्रकार से सतगुरु अपना काम कर रहे हैं ये उनकी लीला मौज खेल है इस खेल को देखते चलो और गुरु चरणों में लगे रहो सुमिरन भजन ध्यान करते रहो और उनकी वाणियो को याद करते रहो कभी भी जो उन्होंने वाणी बोली है भुलना मत वो मिथ्या नही होगी “कलयूग में कलयूग जायेगा, कलयूग में सतयूग आयेगा” ये पक्का है कड़वा सच्च है इस सच्चाई को याद करो सतयूग जी महाराज तो यहीं धरा पर हैं गुरुमहाराज के हुक्म होते हीं अपना सारा काम शुरु कर देंगे और धीरे से कलयूग जी महाराज अपना सारा समान लेकर चले जायेंगे सतयूग जी महाराज अपना पूरा विस्तार करेंगे तो उसमे काफी सफाई होगी तो उस सफाई में सबकी सफाई होगी तो उस सफाई में बचने का रास्ता भजन है भजन हीं करना पड़ेगा तो आपलोग लगकर के सुमिरन भजन ध्यान करते रहो और गुरुमहाराज के अपने निशाने पर रहो और गुरुमहाराज को २४ घंटे याद करते रहो कभी उनकी पुराणी वाणियों को और नये वाणियों को नही भुलोगे अपने गुरुमहाराज का भजन करोगे, निशाना गुरुमहाराज से रखोगे किसी दूसरे से नही | कहते हैं “नामी से लगन लगाना और नामी से हीं मिला है नाम खजाना ” तो जो नाम खजाना मिला है उसको आराम से रखो और नामी से लगन लगाये रखो |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

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सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 28 सितंबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
भजो सब सतगुरु सतगुरु नाम |
नाम भजन सतगुरु का प्यारो, अंत ले आवे काम |
भजो मन सतगुरु सतगुरु नाम |
दया मेहर सतगुरु की बरसे, भजन बने आठों याम |
भजो मन सतगुरु जी का नाम |
ध्यान भजन सच्चे साईं का, सतगुरु जाको नाम |
ध्यान भजन अंतर मन व्यापे, नर तन यही काम |
भजो मन सतगुरु जी का नाम |
सतगुरु जयगुरुदेव
दीन दुखियों के दुःख को मिटाते गुरु, अपने चरणों में सबको लगाते गुरु |
वंदना गुरु की सब जन बजाते चलो, नाम सतगुरु का सब जन तो गाते चलो |
भाव भक्ति में मन को लगाते चलो, सतगुरु नाम सब गुनगुनाते चलो |
सत्य का नाम डंका बजाते चलो, सतगुरु नाम को गुनगुनाते चलो |
राह में कोई रोड़ा नही आयेगा, काम सब तेरा देखो तो बन जायेगा |
आओ भक्ति में खुद को लुटाते चलो, सतगुरु नाम सब गुनगुनाते चलो |
सतगुरु जयगुरुदेव
अखण्ड रूप से विराजमान सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ग्राम बड़ेला के प्रांगण में बैठे हुये समस्त प्रेमीजन इस समय आप लोग आप सब जिधर निकला करो दुनियादार से कह दिया करो की “बाबाजी का कहना है शाकाहारी रहना है” शाकाहारी का प्रचार करते रहो ये अपने गुरुमहाराज का आदेश है शाकाहारी सदाचारी की बात हमेशा करते रहो सुमिरन भजन ध्यान करते रहो सतगुरु की निशाने पर रहो निशाना गुरु से लगाओ और गुरु में तल्लीन रहो गुरु में लवल्लिन रहो गुरु में मन लगाओगे तो सारा काम बनेगा गुरु ही सर्वग्य सत्यता है गुरु ही समरथ संत, सतगुरु सत्यता की डोर है इसलिए गुरु से निशाना रखो और भजन ध्यान सतगुरु के चरणों में रह कर करते रहो और शाकाहारी सदाचारी का प्रचार थोड़ा मोड़ा जो बन पटे रोज रोज, ये नही की आज किया कल नही जो मिल जाये, भैया हमारे गुरुमहाराज का आदेश है शाकाहारी सदाचारी रहो सुखी रहोगे बस इतना, रोज कहोगे अब एक दिन गये दस दीन गये नही, तो इस तरह जो मिलते जाये कहते जाओगे तो ज्यादा अच्छा रहेगा |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

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सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 26 सितंबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
विनय मन भजन गुरु का नाम |
नाम भजन सतगुरु को भाये, शब्द अलौकिक ज्ञान |
विनय मन नाम भजन का ज्ञान |
रूप अलौकिक अंतर दिखे, सतगुरु जी की शान |
करो अराधना ज्ञान ध्यान से, मालिक सतगुरु राम |
नाम भजन सतगुरु का करते, पहुँचो जी निजधाम |
श्रध्दा भाव से करो भजनिया. सतगुरु मेहर आठों याम |
दया बरसती है मालिक की, मौज रहे हर शाम |
ध्यान भजन एक सच्चा साथी, यही अंतर का ज्ञान |
सतगुरु जयगुरुदेव
ध्यान धर सतगुरु नाम विचारो |
नाम भजनियाँ में मन को लगाओ, जीव अपना उध्दारो |
नये वाण अंतर में चलते, तरकस अंतर धारो |
नाम का वाण मन की कुंजी, सतदेश को पधारो |
करो भजनियाँ लगन से भाई, गुरु के देश सिध्दारो |
दया मेहर आवे नामी की, नाम देश में पध्दारो |
नाम अलौकिक नामी प्यारा, सन्मुख हो उध्दारो |
सतगुरु जयगुरुदेव तेरे साईं, इन्हीं का नाम पुकारो |
सतगुरु जयगुरुदेव
सारे प्रेमियों निज सतगुरु के चरणों में शीश झुकाते हुये रोज रोज गुरुमहाराज की चरण वंदना करते हुये नाम भजन में लगे रहो समय का कोई पता नही किस करवट कहाँ पर बैठता है कब क्या हो जाये इसके बारे में किसी को कुछ नही पता | संत महात्माओं को पूरा ज्ञान होता है भुत भविष्य की सारी बाते गुरु ही बताता है जो अंतर में मिला है और उस देश को रोज आता जाता है जो रोज आता जाता नही, अनुभव होता है, बैठता है साधना करता है जाता है आता है कुछ दूर ओ चलता है ऊपर कभी चला जाता है तो कभी नीचे तो उसे साधक कहते हैं साधक सतगुरु से मिलता है सतगुरु से हीं पूरी प्रार्थना करता है और साधना में गुरु पूरी मदद करते हैं तभी कहते हैं कि “साध संग मोहे नित परम सतगुरु दातार” जब रोज साध का संग मिलेगा जिसका सधा होगा साधना बनती होगी तो मेरी भी बनेगी मैं भी साथ बैठूंगा तो मेरा भी कुछ कल्याण हो जायेगा क्योकि वो बतायेगा की इस तरह से नही भाई साहब इस तरह से करो सुमिरन करो भजन करो ध्यान करो तो काम बन जायेगा जहाँ पर बरसात हो रही हो तो वहां पर जितने भी वन्दे होंगे सब भींगेंगे सब के ऊपर छींटे पड़ेगे और गुरुमालिक के निमित होकर के हमे नाम भजन करना है गुरु सहारे हीं रहना है गुरु ही सर्वोपरी है गुरु ही हमे पार करेगा गुरुमहाराज ने हमे नामदान के बाद ये बताया था की चेहरे को याद करना मै तुम्हे पार कर दूंगा, ठीक से लगकर के भजन करो इसी जन्म में पार कर दूंगा ये नही कहा था की किसी दुसरे का हाथ पकड़ लेना वो तुमको पार कर देगा गुरुमहाराज ने तो यही बताया की हम हीं तुमको पार कर देंगे शंका करने का काम नही है शंका करोगे तो फंस जाओगे ये शंका का देश है फसावे का देश है यहाँ तो दुःख तकलीफों का देश है, वहां सुन्दर सुगंधी सो वहां न कोई दुःख है न तकलीफ है न अशांति है वहां तो पूर्ण सुख हीं सुख है अपने सतदेश में अपने देश चले चलो और अपने देश में विश्राम करो
“देश सतगुरु का निकों है, परम अद्भुत परम प्यारा
जहाँ सूरतें विचरती हैं, हैं अद्भुत वहां को उजियारा”
परम सुखमई मंगलमई देश है सतदेश और खुब उजाला वहां प्रकाश है जहाँ सुरते विचरण करती है चलती है घुमती है टहलती हैं अद्भुत नजारे को देखती हैं और अद्भुत नज़ारे बनाती हैं बिगाड़ती हैं खुद उनमे काफी शक्ति हो जाती है गुरु की दया मेहर हो जाती है तो गुरु की दया मेहर से सारा काम करने लगती हैं वो बलवती हो जाती हैं और अपने गुरु पर बलिहारी हो जाती हैं गुरु का पूरा सम्मान करती हैं इसलिए तुमलोगों को भी चाहिये की अपने गुरु का पूरा सम्मान करो गुरु का आदेश का पालन करो किसी भी प्रकार की त्रुटी आप न करो और गुरु आदेश के बताये हुये मार्ग पर चलो जो गुरुमहाराज ने कहा है उस वाणी को याद रखो अगर कोई दूसरा तुम्हे कहता है की भाई हम तुम्हारे गुरु हैं हम तुमको पार कर देंगे तो ये धोखा है उस बात को तुम मत मानना गुरुमहाराज ही हमको तुमको पार करेंगे शब्द स्वरूपी सत्य स्वरूपी वे हमेशा हमारे अंग संग हैं और हर प्रकार से गुरु हाजिर नाजिर होता है गुरु हाड़ मांस का पुतला नही गुरु सर्वग्य सर्वविदित एक परम पराविद्या शक्ति है वो हर समय रहा है और हर समय रहेगा |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

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Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 25 सितंबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
अंतर मनन ध्यान सतगुरु का, दिव्य लोक संचार |
सतगुरु चरनन शीश झुकाकर, चलो देश वही पार |
दिव्य अलौकिक ध्वनियां बाजे, अंतर घट के मझार |
घट पट खोलो खुदा को देखो, अपना नूर हजार |
नूरानी हस्ती सतगुरु की, नूर हो जाये प्यार |
मान घमण्ड गुरुर को तोड़ो, नही राखो सम्मान |
दीन भावना श्रध्दा को जोड़ो, भाव झरोखों होवो पार |
सतगुरु प्रीतम तुम्हें पुकारें, नाव खाड़ी है मजधार |
सतगुरु खेवैयाँ खेवट न्यारो, ले जायेंगे उस पार |
सतगुरु चरनन शीश झुकाओ, धन्य भाग्य गये पार |
सतगुरु जयगुरुदेव
दिल में खिले नाम सतगुरु का, ऐसी मिठ्ठी बोली हो |
बनियों दीन गरीब दयाल, गुरु की छोटी खोली हो |
खबर घट घट की रखते हैं, हैं भारतें सबकी झोली हो |
दयालू दीनबन्धु जी, दया के सागर सिन्धु |
भाव बस दे घट पर तू ध्यान, होवे तत्क्षण तेरा कल्याण |
गुरु की मेहर विराजेगी, अंतर घट ध्वनियाँ बाजेगी |
चरण पर श्रध्दा सुमन राखो, सुरत सतदेश विराजेगी |
सतगुरु जयगुरुदेव
बड़े ध्यान पूर्वक समस्त प्रेमी गुरु की अंतर वाणी को सुनेंगे गुरुमहाराज का हुक्म है समय अजीबो गरीब नाटकीय ढंग का बदलाव लेकर खड़ा हो गया है आप सबो को भी हवा लगेगी तोड़ने मोड़ने वाला वक़्त है इसलिए लग कर के सुमिरन भजन ध्यान करो निशाना गुरु से रखो कोई दूसरा माई का लाल पार करने वाला नही पार तो गुरु हीं करेगा सतगुरु ही करेगा “जयगुरुदेव” “सतगुरु जयगुरुदेव” जो भी बोलोगे पर निशाना गुरु से रखोगे तभी काम बनेगा | सतगुरु तुम्हारा गुरु है, कोई दूसरा नही है “जयगुरुदेव” उस प्रभु उस मालिक का नाम है तो जब तुम सतगुरु को याद कर के “जयगुरुदेव” बोलोगे तो सतगुरु तुम्ह्रारा प्रभु और गुरु दोनों मिल जायेंगे, प्रभु स्वरूपी सतगुरु, प्रभु स्वरूपी गुरु और प्रभु दोनों की मुलाकात होगी | दया मेहर तुम्हारे गुरु की होगी चुकी नामदान तुम्हारे गुरु ने दिया है तो रास्ता गुरु हीं दिखायेगा कोई दूसरा नही दिखायेगा कभी भी ऐसा मत सोचो की गुरुमहाराज कहीं चले गये गुरुमहाराज शब्द स्वरूपी सत्य स्वरूपी अंग संग निज घट में बैठे हुये हैं बाहर से हर प्रकार से विध्द्मान हैं कहीं भी जाओगे जैसे ये अखण्ड रूप से विराजमान सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ग्राम बड़ेला गुरुमहाराज ने अंतर घट में बताया था की बच्चू तूने जीते जी ये मन्दिर बनवाया है इसमें मैं अखण्ड रूप से विराजमान हूँ तो यहाँ पर जो आयेगा सच्चे मन से ध्यान भजन करेगा तो आंख खुल जायेगी तो वो काम गुरुमहाराज कर रहे हैं अखण्ड रूप से विराजमान हैं उनकी अखंडता का परिचय लेने के लिये समस्त भारत एवं विश्व के प्रेमियों के लिए अह्वाहन किया जाता है आमंत्रित किया जाता है की एक बार आकर के सब लोग आप भी गुरु की परीक्षा ले लो और अपनी परीक्षा दे दो और ये चाहते हो की हमारा सुमिरन भजन ध्यान बन जाये तो एक बार पधारो और आकर के बैठकर के सच्चे लगन के साथ गुरु से माफ़ी मांग कर के गुरु के सामने सुमिरन भजन ध्यान करो अगर तुम्हारा सुमिरन भजन ध्यान बनने लगे तुम्हे दिखाई सुनाई पड़ने लगे तो तुम सच्चाई को मान लो अगर तुम्हे दिखाई सुनाई ना पड़े तो कभी मत मानो और जब दिखाई सुनाई पड़ने लगे तो इक्षा हो यहाँ बैठ कर के करो इक्षा हो देश विदेश बैठकर के करो अब तो बनने लगा गुरु की दया होने लगी और जब तुम्हे इक्षा हो जब अंतर से आदेश हो तब फिर चले आये और फिर गुरु की दया मेहर लेकर के चले गये यहाँ कोई रोक टोक तो है नही और नाही कोई दबाव है ना कोई मिलौनी है और ना कही जाने आने के लिए आपको मना किया जाता है की वहां मत जाना यहाँ जाना यहाँ मत जाना वहां जाना ये सब कोई मनाही नही और कोई भी किसी के भी साथ हो कही भी जाता आता हो यहा आता है तो उससे ये नही पूछा जाता की तुम कहाँ कहाँ गये और वह आया है हमारा गुरुभाई है कहीं भी गया किसी भी दर पे गुरु को ढूढने गया गुरु की दया को ढूढने गया तो गया तो गुरु की दया को ढूढने था तो उससे क्या पूछना की तुम कहाँ कहाँ भटके जब तुम सच्चे रास्ते पर आये हो तो तुमको सच्चा रास्ता बता दिया जाये और सच्चा सुमिरन भजन ध्यान कर लो तुझे भी अनुभव होने लगे दिखाई सुनाई पड़ने लगे तो वो भी १० को जोड़ेगा ५० को जोड़ेगा १०० को जोड़ेगा १००० को बतायेगा की भैया इस तरह से है तुम भी कर लो तो तुम्हारा भी काम बन जाये उसकी भी सेवा बन जायेगी वो भी निकल जायेगा और तुम भी निकल जाओगे प्रेमियों जब गुरु की चर्चा होती है तो सतगुरु हर प्रकार से विराजमान होते हैं हर प्रकार से दया मेहर की धार उनकी बरसती रहती है गुरु चाहे तो १ सेकेण्ड में तमको सतलोक अनामधाम पहुंचा दे, न चाहे तो तुम जीवन भर नाक रगड़ते रहो कुछ नही होने वाला १०-१० घंटे बैठते रहो तब भी कुछ नही होगा और १ ही सेकेण्ड में सब कुछ हो जायेगा अगर तुम गुरुमहाराज से अपने सतगुरु से प्यार करते हो गुरुमहाराज को हीं सबकुछ समझते हो गुरुमहाराज को हीं सबकुछ मानते हो तो गुरु में होकर के चलोगे तो भगवान को देखोगे गुरु में, तो गुरु के अंदर भगवन दिखेगा प्रभु दिखेगा परमात्मा और अगर अलग से तुम देखना चाहोगे तो भगवान नही दिखेगा क्योकि “गुरु गोविन्द दोऊ खड़े काके लागूं पाँव बलिहारी गुरु आपने जो गोविन्द दियो लखाये” तो गोविन्द को जो है गुरु लखाता है तो गुरु ही बताता है तो हमको आपको सबको गुरु के अंदर परमात्मा को देखना है परम पिया को देखना है परम पुरुष को देखना है और गुरु के साथ रहना है अपने गुरु के साथ रहना अपने सतगुरु के साथ रहना है उन्हीं का नाम भजन करना है |
सतगुरु जयगुरुदेव
मग्न मन सतगुरु अंगना में नाचो |
दात दियो जिन है सतगुरु ने, पहिनो है नाम का कँगना |
नाम शब्द की लड़ी लगी जब, पग पैजनियाँ बजना |
लगन लगी जब अंतर घट में, धुँढ लेवो मेरा संजना |
सतगुरु सुरत व स्वामी मिल जायें, सज धज सतदेश तेरे अंगना |
स्वामी सुरत एक हो जाये, हो गया सुरत का मिलना |
सतगुरु चरनन करी वंदना, नाम भजन मन अंगना |
सच्चे प्रीतम साईं मालिक, पहिना नाम तेरो कंगना |
सुध बुध्द रहे तुम्हारे चरनन, सत के प्रेम में सजना |
सतगुरु को प्रणाम दण्डवत, सत्यदेश मेरो अंगना |
सतगुरु जयगुरुदेव मेरे स्वामी, येही सत्य के संजना |

बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

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Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 24 सितंबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
सतगुरु नमन वंदना तेरी, चहु दिशी से होये फेरी तेरी |
नाम शब्द की सड़क बनाई, उसपे सूरतें करें चढ़ाई |
मानसरोवर होत धुलाई, सुरते हंस रूप हो जाई |
शब्द रूप का होये घमशाना, महाशुन्य का बड़ा मैदाना |
सुरत समाये शब्द देश में, बैठा तहां पर सतगुरु श्याना |
सतगुरु कंचन रूप सुहावन, चरण वन्दना अति मनभावन |
श्रीचरणों में शीश झुकाओ, गुरु की सब वंदना बजाओ |
सतगुरु जयगुरुदेव
मालिक का अलौकिक सतनामी स्वरुप बड़ा ही अनुपम अद्भुत और बड़ा ही मनमोहक और बड़ा ही प्यारा होता है प्रेमी साधक जो वहां पहुचते हैं देखते हैं खुब अमृत छक छक कर के पीते हैं और अपने सतगुरु को धन्यवाद देते हैं की हे मालिक तुम्हारी दया कृपा से मैं यहाँ पहुँचा आप यहाँ लाये तो हम यहाँ पहुंचे अगर आप यहाँ नही लाते तो कभी भी भूते न भविष्यते हम यहाँ नही आ सकते थें हे प्रभु आपकी बहुत बड़ी दया कृपा है हे सतगुरु आपकी बहुत बड़ी कृपा है की आप हमे यहाँ ले आये आपको कोट कोट बार नमन और प्रणाम है की हे प्रभु आप हमको लाये आप मेरे पिता हैं पिया हैं मालिक हैं स्वामी हैं हम आपके शरणागत रहेंगे और आपके साथ घुल मिल जायेंगे आपकी दया मेहर २४ घंटे बनी रहे आठों याम बरसती रहे, मेहर की नजर दया की नजर रूहानियत की नजर हे प्रभु आपकी मिलती रहे यही आरजू यही तमन्ना है हे प्रभु आप सब पर दया करो, दीनो पर दया करो और जो है आपके शरणागत, सब पर दया करो हर प्रकार से हाजिर नाजिर प्रभु आप सबकी आशाओं को पूरा करो कोई निराशा न रह जाये और सबकी आशा बंधी रहे |
“दयालु मेरे प्रभु गुरु सतनामी |
सतलोक सतधाम के नामी, सतगुरु मेरे नामी |
हैं कृपासिंध गुरुवर मेरे, सतगुरु जयगुरुदेव मेरे स्वामी |
सतगुरु की वाणी वचनामृत, छक छक अमृत पियो ना |
नाम शब्द वाणी के ऊपर, श्रध्दा भाव से झुको ना |
परम दयालू ने दिया आशीष, घाट पार में मिले जगदीश |
मुक्ति मोक्ष परमपद पाओ, जो सतगुरु में नेह लगाओ |”
सतगुरु जयगुरुदेव
ऐ प्रेमियों जब गुरुमहाराज में नेह लगाओगे गुरु के चरणों में मन लगाओगे लग कर के सुमिरन भजन ध्यान करोगे तो दया मेहर की बरसात होगी गुरु दयालू है कृपालू है हर प्रकार से दया का सागर है दया की बरसात होती रहती है वो तुम पर दया कर देंगे और तुम्हारी झोली को भर देंगे हर प्रकार से कृपालू दाता दयालू सतगुरु हैं सतगुरु को कोटी कोटी नमन करते हुये अपना सुमिरन भजन ध्यान करो |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
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सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 23 सितंबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
भजन मन सतगुरु जी का ध्यान |
ध्यान धरोगे जो सतगुरु का, अंतर मन कल्याण |
ज्योत शिखा और दीप शिखा का, मिले अंतर प्रमाण |
राम प्रभु के दर्शन होवें, मंगल सतगुरु राज |
बाजा बाजे मोहक मोहक, सतगुरु जी का साज |
नाम भजन करो तुम सतगुरु का, अंतर मन में राज |
सतगुरु नाम भजन मन प्रेमी, येही एक शिष्य का काज |
शीश धरो सतगुरु चरनन में, मंगल पावन राज |
सतगुरु जयगुरुदेव
चनचल चितवन नाम भजन में, अंतर शब्द का राग |
धसे सुरतिया झिलमिल ज्योति, अंतर खेले फ़ाग |
जग जाये मनवा काल पीत युग, अमृत छक छक राज |
बाजे बाजा ध्वनी अलौकिक, अंतर मन में गाज |
शब्द सुहावन मंगल पावन, अंतर मन का काज |
सतगुरु प्रीतम मेरे सांवरियां, जहाँ बैठे वहीं राज |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

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सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 22 सितंबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
बन जायो काम नाम भजन से, कर गुजारन गरीबी में |
दया मेहर आवे नामी की, सबर का फल है मंजूरी |
शब्द भेद का शब्द सुनावे, येह पर काम जरूरी |
ऐसा भेद है अद्भुत विधाना, शब्द की कृपा सरूरी |
सतगुरु जयगुरुदेव
पड़ो तुम नाम के पीछे, नाम ही गुरु को चाहेगा |
किया जो वादा सतगुरु से, वो वन्दा तु निभायेगा |
नाम का दान सतगुरु ने, थमाया तुमको सस्ते में |
करो कुछ काम अंतर का, कटे मैलाई जो सारी |
दिव्य और दिव्य ज्योति हो, शब्द की अंतर उज्याली |
करो प्रणाम सतगुरु को, मेहर सतगुरु की है आई |
सतगुरु जयगुरुदेव
अखण्ड रूप से विराजमान सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ग्राम बड़ेला के प्रांगण में बैठे हुये समस्त प्रेमीजन, नित प्रति हम अपने निरख परख रोज रोज करते रहें अपनी रहनी गहनी सहनी में और ये ध्यान देते रहें की हमसे कहाँ पर भुल हो रही है कहाँ पर चूक हो रही है कहाँ हमसे अच्छा हो रहा है कहाँ हमसे बुरा हो रहा है और जब जब समय मिल जाये थोड़ी देर के लिए ५ मिनट १० मिनट २ मिनट १ घंटे आधा घंटे तो अपना गुरु भजन में नाम भजन में लग गयें और आत्म मंथन करते रहें | आपके घर में गुरु महाराज की पत्रिकाये होंगी या अगल बगल में प्रेमियों के यहाँ रहती हैं तो उसको उलट पलट के पत्रिकाओ को देख लिया तो गुरुमहाराज का उसमे सत्संग और परवचन गुरुमहाराज का उसमे मिलती है तो उसको पढने से मन भी लग जायेगा और मन पाप से मुक्त हो जायेगा ऐसे ऐसे काम करने से जो है मन में भाव बनता है की गुरुमहाराज की पत्रिका पढ़ ली प्रार्थना पढ़ ली और गुरु को हाजिर मानकर के सारा काम किया, हाजिरी को सारा संसार ही मानता है चाहे किसी देव का, चाहे किसी देवता को, या किसी को पीपल में पानी डालता है तब भी कहेगा की इसके अंदर ब्रह्मदेव बाबा हैं और ये हमारा भला करते हैं तो ऐसे अपने गुरु महाराज को मानकर के की हाजिर नाजिर हैं आपलोग भजन करो | हाजिर नाजिर हैं शंका मत करो तब काम सारा बनेगा कोई भी काम करने पर ये मन लगा कर कहा जाता है की हमारा ये काम हो जायेगा इसप्रकार का है तो तभी सारा काम होता है “तीन लोक नौ खण्ड में गुरु से बड़ा न कोए, कर्ता कुछ ना कर सके गुरु करे सो होये” गुरु जो करेगा वही होगा तो गुरु के अधीन रहो गुरु के अधारे गुरु के द्वारे गुरु के साथ रहो गुरु का संग करो गुरु ने जो बताया है उस तरह से सुमिरन भजन ध्यान करो अपने देश चलने की तैयारी करो अगर यहाँ बवालों में पापाचारों में दुनियादारी में ज्यादा समय देते रहे फसे रहे तो कौन निकालेगा जब सुमिरन ध्यान करोगे जब अंतिम समय आएगा तो कोई बीबी बच्चा साथ देने वाला नही और फिर जब बीबी बच्चे हैं तो मोह भर्म तो लगा ही रहता है तो उतना काम करो जितना तुम्हरा कर्तव्य है इधर भी कर्तव्य अपना पूरा करो और उधर जो अपने मनुष्य जीवन के लिए तुमने कौल करार किया है सांसो की पूंजी मिली की हम सुमिरन भजन ध्यान करेंगे तो सुमिरन भजन ध्यन भी करते रहो जितना बन पट्टे अधिक से अधिक ज्यादा से ज्यादा समय निकाल कर के उसमे भी दो और अपने घर परिवार में भी दो, गुरु की पूरी की पूरी दया बरक्कत आप पर बरसेगी |

बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
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सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 21 सितंबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
भजो मन सतगुरु जी का नाम | नाम भजन के लिए मिला नर तन, फिर क्यों न करो सुबह शाम |
भजन करो सतगुरु मीरा राम |
अद्भुत वीणा अंतर बाजे, अलौकिक धनी धूरधाम |
मूढ़ गवाह समझ जब पावे, ताकत चतुर सुजान |
दया भाव जो श्रध्दा बनावे, आवे गुरु के काम |
नाम भेद जो समझ जात है, गुरु चरनन प्रणाम |
सतगुरु जयगुरुदेव
अखण्ड रूप से विराजमान सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ग्राम बड़ेला के प्रांगण में बैठे हुये समस्त प्रेमीजन, मालिक की अशीम दया अनुकम्पा है जो हम सब को रोज मालिक का कुछ ना कुछ संदेशा मिलता है कुछ ना कुछ सत्संग सुनने को मिल जाता है मालिक ने हमेशा से यही बताया चेताया की लग कर के सुमिरन भजन ध्यान करो यह देश सर्व सराय है रैन एक सपना, सपना है सपना, सराय है सराय, आज नही तो कल यहाँ से जाना होगा यहाँ जो कोई आया है उसे जाने है, रहता हमेशा हमेशा के लिए कोई नही है चाहे रजा हो रंक हो फ़क़ीर हो साधू सन्यासी जो भी हैं सबको यहाँ का विधान है यहाँ से जाना है तो जब यहाँ से जाना है जानते हो की हमको यहाँ से जाना है तो जहाँ पर जाना है वहां भी खाने पिने की व्यवस्था, खर्च पाने के लिए कुछ चाहिये तो यहाँ पर की तो व्यवस्था आपने की तो जहाँ जाना है कहाँ जाओगे कहाँ पर पहुंचोगे किस देश में जाओगे स्वर्ग जाओगे नर्क जाओगे बैकुंठ जाओगे या आगे सतधाम जाओगे कहाँ जाओगे इसके बारे में आपने सोचा की हम जब हमारा शारीर छूटेगा तो मरने के बाद कहाँ जायेंगे किस स्तर पर होंगे, क्या हमारे साथ होगा क्या नही होगा तो दुनियादारी के बारे में सोचते हो उधर के बारे में भी सोचना चाहिये और जब प्रभु का भजन करने के लिए कौल करार किया तो भजन कर के पूंजी जमा करना तुम्हरा काम सबसे पहला था और उसको ही भुल गये पुरे दिन रात लगे रहे खेती दूकान दफ्तर के काम में बच्चों के पालन पोषण में और प्रभु का भजन, हरी का भजन, अपना जो नाम भजन कर कर के अपना ऊपर जाने की स्वर्ग, बैकुंठ धाम, प्रभु के धाम जाने की जो पूंजी थी उसको तो इक्कठा किया नही सारा समय बर्बाद कर दिया तो बोलो यमराज के यहाँ कौन मदद करेगा जब तुम भजन करोगे सतगुरु को याद रखोगे गुरुमहाराज को याद रखोगे “सतगुरु जयगुरुदेव” “जयगुरुदेव ” बोलोगे तो मालिक तुमको वहां मिलेगा और जब तुम बोलोगे ही नही तो तुमको वहां कौन मिलेगा बाहर से जब कोई मिल गया तो जयगुरुदेव भैया जयगुरुदेव कर लिया और जब समय आया तो शाम को भोजन किया, ना सुमिरन किया ना भजन किया ना ध्यान किया और सो गये और जहाँ भी सत्संग में जाते हो तो सत्संग में सत्संग सुना दिया गया २ घंटा ३ घंटा 4 घंटा और सत्संग में जो कुछ बोलना था आगे पीछे की बोल दिया गुरुमहाराज ने ये कहा गुरुमहाराज ने वो कहा पर आप लोगो को जब बिधिवत ये बताया जाये की किस तरह सुमिरन होता है किस तरह भजन होता है किस तरह ध्यान होता है तब तो काम बने उस पर आप सब लोग अमल लाया करो उसपे पूरी की पूरी अपनी क्षमता बुध्दि विवेक को लगाओ की हमे भजन करना है और सत्संग में हर प्रेमी सत्संगी गुरुभाई बहन जो भी सत्संग सुनाता है उसे चाहिये की सबसे ज्यादा भजन पर जोड़ दे भजन के बारे में बताये की भजन करो जब भजन करोगे तब ही कुछ होगा और तुम समझते हो की हम भजन नही करेंगे हमारा काम ऐसे चल जायेगा वहां गये थे संगत में झोली में १०-५ डाल दिला है अबकी बार ५०० डाल देंगे तो ५००० आ भी जायेगा आपकी सारा काम भी हो जायेगा तो देखो भाई गुरुमहाराज ने कहा की जो तुम करोगे उसके बदले में मै दूंगा लेकिन भजन करना ही पड़ेगा भजन करना बहुत अनिवार्य है सुमिरन ध्यान भजन करते चलोगे नाम तुम जपते चलोगे तुम्हे कुछ दिखाई सुनाई पड़े न पड़े उसकी जिम्मेदारी मेरी है | गुरुमहाराज ने कहा की अगर तुम रोज रोज बैठते हो हाजिरी देते हो करते हो तो तुम्हे नही भी दिखाई सुनाई पड़ता है तो मेरो जिम्मेदारी है की मै तुमको पार कर दूंगा लेकिन तुम नही बैठते हो तो कौन तुमको पार करेगा, कोई करेगा पार ? तो लग कर के सुमिरन भजन ध्यान करो और दोनों वक्त निकालो, ना कुछ हो तो चारपाई पर पड़े पड़े पांचो नाम की धुनी “सतगुरु जयगुरुदेव” “जयगुरुदेव” नाम की माला फेरते रहो मन में बोलते रहो जब रास्ते चलते हो कही भी जाते हो तो गुरु का नाम जपते रहो |
सतगुरु जयगुरुदेव
“सतगुरु जयगुरुदेव” का मतलब सत्य के गुरु हमारे सतगुरु जयगुरुदेव स्वामी जी महाराज तो हमारे सत्य के गुरु है इसलिए उनको सतगुरु और वो सतगुरु है हमारे, इसलिए “सतगुरु जयगुरुदेव” बोलते हैं ताकि निशाना किसी दुसरे पर ना जाये निशाना हमारे गुरुमहाराज पर ही रहे की हम अपने गुरु महाराज को ही मानते हैं बाकि सबको अपना गुरुभाई मानते हैं |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव
न किसी की निंदा आलोचना करने को गुरुमहराज ने बताया ना किसी की करते हैं ना किसी की है ना किसी को कुछ कहते हैं जो करे सो भरे और जिसको जो बताया है वो अपना काम करे मुझे जो बताया मुझे जो आदेश दिया मै उस आदेश का पालन करता हूँ मुझे जो बताया है की बच्चू तुम्हारा काम है सुमिरन भजन ध्यान बताना उनको, और खुद करना और करवाना, मै अनुभव करवा लूँगा तो जब यहाँ अखण्ड रूप से विराजमान हैं गुरुमहाराज, तो यहाँ पर जो आयेगा सच्चे मन से सुमिरन भजन ध्यान करेगा तो उसके आँख तो खुलने हीं खुलना है कोई माई का लाल नही रोक सकता वो तो खुल ही न खुल ही जायेगी तो जब गुरुमहाराज ने वचन कहे हैं तो वो काम गुरुमहाराज कर रहे हैं तो उसको कोई माई का लाल थोड़ी न रोक सकता है वो तो गुरु के वचन है गुरुमहाराज कर रहे हैं कोई दूसरा तो कर नही रहा है तो प्रेमियों आप सब को चाहिये की एक बार आकर के यहाँ अपने जीवात्मा की कल्याण के लिए अपने कान आँख खोल लेना चाहिये उसके बाद में मर्जी आये तो अपने घर पर बैठ कर करो मर्जी जहाँ जाना चाहो वहा जाओ मेरी तरफ से तो कोई रोक टोक तो है नही की तुम यहाँ मत जाना इधर मर जाना उधर मत जाना चाहे इधर चले जाना, उधर मत आना जिसकी मर्जी जिधर जा सकता है सुमिरन भजन ध्यान के लिए आ सकता है यहाँ बैठ कर के सुमिरन भजन ध्यान करे गुरु नियम के मुताविक आवे और गुरु नियम के मितविक जावे |

बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
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Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 19 सितंबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
मिलन मन भजन गुरु का नाम |
श्रीचरनन में नेह लगावे, जाये वो सतधाम |
मिलन मन गुरु चरनन में ध्यान |
गुरु अलौकिक कुंज स्वरूपी , इन्ही का करियो ध्यान |
शब्द रसायो अमृत वेला, उसको करियो पान |
हरी अनंत हरी कथा अनंता, ऐसे सतगुरु राम |
शीश धरो सतगुरु चरनन में, हो पूरा कल्याण |
सतगुरु जयगुरुदेव
अखण्ड रूप से विराजमान सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ग्राम बड़ेला के प्रांगण में बैठे हुये समस्त प्रेमीजन, मालिक की अशीम दया अनुकम्पा है और ऐसा खेल रचा है की किसी की बुध्दि में नही आ रहा है सबकी बुध्दि से परे हो जा रहा है कोई कह रहा है इधर हैं कोई कह रहा है उधर हैं कोई कह रहा है जिन्दा हैं तो कोई कह रहा है निजधाम चले गये, हर प्रकार के ऊठा पोह लगी हुई है और मालिक तो शब्द भेदी है हर प्रकार से हाजिर नाजिर है वो उसको अद्भुत दर्शन अलौकिक दर्शन हर प्रकार की दया मेहर कर रहे हैं, कहते हैं जब तक नामी रहता तब तक नाम का असर, अनुभव अनुभूति हो रही दिखाई सुनाई पड़ रहा साधक प्रेमी आगे की तरफ बढ़ रहे हैं गुरु महाराज की जय जयकार कर रहे हैं और जो कुछ भी हो रहा है सब गुरुमहाराज की दया कृपा से हो रहा है अगर उनकी दया मेहर नही होती तो एक भी पग कोई भी प्रेमी चल नही सकता था और गुरुमहाराज ने बताया आगे कई कई “जयगुरुदेव” हो जायेंगे तमाम बजार लग जायेंगे हर जगह दुकाने खुल जायेंगी तो ये तो जो कुछ बताया है वो तो होने है इसमें कोई लेष मात्र का फर्क आना नही है पर हमे आपको ध्यान कर कर, मन लगन लगा कर के सुमिरन भजन ध्यान अवश्य करना है सुमिरन भजन ध्यान ही मुख्य पूंजी है वही इस पार से उस पार ले जायेगा कोई दूसरी चीज हमारे तुम्हारे साथ नही जायेगी सुमिरन ध्यान भजन ही जायेगा , ध्यान भजन मन में रहे नाम सतगुरु का वही दिव्य देश दिखलायेगा और वही सतगुरु के चरणों में पहुँचायेगा इसलिए नाम भजन करना सबसे आवश्यक है और परम जरूरी है गुरुमहाराज ने हमलोगों को अमोलक दौलत दी है वो दौलत है नाम, दात बक्शी है नाम की तो उस नाम को हमको बराबर लेते रहना है जपते रहना है और गुरु में मन लगाये रहना है |
सतगुरु जयगुरुदेव
धरो मन सतगुरु चरनन ध्यान |
धीर गंभीर अधम और पापी, गुरु चरनन कल्याण |
धरो मन सतगुरु चरनन ध्यान |
जिन सतगुरु ने नाम दियो है, सुन वीणा की तान |
धरो मन सतगुरु चरनन ध्यान |
घंटा शंख मृदंग किंगरिया, किरके आठों याम |
धरो मन सतगुरु चरनन ध्यान |
अद्भुत दिव्य देश दिखलावें, बन प्रभु सतगुरु राम |
इन्ही के चरनन पुरुषारथ है, हो जाये कल्याण |
धरो मन सतगुरु जी में ध्यान |

बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 18 सितंबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
विनय मन पावन सतगुरु नाम
पतित से पावन नाम गुरु का, अन्तर घट कल्याण |
दया मेहर बरसे नामी की, नाम भजन दो ध्यान |
चढ़े सुरतिया जब अम्बर में, दया मेहर की मिले खान |
प्रीतम ना-मी मेरे सांवरियां, दात दियो है दान |
मन चित लग जाये नाम भजन में, बस तेरो कल्याण |
विनती विनय प्रार्थना गुरु से, धुन मिल जाये जी ध्यान |
सतगुरु जयगुरुदेव
पावन चंचल शब्द सहारा, शब्द की सीडी का सकल पसारा |
शब्द पकड़ होऊ उस पारा, मेहर होई दाता की आला |
खोलें अंतर्घट का ताला, सतगुरु प्रीतम दीन दयाला |
हे मालिक सतगुरु कृपाला, नामी मेरे दीन दयाला |
प्रभु की कृपा होये सब काजू, मंगल रहे अमंगल न साजू |
श्रीचरणन की चमक जो आवे, मुक्ति मोक्ष परमपद पावे |
पद पंकज चूमे हरसावे, अपनी सतगुरु में घुल मिल जावे |
सतगुरु जयगुरुदेव
मगन मन जपना नाम गुरु का |
अंतर ध्यान हो सतगुरु प्यारे, हर क्षण रहूँ तुम्हारे सहारे |
हे मालिक मेरे कृपाला, सच्चे सतगुरु दीन दयाला |
दया मेहर करो खोलो ताला, सतगुरु प्रीतम हे नन्दलाला |
सतगुरु सांवरियां से नेह लगाऊ, नाम भाजन मै इन्ही का गाऊं |
शब्द सिरोही सतगुरु प्रीतम, दया मेहर की खानी जो आला |
हर घट का खुल सतगुरु ताला, सतगुरु प्रीतम हैं कृपाला |
सतगुरु जयगुरुदेव
मंगल मन में प्रार्थना कर के अपने गुरु में ध्यान लगाने में प्रेमियों को साधकों को, और आनंद आता है अंतर में, जब भीनी भीनी अवाज आने लगती है हरियाली की रील चलने लगती है मालिक की मेहर से मन बुध्दि चित एकाग्रचित हो जाता है तब अद्भुत आनंद की अनुभूति होती है अच्छी सुगंधी आती है और अच्छी दया कृपा होती है गुरु महाराज की | गुरु महाराज से प्रेमी बाते कर के गदगद हो जाते हैं बाग बाग हो जाते हैं हर प्रकार से मालिक उन पर दया मेहर करते हैं और मालिक का गुणगान वे करते रहते हैं, मालिक समर्थ है सनातन से परम पिता परमेश्वर है सबका मालिक है यही ईशवर है सच्चा, अनाम पुरुष करतार निर्गुण निराकार शिव, या श्रीराम पुरुष करतार को हीं कहते हैं परम पिता परमेशवर भी इनको कहा जाता है तो जब इनमे मन लगाओगे इन्हीं का भजन करोगे इन्हीं का गुण गाओगे तब सारे देवी देवता सारे धनी सब कोई खुश रहेगा सबकी पुजा गुरु की पुजा में हो जाती है गुरु के साथ जब लगकर के सुमिरन ध्यान पुंजन हवन जब किया जाता है तो सारे कार्य सफल हो जाता है गुरु के आधारे गुरु के द्वारे जब गुरु अधारे गुरु द्वारे रहोगे तो सारा काम तुम्हारा बनता चला जायेगा अब असली गुरुद्वारा घट के अंदर है घट में घाट, घाट पर सतगुरु तो सतगुरु की जहाँ बैठक होगी वहां असली गुरुद्वारा है यहाँ पे तो सभी लोग जानते हैं की गुरु द्वारा कहाँ पर है, आश्रम मथुरा और प्रेमी जाते आते रहते हैं माथा भी टेकते हैं किसी को कोई रोक टोक नही ना कोई मनाही है की वह मत जाना | मालिक की चीज है मालिक ने एक एक तिनका जोड़ के बड़े ही परिश्रम से आश्रम का निर्माण किया जहाँ मालिक के चरण रचे बसे और हमेशा से वह भूमि पवित्र है और आगे भी पवित्र रहेगी तो आप लोगो को निशाना अपने गुरुमहाराज से रखकर के गुरु को हाजिर नाजिर मानकर के सुमिरन भजन ध्यान करना है और आत्मबोध आत्मज्ञान के तरफ बढ़ते रहना है अपने मालिक में लव लगाते रहना है गुरु की दया कृपा को प्राप्त करना है और अपने गुरु के बताये हुये बातों पर अटल रहना है जो भी वाणी गुरुमहाराज ने बोली है उस पर ध्यान देना है क्योकि संत की वाणी असत्य नही हो सकती कभी, “संत वचन पलटे नही पलट जाये ब्रहमांड ” तो उनकी बातें जो हैं वो सच्च होनी है तो सच्चाई के तरफ लगन से लगे रहे और गुरु महाराज की पुरानी बातों को याद करते रहें , पत्रिका को उलट पलट कर देखते रहें जो पुरानी पत्रिका है तो गुरुमहाराज ने क्या कहा और ध्यान भजन करते रहें जब तक सांसो की पूंजी है और अपने गुरु के सहारे रहें और अपने गुरु के अधारे रहे जब गुरु सहारे गुरु अधारे गुरु द्वारे रहोगे तो सारा काम बना रहेगा अगर गुरु अधारे नही रहे तो काम नही बनेगा तो प्रेमियों हमको नेह अपने गुरु से लगाना है और गुरु का हीं नाम भजन को गाना है |
सतगुरु जयगुरुदेव
सतगुरु कहते है अपने गुरु को अपने गुरुमहाराज को ही सतगुरु कहते हैं तो जो हम “सतगुरु” कह देंगे तो पहले हमारे गुरुमहाराज याद आ जायेंगे फिर “जयगुरुदेव”, “जयगुरुदेव नाम प्रभु का” है तो “प्रभु” ही वही और वही “सतगुरु” एक ही चीज है तो पहले कहते हैं “सतगुरु जयगुरुदेव “

बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

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Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 17 सितंबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
नाम से मिली अमोलक नाम |
नाम अमोलक दियो गुरु ने, जो सच्चा प्रमाण |
नामी प्रीतम मेरे सांवरिया, सतगुरु हीं हैं राम |
शीश राखो इन्हीं चरनन में, इन्ही के चरण अराम |
सतगुरु प्रीतम मालिक अपने, यही तो हैं प्रभु राम |
सतगुरु जयगुरुदेव
गुरु महाराज ने समस्त प्रेमियों को सिखाया बताया नाम की अमोलक दौलत दी नाम जड़ी दी और ये बताया इसको बराबर रगड़ते रहना अंतर में चमक आएगी तुम्हे दिखाई पड़ेगा सुनाई पड़ेगा किसी भी विषम परिस्थिति में मेरे चेहरे को मुझको याद करना मै तुम्हारी मदद कर दूंगा तुम्हारा मददगार हूँ हर प्रकार से मैं तुम्हारा मदद करूंगा तुम्हे अपने साथ रखूँगा मालिक ने सत्संग सुनाते हुये सबकुछ बताते हुये शाकाहारी सदाचारी रहते सुमिरन भजन ध्यान का रास्ता बताया की जब आप खा पी लो शाम को चारपाई पर लेटने चलो तो १ घंटे सुबह और १ घंटे शाम उस मालिक को दे दो जिससे तुम्हारा भी काम बन जाये और उस मालिक का भी काम बन जाये दोनों का आपस में ताल मेल हो जाये रास्ता सच्चा है सतगुरु सच्चे हैं तो राही सच्चे हैं तो उस देश की तरफ चल चलो अपने मालिक से मिलो सतधाम सतदेश की तरफ बढ़ो गुरु समरथ है हर तरह से पार करेगा उध्दार करेगा कोई मिलौनी और कोई उस प्रकार से छाया नही है गुरु के सामने जो तुम्हे रोक सके गुरु का नाम लेते हीं भव पार हो जाओगे |
“निष्कंटक निश होऊ प्रभाऊ, नाम जपत जहाँ जरत हैं राहु
कलमल सिंध सुख जहाँ जाई, जब तुम लोगे नाम दुहाई ”
तुम्हारे ऊपर विशेष दया मेहर होगी सारे कर्म कर्जे छुट जायेंगे और जो कलमल के सिन्धु हैं वो सुख जायेंगे जब तुम नाम लोगे नाम भजन करोगे प्रभु के बताये मार्ग पर चलोगे तो सारे के सारे काम तुम्हारे बनते जायेंगे गुरु महाराज की दया कृपा होती जायेगी दया मेहर की बरसात होती जायेगी और सब तुम उसमे ओत पोत होते चले जाओगे |
“सतगुरु स्वामी शब्द स्नेही, नामी अपने रहे विदेही
नाम की ज्योति जलाई नामी, निष्कलंक निश पाप हे नामी
दया मेहर उपजी नामी की, दात दीन्ह सतगुरु स्वामी की ”
जो कुछ मिला है उसको गुरुमहाराज ने दिया है आपको सब प्रकार से जो भी दात बक्शी है वो गुरु महाराज की तरफ से बक्शी हुई है उन्ही की कमाई हुई पूंजी है जो तुमको मिली है तुम सब लग कर के सुमिरन भजन ध्यान करो और अपने देश चलो |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 16 सितंबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
मेहर बस दीन्हा सतगुरु नाम |
दया मेहर उपजे साईं की, सत्य है देश अनाम |
सच्चे सतगुरु सत्य देश के, किया त्रिलोक मुकाम |
नाम भजन का मार्ग दीन्हा, बन जाये सब काम |
दीन गरीबी और बिमारी, ये सब दीन्हा दान |
कर्म निपटावे आगे बढ़ाये, सुरत जाये निजधाम |
सतगुरु मेहर से देश आपनो, कीन्हा जाये मुकाम |
शीश झुकायो सतगुरु चरनन में, जिनने दियो था नाम |
सतगुरु जयगुरुदेव
अखण्ड रूप से विराजमान सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ग्राम बड़ेला के प्रागंण में बैठे हुये समस्त प्रेमीजन मालिक की अशीम दया कृपा अनुकम्पा से हमको आपको सबको “एक घड़ी आधी घड़ी आधी में पुनियद गोस्वामी संगत साध की कटे कोट अपराध” तो जो भी समय हमको आपको मिलता है सत्संग का छोटा मोटा उसमे गुरुमहाराज की विशेष दया कृपा होती है और दया मेहर की बरसात होती रहती है उसी में समझ आती है और सत्संग के दौरान अपनी गलतियों को सुधारा भी जाता है चुकि सत्संग सुनने के बाद हमको कुछ न कुछ पता चलता रहता है कि क्या कमी है क्या अच्छाई है क्या बुराई है तो उसको समझने के लिए और अपने सुरत जीवात्मा की धुलाई के लिए सत्संग में जाते हैं संत सतगुरु की सत्संग सुनते हैं जो बड़ी ही दया कृपा कर के मालिक की वाणी सुनने को मिलती है गुरु महाराज ने अपार दया कर के करोड़ो करोड़ की संगत जोड़ी और सबको नामदान दिया पर कहा निशाना मुझसे रखना बच्चू किसी दुसरे से नही हमको देखते रहना भजन करते रहना मै तुमको अंतर में मिलता रहूँगा | असली मिलन अंदर का और अंदर का रास्ता अंदर से, अंतर में सारी खिलकत है अंतर में सारी दुनिया बसी है अंतर में सदा सर्वदा के लिए बैठा हुआ हु अंतर में सारा खजाना रखा है अंतर की आत्मबोध आत्मज्ञान की पढाई पढाई है तो आत्मबोध आत्मज्ञान कि पढाई पढ़ो आत्मसिध्दी प्राप्त करो |
आत्मबोध हो नाम भजन से, जो करे गुरु का ध्यान |
दया मेहर बरसे सतगुरु की, अंतर घट खुलेयाम |
जब मालिक की विशेष दया कृपा होती है जब मालिक की दया की बरसात होती है तो अंतर का ताल्ला खुल जाता है दिखाई और सुनाई पड़ने लगता है अनुभव होने लगता है, मालिक की दया मेहर बरसने लगती है सच्चा सुमिरन ध्यान भजन लगन के साथ करने पर मालिक विशेष दया कृपा करते हैं और अंतर का ताल्ला खोल देते हैं सतगुरु के साथ प्रेमी गुरु महाराज के साथ आगे बढ़ने लगते हैं उनको आनंद आने लगता है रस मिलने लगता है ऊपर चढ़ाई होने लगती है तो ये सब गुरुमहाराज की दया कृपा से होता है शिष्य कुछ भी नही गुरु सबकुछ है शिष्य ने अपना सर्वस्य सबकुछ गुरु को सौंप दिया सतगुरु के चरणों में कर दिया की हे मालिक दया करो हर प्रकार से, और हमे अपने निज घर पहुंचा दो जहाँ सुरतो का असली मुकाम है उस मुकाम पर पहुँचाओ मालिक, हम आपके साथ हैं जाने अनजाने कोई गलती हो जाये भुल हो जाये अपराध हो जाये उसको क्षमा कर दो और अपने साथ हमको अपने देश निज घर निज धाम ले चलो और जीवन मरण से मुक्ति दिलाओ सुरत जीवात्मा साधक प्रेमी प्रेमियों को प्रार्थना गुरु महाराज से इसी तरह करनी चाहिये और गुरु महाराज दाता दयाल हैं विशेष मौज के धनी हैं वो हरदम दया करते रहते हैं दया की धार उनकी हरदम आती रहती है और मेहर बरसती रहती है और हमसब को लेना नही आता देते तो वो बहुत कुछ हैं पर हमे लेना नही आता अगर हम ठीक से सारी दया कृपा को ले लें ग्रहण कर लें एक पैसे भी ग्रहण कर लें तो बहुत अच्छी बात है जब ग्रहण कर लेंगे तो हमारा काम बन जायेगा गुरु की मौज से हमारी साधना बन जायेगी हमारा सुमिरन भजन ध्यान बन जायेगा मालिक तो दयाल है ही सबकुछ दे रहा है लुटा रहा है दोनों हाथ से बांट रहा है लेने वाला तैयार हो लेने के लिए, देने वाला देने के लिए उपस्थित है हर क्षण बैठा हुआ है | सतगुरु ने बहुत कुछ गुरुमहाराज ने बताया समझाया और चेताया की ये कर्मो का देश है यहाँ लेन देन है कर्मों का निपटारा करो अपना लें दें चुकता करो और अपने रास्ते चलो घर चलो
कहते हैं—“देश अपने चलो भाई, पराये देश नही रहना
काम सच्चा करो जाई, ध्यान मन भजन को गहना
गुरु का ध्यान कर पहले, बहुर घट शब्द को सुनना
नाम के रंग में रंग जा, मिले तोहे देश निज अपना “
प्रेमियों गुरुमहाराज ने सबकुछ सुना सुना कर के बता बता कर के और चेता चेता कर के आपको समझाया बताया अथक प्रयास किया अथक मेहनत की और अब भी अथक मेहनत कर रहे हैं आपको अनुभव करा रहे हैं बराबर दया मेहर बांट रहे हैं पर आप लेने वाले बन जाओ और लग कर के १ घंटे सुबह एक घंटे शाम सुमिरन भजन ध्यान कर लो तो तुम पर दया मेहर हो जाये मलिक तो हर प्रकार से साथ हैं हर प्रकार से हाजिर नाजिर हैं लोग समझते हैं हर प्रकार से हाजिर नाजिर किस तरह, इस तरह तो गुरुमहाराज दिखाई नही पड़ते इसके मतलब जब हर प्रकार से हाजिर नाजिर हैं तो हर प्रकार से हाजिर नाजिर मतलब जो सर्वेश्वर हो तो हर प्रकार से हाजिर नाजिर होगा की नही होगा, सर्वविदित हो तो हर प्रकार से हाजिर नाजिर होगा की नही होगा और ये अपना घट है घट में घाट , घाट पर सतगुरु की बैठक तो हम जिन्दा तो हमारे गुरुमहाराज जिन्दा हैं उसमे बैठे हुये हैं और उनका बोध आत्मज्ञान हमलोगों को होता रहता है और फिर उनके शरीर के लिए क्या मुश्किल ये है वो है जिस कपड़े में घूम रहे हैं उस कपड़े में अगर घूम नही रहे होते शशरीर, तो हमलोगों को अनुभव नही होता इसलिए तो वे हैं हीं हैं मालिक तब हीं अनुभव होता है तभी उनका शब्द सुनाई देता है अंतर में शब्द का रस उतरता है शब्द का ज्ञान बरसता है ऐ प्रेमियों लग कर के सुमिरन भजन ध्यान सब लोग करो वक्त नाजुक है और जो जहाँ पर है भारत में या बाहर विदेशों में जब समय मिले तो सुमिरन ध्यान भजन बनाने के लिए अनुभव अनुभूति पाने के लिए तो एक बार अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ग्राम बड़ेला तहसील रुदौली जनपद फ़ैजाबाद अयोध्या में जरुर पधारें, आओ जिससे आपका सुमिरन भजन ध्यान जरुर बनने लगे तुम्हे भी अनुभूति होने लगे यहाँ किसी से कोई टैक्स वसूल नही किया जाता आपकी जो इक्ष्छा है गुरु नियम के अनुसार श्रध्दा भाव के अनुसार आपका शक्ति हो और यहा भोजन करो भजन करो अपना भजन ठीक करो तुम्हे दिखाई सुनाई पड़े यही सबसे बड़ी चीज है तुम्हारा भजन बन जाये समझो सब कुछ बन गया अंतर में सतगुरु के दर्शन होने लगे सबकुछ मिल गया |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
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Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 15 सितंबर 2015

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
अधारे रहियो गुरु सहारे |
तुम सुरतें सतगुरु की प्यारी , सत्य भेद है अधारी |
सतनाम का नाम मिला है, खोलो अधर किवाड़ी |
रूप अलौकिक अंतर देखो, मेहर घाट मजधारी |
श्रीचरणन सतगुरु जी की सेवा , नाम शब्द की मिल जाये मेवा |
सतगुरु चरनन शीश झुकाकर, करूं वंदना यही हैं देवा |
सतगुरु जयगुरुदेव अनामि, श्वेत पुरुष सुन्दर यही स्वामी |
सतगुरु जयगुरुदेव
भेद मन ध्यान कर गुरु का, गुरु अधार सच्चा है |
पार सतगुरु ले जायेंगे, यही तो दयाल सच्चा है |
तुम सब को सतगुरु स्वामी महाराज अपने गुरु महाराज ही पार ले जायेंगे कोई दूसरा नही ले जायेगा | हे श्वेत पुरुष सच्चे दयाल, हे सच्चे समरथ स्वामी, हे हमारे नामी, यही सारा काम करेंगे दूसरा कोई नही करेगा और सारी चीजों को यही बतायेंगे यही समझायेंगे और यही सारा काम करवायेंगे इनके बिना कोई काम होने वाला नही है अगर आप सबको पार चलना है तो गुरु का हीं भजन करना होगा |
नाम भजन चित धारो प्रेमियों, सतगुरु नाम है दीन्ह |
दया मेहर पाओ सतगुरु की, उसी में होवो लीन |
नाम भजन अंतर का गाओ, जिसमे बाजे बीन |
सतगुरु मेहर आवेगी भाई, हो जाओ तर्ल्लिन |
गुरुमहाराज का नाम भजन करना ही सबसे अच्छा उचित कार्य है उसी में तर्ल्लिन होने पर सारा काम बनेगा अगर मालिक का नाम नही भजोगे मालिक में लव नही लाओगे मालिक में लगन नही लगाओगे तो तुम्हरा काम नही बनेगा इसलिए मालिक में तर्ल्लिन हो मालिक में लव लगाओ मालिक का भजन करो |

बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

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Satguru Jaigurudev

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक : १३-०९-२०१५ **** समय : ६.० AM


गुरु महाराज ने गुरुबहन बिंदु को लिखवाया सन्देश : गुरु महाराज के शब्दों में
सबके सब मनमानी करने पर तुले हैं | खूब मनमानी कर करा लो | आगे समय मिले न मिले , कोई रोक टोक नहीं हैं | लेकिन मनमानी करने का नतीजा भुगतने को भी तैयार हो जाओ | बातों का खंडन करना , बार - बार काटना अच्छी बात नहीं | गुनाह पर गुनाह करते जा रहे हो, माफ़ कौन करेगा | अरे बच्चे ! सच की अदालत पर सुनवाई के लिए जिस दिन बुलाया जायेगा , उस दिन कोई सहाय नही होगा | माफ़ की अर्जी लगाई नहीं अपनी मर्जी में जो आया वही कर रहे हो | देखते जाओ आगे क्या क्या होता है | सब सच सामने ही आ रहा है | मेरे न्यायाधीश मत बनो | अन्याय से बचने का यतन करो | होनी को अनहोनी में बदलने पर तुले हो , यह अच्छी बात नहीं | (सबके सब सम्भलो , सब एक ही झटके में डूब जाओगे अगर मेरी बातों का मनन नहीं किये |) मेरी आगे और पीछे की सारी बातें पुनः याद करो | एक भी बात कटने वाली नहीं है |
सच्चा सौदा करने के लिए धरती पर लए गए हो | सच्चे को खोजो अंतरघाट पर बैठकर, बाहर कुछ नहीं मिलेगा , सारा खेल अंतर का है | वहीँ अंतर में सूरतों का सच्चा सौदागर बैठा है | उसी से पूछो और नूरी खिलकत की कदर करो | सब सच सामने आ जायेगा | सत से सत को पाओगे | अरे धोखाधडी , छलकपट छोड़ दो |
********जीत को सके अजेय सतगुरु जयगुरुदेव स्वामी, सत से सतगुरु जयगुरुदेव स्वामी पुनः है आयी | ************
********सत सत सत सब सत में मिल जायी|********
सतगुरु जयगुरुदेव स्वामी की सच्ची महा लीला समझ अब आयी | सत साईं की सच्ची लीला समझ अब जाओ | सतगुरु स्वामी का भजन सच गाओ | गा गाकर के सबको सुनाओ | सबको सत दरबार का सतसंदेश पुनः सुनाओ | सबमें सोते भाग्य जगाओ |
सबका अमर सौभाग्य पुनः दिलाओ |
अखंड अमर देश का अमर दयालु पुनः है आया | सतखंड का अमर देश लखाया | ऊँगली पकड़कर आ जाओ किनारे | खेय के नैया ले आया है दुवारे | सत देश की सच्ची खबर हूँ मैं लाया | सच्चा सन्देश ही मैं सबको सुनाया | अनहोनी को सच में बदलने पुनः हूँ मैं आया | अंतर बाहर परम सौभाग्य है सबका अब जगने ही वाला | अंतर का ही परम दयालु है बाहर आया |
सतगुरु सतनाम | सतगुरु जयगुरुदेव नाम की महिमा लखाया | बताया |
स्वांस स्वांस पर जपो सब सतगुरु सतनाम या सतगुरु जयगुरुदेव नाम हो जाये सबका कल्याण |
सतगुरु जयगुरुदेव
अखंड भारत संगत गुरु की
गुरु बहन - बिंदु
जिला - फैज़ाबाद, अयोध्या

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 31 अगस्त २०१५

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
पावन सतगुरु का सुन्दर धामु, नाम भजन करो मिले परमानु |
सतगुरु प्रीतम बृहद अलौकिक, नाम दियो नामधारी |
नाम भजन करो वीणा पार करो, करो अपनी उध्दारी |
मन चित धारो नाम भजन में, करो नही सब जन अबारी |
शीश झुकाओ सतगुरु चरनन में, चढ़े चलो अगम अटारी |
सतगुरु प्रीतम मिले सवारियां, नही करो सब जन अबारी |
जल्दी पहुँचो गुरु चरनन में, आई भजन की बारी |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 30 अगस्त २०१५

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
विनय मन भजो गुरु का नाम |
नाम गुरु का प्यारे लागे, प्यारे गुरु धुरधाम |
धुर के मालिक सतगुरु नामी , हरी बतायो नाम |
भेद एक एक सतगुरु दीन्हा , सतगुरु संग बने काम |
नाम भजनिया में सब मन डालो, सतगुरु मेहर बदाम |
रंग रंगीली योगि नही है, श्वेत पुरुष करतार |
सत्य भेद के सतगुरु मालिक, येही सच्चे अधार |
घट पट खोलत हैं सतगुरु जी, शब्द भेद झंकार |
चढ़े सुरतिया अम्बर में, सतगुरु से हो प्यार |
सतगुरु चरणन शीश झुकाऊ , यही तो हैं अधार |
सतगुरु जयगुरुदेव
अखण्ड रूप से विराजमान सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ग्राम बड़ेला के प्रागंण में बैठे हुये समस्त प्रेमीजन दूर दराज से आये हुये समस्त प्रेमियों सब लोग मन चित बुध्दि लगाकर के मन को एकाग्र कर के मन को रोक कर के मालिक की साधना में लगेंगे मालिक से प्रार्थना करेंगे हे मालिक हमे भी आत्मबोध आत्मज्ञान कराओ अंतर दर्शन दो और हमे भी बताओ की आपकी क्या दया मेहर क्या कृपा है हे प्रभु हर प्रकार से सर्वग्य समरथ नामी अनामी आपने सबका भेद बताया सबसे मिलवाओ और जहां तक हम मिले हैं वहां तक आप ही ने मिलवाया अंतर में, आप ही हमे लेकर चले हैं अपने बल से मै कहीं नही गया हे प्रभु हे सतगुरु हे नामी हम पर दया मेहर करो हम तुम्हारे जीव है तुम्हारे बच्चे हैं तुम्हारे शरणागत रहेंगे तुम्हारे पास रहेंगे हम भूल जाये अगर तो आप मत भूलो हमे २४ घंटे आप याद दिलाते रहो और अपने चरणों के पास रखो हे प्रभु हमारा सुमिरन भजन ध्यान बने हमारा मन चित नाम भजन में लगे ऐसी दया मेहर करो की हम आपके साथ लगे रहे जो कुछ आपने अब तक कहा है सारी बाते पूरी हो रही हैं आगे भी जो कुछ कहे हैं वो पुरे होंगे आप हमे हर प्रकार से संभाल कर रखो हर प्रकार से हमे अनुभव अनुभूति हो दर्शन पर्शन हो अंदर बाहर ऐसा आत्मबोध आत्मज्ञान हो की हमारे गुरु से हर प्रकार से मुलाकात हो रही है हर प्रकार से बात हो रही है आप सर्वग्य हो आप सचर हो आप स्वामी हो दयाल हो आपने ही हमको संभाल कर के रखा है आपने ही हमको सारा भेद बताया है तो हे प्रभु हम पर पूरी की पूरी दया मेहर बनाये रखो सदा सर्वदा से आप ही सच्चे मालिक रहे हैं और आगे भी रहेंगे तो हे प्रभु हम यही चाहते हैं की आप ही मेरे मालिक हो आप ही मेरे स्वामी हो आप ही मेरे दाता हो कोई दूसरा ना हो निर्विघ्न हम आपके जीव और आप हमारे पीव |
सतगुरु जयगुरुदेव
भेद मन सतगुरु जी का नाम |
बिन्दु अधार दियो सतगुरु ने, येही से बन जाये काम |
मनवा लग जाये नाम भजन में, हो जाये कल्याण |
सुख दुःख रहे अधार गुरु की, शब्द सिरोही प्यार |
लार तार एक धार है आई, देखो हरी का द्वार |
मन चित लागे नाम भजन में, हो जाओ उस पार |
सतगुरु नामी हे मेरे स्वामी, कर दीजो उध्दार |
नाम भजन कुछ बन नही पाये, हम हैं नाम अधार |
शीश धरत हैं तेरे चरनन में, सतगुरु करो वही पार |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

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Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 29 अगस्त २०१५

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम

पूनम के शुभ अवसर पर गुरु भाई अनिल कुमार गुप्ता ने परम संत सतगुरु जयगुरुदेव की दया मेहर से रूहानी संत्संग सुनाया |

सतगुरु जयगुरुदेव :
मंगल पावन सतगुरु नामी |
नाम भजन अंतर परनामी |
चढ़े सुरतिया दिव्य गगन में, मेहर होये सतगुरु जब नामी |
अद्भुत अंतर दृश्य दिखाये |
सतगुरु जयगुरुदेव
मनवा लागे नाम भजन में, सुख पावे अन्तर्यामी |
आमी रसा का सेई प्याला, होये नाम मन मतवाला |
सतगुरु नामी अंतर मिल जायें, सुखद कृपा हो दयाला |
नाम भजन में लगे मनवा, सतदेश कृपाला |
सतगुरु नामी दीन दयालू, मेहर करो बन दयाला |
मनवा लग जाये नाम भजन में, खुले का अंतर का ताला |
नाम वेग सतगुरु का सुहाये, शब्द भेद झन्कारा |
सतगुरु नामी मालिक प्रीतम, मिल जाये दीन दयाला |
मेहर हुई मेरे नामी की, बन गयो काम कृपाला |
शीश झुकाऊ तुम्हरे चरणन में, हे मेरे नामी सतगुरु लाला |
मेहर तुम्हारी ऐसी वर्षी, वर्षी बदरिया आला |
घट के पट सब खोल दियो है, मेहर कियो सतगुरु दीन दयाल |
तुम्हरी मेहर को शीश झुकाऊ, हे मेरे नामी नन्दलाला |
सतगुरु मालिक प्रीतम स्वामी, तुम हो दीन दयाला |
सतगुरु जयगुरुदेव
भजन मन नामी सतगुरु मालिक |
मनवा लगे नाम भजन में, दया मेहर बरसे मालिक |
हे मालिक दयाल मेरे नामी, तुम हो अन्तर्यामी |
मेहर करो स्वामी मेरे दाता, नाम भजन खुल जाये खाता |
मन चित लागे श्रीचरणन में, मेहर होये ऐसी मेरे दाता |
करूं वंदना विनती स्वामी, होये कृपा सतगुरु मेरे नामी |
तुम्हरे चरनिया में शीश झुकाऊं, मुक्ति मोक्ष परमपद पाऊं |
महिमा नाम की तुम्हरी गाऊं, हे सतगुरु तुममे मिल जाऊं |
सतगुरु जयगुरुदेव बुलाऊं |
सतगुरु जयगुरुदेव
अखण्ड रूप से विराजमान सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ग्राम बड़ेला के प्रागंण में बैठे हुये समस्त प्रेमीजन मालिक की अशीम दया कृपा है आज पूनम है और रक्षावंधन, रक्षावंधन का मतलब ये है की हर तरह से हर गाठ्ठे सतगुरु से बंध जाये और मालिक से प्रेम प्रतीत हो जाये हर तरह से रक्षा सुरक्षा मालिक से प्राप्त हो जाये ऐसी नेह और लगन अपने सतगुरु से लगाते हैं मालिक से कहते हैं की हे मालिक ये जो आठों गाठ्ठे हैं खुल जाये और आपकी सुरक्षा की मेहर की दया की दृष्टि पड़ जाये और उसी में हम लिपट जाये उसी में बंध जाये और आपके हो जायें हरदम हमेशा हर प्रकार से आपमें रत हो जायें |
****सतगुरु स्वामी मंगल नामी, मेहर नाम श्रुति मिले हे नामी |****
सुरत सतगुरु से विनती करती है की हे मालिक हर प्रकार से आपकी दया मेहर हो और आपकी अनाम देश की भक्ति आपका अनाम देश प्राप्त हो आपके अनाम देश में सुरत जीवात्मा आपके श्रीचरणों में जाये और आपकी पूरी की पूरी दया मेहर हो आप दयाल हो हे प्रभु दीन दयाल कृपाला हर प्रकार से दया मेहर कर के अपने चरणों में लगा लो अपने बंधन में बांध लो किसी दुसरे की बंधन में हमे बंधने की जरुरत नही है |
****श्रुति सावन जस बरसे मेहर, मेहर बदरिया भारी |****
जिस तरह सावन भादो में बरसात होती है उसी तरह मेहर की बदरिया मेहर की बरसात हमारे ऊपर हो, मालिक हर प्रकार से आपकी दया कृपा हो, मालिक हर प्रकार से हम आपके अंग-संग हो मालिक किसी प्रकार हम भटक न जाये और आपके श्रीचरणों में रहें, निशाना आपसे रहे किसी दुसरे से ना रहे हर प्रकार से आपकी दया मेहर रहे हर प्रकार से आपकी कृपा रहे किसी प्रकार की त्रुटी ना हो हम पापी हैं अधम है नकार हैं पर आप अमृत की धार हैं आप हर प्रकार से दया के सागर हैं हर प्रकार से सर्वग्य हैं हमारी गलतियों को क्षमा करे और हम पर दया मेहर करते हुये अपने श्रीचरणों में लगाये रहें |
****मेहर दयाल करो मेरे नामी, ऊपजे ज्ञान हे अन्तर्यामी |****
ऐसी दया मेहर कर दो हे प्रभु ऐसी कृपा कर दो की आपकी मेहर हमारे अंदर ऊपज जाये हमे ऐसा अनुभव अनुभूति हो की आपमें रत हो जायें जब हम नाम भजन के लिए बैठे तो ऐसा मन लग जाये ऐसा अद्भुत दृश्य चले ऐसी आपकी मेहर बरसे की हम आपमें ही मिल जायें और जब तक बैठे रहे आपको ही देखते रहें आपको हीं सुनते रहे आपकी ही मेहर में तल्लीन रहे हर प्रकार से आपकी दया मेहर बरसती रहे और उसी को हम देखते रहें उसी में हम रत रहें कहीं दुनियां में ना भटके |
****हरी भजन का मार्ग बतायो, प्रभु राम से सतगुरु मिलवायो |****
सबसे बड़ी दया मेहर कर के आपने नाम बताया नाम दिया और प्रभु राम से मिलवाया प्रभु राम का भजन बताया प्रभु राम का मार्ग बताया हरी भजन बताया सबकुछ आपने बताया आपकी बहुत बहुत बड़ी कृपा है बहुत बड़ी दया है बहुत बड़ी मेहर है जो ऐसा हुआ हम इस लायक नही थे फिर भी आपने लायक बना दिया हम नालायको को लायक बना दिया और लाकर के इस स्थान पर खड़ा किया मालिक जहाँ से हमको सबकुछ आपके द्वारा ही प्राप्त हो रहा |
****मेहर बस नामी मिला है नाम, नर तन कृतारथ हुआ है नामी |****
आपकी मेहर आपकी दया के बस हमको जो कुछ मिला है और ये नर तन है ये कृतारथ हो गया कृतग्य हो गया पार हो गया ये सफल हो गया आपके नाम से आपके द्वारा नाम मिल जाने से हमारा काम बन गया हर प्रकार से आपकी दया मेहर हो गई और आपकी दया मेहर से हमारा सारा काम बन गया हे सतगुरु आप दया मेहर करते रहें और हमारा काम बनता रहे हे मालिक हम किसी क्षण भुल जाये पर आप मत भुलना हर प्रकार से दया मेहर करो प्रभु और अपने चरणों में लगाये रखो |

बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

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Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 28 अगस्त २०१५

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
नाम का भेद गुरु ने दीन्ह |
नाम पकड़ कर अंतर चलियो, लो सतगुरु को चीन्ह |
हरी भजन सतगुरु ने बतायो, बाजे तामे बीन |
नाम भजन सतगुरु का प्यारा, उसमे होवो तर्ल्लिन |
प्रथम होये दर्शन प्रभु रामा, घंटा संख सुनो धुनी |
सतगुरु जयगुरुदेव
मन में नाम होये सतगुरु का , बन जायेगा काम |
अंतर मेहर विराजे गुरु की, यही गुरु अंतर ध्यान |
सतगुरु जी में लगन लगाओ, हो पूरा कल्याण |
नाम भजन एक कुंजी सच्ची, इसे में धरो सब ध्यान |
सतगुरु दया बरसे अंतर, हो पूरा कल्याण |
सतगुरु भजन नाम को करियो, सतगुरु नाम अधार |
नाम रूप सतगुरु का सच्चा, मिले हरी प्रभु जी का घाट |
राम प्रभु खुश हो जायेंगे, सतगुरु जोहत बाट |
नाम दियो है भजन करण को, करो भजन दिन-रात |
सतगुरु जयगुरुदेव
अखन रूप से विराजमान सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ग्राम बड़ेला के प्रागंण में बैठे हुये समस्त प्रेमीजन मालिक की अशीम दया और अनुकम्पा आप सब पर विराजमान हो आपका सुमिरन भजन ध्यान सब बन जाये मालिक का दया मेहर बरसे और आप सब मालिक के चरणों में लगे रहो | गुरु हर प्रकार से सर्वग्य सर्वदाता सर्वविदित स्वयम जीता जागता एक समरथ देवता है वो अनाम पुरुष करतार का स्वरुप है उन्हें देखोगे तो वो प्रभु राम का स्वरुप है ब्रह्म और पारब्रह्म का स्वरुप है महाकाल का स्वरुप है हर जगह पर गुरु की बैठक है और हर जगह उनका स्वरुप है गुरु ही वंदो को पार कर के अपने देश में सतदेश में ले जाते हैं गुरु की दया कृपा से हीं सारा काम होता है गुरु चाहे तो छण में कुछ का कुछ कर दे गुरु के चरणों में बैठे रहो जैसे भी रखे उसमे खुश रहो और गुरु की जय जयकार करते रहो और गुरु से प्रार्थना करते रहो हे मालिक दया करो गुरुमहाराज हर प्रकार से दयालु हैं हर प्रकार से दया करते हैं और करते आये हैं आगे भी करते रहेंगे आप लोगो को चाहिये की भाव पूर्ण प्रार्थना बोलने के बाद सुमिरन भजन ध्यान गुरु में मन लगाना और गुरु का भजन गाना, भजन अंतर में गाया जाता है जब भी तुम सुमिरन भजन ध्यान के लिए बैठो तो मालिक की भावपूर्ण प्रार्थना बोलो और भावपूर्ण प्रार्थना बोलने के बाद सुमिरन भजन ध्यान में आपलोग लग जाओ सुमिरन भजन ध्यन में लग जाओगे तो अनन्य दया मालिक की विराजेगी और तुमको दिखाई भी पड़ेगा सुनाई भी पड़ेगा मालिक की इस समय विशेष मौज दया चल रही है | २५ जून सन् २०१२ से गुरुमहाराज ने कहा बच्चू तुमने जीते जी ये मंदिर मेरा बनवाया है मै अखण्ड रूप से इसमें विराजमान हूँ यहाँ पर जो प्रेमी आयेगा तीन बार सच्चे मन से ध्यान भजन करेगा उसकी आँख खुल जायेगी तो अब अमृत की बरसात आँख खोलने की बरसात सुमिरन भजन ध्यान बनने की बरसात गुरुमहाराज कर रहे हैं इसमें कोई कमी नही जो प्रेमी आते हैं उनको अनुभव होता है दिखाई भी पड़ता है सुनाई भी पड़ता है उनके आँख कान खुल रहे हैं और समस्त भारत के प्रेमियों से और विश्व के प्रेमियों से अनुरोध है की यहाँ पर आकर के एक बार गुरुमहाराज के अखंड स्वरुप का दर्शन करें और इस मंदिर में माथा टेके और अपनी आँख कान खुलवा लें अपने घर पर बैठकर भजन करे, मर्जी जहां चाहे जाना आना जाते आते रहें यहाँ से कोई रोक टोक नही है गुरु अधारे गुरु के द्वारे रहोगे तो सारा काम बनता चला जायेगा, मै किसी को मना नही करता की आप यहा मत जाओ वहा मत जाओ, उधर मत जाओ जहाँ भजन बन जाये वहीं चले जाओ पर यहाँ के लिए जो गुरुमहाराज ने कहा है की सुमिरन भजन ध्यान बन जायेगा आँख कान खुल जएगी तो एक बार आपको वहां पहुंचना चाहिये और उसकी परीक्षा करनी चाहिये जैसे तुमने नामदान लिया गुरुमहाराज से तो गुरु की फिर एक बार परीक्षा कर लो और गुरुमहाराज के बताये हुये स्थान पर पहुचो और ना हो तो कभी मत मानना और हो जाये बन जाये तो बहुत अच्छी बात अपनी दया दुआ गुरुमहाराज की जो भी दया की बरसात है उसको ले जाओ | देखो प्रेमियों पावन रक्षा-बंधन का पर्व आ गया है तो पावन रक्षा-बंधन का मतलब ये होता है की गुरु अपने नाम की रक्षा सुरक्षा से बांध ले इसी को कहते है रक्षा-बंधन कहते हैं जिससे हमेशा के लिए गुरु से शिष्य बंध जाये और प्रेमी से प्रेमी पर पूरा प्रेम विश्वाश हो और गुरु के साथ लग जाये रक्षाबंधन का मतलब यही है की गुरु पूरी तरह रक्षा सुरक्षा कर दे और शिष्य पूरी तरह गुरु के रक्षा सूत्र में बंध जाये गुरु के आदेश में चले और गुरुमहाराज का नाम भजन करे और गुरुमहाराज का नाम पालन करे पूरी दया मेहर गुरु की बरस रही है आप सभी लोग गुरुमहाराज के चरणों में लगे रहो और गुरुमहाराज का भजन करो जबतक साँस रहे सांसो की पूंजी गुरु की चरणों में लगे रहो गुरु ही पार करेगा कोई दूसरा नही, प्रभु के दरवाजे पर गुरु ही बतायेगा की भाई ये तुम्हारा भक्त इसको पार कर दो या यम के दरवाजे पर चिट्ठी पत्री जब तुम पहुचोगे तो तुम्हारा मदद गुरु ही करेंगे कोई दूसरा नही करेगा |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

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Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 27 अगस्त २०१५

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
निज चरणो में अरज करो सतगुरु के , हे मेरे मालिक सतगुरु नाम,
सत्य भेद के अंतरयामी , हमको तुम्ही ने नाम लख्यो ,
मेहर कियो जो हमें बुलायों, दीन्हा है दात बड़ी है भारी,
पाप की गठरी लिया है उतारी, मेहर होए नर्तन बन जाये ,
सुमिरन ध्यान भजन मन लागे, करू भजन मैं रहौं शाकाहारी ,
निश्छल प्रेम आराधना तुम्हारी , नाम भजन में मनवा लागे ,
भाग्य उदय हो अमृत जागे , जगत विधाता सतगुरु नामी,
श्रीचरणों में करू प्रणामी, नाम भेद मेरा बन जाये ,
अंतर अदभुद दृश्य दिखाए , नाम भजन में मनवा लागे ,
मेरो भक्ति चरण में लागे , चरण बंदना करू साईं की ,
सतगुरु मालिक अरु नामी की, सतगुरु चरण शीश झुकाऊ,
चरण बन्दना गुरु जी गाउँ , सतगुरु जयगुरुदेव |
मुझे एतबार है मालिक, मेरी नैया संभालोगे ,
दिया है नाम जो भगवन, किनारे नाव लाओगे ,
बड़ा भैरी मै पापी हूँ , मुझे विश्वास है बचाओगे ,
दया के खान सिंधु हो , मेरे सतगुरु जी विंधु हो ,
नाम की दात है बक्शी, दया के आप सिन्धुं हो ,
विनय मेरी मेरे मालिक, मेरी नैया करो उस पार,
दया हो मेरे सतगुरु जी , बंदना हो तुम्हारी ही ,
शरण में शीश रखता हूँ, जाऊं तुम पर बलिहारी मैं,
सतगुरु जयगुरुदेव |
मनवा लागे नाम भजन में,
मेहर यही करो सतगुरु , नाम की अंतर महिमा जागे ,
दया करो मेरे सतगुरु , नाम भजन मै तुमहरा गाऊँ,
मेहर करो मेरे सतगुरु , दीनदयाला प्रभु किरपाला,
तुम्ही हरी हो सतगुरु , प्रभु राम के दरश कराओ ,
इस सूरत को आगे बढ़ाओ , मनवा लागे नाम भजन में,
ऐसी दया मेहर बरसाओ , शीश धरु चरनन में तुम्हरे ,
नाम भजन किरतराथ गाउँ ,श्री चरनन में नेह लगाउन,
मुक्ति मोक्ष परम पद पाउन , सतगुरु जी बलिहारी जाऊं
सतगुरु जयगुरुदेव |
प्रेमियों मालिक की अशीम दया अनुकम्पा है आप सब के ऊपर , आप सब लगकरके सुमिरन ध्यान और भजन करो , गुरु में मन लगाओ और गुरु से माफ़ी मागो , कि हे मालिक दया करो मेरा सुमिरन ध्यान और भजन बन जाये | आप अपने घट में घाट पर समय दे और सुबह शाम लगकर सुमिरन ध्यान भजन करे और अपने गुरु महराज से अपने गुनाहो कि माफ़ी मांगे कि हे गुरु महाराज मुझसे जाने अनजाने जो भी गलती अपराध हो गया हो उसे क्षमा करदो और अपने चरणो में लगाये रखो , मुझे जाने अनजाने मांगना नहीं आता, पर आप हमपर कोई भी हरी वीमारी है या कोई दुख कलेश है तो मालिक उसमे हर प्रकार से दया मेहर करे और मालिक मै अनजान हूँ और मालिक आप तो जानते है कि आप को किस पर किस तरह दया करनी है तो मालिक आप अपनी तरह से जिस पर जिस तरह से दया करनी है उसपर उस तरह से दया कृपा कर दीजिये | गुरु महाराज हम सब आपकी संतान है आप के शिष्य है सदा आप का ही नाम लेंगे और अंतिम श्वांस तक सतगुरु जयगुरुदेव सतगुरु जयगुरुदेव बोलेंगे ||
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
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Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 24 अगस्त २०१५

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
नाम अधीन सतगुरु के रहियो, जिन्होंने नाम नीध दीन्ह |
मेहर जो बरसेगी अम्बर से, शब्द रसा की झीन |
अदभुद अलौकिक अंतर दिखे, लो सतगुरु को चीन्ह |
नाम भेद का गूढ़ दियो हैं, इसी में होवो लीन |
मनवा लगाओ नाम भजन में, मुक्ति मोक्ष लीजो चीन्ह |
नाम धना प्रताप गुरु का, इन्ही चरणों में हो विलीन |
शीश धरो सतगुरु चरणन में, जहाँ पे बाजे बीन |
सतगुरु जयगुरुदेव
नाम का मिला खजाना भारी |
नाम दिया है अनाम पुरुष ने, सत्य पुरुष करतारी |
माता-पिता सतगुरु मेरे, धर्म के हैं अधिकारी |
उज्जवल सुरत श्वेत फकीरा, सतगुरु मोहन मुरारी |
शब्द भेद के दाता सतगुरु, सतगुरु निधी अधारी |
नाम भजन करो सतगुरु जी का, रहो सब नाम अधारी |
नाम को धारण कियो है तुमने, बनो शिष्य नामधारी |
पद पंकज में शीश झुका कर, जाओ सब बलिहारी |
सतगुरु जयगुरुदेव
अखण्ड रूप से विराजमान सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ग्राम बड़ेला के प्रागंण में बैठे हुये समस्त प्रेमीजन, समय धीरे धीरे अपने सुई की रफ़्तार से बढ़ रहा है अदभुद अलौकिक घड़ियाँ आती जाती रहती है जिसमे जीर्ण और क्षीर्ण समय भी निकल रहा है ऐसा विषममयी समय निकला और ऐसी उज्जवल भविष्य की परिस्थितियाँ निकली आगे मंगलिक कार्य होंगे और मंगलमय फुल खिलेंगे सतगुरु से मिलन अंतर्घट में होगा बाहर से भी मिलने की पूरी उम्मीद है देखो प्रेमियों समरथ संत सतगुरु एक नही अनेक होते हैं और एक भी होते है वे अनन्य रूप भी रख सकते हैं और एक ही रूम में भी दर्शन दे सकते हैं सतगुरु की मौज बदली उन्होंने कपडा बदला स्थान बदला तो जहाँ पर वे हैं उनकी नाम की महिमा होती है उन्होंने हर प्रकार से दिखा कर के हर जगह विराजमान होकर के अपनी संगत को संभालना शुरू किया हर प्रकार से सबको दर्शन देना शुरू किया अगर अब कोई कहता है की नही दर्शन तो मेरे हो रहे हैं मै ही सबसे बड़ा, तो ये भुल है जिन प्रेमियों को नामदान गुरुमहाराज से मिला है उनकी संभाल तो गुरुमहाराज ही करेंगे और जिनको नामदान किसी दुसरे से मिला है तो उसकी संभाल दुसरे गुरु करेंगे जिससे जिसको नामदान मिला है उस धनी का वो जिव है और वो धनी पूरी संभाल अपनी जीवों का करता है अंदर और बाहर से जिव को विश्वास होना चाहिये की हमारा मालिक हमारा प्रभु समरथ है हमारा सतगुरु समरथ है हमपर हर प्रकार से उनकी दया मेहर बरस रही है और जिव को शिष्य को प्रेमी को मन चित लगाकर के अपने गुरु को हाजिर नाजिर मानकर के पूरी की पूरी विनती प्रार्थना अराधना सुमिरन ध्यान भजन करना चाहिये ये नही समझना चाहिये कभी की गुरु निजधाम चले गये गुरु निजधाम कभी नही जाते वे हर प्रकार से सर्वग्य हैं सर्व विदित हैं शब्द स्वरूपी सत्य स्वरूपी रूप अरूपी हर प्रकार से जब हैं तो उनको तुम नही कह सकते की वे चले गये ये हमारा तुम्हारा घट है घट में घाट है घाट पर गुरु की बैठक तो जब हम तुम जिन्दा हैं तो गुरुमहाराज बोलो जिन्दा हैं की नही जिन्दा हैं अंदर | जब अंदर में बैठे गुरुमहाराज हम जीवित है तो उसमे वे भी जीवित हैं ये सब समझने की चीज है जैसे ये लोग कहते हैं की गुरुमहाराज जिन्दा नही है चले गये तो मंदिर के अंदर मूर्ति रखी होती है तो वहां जिन्दा मानकर जाते हो प्रेमियों की मुर्दा तो जब जिन्दा मानकर जाते हो की इसमें जीता जागता देवता बैठा है तो हमारे गुरुमहाराज हर प्रकार से जिन्दा हैं भाव होनी चाहिये और भाव झरोखे सब कुछ मिलता है तो ऐ प्रेमियों हमेशा गुरु को हाजिर नाजिर मानकर के समर्थ मानकर के सत्यता के साथ अपने गुरु की दी हुई नाम जड़ी को रगड़ते हुए अंतर के शीशे में चमक लाओ और लगकर के सुमिरन भजन ध्यान करो और गुरु में लीन रहो यही गुरुमहाराज का आदेश है यही निर्देश है और यही तुम्हारा कर्तव्य है |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
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Guru Malik ka Sewadar - Gurubhai Anil Kumar Gupta

Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 23 अगस्त २०१५

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
मुझ पर दया करो मेरे नामी |
नामी अनामी पुरुष सतनामी, मेहर करो मेरे स्वामी |
मुझपर दया करो मेरे नामी |
मै पापी दुखियारा जीवा, आया शरण तिहारी |
मुझपर दया करो नामधारी |
जन्म जन्मांतर पाप कमाई, मेहर करो नामधारी |
पाप की गठरी सर पे लदी है, उसको लोवो उतारी |
दया मेहर से नर तन पायो, दया मेहर है तिहारी |
हे सतधारी मालिक सतगुरु, सुन लो अरजिया हमारी |
नाम निधि की बरसा कर दो, हट जाये सब बिमारी |
सुखमय सेवा करूं तिहारी, नाम भजन जाऊं बलिहारी |
नाम की महिमा तुम्हरी गाऊं, हे समरथ नामधारी |
मुझपर दया करो नामधारी |
सत्य विरह की लगन लगे जो, आऊ शरण तिहारी |
मुझपर दया करो नामधारी |
विनय प्रार्थना मेरी मालिक, सुध तुम लेव मुरारी |
हरी भजन मनवा लग जाये, गाऊं किरत तुम्हारी |
श्रीचरणन में शीश झुकाऊ, जाऊं मै बलिहारी |
सतगुरु जयगुरुदेव
धन धन मालिक नामी सतगुरु, धन्य है दया तुम्हारी |
हम पापी दुखियारी जीवा, आये शरण तिहारी |
हे अनाम श्रुति मंगल स्वामी, पाटी राखो शरण तुम्हारी |
नाहक हँसी हंसारक होवे, जायेगी लाज तुम्हारी |
शरणागत की लज्जा राखो, आये शरण तुम्हारी |
कोटि वन्दना श्रीचरणन की, हे मेरे सतगुरु मुरारी |
जब जब भीड़ पड़ी भक्तन पर, लियो मेरे सतगुरु उबारी |
अबकी मेहर करो मेरे मालिक, विनती करूं मै तुम्हारी |
कुल आदेश का पालन होवे, रहूँ मै शरण तुम्हारी |
सतगुरु मालिक नामी मेरे, करूं मै तुम्हरी प्रणामी |
सतगुरु जयगुरुदेव
विनय मन भाव झरोखे आवे |
विनय प्रार्थना तुम्हारी गाकर, सतगुरु जी को मनावे |
शब्द भेद से जुड़े सुरतिया, मूरत तुम्हरी दिखलावे |
नाम भेद कुछ जानू न मालिक, नाम भजन ही भावे |
निमित मात्र सतगुरु मै बोलूं, इतने मेहर हो जावे |
दुःख दलिद्र को दूर करो तुम, और ऊपरी मार भगाओ |
सदा संसार है निष्कंटक, नाम भजन मन आवे |
श्रीचरणन की करूं वंदना, नितप्रति दर्शन पावे |
प्रत्यक्ष प्रकट हो नामी मालिक, सगरे काम बन जाये |
शीश धरुं सतगुरु गोसाई जी, तुम्हरे गुण को गावे |
तुम सर्वागी मेरे दाता हो, तुम्हारी मेहर होई जावे |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
संपर्क सूत्र : 09651303867, 07052705166, 09711862774, 08004021975

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Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 22 अगस्त २०१५

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
नाम का भेद गुरु ने दीन्ह |
नाम भजन मन सब जन प्रेमियों, लो अंतर में चीन्ह |
गुरु की मेहर सुरत चले अम्बर , अंतर बाजे बीन |
मनवा लागे नाम भजन में, हो गुरुचरणन लीन |
सतगुरु नाम विराजे अंतर, नाम भजन तर्ल्लिन |
सतगुरु जयगुरुदेव
नाम की आरत नामी स्वामी |
तुम्ही दयाल दीन हरी हो, तुम्ही अन्तर्यामी |
मन चित लग जाये नाम भजन में, तुम्ही हो मेरे स्वामी |
शीश धरुं तुम्हरे चरणन में, तुम्हारी मेहर उपजानी |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
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सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 21 अगस्त २०१५

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
नाम मन भजन सतगुरु ज्ञान |
नाम भजन से समझो प्रेमियों, हो पुरा कल्याण |
मनवा रम जाये नाम भजन में, गाये सतगुरु का नाम |
मुक्ति मोक्ष परम पद पाये, पहुंचे सतगुरु धाम |
नाम भजन मन चित में धारो, यही तुम सबका काम |
रूप अलौकिक मोरे नामी का, जिसने दियो है नाम |
शीश झुकाओ उन्ही के चरणों में, हो पूरा कल्याण |
सतगुरु जयगुरुदेव
जब जब चले झकोले संसारी |
आवे अंध के विषय ब्यारी, तब तब सतगुरु नाम सम्भारी |
मन चित नाम भजन जो लाया, मिठ्ठा फल है उसी में पाया |
नाम सतगुरु जी का जिसने गया, काम उसने ही अपना बनाया |
मन चहु दिशी में है भागे, इससे ना है भजन में लागे |
करे गुरु चरणन की अराधना, तेरा सारा काम बन जाये |
सतगुरु संग नेह लगाओ, फिर नाम भजन को गाओ |
सतगुरु चरणन में जाओ, मन चित उन्हीं में लगाओ |
अब सच्चे फल को पाओ, और नाम की महिमा गाओ |
सतगुरु जयगुरुदेव
अखण्ड रूप से विराजमान सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ग्राम बदला के प्रांगन में बैठे हुये समस्त प्रेमीजन, गुरुमहाराज की अति दया कृपा है जो आपको सत्संग भजन गुरुमहाराज की प्रार्थनायें निष्पक्ष सुनने को मिलती है और आप लोग बराबर उसमे सरीक होते हैं और साथ देते हैं मालिक के लिए इतने समय निकाल कर के बैठते हैं जितना समय मालिक के चरणों में बितता है उतना परम सौभाग्यशाली समय होता है उतने समय वहां हाजिरी होती है गुरुमहाराज के दरबार में लिख जाता है की हमारे लिए इन्होंने इतना समय निकाला | आप सब रोज सुबह शाम प्रार्थना बोलकर के सुमिरन भजन ध्यान किया करो तब सबका सुमिरन भजन ध्यान बनेगा मन चित आपका लगेगा आपके सारे काम बन जायेंगे मैलाई कट जायेगी और ये जीवात्मा जग जायेगी मन बुध्दि चित गुरु के चरणों में लग जायेगा और रोज सुमिरन भजन ध्यान करने से आपकी मैलाई धीरे धीरे कट जायेगी आपको अनुभव होगा दिखाई भी पड़ेगा सुनाई भी पड़ेगा गुरुमहाराज ने बताया है “हरी आनंत हरी कथा अनंता, शब्द रूप व्यापक भगवंता ” देखो हरी की कथा का कोई अंत नही वो अनंत है और वे शब्द रूप में हर जगह विराजमान हैं जब तुम अंतर में गुरु को पुकारोगे गुरु के अंदर प्रभु को देखोगे तो प्रभु तुम्हे दिखाई देगा गुरु तुम्हे सब कुछ बतायेगा गुरु सर्वशक्तिमान है हर प्रकार का प्रभु है और जैसी आशा आप रखोगे वैसी आशा आपको मिलेगी गुरुमहाराज ने सबकुछ आपको चेताया बताया सुनाया है अब लगकर के सुमिरन ध्यान भजन करने की जरूरत है अगर सुमिरन भजन ध्यान करोगे गुरु में मन लगाओगे गुरुमहाराज सर्वग्य हैं तो हर प्रकार से तुमको दर्शन देंगे अंतर घट में तुम्हारी जिज्ञाशा को पूरी करेंगे जब उनकी इक्छा होगी उनकी मौज हो जायेगी तो तुमको हर प्रकार से दर्शन वे दे सकते हैं हर प्रकार से सक्षम हैं असक्षम वे नही हैं असक्षम तो हम हीं लोग हैं जो सारा काम नही कर पाते गुरुमहाराज का और न गुरुमहाराज के बताये हुये रास्ते पर पूर्ण परिपूर्ण चल पाते हैं गिर जाते हैं क्योकि हम मानव हैं पापी जिव हैं गुनाहगार हैं गुनाहों की माफ़ी भी गुरुमहाराज हीं करते हैं दूसरा कोई कर नही सकता गुनाहों की माफ़ी गुरुमहाराज के दरवार में हीं होती है किसी और के नही |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

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सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 20 अगस्त २०१५

सतगुरु जयगुरुदेव : मालिक का विशेष संदेश सभी प्रेमियो के लिये
अन्तर घट सतगुरू जयगुरूदेव मन्दिर ग्राम बड़ेला में अखण्ड रूप से विराजमान गुरूमालिक ने आध्यात्मिक रूप से अन्तर में गुरू भाई अनिल कुमार गुप्ता को लिखाया-
सतगुरु जयगुरुदेव :
महापर्व पावन गुरू जन्माष्टमी के पावन पर्व पर हर प्रकार की दया दुआ अखण्ड रूप से विराजमान अन्तर घट मन्दिर ग्राम बड़ेला से मिलेगी जिसमें गुनाहो की माफी दया, दुआ, बरक्कत की पुरी बरसात होगी| जो भी प्रेमी पावन पर्व पहुँचेगा उसका अन्तर के पट खुल जायेगा| सुमिरन, ध्यान, भजन बनने लगेगा ऐसी मौज मालिक की है| परम प्रभू सतगुरू की इच्छा है| सारे प्रेमी गुरू भाई बहनो को दिखाई और सुनाई पड़े| सब के सब अनुभव से सराबोर हो अपने अन्तरघट में बैठ गुरू का सतसंग सुने और आन्तरिक दया दुआ को प्राप्त करें | देखो प्रेमियों किसी को कही भी जाने से मना मत करो अपनी मर्जी से वो जहॉ जाना चाहे जाने दो पता नही मालिक की दया दुआ उसे जहॉ जा रहा है वही मिल जाय| ये सराय मनुष्य रूपी पोल का पुरा इस्तेमाल अगर मन कहता है कि ये कार्य सही है तो वो सही भी हो सकता है| आप मालिक की खोज में जावोगे तो मालिक पूरी दया करेगें तुम्हें विश्वास हो गुरू पर बस| विश्वास की जरूरत है , मालिक तुम्हारा राह देख रहा है बस तुम घाट पर तो आवो पूरा दर्शन पूरा लाभ प्राप्त करो
सतगुरू जयगुरूदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

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सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 20 अगस्त २०१५

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
सतगुरु नैया पार लगाओ |
कामी क्रोधी मन घट बीचे, इस पर मालिक दया फरमाओ |
सतगुरु नैया पार लगाओ |
ध्यान भजन बने आपकी मेहर से, नेह अपने चरणन में लगाओ |
सतगुरु नैया पार लगाओ |
दीन गरीबी और बिमारी, इसमें विशेष दया फरमाओ |
मेहर की बादल ऐसे बरसे, तब करूं मन को देव धुलाई |
नाम भजन में मन लग जाये, सतगुरु मेरे होऊ सहाय |
शीश धरुं तुम्हरे चरणन में, नैया मेरी पार लगाओ |
सतगुरु जयगुरुदेव
मनवा गुरु संग खेले होली |
सुरत सुहागन जब सत नाही, तब ले गुरु संग ना डोली |
नाम भजन हो घाट के ऊपर, सतगुरु संग न बोली |
शीश प्रतीत करे सतगुरु से, निश दिन खेले होली |
नाम भजन में जाये समाई, सतगुरु संग हो होली |
नाम भजन को अंतर गावे, नाही करत ठिठोली |
सतगुरु मेहर विराजे सब पर, हो सतगुरु संग होली |
शीश धरे सतगुरु चरणन में, सतगुरु जयगुरुदेव बोली |
सतगुरु जयगुरुदेव
अखण्ड रूप से विराजमान सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ग्राम बदला के प्रांगन में बैठे हुये समस्त प्रेमीजन, मालिक का आंतरिक हुक्म है लगकर के सुमिरन भजन ध्यान करते रहो जिससे दया मेहर घाट पर बरसेगी पूरी की पूरी दया मेहर आपको मिलेगी जैसे मालिक को याद करोगे मालिक तत्तक्षण हाजिर हो जायेंगे और आपकी हर प्रकार से मदद करेंगे पर आप गुरु के सहारे गुरु के द्वारे रहोगे तो काम आपका बन जायेगा इधर उधर भटकोगे तो आपका काम नही बनेगा | आप मन दूसरे में लगाओगे तो कैसे काम बनेगा मालिक ने कहा था की निशाना मुझसे रखना तब काम बनेगा जब भी जरूरत पड़े तो इस सुरत को गुरु के चेहरे को याद करना वो तत्तक्षण मदद कर देंगे आप सब को चाहिये की हमेशा गुरु महाराज को याद करते रहो उनमे मन लगाते रहो अगर कोई कहता है की गुरु महाराज नही तो सीधे सीधे समझा दो की देखो ये हमारा घट है मनुष्य रुपी मंदिर है मंदिर में दरवाजा है ये मनुष्य रुपी मंदिर घट है घट में घाट और घाट पर गुरु की बैठक और जब तक मै जिन्दा हु तब तक गुरु महाराज हमारे घाट पर जिन्दा हैं हमारे लिए वे जिन्दा हाजिर नाजिर हैं आपके लिए वे कही गये हों उसके लिए आप ही समझो और अगर समझते हो तो तुम्हारे लिए भी इस तरह जीवित है संत मानव पोल पर सतगुरु एक संत जाता है दूसरा आ जाता है संतों का शील-शिला आने का अब बंद नही होगा गुरु महाराज ने बताया है और दूसरी बात आप गुरु महाराज से पूछोगे की मालिक आप कहाँ बैठे हो किस जगह हो रोओगो गाओगे चरणों में माथा टेकोगे तो मालिक जरुर बतायेंगे और आप सब को समझायेंगे की देखो बच्चू मै इस तरह से हूँ मै भी मालिक से प्रार्थना करता रहता हूँ की मालिक दया करो प्रतयक्ष प्रकट हो जाइये सबको दर्शन दीजिये सबके दुखो को हर लिजिये और ये जो आडम्बर बना है उसको साफ़ कर दीजिये हम सब आपके साथ और आप हमारे साथ और हमारा ध्यान भजन बने आपके श्रीचरणों में नेह लगे किसी प्रकार का विकार न आये और विकार आये तो आपकी दया मेहर से साफ़ हो जाये आप हर प्रकार से दया मेहर करो मालिक की अशीम दया अनुकम्पा ऊपर से हो रही है आप लोग लेने के लायक बन जाओ इस समय घनाघोर अनुभव अध्यात्मिक चमत्कार अंतर का हो रहा मालिक पुरी की पुरी दया कृपा कर रहे हैं हर कार्यक्रम पर विशेष दया मेहर होती है आने वाले कार्यक्रम में जन्माष्टमी पर मालिक की विशेष दया मेहर बरसेगी जिनको दिखाई सुनाई नही पड़ता उनके आँख कान खुला जायेंगे उनको दिखाई सुनाई पड़ेगा मालिक की ऐसी दया कृपा की मौज है और मालिक ने हमेशा से कह रखा है की हर कार्यक्रम निष्कंटक निर्विघ्न पार होंगे और मालिक से यही हमारी प्रार्थना है की जब तक जितने भी कार्यक्रम यहाँ पर हो निष्कंटक निर्विघ्न पार हों हर प्रकार से आपकी विशेष दया मेहर बरसे सबको अध्यात्मिक अनुभव हो आपका यश फैले आपका नाम फैले आपके नाम भजन में सब लोग लगें हरी का भजन करें प्रभु का भजन करे प्रभु राम का भजन करें प्रभु राम में नेह लगावें और आपको प्राप्त कर जावें आदि अनाम पुरुष करतार निर्गुण निराकार आप हीं तो हैं कोई दूसरा नही आपमें जो प्रभु राम को देखेगा वो राम को अवश्य देखेगा और जो आप में राम को नही देखेगा उसे कभी राम के दर्शन नहीं होंगे इसलिए सभी प्रेमी लग कर के ध्यान भजन किया करें और मालिक में मन लगावें |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

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सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 19 अगस्त २०१५

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
भजन मन सतगुरु जी का ध्यान |
नाम भजन हो मेरे मालिक का, हो पूरा कल्याण |
मन चित लागे नाम भजन में, भजुं गुरु जी का नाम |
मोह और माया फ़ांस हटाकर, चंचल चित गुरु नाम |
सतगुरु मेरे प्रीतम मालिक, गुरु चरणन आराम |
शीश धरत हैं मालिक चरणन में, हो पूरा कल्याण |
सतगुरु जयगुरुदेव
नाम मन सतगुरु जी का भजन |
जन्म जन्मांतर बाद मिले हैं, सच्चे प्रीतम सज्जना |
नाम भजन का चितवन कर के, दिव्य अटारी चढ़ना |
सुख सावन है सतगुरु संग, सतगुरु नाम है गहना |
नाम भजन हम करी सतगुरु का, पहिने नाम का कँगना |
गुरु में हम जब घुल मिल जावें, नाम भजन को गहना |
नाम दियो समरथ मालिक ने, जिसको सुरत ने पहना |
करो धन्यवाद गुरु सतगुरु का, जिन्होंने दिया नाम धन गहना |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

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सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 18 अगस्त २०१५

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
विनय मन भजन गुरु का नाम |
गुरु प्रार्थना और अराधना, बस एक ही है काम |
मनवा लागे नाम भजन में, सतगुरु जी का काम |
नाम बतायो भेद लखायो, कुल मालिक सतगुरु नाम |
नाम भजन मन चित को ढालो, तब पुरा अविराम |
शीश झुको सतगुरु चरणन में, सतगुरु करे कल्याण |
सतगुरु जयगुरुदेव
विनय मन नाम भजन को गाना |
नाम भजन सतगुरु ने बतायो, मिलो नाम को खजाना |
नाम में शब्द की डोर लगी, उपर को चढ़ जाना |
सत्य भेद जब होई सुरतिया, संगम हो तब पुराना |
सतगुरु प्रीतम सत्य देश के, सत से मिले खजाना |
मन चित लाओ नाम भजन में, नाम भजन मन लाना |
सतगुरु जी के लागे नेहिया, मिल जाये नाम खजाना |
सतगुरु जयगुरुदेव
विनय मन सतगुरु जी का नाम |
सतगुरु संग में समस्त देवता, देवियों के चरणों में प्रणाम |
मंगल मूरत है नामी की, ज्योति जले आठो याम |
दिव्य प्रकाश होये अंतर में, भज लो सतगुरु नाम |
मनवा लाओ नाम भजन में, हो पुरा कल्याण |
सतगुरु चरणन शीश झुकाओ, जिन्होंने दियो है नाम |

बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

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सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 17 अगस्त २०१५

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
श्रीचरणों मे अरज करो सतगुरु की |
हे मेरे मालिक सतगुरु नामी, सत्य भेद के अंतरयामी |
मोको तुमने नाम लखायो, मेहर कियो जो हमे बुलायो |
दीना है दात बड़ी जो भारी, पाप की गठरी लिया है उतारी |
मेहर होये नर तन बन जावे, सुमिरन ध्यान भजन मन लागे |
करूं भजन मैं रहू शाकाहारी , निश्चल प्रेम अराधना तुम्हारी |
नाम भजन में मनवा लागे, भाग्य उदय हो अमृत जागे |
जगत विधाता सतगुरु नामी, श्रीचरणों में करूं परणामी |
नाम भेद मेरा बन जावे, अंतर अद्भुत दृश्य दिखावे |
नाम भजन में मनवा लागे, मेरो भाग्य श्रीचरण में जागे |
चरण वंदना करूं साईं की , सतगुरु मालिक और नामी की |
सतगुरु चरणन शीश झुकाऊँ, चरण वंदना गुरूजी की गाऊं |
सतगुरु जयगुरुदेव
मुझे एतवार है मालिक, मेरी नैया संभालोगे |
दिया जो नाम हे भगवन, किनारे नाँव लाओगे |
बड़ा बैरी मैं पापी, मुझे विश्वाश है तुम बचाओगे |
दया के खान सिन्धु हो, मेरे सतगुरु जी बिन्दु |
नाम की दात है बखशीश, दया के आप सिन्धु हो |
विनय मेरी मेरे मालिक, मेरी नैया करो उस पार |
दया हो मेरे सतगुरु की , वंदना हो तुम्हारी भी |
चरण में शीश रखता हूँ, जाऊं तुम पर बलिहारी मैं |
सतगुरु जयगुरुदेव
मनवा लागे नाम भजन में, मेहर यही करो सतगुरु |
नाम की अंतर महिमा जागे, दया करो मेरे सतगुरु |
नाम भजन मै तुम्हरा गाऊं, मेहर करो मेरे सतगुरु |
दीनदयाला प्रभु कृपाला, तुम हरी हो सतगुरु |
प्रभु राम के दरश कराओ, इस सुरत को आगे बढाओ |
मनवा लागे नाम भजन में, ऐसी दया मेहर बरसाओ |
शीश धरु चरनन में तुम्हरे, नाम भजन कृतारथ गाऊं |
श्रीचरणन में नेह लगाऊं, मुक्ति मोक्ष परमपद पाऊं |
सतगुरु जी बलिहारी जाऊं |
सतगुरु जयगुरुदेव
अखण्ड रूप से विराजमान सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ग्राम बड़ेला के प्रागंण में बैठे हुये हमारे समस्त गुरुभाई बहनों, मालिक की अशीम दया अनुकम्पा है आप सब के ऊपर आप सब लग कर के सुमिरन ध्यान भजन करो, गुरु में मन लगाओ और गुरु से माफ़ी मानगो की हे मालिक दया करो हमारा सुमिरन भजन ध्यान बन जाये हे प्रभु हम पर मेहर करो की हमारा काम बन जाये आप सब लग कर भजन ध्यान करें गुरुमहाराज में मन लगाये और गुरु की चर्चा करते रहें रोज रोज अपने घट में घाट पर समय दें सुबह शाम लगकर के सुमिरन ध्यान भजन करें और गुरुमहाराज से अपने गुनाहों की माफ़ी मांगे हे गुरुमहाराज मुझसे जाने अनजाने में जो भी गलती अपराध हो गया हो क्षमा कर दो दया कर दो अपने चरणों में लगाये रखो मुझे मांगना नही आता पर आप मुझे हारी में बिमारी में हर प्रकार से कष्ट कलेश में मुझ पर दया करो मालिक, मै अनजान हूँ क्या क्या माँगू ,आप तो जानते हैं की किस पर दया किस प्रकार करनी है तो जिस पर जिस प्रकार से दया करनी उसी प्रकार दया कर दो, पुरी की पुरी दया कृपा करो , मालिक हमे अपने चरणों में लगाये रखो हमसब आपके संतान है आपके बच्चे हैं आपके शिष्य हैं सदा आपका हीं नाम लेंगे अंतिम क्षण तक “सतगुरु जयगुरुदेव” “सतगुरु जयगुरुदेव” बोलेंगे |
बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

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अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
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Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 16 अगस्त २०१५

सतगुरु जयगुरुदेव : प्रतिदिन सत्संग - बड़ेला धाम
सतगुरु जयगुरुदेव :
भजन मन धारो सतगुरु नाम, सतगुरु नाम है सत्य स्वरूपी ,
सत्य ही आवे काम , सत्य सत्य से होए मिलनवा,
सूरत करे आराम , सुन्न शहर की होवे चढाई ,
भज सतगुरु का नाम , मुक्ति मोक्ष परम पद पावे ,
हो जाये कल्याण , नाम भजन मन चित में लागे ,
बन जाए सारो काम, सतगुरु नाम भजन मन धारे,
सतगुरु का यह काम , नाम भजन जब करे ये मनवा ,
सतगुरु का ये आधार , झट पट खुले क्षणिक तुम देखो ,
दिव्या अलौकिक धाम , मन आनंदित शीश झुकावे ,
सतगुरु सो प्रणाम |

बोलो सतगुरु जयगुरुदेव | ||

अखण्ड भारत संगत सतगुरू की
गुरु मालिक का सेवादार - गुरु भाई - अनिल कुमार गुप्ता

अंतर्घट सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर एवं अखंडेश्वर सतगुरु जयगुरुदेव मंदिर ,
ग्राम : बड़ेला, पोस्ट : तालगाँव, तहसील: रुदौली, अयोध्या, जिला: फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
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Guru Purnima

सतगुरु जयगुरुदेव :

दिनांक: 15 अगस्त २०१५